Tuesday, 30 January 2018

तब तक तुंहला ठगत रइहीं चारों मुड़ा के पंडा..

जब तक अपन हाथ नइ धरिहौ धरम-करम के झंडा
तब तक तुंहला ठगत रइहीं बस चारों मुड़ा के पंडा

चेतव-गुनव आंखी उघारौ का होथे अगुवा के बात
पद-पदवी म बइठे लोगन घलोक नवाथें काकर माथ

गजब पढव साहेब बनव फेर धरम ल झन छुट्टा छोड़व
छोटे-नान्हे जम्मो संगी ल खोज-खोज के बांधव-जोड़व

बाहरी कहाने वाला आज कइसे बइठे हें तुंहर छाती म
का बात म उन राज करत हवंय तुंहर मयारु माटी म

बस धरम के नांव सुनते लोगन भेंड़िया धसान बन जाथें
एकर आड़ म जम्मो पाखण्डी तुंहर अधिकार म जम जाथें

तब काबर छोड़ देथव ए रद्दा ल तुम अनदेखा कर के
पद-पदवी संग आगू बढव धरम-ध्वजा ल खुद धर के

तभेच आही सुराज तुंहर अउ तभेच तो बनही बात
नइ चेतहू-गुनहू त जान लेवव जिनगी भर खाहू लात

-सुशील भोले
संयोजक, आदि धर्म सभा
संजय नगर, रायपुर
मो नं 9826992811

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