Friday, 13 March 2015

ऊँचई

(पूर्व प्रधानमंत्री, भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता *ऊँचाई* का छत्तीसगढ़ी भावानुवाद)

ऊँच पहार म
पेंड़ नइ जामय
नार नइ लामय
न कांदी-कुसा बाढय़।

जमथे त सिरिफ बरफ
जेन कफन कस सादा
अउ मुरदा कस जुड़ होथे
हांसत-खुखुलावत नरवा
जेकर रूप धरे
अपन भाग ऊपर बूंद-बूंद रोथे।

अइसन ऊँचई
जेकर पारस
पानी ल पखरा कर दय
अइसन ऊँचई
जेकर दरस हीन भाव भर दय
गर-माला के अधिकारी ये
चढ़इया बर नेवता ये
वोकर ऊपर धजा गडिय़ाये जा सकथे।

फेर कोनो चिरई
उहां खोंधरा नइ छा सकय
न कोनो रस्ता रेंगइया
वोकर छांव म सुरता सकय।

सच बात ये आय के
सिरिफ ऊँच होवइ ह
सबकुछ नइ होवय
सबले अलग
लोगन ले बिलग
अपन ले कटे
अकेल्ला म खड़े
पहार के महानता नहीं
मजबूरी आय
ऊँचई अउ गहरई म
अगास-पताल के दुरिहाई हे।

जेन जतका ऊँच
ततके अकेल्ला होथे
जम्मो बोझा ल खुदे बोहथे
मुंह ल मुच ले करत
मने-मन रोथे।

जरूरी ये आय के
ऊँच होवई के संग
फैलाव घलोक होय
जेकर ले मनखे
ठुडग़ा कस खड़े झन राहय
लोगन संग मिलय-जुलय
ककरो संग रेंगय।

भीड़ म भुलाना
सुरता म समाना
खुद ल बिसरना
अस्तित्व ल अरथ देथे
जिनगी ल महकाथे।

धरती ल बठवा मन के नहीं
ऊँच-पूर मनखे के जरूरत हे
अतका ऊँच ते अगास ल अमर लय
नवा-दुनिया म प्रतिभा के बीजा बो दय।

फेर अतेक ऊँच नहीं
ते पांव तरी दूबी झन जामय
कोनो कांटा झन गडय़
न कोनो डोंहड़ी फूलय।

न बसंत न पतझड़ होय
सिरिफ ऊँचई के आंधी होय
कलेचुप ठगड़ा कस अकेल्ला।

हे भगवान,
मोला अतेक ऊँचई कभू झन देबे
पर ल घलोक नइ पोटार सकंव
अइसन निष्ठई कभू झन देबे।

मूल हिन्दी : अटल बिहारी वाजपेयी
छत्तीसगढ़ी भावानुवाद : सुशील भोले

नोट- इस कविता पर मेरे फेसबुक वाल पर आयी टिप्पणियां----

Tuesday, 10 March 2015

नारी...













मया के पुतरी एक बना के रंग डारे हे भारी
चक ले दिखथे सुघ्घर उहू जस फुलवा के डारी
आथे-जाथे जब-जब जिहां तिहां उमंग जगाथे
अरथ बताथे जिनगी के अउ महकाथे फुलवारी

*सुशील भोले*

Monday, 9 March 2015

महिला दिवस पर महिला सम्मान समारोह एवं काव्यपाठ....

सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा महिला दिवस पर महिला सम्मान समारोह एवं होली मिलन का कार्यक्रम रविवार 8 मार्च को सिविल लाईन रायपुर स्थित वृंदावन सभागार में आयोजित किया गया। इस वृहद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली 51 महिलाओं का सम्मान किया गया।
सुशील भोले का काव्यपाठ

 जन्म से ही बिना हाथों के पैदा होना वाली दामिनी सेन ने अपने पैरौं से निर्धारित समय में 36 चित्र बनाकर विश्व रिकार्ड बनाया है... उन्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं... 

 इस अवसर पर नगर के युवा चित्रकार प्रमोद साहू की रंगोली देखिये....


वृंदावन सभागार में उपस्थित जनसमूह

Saturday, 7 March 2015

होरी के रंग....

इस वर्ष होली के अवसर पर हमारे घर का नजारा पूरी तर से रंगीन हो गया था। देखें कुछ चित्र....








Wednesday, 4 March 2015

होली की शुभकामनाएँ....

होली पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं....

रंगों का यह पर्व आप सभी के जीवन में खुशियां लेकर आये... 


















*सुशील भोले*

मन बगिया म....














मन बगिया के कोयलिया गावत हावय फाग
सर-सर पुरवाही सर्राथे मिलाथे संग म राग
झुमर-झुमर के आमा मउर सुघ्घर नाच देखाथे
रंग बसंती ओढ़े धरती के जागगे हावय भाग
*सुशील भोले*

Monday, 2 March 2015

बसंती रंग झूम-झूम जाथे...


















बगिया म आगे हे बहार, बसंती रंग झूम-झूम जाथे
पुरवइया छेड़ देहे फाग, मन के मिलौना ल बलाथे

मउहा ममहाथे अउ तीर म बलाथे
मंद सहीं नशा म मन ल मताथे
संग म सजन के सोर करवाथे....बसंती रंग....

परसा दहक गे हे नंदिया कछार
झुंझकुर ले झांकत हे मुड़ी उघार
लाली-लाली आगी कस जनाथे... बसंती रंग....

लाली-लाली लुगरा के छींट घलो लाल
राजा बसंत जइसे छींच दे हे गुलाल
अब तो तरी ऊपर लाले-लाल जनाथे... बसंती रंग...

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811