Friday, 6 September 2013

तोर मेहनत के लागा ल.....














तोर मेहनत के लागा ल, तोर करजा के तागा ल
उतार लेतेंव रे, मैं ह अपन दुवार म.........

देखत हावौं खेत-खार म जाथस तैं ह
मंझनी-मंझनिया देंह ठठाथस तैं ह
जाड़ न घाम चिन्हस, बरखा न बहार देखस
ठउका उही बेर तोला पोटार लेतेंव रे, मैं ह अपन.......

कहिथें बंजर-भांठा हरियाथे उहें
तोर मेहनत के पछीना बोहाथे जिहें
परबत सिंगार करय, नंदिया दुलार करय
ठउका इही बानी महूं दुलार लेतेंव रे, तोला अपन....

तैं तो दानी म बनगे हस औघड़ दानी
भले नइए तोर बर खदर के छानी
सुख ल तिरियाई देथस, दुख ल कबियाई लेथस
ठउका अइसनेच म तोला जोहार लेतेंव रे, मैं ह अपन....

सुशील भोले
संपर्क : 41-191, डॉ. बघेल गली,
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