Thursday, 15 September 2016

कौन परदेशिया?

 ले प्रमाण-पत्र बांट रहे जोगी छत्तीसगढ़िया
जो रहते इस भू पर सब हैं यहीं के गढ़िया
पूछे फिर उनसे कोई तो है कौन परदेशिया
जो लूट रहा यहां समृद्धि बनके सबसे बढ़िया

* सुशील भोले
मो. 98269 92811, 80853 05931

बूझता दीपक और मसीहा...

एक बूझता दीपक अनायास भभक गया है
अग्नि शिखर से खुद को श्रेष्ठ समझ गया है
प्रकृति ने तोड़ी है जिसकी अहंकार की जांघ
वह श्रेष्ठजनों का खुद को मसीहा समझ गया है

* सुशील भोले
मो. 98269 92811, 80853 05931

Wednesday, 14 September 2016

छत्तीसगढ़ भातृसंघ, उसकी गरिमा और कुछ सवाल...

                     
                   डॉ. भारत भूषण बघेल की डिस्पेन्सरी मेरे घर के बगल में थी, इसलिए हम दोनों प्राय: रोज मिलते थे। अनेक विषयों पर चर्चा भी करते थे। इस दौरान यह भी चर्चा हो जाती थी, कि बहुत से अपात्र और अयोग्य लोग हैं, जो केवल अपने राजनीतिक-सामाजिक स्वार्थ साधने के लिए डॉ. खूबचेद बघेल के नाम का उपयोग कर लेते हैं, जबकि ऐसे लोगों का व्यक्तित्व और कृतित्व किसी भी दृष्टि से उनके पिता (डॉ. खूबचंद बघेल) की गरिमा के अनुरूप रत्ती भर भी नहीं होती।

                 डॉ. भारत भूषण बघेल कई बार रो पड़ते थे, और कहते थे कि उनके पिता ने उन्हें हर प्रकार की राजनीति और पदों के स्वार्थ से दूर रहने की सलाह दी है।  उसे संयम और सादगी पूर्ण जीवन जीने का निर्देश दिया है, इसलिए वे किसी को कुछ कहते नहीं, किन्तु ऐसे लोगों को देखकर उन्हें दुख तो होता ही है।

               मुझे डॉ. भारत भूषण बघेल के इस बात का संस्मरण पिछले दिनों शंकर नगर, दुर्ग स्थित कुर्मी भवन जाने और वहां उपस्थित कुछ लोगों के चेहरे देखकर हुआ, जहां छत्तीगढ़ राज्य आन्दोलन के समय डॉ. खूबचंद बघेल द्वारा गठित संस्था छत्तीसगढ़ भातृसंघ को पुनर्जीवित और पुनर्गठित करने की कवायद चल रही थी।

             दुर्ग से वापस रायपुर आने के पश्चात रात्रि में मुझे ठीक से नींद नहीं आई। क्योंकि वहां मैंने कुछ ऐसे भी चेहरे देखे थे, जिन्हें उगाही करने, चंदाखोरी करने, राजनीतिक दलाली करने के लिए अक्सर चिन्हित किया जाता है। कुछ ऐसे अयोग्य और अपात्र लोग भी थे, जिन्हें किसी सिद्धांत, किसी आदर्श की समझ ही नहीं, कई ऐसे थे जो केवल धंधेबाजों की तरह लिखने-पढऩे, गाने-नाचने के अलावा और कुछ नहीं जानते। क्या ऐसे लोगों के भरोसे डॉ. खूबचंद बघेल के आदर्श और ऊंचाई को स्थापित किया जा सकता है?

               छत्तीसगढ़ भातृसंघ के लिए दुर्ग में हुई पहली बैठक से लेकर आज तक मेरे मन में प्रश्नों का यही सैलाब उमड़ रहा है कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं होने वाला है? क्या इसका भी हश्र स्वधीनता आन्दोलन के समय की कांग्रेस, उनके महान नेता और आज की कांग्रेस और आज के तथाकथित नेता की तरह तो नहीं हो जाएगा?

              मन में यह भी विचार आया कि क्या डॉ. खूबचंद बघेल के नाम का इस्तेमाल किए बिना भी इस तरह के आयोजनों को, उनके उद्दश्यों को अंजाम नहीं दिया जा सकता? वैसे भी 50-55 साल पहले जो स्थितियां थीं, आज परिवर्तित हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ भातृसंघ का मुख्य उद्देश्य राज्य निर्माण था, वह भी देढ़ दशक पहले 1 नवंबर 2000 को ही पूरा हो चुका है। मुझे लगता है कि आज राज्य निर्माण के पश्चात की परिस्थितियों पर सोचने और उसके लिए किसी नये बैनर पर ईमानदार अभियान चलाने की आवश्यकता है।

              मेरा सभी आयोजक और अध्यक्ष मंडल से अनुरोध है कि वे किसी नये नाम और बैनर माध्यम से अपने लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में आगे बढ़ें।

                                                              धन्यवाद,


                                                                                                        भवदीय
                                                                                                    सुशील भोले
                                                                                    डॉ. बघेल गली, संजय नगर, रायपुर
                                                                                     मो. 98269 92811, 80853 05931   

Monday, 12 September 2016

अब क्रांति की बारी...

















जय-जय छत्तीसगढ़ महतारी,
अब क्रांति की आई बारी
बहुत हुई चरण वंदना,
और गौरवगान की लाचारी।।...


अब रणबांकुरों की बांहों से
गीत समर का गाना है
जो लूट रहे यहां की समृद्धि
उन्हें खून-खून रुलाना है
जितने शोषक रक्त पिपासु
उन्हें सजा देना है भारी।।....


राष्ट्रीयता के भ्रम से निसदिन
जो नादान भटक रहे
झूठे-पाखंडी के संग में
सत्ता-सुख जो गटक रहे
एेसे लोगों को जागृत कर
कराएं उन्हें क्षेत्रीय चिन्हारी।।...


धर्म-मुखौटों को ढ़ांके
जो गली-गली यहां बोल रहे
हमारी अस्मिता को लीलने
जो दुश्मन सा यहां डोल रहे
एेसे धर्म-भ्रष्टों को रौंदने की
आओ करें तैय्यारी।। .....


* सुशील भोले
मो. 98269 92811
(फोटो- बसंत साहू)



Saturday, 13 August 2016

गौ-माता भूखन मरत...

















धरम-करम के नांव म होवत हावय धंधा
गौ-माता भूखन मरत हे, सेवक खाथे चंदा
कइसे भरोसा करे जाय साधु भेषधारी के
सत्-ईमान संकट म परगे, सेवा होगे गंदा

* सुशील भोले
98269 92811, 80853 05931

Thursday, 4 August 2016

झड़ी-बादर...













अब्बड़ दिन म दिखे हावय एसो सुघ्घर झड़ी
नंदिया-नरवा बदत हावंय आपस म देखौ गड़ी
चौमासा के ए बरसा ल रूंध-बांध के छेंके परही
तभे हमर जिनगी म जुड़़ही खुशहाली के लड़ी

सुशील भोले
मो. 9826992811 

Wednesday, 3 August 2016

जोगी के रूप धरे....

जोगी के रूप धरे रावन सीता ल हर के ले जाथे
सत्ता मद म बूड़े़ बाम्हन धरम-करम बिसर जाथे
कइसे मोह बनाए हावय अहंकार के मोर-मुकुट के
बड़े-बड़े विद्वान घलो मन लंदर-फंदर म पर जाथे

सुशील भोले
मो. 98269 92811
      8085305931