Tuesday, 18 April 2017

शक्ति चिन्हाथे मंत्र

ये देश के जतका भी पारंपरिक ज्ञान के स्रोत हे, सबला तोपे, मूंदे अउ छाबे के बुता अभी र_ मार के चलत हे। विज्ञान के नांव म हर पारंपरिक शक्ति के स्रोत ल चुनौती दिए जात हे। कभू-कभार तो लगथे, ये सबला जान-बूझ के भ्रमित करे जावत हे। काबर के विज्ञान के नांव म जेन किसम के कुतर्क करे जाथे, वोहर बौद्धिक रूप ले कभू तर्क संगत नइ लागय।

तंत्र-मंत्र ल बिना सोचे-समझे अउ जांचे-परखे अंधविश्वास काबर कह दिए जाथे? आखिर अंधविश्वास के परिभाषा आय का? बिना परीक्षण करे कोनो भी जिनिस ऊपर भरोसा करना ल ही तो अंधविश्वास कहे जाथे ना? मोर प्रश्न हे- का विज्ञान ह आज तक अइसन कोनो विधि के आविष्कार करे हे, जेकर द्वारा दैवीय शक्ति मन के मात्रा या प्रतिशत ल नापे जा सकय? नहीं त फेर दैवीय शक्ति ल मंत्र के माध्यम ले लोगन तक पहुंचाए के बुता ल अंधविश्वास कइसे कहे जावत हे?

असल म मंत्र ह माध्यम के काम करथे। जइसे बिजली के द्वारा जलने वाला बल्ब 'पॉवर हाउसÓ या बिजली उत्पादन केंद्र ले आए तार म समाए शक्ति के सम्पर्क म आथे त वो बल्ब ह जगमगा के जल जाथे। उही किसम तंत्र-मंत्र घलो म स्वतंत्र रूप ले कोनो शक्ति नइ राहय, फेर जब वो कोनो साधक द्वारा दैवीय साधना ले प्राप्त शक्ति के संपर्क म आथे, त लोककल्याण के भावना प्रेरित मनखे बर अमरित कस हो जाथे। भभूत म, ताबीज म, या माला-मुंदरी म स्वतंत्र रूप ले कोनो शक्ति नइ राहय, फेर जइसे बल्ब ह बिजली-शक्ति के सम्पर्क म आए ले जगजगा उठथे, तइसने अइसन जम्मो किसम के जिनिस ह सिद्ध साधक के सम्पर्क म आके लोक कल्याणकारी बन जाथे।

ग्रह-नक्षत्र मन के घलो अइसने अपन-अपन महत्व हे। इहू मन बेरा-बेरा म अपन अच्छा या बुरा प्रभाव ले लोगन ल अपन उपस्थिति के अनुभव करावत रहिथें। एकर मन के प्रभाव ले बांचे खातिर रत्न आदि धारण करे जाथे, वोकरो बड़ महत्व हे। फेर ये सबला सही जगा अउ सही रूप म पहिने या धारण करे जाना चाही। जइसे महंगा ले महंगा टेलीविजन ह घलो बिना एंटीना के चकचक ले साफ-सुथरा नइ दिखय, तइसने कतकों बेर कोनो ग्रह के प्रभाव ह हमन ल पूर्ण रूप ले नइ मिल पावय, तब वो ग्रह ले संबंधित रत्न हमर बर एंटिना के भूमिका निभाथे। ए रत्न मन म कई किसम के रोग-राई ठीक करे के घलोक गुण होथे।

असल म ये तंत्र-मंत्र, ज्योतिष आदि ल कोनो चमत्कार के भावना ले देखने वाला मन ठगाथें, या उनला वइसन संतुष्टि नइ मिलय जइसन उन चाहत रहिथें। अइसन किसम के ये जम्मो जिनिस मनला घलोक चिकित्सा के एक विधि माने जाना चाही, वोकर ले जादा अउ कुछू नहीं। जइसे चिकित्सा के अबड़ अकन विधि हे, तेमा के एक ठन विधि इहू आय, बस अतके। औषधि म प्राकृतिक जिनिस मन शक्ति ले रोग के प्रवृत्ति के अनुसार उपयोग करके ठीक करे जाथे, वइसने दैवीय शक्ति के माध्यम ले घलो कोनो भी किसम के तकलीफ मनला बने करे जाथे। आध्यात्मिक या कहिन दैवीय शक्ति के सबले बड़े गुन ये आय के ए हर मानसिक सुख अउ शांति के घलोक व्यवस्था करथे, जबकि औषधि मन के माध्यम ले अइसन सुख-शांति के व्यवस्था नइ करे जा सकय।

दाई-बबा मन के अनुभव के खजाना ल हमन घरेलू नुस्खा के रूप म घलोक जानथन। वइसने जड़ी-बूटी के रूप म हमर इहां आयुर्वेदिक चिकित्सा के जेन चलन हे, वो सब बहुते महत्व के हे। अपन तीर-तखार म बगरे जिनिस म कम से कम खर्चा म बड़े ले बड़े तकलीफ के निदान हो जाथे। मोला लागथे, ए देश के अइसन जम्मो पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के उही मन बुराई करथें या वोकर संबंध म अफवाह फैलाथें, जे मन दवाई माफिया के षडयंत्र जाल म उलझे या फंसे होथें। इहू बात सोला आना सच हे, कतकों झन मन आज ये दैवीय शक्ति के दुरूपयोग करत हें। वोला लूटे के, ठगे के या कोनो ल प्रताडि़त करे के बुता करत हें। ए सब बर कोनो व्यक्ति दोषी हो सकथे, शक्ति के महत्व ह नहीं।

ये आध्यात्मिक या दैवीय पद्धति ले चिकित्सा करे म कतकों झन ल सफलता नइ मिलय, त वोकर दू कारण होथे।  एक, ईलाज करने वाला के पूर्ण सिद्ध नइ होना, अउ दूसर- स्वयं मरीज के द्वारा वो सब परहेज अउ नियम कायदा के पूरा नइ करना। दैवीय शक्ति ले संबंधित जम्मो जिनिस ल जाने या समझे के खातिर खुद वो प्रक्रिया ल पूरा करना परथे। काबर ते ये हर अनुभव जन्य ज्ञान के क्षेत्र आय। जेन एला अनुभव करथे, सिरिफ उही एकर बारे म जान सकथे। दुरिहा ले बइठ के कल्पना करने वाला एकर बारे म कुछू नइ जान सकय। जइसे कोनो विश्व विद्यालय के डिग्री पाए खातिर एक प्रक्रिया विशेष ल खुद पूरा करना होथे। परीक्षा आदि के कठोरता ल खुद नाहके बर लागथे, तइसने ये दैवीय शक्ति ल जाने, पहचाने या देखे खातिर एक विशेष प्रक्रिया, जेला सरल बोलचाल म साधना या सिद्धी कही देथन, वोला खुद ल पूरा करना परथे।


सुशील भोले
संस्थापक, आदि धर्म सभा
54/191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ. ग.)-492001
मो. 98269 92811, 79747 25684

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