Saturday, 9 January 2016
Friday, 8 January 2016
देखे सपना धुआं होगे....
राज बनगे-राज बनगे, देखे सपना धुआं होगे
चारों मुड़ा कोलिहा मन के, देखौ हुआं-हुआं होगे
का-का सपना देखे रिहिन पुरखा अपन राज बर
नइ चाही उधार के राजा, हमला सुख-सुराज बर
राजनीति के पासा लगथे, महाभारत के जुआ होगे.....
शेर-बघवा भालू-चीता, हाथी के चिंघाड़ नंदागे
सत रद्दा रेंगइया मन के इतिहास ले नांव भुलागे
जतका ढोंगी, जोगी-भोगी, तेकरे मन बर दुआ होगे....
तिड़ी-बिड़ी छर्री-दर्री, हमर चिन्हारी के परिभाषा
कला-साहित्य सबो जगा, चील-कौंवा के होगे बासा
बाहिर ले आये मन संतवंतीन, घर के नारी छुआ होगे....
अरे कूदौ-फांदौ टोरौ-पोंछौ, काजर कस अंधरौटी ल
अपने खातिर बेलव-सेंकव, स्वाभिमान के रोटी ल
खूब पेराये हौ कुसियार बरोबर, सरबस छुहा-छुहा होगे...
सुशील भोले
41-191, डॉ. बघेल गली, संजय नगर रायपुर
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com
चारों मुड़ा कोलिहा मन के, देखौ हुआं-हुआं होगे
का-का सपना देखे रिहिन पुरखा अपन राज बर
नइ चाही उधार के राजा, हमला सुख-सुराज बर
राजनीति के पासा लगथे, महाभारत के जुआ होगे.....
शेर-बघवा भालू-चीता, हाथी के चिंघाड़ नंदागे
सत रद्दा रेंगइया मन के इतिहास ले नांव भुलागे
जतका ढोंगी, जोगी-भोगी, तेकरे मन बर दुआ होगे....
तिड़ी-बिड़ी छर्री-दर्री, हमर चिन्हारी के परिभाषा
कला-साहित्य सबो जगा, चील-कौंवा के होगे बासा
बाहिर ले आये मन संतवंतीन, घर के नारी छुआ होगे....
अरे कूदौ-फांदौ टोरौ-पोंछौ, काजर कस अंधरौटी ल
अपने खातिर बेलव-सेंकव, स्वाभिमान के रोटी ल
खूब पेराये हौ कुसियार बरोबर, सरबस छुहा-छुहा होगे...
सुशील भोले
41-191, डॉ. बघेल गली, संजय नगर रायपुर
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com
छत्तीसगढ़ में भी स्थानीय पार्टी की आवश्यकता...
छत्तीसगढ़ को स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आये 15 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस बीच देश की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों की सरकार हमने देख लिया है। दोनों ही पार्टी यहां की अस्मिता और मूल निवासियों की समस्या, उनके अधिकारों के प्रति लापरवाह रही हैं। यह कहना ज्यादा अच्छा होगा कि इन पार्टियों ने राष्ट्रीयता के नाम पर क्षेत्रिय उपेक्षा का नंगा नाच किया है। यहां के लोगों को कमजोर बनाने, विस्थापित करने का षडयंत्र रचा है। यहां के संसाधनों को लूटकर अपने और अपने घर वालों को मालामाल किया है।
कुल मिलाकर यह कहना ज्यादा अच्छा होगा कि जिन उद्देश्यों को लेकर यहां के महापुरुषों ने पृथक राज्य का स्वप्न देखा और उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए राज्य आंदोलन का श्रीगणेश किया, वह कहीं से भी सार्थक होता दिख नहीं रहा है।
देश के कई अन्य राज्यों में एेसे ही हृदय विदारक दृश्यों के चलते स्थानीय पार्टियों ने जन्म लिया है, और उसका परिणाम भी सुखद रहा है। तो क्या छत्तीसगढ़ में भी एक एेसी ही क्षेत्रिय पार्टी का गठन नहीं किया जाना चाहिए जो स्थानीय लोगों, उनके अधिकार और अस्मिता के लिए निःस्थार्थ काम कर सके।
यहां पहले कुछ लोग स्थानीय पार्टी बनाने का काम कर चुके हैं, लेकिन वे राष्ट्रीय दलों से "खेदारे" हुए लोग थे, या फिर एेसे लोग थे जिनकी विश्वसनीयता संदिग्ध थी, इसीलिए वे सफल नहीं रहे। कुछ एेसे भी लोग थे जो छत्तीसगढ़िया के नाम पर गैर छत्तीसगढ़िया लोगों को या कहें "शंकरनस्ल" के छत्तीसगढ़िया लोगों को "मूल" छत्तीसगढ़िया के सिर पर लाद देना चाहते थे। यह भी उनके आंदोलन के असफल होने का कारण रहा है।
अब छत्तीसगढ़ को "आरुग" छत्तीसगढ़िया लोगों की पार्टी की आवश्यकता है। एेसे छत्तीसगढ़िया जो "दिल्ली" में बैठे लोगों की जय बोलाने को ही राष्ट्रीयता ना समझे। एेसा "आरुग" छत्तीसगढ़िया केवल क्षेत्रिय पार्टियों के माध्यम से ही हमें मिल सकता है। तो आईये "आरुग छत्तीसगढ़िया" लोगों की एक स्थानीय पार्टी को मूर्त रूप देने के दिशा में कदम बढ़ायें...
जय छत्तीसगढ़... जय छत्तीसगढ़ी.. जय छत्तीसगढ़िया...
सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811
कुल मिलाकर यह कहना ज्यादा अच्छा होगा कि जिन उद्देश्यों को लेकर यहां के महापुरुषों ने पृथक राज्य का स्वप्न देखा और उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए राज्य आंदोलन का श्रीगणेश किया, वह कहीं से भी सार्थक होता दिख नहीं रहा है।
देश के कई अन्य राज्यों में एेसे ही हृदय विदारक दृश्यों के चलते स्थानीय पार्टियों ने जन्म लिया है, और उसका परिणाम भी सुखद रहा है। तो क्या छत्तीसगढ़ में भी एक एेसी ही क्षेत्रिय पार्टी का गठन नहीं किया जाना चाहिए जो स्थानीय लोगों, उनके अधिकार और अस्मिता के लिए निःस्थार्थ काम कर सके।
यहां पहले कुछ लोग स्थानीय पार्टी बनाने का काम कर चुके हैं, लेकिन वे राष्ट्रीय दलों से "खेदारे" हुए लोग थे, या फिर एेसे लोग थे जिनकी विश्वसनीयता संदिग्ध थी, इसीलिए वे सफल नहीं रहे। कुछ एेसे भी लोग थे जो छत्तीसगढ़िया के नाम पर गैर छत्तीसगढ़िया लोगों को या कहें "शंकरनस्ल" के छत्तीसगढ़िया लोगों को "मूल" छत्तीसगढ़िया के सिर पर लाद देना चाहते थे। यह भी उनके आंदोलन के असफल होने का कारण रहा है।
अब छत्तीसगढ़ को "आरुग" छत्तीसगढ़िया लोगों की पार्टी की आवश्यकता है। एेसे छत्तीसगढ़िया जो "दिल्ली" में बैठे लोगों की जय बोलाने को ही राष्ट्रीयता ना समझे। एेसा "आरुग" छत्तीसगढ़िया केवल क्षेत्रिय पार्टियों के माध्यम से ही हमें मिल सकता है। तो आईये "आरुग छत्तीसगढ़िया" लोगों की एक स्थानीय पार्टी को मूर्त रूप देने के दिशा में कदम बढ़ायें...
जय छत्तीसगढ़... जय छत्तीसगढ़ी.. जय छत्तीसगढ़िया...
सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811
Thursday, 7 January 2016
तभे पुरखा मन के सपना होही साकार...
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छत्तीसगढिय़ा मन जब होहीं एकाकार
तभे पुरखा मन के सपना होही साकार
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छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना अपनी मूल संस्कृति और महापुरुषों को स्मरण करने का लगातार प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में नए वर्ष की नव प्रभाती में 3 जनवरी को संस्कारधानी-न्यायधानी बिलासपुर के मुंगेली नाका स्थित ग्रीन गार्डन में महान संत और मनखे-मनखे एक बरोबर के उद्घोषक गुरु घासीदास जी को 'पुरखाÓ के रूप में 'सुरताÓ किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुरु घासीदास जी की सातवीं और आठवीं पीढ़ी के वंशज गुरु बालदास जी एवं गुरु सोमेश दास जी उपस्थित थे.
जनवरी की सर्द हवाओं में अंगारा दहकाते हुए प्राय: सभी वक्ताओं ने सभी छत्तीसगढिय़ा समाज को एकजुट होकर परदेशिया राज से मुक्त होने का आव्हान किया. भंडारपुरी गुरुद्वारा के गद्दीनशीन गुरु बालदास जी ने अपने उद्बोधन में सभी छत्तीसगढिय़ा समाज को एकजुट होने का आव्हान किया. उन्होंने कहा, गुरु बाबा घासीदास जी का संदेश केवल सतनामी समाज के लिए नहीं, अपितु समस्त मानव समाज के लिए है. उनके बताए रास्ते पर चलकर ही हम छत्तीसगढिय़ा राज का सपना साकार कर सकते हैं. हमारे महापुरुषों ने छत्तीसगढिय़ा राज का जो स्वप्न देखा था, वह तभी साकार होगा जब हम एकजुट होकर परदेशिया लोगों से मुकाबला करेंगे. उनके बांटो और राज करो की नीति को मुंहतोड़ जवाब देंगे.
गुरु घासीदास जी की आठवीं पीढ़ी के वंशज ब्रम्हचारी सोमेश दास जी ने भी संपूर्ण छत्तीसगढिय़ा समाज को एकजुट होने का आव्हान किया. उन्होंने कहा, 'गुरु घासीदास जी के बताए रस्ता म रेंगबो, तब हमला उंकर आशीर्वाद मिलही अउ तभे हमर पुरखा मन के छत्तीसगढिय़ा राज के सपना साकार होही.Ó उन्होंने कहा, सतनाम का संदेश समस्त मानव जाति को एक करने का है. आज हम विभिन्न जातियों में बंटकर बिखरे हुए हैं. इसी का फायदा बाहरी लोग उठाते हैं. हमें आपस में उलझाते और लड़ाते हैं. और मु_ी भर लोग हम पर राज कर लेते हैं.
'पुरखा के सुरताÓ कार्यक्रम की शुरूआत छत्तीसगढ़ महतारी एवं गुरु घासीदास जी की वंदना-आरती के साथ हुई. इसके पश्चात छत्तीसगढ़ी भाषा के पुरोधा साहित्यकार, भाषाविद् डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा को दो मिनट की श्रद्धांजलि अर्पित की गई. तत्पश्चात वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी नंद किशोर शुक्ला ने गुरु घासीदास जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, जिस प्रकार अंग्रेजों ने हमें जात-पात में बांटकर इस देश में राज किया, उसी प्रकार ये बाहरी लोग भी हमको आपस में लड़ा-भिड़ा कर राज कर रहे हैं. गुरु घासीदास जी सभी लोगों को जोड़कर एक पंथ का निर्माण किए हैं, उसी प्रकार हम लोग भी एकजुट होकर छत्तीसगढिय़ा राज का निर्माण करें.
प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक और डॉ. खूबचंद बघेल जयंती आयोजन समिति, बिलासपुर के संयोजक डॉ. एल.सी. मढ़रिया ने भी समस्त छत्तीसगढिय़ा समाज को एकजुट होने का आव्हान किया. उन्होंने कहा, छत्तीसगढिय़ा किसान अपना खून-पसीना बहाकर धान उपजा रहे हैं, और परदेशिया उसकी बाली को काटकर खा रहे हैं. आज छत्तीसगढ़ में आरुग छत्तीसगढिय़ा नेता की आवश्यकता है.
अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ यादव ने कहा, जिस तरह अन्य प्रदेश के लोग अपनी भाषा-संस्कृति के प्रति कट्टर हैं, उसी प्रकार हमें भी अपनी अस्मिता के प्रति कट्टर होना पड़ेगा. इसकी शुरूआत हम अपने ही घर से करें.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पश्चात छत्तीसगढिय़ों का शोषण और बढ़ गया है. यहां की जमीनों को गैर छत्तीसगढिय़ा लोगों के हाथों में सौंपने का खुला खेल चल रहा है. प्रतिवर्ष एक लाख कृषि भूमि को गैर कृषि कार्यों के लिए दे दिया जा रहा है. छत्तीसगढ़ का किसान कभी आत्महत्या नहीं करता था. आज पूरे देश में कृषक आत्महत्या के मामले में यह राज्य तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. यहां के किसान दिन प्रतिदिन मजदूर बनते जा रहे हैं. आज इस प्रदेश में जितने भी विधायक-सांसद हैं, उनमें बाहरी लोगों और उनकी विचारधारा पर चलने वालों की संख्या ज्यादा है.
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के संस्थापक स्व. ताराचंद साहू के दामाद और एसीसीएल में अधिकारी के रूप में कार्यरत नागेन्द्र साहू ने स्पष्ट कहा, आज छत्तीसगढ़ को 'स्वाभिमान मंचÓ की नितांत आवश्यकता है. स्व. ताराचंद जी के पुत्र दीपक साहू भले ही राजनीति की धारा में बह गये, लेकिन मैं इस सिद्धांत का समर्थक हूं. आज मुझे बहुत खुशी हो रही है, छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना के बैनर तले फिर से सभी छत्तीसगढिय़ा समाज को एकजुट किया जा रहा है.
शिक्षाविद् डॉ. सोम गोस्वामी ने कहा, शिक्षा, दीक्षा और चिकित्सा सभी क्षेत्रों में आरुग छत्तीसगढिय़ा लोगों को होना चाहिए. नेता अधिकारी सभी लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए. इससे एक तो उन स्कूलों के स्तर में सुधार आएगा साथ ही सभी लोगों को एक जैसी शिक्षा मिलेगी. इससे मनखे-मनखे एक बरोबर का गुरु घासीदास का सिद्धांत पूरी तरह लागू होगा.
कर्मचारी नेता श्याम मूरत कौशिक ने कहा, संगठित होकर बाहरी नेताओं को सभी चुनावों में हरवाना आवश्यक है. उन्होंने कहा सम्पूर्ण छत्तीसगढिय़ा राज की स्थापना के लिए हमारा तन, मन, धन सब कुछ समर्पित है. छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना के युवा नेता अजय यादव ने गुरु घासीदास जी के सिद्धांत और क्रांति सेना की साम्यता पर प्रकाश डाला.
वरिष्ठ साहित्यकार संस्कृति मर्मज्ञ सुशील भोले ने कविताओं के माध्यम से पूर्ण छत्तीसगढिय़ा राज्य स्थापित करने की बात कही. उन्होंने गुरु घासीदास के चित्रों में एकरूपता लाने की बात उपस्थित धर्म गुरुओं से की. साथ ही आव्हान किया कि ऐसे ग्रंथों का बहिष्कार किया जाना चाहिए जो हमें जाति-वर्ण में बांटने और भेदभाव करने के लिए उकसाते हैं. सुशील भोले ने कहा, अब छत्तीसगढ़ी समाज को आध्यात्मिक गुरुजनों के द्वारा नेतृत्व प्रदान किए जाने की आवश्यकता है. राजनीति के दगाबाज नेताओं ने छत्तीसगढिय़ा उम्मीदों को डूबाकर रख दिया है। इसलिए छत्तीसगढिय़ा आंदोलन की विश्वसनीयता को संदेह की नजरों से देखा जाता है. इस धारणा को बदलने के लिए स्वच्छ छवि के गैर राजनीतिक लोगों के अलावा आध्यात्मिक पुरुषों को इसमें जोड़ा जाना चाहिए.
छत्तीसगढ़ राज्य आन्दोलनकारी दाऊ आनंद कुमार ने कहा, राज्य आन्दोलन हम लोगों ने किया और लाल बत्ती में परदेशिया लोग घूम रहे हैं. उन्होंने कहा, यहां के हर खदान, हर संसाधन पर बाहरी लोग काबिज होते जा रहे हैं. अब छत्तीसगढिय़ों के स्वाभिमान की जीत होनी चाहिए. पूर्णत: छत्तीसगढिय़ा राज्य की स्थापना होगी तभी पुरखों का स्वप्न साकार होगा.
छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष अमित बघेल ने आक्रामक अंदाज में कहा, अब समय आ गया है, हम भगत सिंह की तरह फांसी पर झूलने की बजाय सुभाष की तरह परदेशिया लोगों का संहार कर छत्तीसगढिय़ा राज्य लेंगे. मांगने से भीख मिलता है, सम्मान नहीं. हमको यदि सम्मान चाहिए तो उसे छीनकर लेना होगा. अब मुख्यमंत्री दिल्ली वालों के रहमोकरम पर नहीं छत्तीसगढिय़ा लोगों की मर्जी से बनना चाहिए. ऐसा तभी हो सकता है, जब हम बाबा गुरु घासीदास जी के मनखे-मनखे एक बरोबर के सिद्धांत पर चलकर एक होंगे.
कार्यक्रम के अंत में महिला प्रदेशाध्यक्ष लता राठौर ने आभार व्यक्त किया. विभिन्न वक्ताओं के वक्तव्य के साथ ही साथ जय परिहार, केजूराम टंडन, मनमोहन ठाकुर, आशा सुबोध अनामिका आदि ने काव्यपाठ के माध्यम से छत्तीसगढ़ महतारी के दर्द को व्यक्त किया. सभा का संचालन यशवंत वर्मा ने किया. सभा समाप्ति के पश्चात छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध जोशी बहनों ने पारंपरिक गीतों की आकर्षक प्रस्तुति दी. छत्तीसगढिय़ा अस्मिता के लिए समर्पित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ रेल कर्मचारी समिति की ओर से प्रसादी-खिचड़ी की व्यवस्था की गई थी. पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्टाल आकर्षण का केन्द्र था, जहां चीला, फरा, ठेठरी, खुरमी जैसे व्यंजन अपनी खुश्बू से लोगों को आकर्षित कर रहे थे.
छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना के संजीव साहू, देव लहरी, राकेश छत्तीसगढिय़ा, सुधांशु गुप्ता, तुकाराम साहू, वासंती वर्मा, तुलसी देवी तिवारी, भुवन वर्मा, सोनू नेताम गोंड़ ठाकुर, मिलन मलरिहा, ध्रुव देवांगन, गिरधर साहू, दिनेश बारले, रश्मि गुप्ता, किरण शर्मा, नीतेश, बलवंत बंजारे सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से आये सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने इस गरिमामय आयोजन में अपना योगदान दिया.
*सुशील भोले *
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811
हमर मूल परब-तिहार
* सावन अमावस - हरेली (मांत्रिक शक्ति प्रागट्य दिवस)
* सावन अंजोरी पंचमी - नाग पंचमी (वासुकी जन्मोत्सव)
* सावन अंजोरी आठे ले भोजली परब
* सावन पुन्नी - परमात्मा के शिवलिंग रूप म अवतरण दिवस
* भादो अंधियारी छठ - कमरछठ (कार्तिकेय जन्मोत्सव)
* भादो अमावस - पोरा (नंदीश्वर जन्मोत्सव)
* भादो अंजोरी तीज - तीजा (पार्वती द्वारा शिव प्राप्ति खातिर करे गए तप दिवस)
* भादो अंजोरी चौथ - गणेश जन्मोत्सव
* कुंवार अंधियारी पाख - पितर पाख
* कुंवार अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति के पार्वती रूप म अवतरण दिवस)
* कुंवार अंजोरी दशमी - दसहरा (समुद्र मंथन ले निकले विष के हरण दिवस)
* कुंवार पुन्नी - शरद पुन्नी (अमरित पाए के परब)
कातिक अंधियारी पाख - कातिक नहाए अउ सुवा नाच के माध्यम ले शिव-पार्वती बिहाव के तैयारी पाख
* कातिक अमावस्या - गौरा-गौरी पूजा (शिव-पार्वती बिहाव परब)
* कातिक पुन्नी ले शिवरात्रि तक - मेला-मड़ई के परब
* अगहन पुन्नी - परमात्मा के ज्योति स्वरूप म प्रगट दिवस
* पूस पुन्नी - छेरछेरा (शिव जी द्वारा पार्वती के घर नट बनके जाके भिक्षा मांगे के परब)
* माघ अंजोरी पंचमी - बसंत पंचमी (शिव तपस्या भंग करे बर कामदेव अउ रति के आगमन के प्रतीक स्वरूप अंडा पेंड़ गडिय़ाना, नाचना-गाना, सवा महीना के परब मनाना)
* फागुन अंधियारी तेरस - महाशिवरात्रि (परमात्मा के जटाधारी रूप म प्रगटोत्सव पर्व)
* फागुन पुन्नी - होली या काम दहन परब (तपस्या भंग करे के उदिम रचत कामदेव ल क्रोधित शिव द्वारा तीसरा नेत्र खोल के भस्म करे के परब)
* चैत अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति के सती रूप म अवतरण दिवस)
* बइसाख अंजोरी तीज - अक्ति (किसानी के नवा बछर)
************
सिरिफ अपन धरम अउ संस्कृति ह मनखे ल आत्म गौरव के बोध कराथे, जबकि दूसर के संस्कृति ह गुलामी के रस्ता देखाथे।
******************
यदि राजनीतिक गुलामी से मुक्त होना चाहते हो, तो सबसे पहले धार्मिक और सांस्कृतिक गुलामी से मुक्त हो, क्योंकि इनके नाम पर ही बाहरी कहे जाने वाले लोग तुम पर राज कर रहे हैं। ...
***********
सुशील भोले
संस्थापक : आदि धर्म सभा
54/191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़)
मोबा. नं. 98269 92811, 80853 05931
* सावन अंजोरी पंचमी - नाग पंचमी (वासुकी जन्मोत्सव)
* सावन अंजोरी आठे ले भोजली परब
* सावन पुन्नी - परमात्मा के शिवलिंग रूप म अवतरण दिवस
* भादो अंधियारी छठ - कमरछठ (कार्तिकेय जन्मोत्सव)
* भादो अमावस - पोरा (नंदीश्वर जन्मोत्सव)
* भादो अंजोरी तीज - तीजा (पार्वती द्वारा शिव प्राप्ति खातिर करे गए तप दिवस)
* भादो अंजोरी चौथ - गणेश जन्मोत्सव
* कुंवार अंधियारी पाख - पितर पाख
* कुंवार अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति के पार्वती रूप म अवतरण दिवस)
* कुंवार अंजोरी दशमी - दसहरा (समुद्र मंथन ले निकले विष के हरण दिवस)
* कुंवार पुन्नी - शरद पुन्नी (अमरित पाए के परब)
कातिक अंधियारी पाख - कातिक नहाए अउ सुवा नाच के माध्यम ले शिव-पार्वती बिहाव के तैयारी पाख
* कातिक अमावस्या - गौरा-गौरी पूजा (शिव-पार्वती बिहाव परब)
* कातिक पुन्नी ले शिवरात्रि तक - मेला-मड़ई के परब
* अगहन पुन्नी - परमात्मा के ज्योति स्वरूप म प्रगट दिवस
* पूस पुन्नी - छेरछेरा (शिव जी द्वारा पार्वती के घर नट बनके जाके भिक्षा मांगे के परब)
* माघ अंजोरी पंचमी - बसंत पंचमी (शिव तपस्या भंग करे बर कामदेव अउ रति के आगमन के प्रतीक स्वरूप अंडा पेंड़ गडिय़ाना, नाचना-गाना, सवा महीना के परब मनाना)
* फागुन अंधियारी तेरस - महाशिवरात्रि (परमात्मा के जटाधारी रूप म प्रगटोत्सव पर्व)
* फागुन पुन्नी - होली या काम दहन परब (तपस्या भंग करे के उदिम रचत कामदेव ल क्रोधित शिव द्वारा तीसरा नेत्र खोल के भस्म करे के परब)
* चैत अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति के सती रूप म अवतरण दिवस)
* बइसाख अंजोरी तीज - अक्ति (किसानी के नवा बछर)
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सिरिफ अपन धरम अउ संस्कृति ह मनखे ल आत्म गौरव के बोध कराथे, जबकि दूसर के संस्कृति ह गुलामी के रस्ता देखाथे।
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यदि राजनीतिक गुलामी से मुक्त होना चाहते हो, तो सबसे पहले धार्मिक और सांस्कृतिक गुलामी से मुक्त हो, क्योंकि इनके नाम पर ही बाहरी कहे जाने वाले लोग तुम पर राज कर रहे हैं। ...
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सुशील भोले
संस्थापक : आदि धर्म सभा
54/191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़)
मोबा. नं. 98269 92811, 80853 05931
Tuesday, 5 January 2016
सन् 2016 म हमर परब-तिहार....
छेरछेरा - 24 जनवरी
बसंत पंचमी - 12 फरवरी
माघी पुन्नी मेला - 22 फरवरी
महाशिवरात्रि - 7 मार्च
होली - 23 मार्च
चैत नवरात - 8 अप्रेल ले
अक्ति - 9 मई
रथ यात्रा - 6 जुलाई
हरेली - 2 अगस्त
नाग पंचमी - 7 अगस्त
भोजली परब - 12 अगस्त ले
राखी - 18 अगस्त
कमरछठ - 23 अगस्त
पोरा - 1 सितम्बर
तीजा - 4 सितम्बर
गनेस चउथ - 5 सितम्बर
कुंवार नवरात - 1 अक्टूबर ले
दंसहरा - 11 अक्टूबर
शरद पुन्नी - 15 अक्टूबर
सुरहुत्ती, देवारी, गौरी-गौरा - 30 अक्टूबर
कातिक पुन्नी मेला - 14 नवंबर
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सिरिफ अपन धरम अउ संस्कृति ह लोगन ल आत्म गौरव के बोध कराथे, दूसर के संस्कृति ह गुलामी के रद्दा देखाथे।
* सुशील भोले *
संस्थापक, आदि धर्म सभा
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811
बसंत पंचमी - 12 फरवरी
माघी पुन्नी मेला - 22 फरवरी
महाशिवरात्रि - 7 मार्च
होली - 23 मार्च
चैत नवरात - 8 अप्रेल ले
अक्ति - 9 मई
रथ यात्रा - 6 जुलाई
हरेली - 2 अगस्त
नाग पंचमी - 7 अगस्त
भोजली परब - 12 अगस्त ले
राखी - 18 अगस्त
कमरछठ - 23 अगस्त
पोरा - 1 सितम्बर
तीजा - 4 सितम्बर
गनेस चउथ - 5 सितम्बर
कुंवार नवरात - 1 अक्टूबर ले
दंसहरा - 11 अक्टूबर
शरद पुन्नी - 15 अक्टूबर
सुरहुत्ती, देवारी, गौरी-गौरा - 30 अक्टूबर
कातिक पुन्नी मेला - 14 नवंबर
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सिरिफ अपन धरम अउ संस्कृति ह लोगन ल आत्म गौरव के बोध कराथे, दूसर के संस्कृति ह गुलामी के रद्दा देखाथे।
* सुशील भोले *
संस्थापक, आदि धर्म सभा
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Friday, 1 January 2016
चंदूलाल चंद्राकर याद किए गये...
पूर्व केन्द्रीय मंत्री, हिन्दुस्तान टाईम्स के संपादक रहे स्व. चंदूलाल चंद्राकर की 96 वीं जयंती के अवसर पर 1 जनवरी 2016 को डंगनिया, रायपुर स्थित चंद्राकर छात्रावास के सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम का आयोजन सर्व कुर्मी समाज के रायपुर महानगर ईकाई द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में आशाराम वर्मा, सुशील भोले, ललित बघेल, भगवती चंद्राकर, भक्त भूषण चंद्रवंशी, पद्मा चंद्राकर, सरिता वर्मा, सुनीता हनुमंता, मंजू धुरंधर, शैलेन्द्र नायक सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरूआत चंदूलाल जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसमें वक्ताओं ने उनसे संबंधित अपने संस्मरण सुनाये।
कार्यक्रम में आशाराम वर्मा, सुशील भोले, ललित बघेल, भगवती चंद्राकर, भक्त भूषण चंद्रवंशी, पद्मा चंद्राकर, सरिता वर्मा, सुनीता हनुमंता, मंजू धुरंधर, शैलेन्द्र नायक सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरूआत चंदूलाल जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसमें वक्ताओं ने उनसे संबंधित अपने संस्मरण सुनाये।
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| दैनिक नवभारत, रायपुर के 3 जनवरी 2016 अंक में प्रकाशित समाचार |
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