Wednesday, 10 January 2018

देख कबीरा सुन्ना परगे, धरम के....

देख कबीरा सुन्ना परगे, धरम के रद्दा उन्ना परगे
लंदी-फंदी के करनी म माथ धरे फेर गुन्ना परगे
छोल-चांच के रद्दा बनाए, सत् के रथ आगू बढाए
कागद-कलम-मसि के लेखा ले, अड़हा मनला ज्ञान गढाए
भेंड़िया धसान के रेंगना म, फेर इहू म घुन्ना परगे----
चारोंमुड़ा पाखण्ड नाचत हे, भोगी मन नवा रूप खापत हें
सत्-सेवा के मायाजाल म, यौवन के आगी तापत हें
बड़े-बड़े बंगला बनथे अब, आश्रम के रूप जुन्ना परगे---
कइसे करी मानवता रक्षा, यक्ष-प्रश्न फेर आज खड़े हे
धरम के ठेकादार-गौंटिया, चारोंमुड़ा निर्लज्ज अड़े हे
परमारथ के कारज म, कांटा-खूंटी अब दुन्ना परगे---

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो नं 9826992811

2 comments:

  1. अपनी-अपनी गोटियां फेंकने और रोटियां सेंकने वालों के फेहरिस्त बड़ी लम्बी है
    बहुत सही ..

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