Sunday, 9 October 2016

मूल धर्म-संस्कृति समझने ....

मूल धर्म-संस्कृति समझने लगे मुझे इक्कीस साल
जिन्हें छिपाने रचा गया किस्से-कहानियों का जंजाल
सृष्टिकाल का है यह गौरव कहता जिसे मैं आदिधर्म
फिर से पाकर निश्चित दुनिया होगी आत्मिक मालामाल


* सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 98269 92811, 80853 05931

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