Saturday, 10 June 2017

चंदा उसका नाम सखी रे ...





















खामोशी में नयन-शब्द से जो मन की बातें करती है
चंदा उसका नाम सखी रे, हृदय-कमल में रहती है..

चंचल-चपल मृगनयनी सी, प्रेमावन की है बाला
अपने अधरों से ही पिलाती, मादक प्रेम का जो हाला
मेरे गीतों में राग सुहानी, सरगम बन वह झरती है...

दूर देश की है वह पंछी, मन-बगिया में खेल रही
विरह-वेदना की ज्वाला को, जो बरसों से झेल रही
फिर आलिंगन में आने से, नाहक काहे वो डरती है...

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. 9826992811, 79747-25684

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