Tuesday, 18 April 2017

डर्राए के जरूरत नइहे

परमात्मा हमर संरक्षक होथे, मार्गदर्शक होथे, हमर पालनकार पिता होथे, ऐकर सेती वोकर ले कोनो किसम के डर्राए, लजाए या संकोच करे के जरूरत नइए। हम जेकर उपासना करथन वोला अपन परिवार के एक सदस्य मान के करना चाही। वो हमर रखवार ये, हमर मुखिया ये अइसन मान के वोकर पूजा उपासना करना चाही। आज समाज म कई किसम के अइसन बात प्रचलन म देखे जाथे, जेमा लोगन ल परमात्मा के पूजा-उपासना ले भटकाए के, झझकाए के उदिम करे जाथे। खास करके इहां के पिछड़ा कहे जाने वाला  समाज मन संग जानबूझ के अइसन बात मन म डरवाए जाथे, तेमा वोमन पूजा-उपासना के रद्दा म आगू झन बढ़ सकंय। असल म ये वर्ग के लोगन ल आध्यात्मिक शक्ति ले अलगाए खातिर, शक्तिहीन बनाए खातिर अइसन किसम के षडयंत्र रचे जाथे। जबकि तथाकथित उच्च वर्ग के लोगन ल हर परिस्थिति म पूजा-उपासना करे बर प्रोत्साहित करे जाथे।

भगवान ह कोनो दुष्ट, चंडाल या बात-बात म रिसाने या गुस्सा करने वाला नइ होय, तेमा वो लोगन के छोट-मोट गलती अउ भूल-चूक म रिसा या गुस्सा जावय। उनला भगवान ए सेती कहे जाथे, के वोहर हर किसम के गलती अउ भूल-चूक ल माफी कर देथे। ओकर ले सुधार के रस्ता बताथे, अउ गलत काम के दलदल ले पार नहकाथे। उपई करे म महतारी घलो थपरा बजाथे, मुंह चलाथे, तब वो जेन धर्म रूपी न्याय के स्थापना करथे उहू हर सजा कइसे नइ दिही? फेर वो सजा ह सिरिफ सुधार खातिर होथे, या वोकर बहाना म कोई विशेष साधना पूरा करवाना या फेर कोनो गूढ़ रहस्य के बात ल समझाना होथे. तेकरे सेती अइसन कोनो भी किसम के बात या घटना ल सोच के पूजा-उपासना के रद्दा ल नइ छोडऩा चाही।

आज हमन पिछड़ा समाज के रूप म जेन लोगन मन ल देखथन, वो असल म अइसने किसम के भटकाव मन के सेती परमात्मा के रद्दा ले दुरिहा होए के सेती पिछड़े हे। चाहे वोला संस्कारगत पिछडऩा काहन, शिक्षा के माध्यम ले पिछडऩा काहन या फेर पद-पइसा के रूप म पिछडऩा काहन। सब आध्यात्मिक शक्ति ले दुरिहाए के सेती होए हे। अध्यात्म संग जुड़ाव ह हर किसम के विकास के रस्ता ल खोलथे। ज्ञान, बल, बुद्धि, आत्मवश्वास हर चीज के विकास ह पूजा-उपासना के माध्यम ले होथे, अउ इही सब चीज ह अन्य सब विकास के रस्ता म सफलता देवाथे। जेन समाज ल या लोगन ल आज हम विकसित रूप म देखथन वो सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति के सेती आय। इहां के बहुत बड़े तबका ल अध्यात्मिक शक्ति ले काटे के जेन षडयंत्र करे गे रिहिसे वो सिरिफ ये सेती आय के एमन कभू विकास के रद्दा म आगू झन बढ़ सकंय, तेमा वोकर मन के इशारा म इन जीवन भर नाचत-कूदत राहंय।

आर्य मन ये देश म मुट्ठी भर संख्या म आइन, फेर इही षडयंत्र के सेती ये देश के बहुसंख्य लोगन ल अपन गुलाम बना डारिन। ये देश के मूल धर्म, मूल देवता अउ मूल संस्कृति ल बिगाड़े, अपमानित करे अउ वोमा जबरदस्ती अपन ठप्पा लगा के अपन कब्जा म करे के छोड़ अउ वोमन कुछू नइ करे हें। इहां के जतका भी गौरवशाली मूल संस्कृति हे, इतिहास हे, देवी-देवता हे, वो सब हमर पुरखौती आय, हमर संपत्ति आय। वो सबला हमला फिर से अपन हाथ म लेना परही। वोकर ऊपर कुंडली मार के बइठ के दुकानदारी चलावत मनखे मनला वोमा ले खेदारे ले परही। परमात्मा ककरो देंह-पांव, रूप-रंग देख के नइ मोहावय, तेमा वो वोकर मन के केहे-बोले ल मानही-सुनही। परमात्मा हर मनखे के सुख-दुख के संगवारी आय, हर मनखे वोला अपन भक्ति दुवारा प्रसन्न कर सकथे, अउ लोक कल्याण के रद्दा म रेंग के वो परमतत्व के अस्तित्व म शामिल हो सकथे।  

सुशील भोले
संस्थापक, आदि धर्म सभा
54/191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ. ग.)-492001
मो. 98269 92811, 79747 25684

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