Friday, 8 May 2015

देखौ तो किसान...



















काहत रहिथन भले उनला हम भुइयां के भगवान
फेर कतेक करलई के जीवन जीथे देखौ तो किसान
कभू बाढ़ कभू सूखा या भूमि-अधिग्रहण के सेती
बिलबिलावत भूख-करजा म देवत हे अपन परान

सुशील भोले 

मो. 80853-05931, 98269-92811

Thursday, 7 May 2015

पांव फिसल तो जाही रे...























सम्हल-सम्हल के रेंगबे बइहा पांव फिसल तो जाही रे
फेर झन कहिबे ठोकर खाके बताये नहीं कुछु-कांही रे....

ये दुनिया तो निच्चट बिच्छल जब देख पांव फिसलथे
आगू बढ़त देख के कतकों, गोड़ ल धर के तीरथें
पग-पग डबरा-खंचका इहां कब कोन मेर धंस जाही रे...


अपन-बिरान के दिखय नहीं अब ककरो चेहरा ले भेद
थोरको भरम होही ककरो बर त वोला देबे बिल्कुल खेद
बनके अपन नइते बैरी ह, पीठ म छूरा धंसवाही रे...

जब तैं सम्हल जाबे त सुन दूसर ल घलो सम्हाल लेबे
हर जीव ल सांस लिए बर, सुख के पल दू पल देबे
इही धरम के मूल भाव ये, नइ मानही ते पछताही रे...

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

Wednesday, 6 May 2015

तोर डोंगा डोंगहार.....













कइसे डगमड करथे गा तोर डोंगा डोंगहार
बीच धारा म बोर दिही का ये केंवची पतवार
लिच ले हालत हे ये जस आय गोरी के कनिहा
अइसे म कइसे नहकाबे तैं बिन बोरे वो पार

सुशील भोले 
मो. 80853-05931, 98269-92811


Tuesday, 5 May 2015

ददा देथे हमला सुख के ठांव......
















आती-जाती थोर सुरताती जस पेंड़ ह देथे छांव
सुघ्घर अइसने ददा देथे, हमला सुख के ठांव
कइसनो बीपत के बेरा हो, वो तभो लेथे संवार
वोकरे परसादे पाये हावन कुल, गोत्र अउ नांव

सुशील भोले 
मो. 80853-05931, 98269-92811

Saturday, 2 May 2015

दूधाधारी मठ

दूधाधारी मंदिर का भीतरी भाग

राम मंदिर

लेखक सुशील भोले प्रसाद ग्रहण करते

संकट मोचन हनुमान जी

बालाजी मंदिर

राम मंदिर की परिक्रमा में भगवान विष्णु के विविध अवतार

राम मंदिर की परिक्रमा में भगवान विष्णु के विविध अवतार

राम मंदिर की परिक्रमा में भगवान विष्णु के विविध अवतार

दूधाधारी महाराज का समाधि स्थल
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की पश्चिम दिशा में स्थित ऐतिहासिक दूधाधारी मठ की स्थापना विक्रम संवत 1610 में हुई है। बताते हैं कि दूधाधारी के नाम से विख्यात स्वामी श्री बलभद्र दास जी यहां जिस समय आये तब यह इलाका घने जंगल के रूप में जाना जाता था। यहीं पर निर्जन जंगल के बीच श्री संकट मोचन हनुमान जी की मूर्ति थी, जिस पर एक गाय अपने स्तन से दूध चढ़ाया करती थी। बलभद्र दास जी उसी दूध को पीकर रहते थे। कहते हैं कि उनका नाम इसीलिए दूधाधारी पड़ा।

दूधाधारी जी के यहां पर रहने के साथ ही उनकी ख्याति चारों ओर होने लगी। इसे सुनकर नागपुर के राजा रघु भोसले उनके दर्शनार्थ यहां आये और उनसे आशीर्वाद के रूप में पुत्र प्राप्त किये। इन्ही राजा रघु भोसले ने यहां पर सबसे पहले स्वामी बालाजी भगवान मंदिर का विक्रम संवत 1610 में निर्माण करवाया, जो कि श्री संकट मोचन हनुमान जी के ठीक सामने स्थित है।

इस मठ के अंदर वर्तमान में जो सबसे बड़ा मंदिर है, उसका निर्माण भगवान बालाजी मंदिर निर्माण के करीब 200 वर्षों  के बाद हुआ है। इस मंदिर में भगवान राम अपने अनुजों एवं भार्या के साथ विराजित हैं।
इस मठ का संचालन दूधाधारी महाराज के शिष्य परंपरा के माध्यम से होता है। वर्तमान में रामसुंदर दास जी दसवें मठाधीश के रूप में यहां का संचालन कर रहे हैं।  

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल -  sushilbhole2@gmail.com

Friday, 1 May 2015

मानवता की सेवा....


















तेरा दर्शन तेरा अर्चन, किसका तू नाम लेवा
मेरा तो बस एक ही दर्शन मानवता की सेवा...

तू कहता है धर्म बचाने उठाएं चलो हथियार
निर्बल पर शासन करें, और बनायें लाचार
मेरा धर्म तो यह कहता है इनको ही मानो देवा...

ऊंंच-नीच और जाति-भेद, गौरव होगा तेरा
नारी को बुर्खा में बांधना मजहब होगा तेरा
मेरा गौरव समता में, सब मिलकर करें कलेवा...

तू महलों में बैठा हो या मजहब के आसन पर
तेरा कब्जा हो चाहे, दुनिया भर के राशन पर
मेरा तो बस श्रम का आसरा इसमें ही मेरा मेवा...

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल -  sushilbhole2@gmail.com

हमर हाथ हे जबड़ कमइया........










चिटिक खेत अउ भर्री नहीं, हमला सफ्फो खार चाही
हमर हाथ हे जबड़ कमइया, धरती सरी चतवार चाही...

हमर पेट ह पोचवा हे अउ, तोर कोठी म धान सरत हे
हमरे खातिर तोर गाल ह, बोइर कस बम लाल होवत हे
गाय-गरु कस पसिया नहीं, अब लेवना के लगवार चाही....

तन बर फरिया-चेंदरी नहीं, अउ तैं कहिथस जाड़ भागगे
घर म भूरीभांग नहीं तब, सुख के कइसे उमर बाढग़े
चिरहा कमरा अउ खुमरी नहीं, अब सेटर के भरमार चाही...

ठाढ़ चिरागे दूनों पांव ह, जरत मंझनिया के सेती
हमर देंह ह होगे हे का, कइसे रे तोरेच पुरती
अब बेंवई परत ले साहन नहीं, हमला सुख-सत्कार चाही...

सुन-सुन बोली कान पिरागे, आश्वासन के धार बोहागे
घुड़ुर-घाडऱ लबरा बादर कस, अब तो तोरो दिन सिरागे
हमला आंसू कस बूंद नहीं, अब महानदी कस धार चाही....

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com