सुरता//
छत्तीसगढ़ी गीत म मंदरस कस संगीत घोरइया खुमान साव
छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत ल मंदरस कस मीठ बना के जन-जन के कंठ म बिराजे के जब कभू भी गोठ होही त स्व. खुमान लाल साव जी के नांव अगुवा के रूप म सुरता करे जाही. मोर उंकर संग पहिली बेर भेंट सन् 1988 म तब होए रिहिसे, जब मैं छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' के प्रकाशन-संपादन करत रेहेंव. उही बखत एक दिन 'चंदैनी गोंदा' के सर्जक दाऊ रामचंद्र देशमुख जी संग भेंट करे खातिर बघेरा गे रेहेंव, त दाऊजी बताइन, अवइया शनिच्चर के भिलाई पावरहाउस तीर 'चंदैनी गोंदा' के कार्यक्रम हे, तहूं वोला देखे बर आ जाबे.
मोला आश्चर्य लगिस. काबर ते दाऊजी तब तक तो 'चंदैनी गोंदा' के विसर्जन कर के 'कारी' के मंचन म सक्रिय होगे रिहिन हें, तब भला चंदैनी गोंदा फेर कहाँ ले आगे? तब वोमन बताइन, चंदैनी गोंदा के संगीतकार रहे खुमान साव अभी घलो एला अपन अनुसार से चलावत हें, उही कार्यक्रम म उहाँ मोर सम्मान राखे हावय, तेकर सेती जाहूं. तब मैं अउ चंद्रशेखर चकोर उहाँ गे रेहेन, तब दाऊजी ह उंकर संग हमर मन के चिन्हारी करवाए रिहिन हें. फेर मोर उंकर संग सबले जादा घनिष्ठ संबंध तब बनिस जब मैं प्रेस लाईन के बुता ल कुछ बेरा तक छोड़ के 'छत्तीसगढ़ रिकार्डिंग स्टूडियो' के संचालन करत रेहेंव. सन् 1994 ले लेके 2006 तक. इही ये बेरा ह मोर साधना काल के घलो बेरा आय. तब मोर सुतना बसना सब स्टूडियो म ही होवय.
खुमान साव जी एक- दू पइत तो हमर इहाँ रिकार्डिंग करवाए के बुता खातिर आए रिहिन हें. फेर मोर संग बइठ के साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ आध्यात्मिक चर्चा खातिर जादा आवंय. उन कहंय, सुशील तोर जगा आथंव न, त मोला एक अलगेच किसम के सुख के अनुभव होथे. काबर तैं ह साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ पत्रकारिता ले जुड़े के संगे-संग आध्यात्मिक मनखे घलो अस. तैं इहाँ के मूल संस्कृति के जेन बात बताथस न, ए ह हम कभू नइ सुने राहन तइसनो होथे. ए सबके एकाद किताब छपवाना, तेमा तोला ए साधना म ज्ञान मिले हे, तेन ह अवइया पीढ़ी खातिर घलो सुरक्षित रहि जावय. आगू चलके अइसने पुरोधा मन के सलाह अउ आशीष ले वो बखत पाए ज्ञान के आधार म 'आखर अंजोर' के प्रकाशन होइस.
खुमान साव जी के जनम 5 सितम्बर 1929 के खुर्सीटिकुल, ब्लॉक डोंगरगांव, जिला राजनांदगाँव के दाऊ टीकमनाथ साव जी के संतान के रूप म होए रिहिसे. उनला अपन परिवारेच म संगीत के माहौल मिलिस. उंकर सियान टीकमनाथ जी खुदे हारमोनियम बजावंय. तब लइका खुमान घरे म हारमोनियम बजाए के उदिम करे लागिस. उंकर बड़े दाई के बेटा अउ हमर इहाँ के नाचा के पुरोधा दाऊ मंदराजी घलो उनला हारमोनियम बजाए खातिर प्रोत्साहित करंय. लइका खुमान 13 बछर के उमर म बसंतपुर के नाचा कलाकार मन संग खड़े साज म पहिली बेर हारमोनियम बजाइस. मंदराजी के रवेली नाचा पार्टी म उन 14 बछर के उमर म शामिल होइन.
उन 1950-51 म राजनांदगाँव म आर्केस्ट्रा पार्टी घलो चलाइन. छत्तीसगढ़ के संगे-संग महाराष्ट्र अउ मध्यप्रदेश के कतकों शहर म उंकर सफल कार्यक्रम होइस. वोमन 1952 म 'सरस्वती कला मंडल' के गठन करिन. संगीत म कुछ ठोसहा करे के चाह म वोमन भैयालाल हेड़ाऊ, गिरिजा सिन्हा, रामनाथ सोनी आदि संग मिलके सन् 1960 म 'शिक्षक सांस्कृतिक मंडल' के गठन करिन. म्युनिसिपल स्कूल राजनांदगाँव म करीब 30 बछर तक उंकर संगीत निर्देशन म उहाँ के लइका मन प्रतियोगिता मन म परचम लहराइन. तब वोमन राजनांदगाँव म राहत रिहिन, तहां ले सोमनी तीर के गाँव ठेकवा म बस गिन.
गोठबात म वोमन बतावंय. 1952 म पिनकापार (बालोद) निवासी दाऊ रामचंद्र देशमुख (बाद म दाऊ जी बघेरा म आगे रिहिन) के बलावा म मड़ई के अवसर म आयोजित नाचा म हारमोनियम बजाए बर गिन. दू बछर पिनकापार के मड़ई म हारमोनियम बजाए के ए असर होइस के रवेली अउ रिंगनी नाचा पार्टी वाले मन एकमई होगे. तब उंकर संगीत निर्देशन म 1971 म आकाशवाणी रायपुर म भैयालाल हेड़ाऊ आदि के स्वर म उंकर गीत के रिकार्डिंग होइस. उही गीत मनला आकाशवाणी ले सुनके दाऊ रामचंद्र देशमुख जी खुमान साव जी ल बघेरा बलाइन. देशमुख जी वो बखत छत्तीसगढ़ के कलाकार मनला खोजे अउ उनला मांजे के कारज करत रिहिन हें. वोमा खुमान साव जी ल हारमोनियम वादक के रूप म शामिल कर लिन. एकर पाछू फेर 7 नवंबर 1971 के दिन छत्तीसगढ़ के धरती म "चंदैनी गोंदा" के प्रथम मंचन के साथ सांस्कृतिक जागरण के जोत जलिस. तहाँ ले पूरा छत्तीसगढ़ म खुमान साव के संगीत के सोर गूंजे लागिस.
खुमान साव जी इहाँ के पारंपरिक गीत-संगीत के संरक्षण खातिर बहुत गुनंय अउ कारज घलो करंय. उन बतावंय (ए बात ल मोला लक्ष्मण मस्तुरिया घलो बतावंय), हमन पूरा छत्तीसगढ़ के गाँव गाँव म टेप रिकॉर्डर धर के किंजरन अउ कलाकार मन जगा जाके वोमन ल गीत गाए बर काहन, तहाँ ले उनला रिकार्डिंग कर लेवन. तहांले उही गीत मनला थोड़ा बहुत सुधार के परिमार्जित कर के आज जेन सुनत हव, तेन रूप म बनावन.
खुमान साव जी आज छत्तीसगढ़ी के नांव जेन किसम के गीत अउ खासकर के पद्य लिखे जावत हे, तेला भावत नइ रिहिन हें. उन काहंय हमर पारंपरिक शैली म लेखन होना चाही. जेमा स्वर अउ तालबद्ध गीत लिखे के परंपरा हे. हमला अपन मौलिक पहचान ल बनाए रखना चाही, न कि लघु गुरु अउ मात्रा मनला गिन-गिन के दूसर मन के पिछलग्गू बनना चाही.
ए संबंध म उन उदाहरण घलो देवंय- 'जब हमन चंदैनी गोंदा के गीत मनके रिकार्डिंग खातिर मुंबई गेन, त उहाँ हमर करमा के एक गीत ल सुनके उहाँ जुरियाए मुंबई के जम्मो कलाकार माथा धर लिन. ( दिया के बाती ह वो कइसे सच बात ल कहिथे जले के बेर) काबर के करमा के ए गीत म पांच मात्रा के ताल हावय. ए ह छत्तीसगढ़ी संगीत के मौलिकता आय. दुनिया के अउ कोनो संगीत म अइसन विसम ताल नइए. बाकी सब म दू मात्रा, चार मात्रा के सम ताल ही होथे. उहाँ जुरियाए सब संगीतकार ए ताल ल बजाए के कोशिश करिन फेर कोनो नइ बजा पाइन.
ए बात ल उन मोला हमर स्टूडियो म होय गोठबात म तो बताएच रिहिन. छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा सन् 2014 के 12, 13 अउ 14 दिसंबर के रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन म आयोजित होए प्रथम "रायपुर साहित्य महोत्सव" म घलो कहे रिहिन. ए कार्यक्रम म मैं तीनों दिन के सबो कार्यक्रम म संघरे रेहेंव. पहला दिन के पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी मंडप के उद्घाटन सत्र के कार्यक्रम के संचालन महीच करे रेहेंव. छत्तीसगढ़ के साहित्यकार मन ऊपर आधारित ए सत्र म मोर संग म छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के संपादक नंदकिशोर तिवारी जी अउ डा. रमेन्द्रनाथ मिश्रा जी रिहिन. हमर मन के बगल म मुकुटधर पाण्डेय मंडप रिहिसे, जिहां दूसरा दिन लोक गीत ऊपर आधारित सत्र रिहिसे, जेमा खुमान साव जी अउ लक्ष्मण मस्तुरिया जी वक्ता के रूप म रिहिन हें अउ एकर संचालन लाल रामकुमार सिंह करे रिहिन हें. ए मंच म घलो आदरणीय खुमान साव जी मुंबई म करमा गीत के पांच ताल वाले बात के बढ़िया फोरिया के विस्तार ले उल्लेख करे रिहिन हें.
अतेक अद्भुत प्रतिभा के धनी खुमान साव जी ल जनता के तो अथाह सम्मान मिलय, फेर उंकर शासकीय सम्मान के गिनती नहीं के बराबर हे. वइसे 2015 म उनला संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार तो मिले रिहिसे, फेर पद्मश्री या राज्यशासन के मंदराजी आदि के सम्मान उनला नइ मिल पाइस. मोर कभू उंकर संग ए विषय म चर्चा होवय त उन कहंय, अरे टार न, सरकारी सम्मान ल. उहाँ कोन आवेदन करही. हमला जनता के जेन सम्मान मिलथे, तेन सबले बढ़के हे. बाद म मैं ए विषय म जानकारी लेंव त पता चलिस, के अइसन सम्मान खातिर संबंधित कलाकार ल स्वयं या फेर कोनो समिति के माध्यम ले आवेदन करे बर लागथे, तभे वोकर नाम ऊपर सम्मान चयन समिति द्वारा विचार करे जाथे. आदरणीय खुमान साव जी कहंय, कोनो स्वाभिमानी आदमी ह आवेदन करही का, मोला सम्मान दे कहिके??
वाजिब म संबंधित विभाग ल अउ वोकर सलाहकार मनला ए विषय ऊपर फिर से विचार करना चाही, तेमा वरिष्ठ कलाकार या साहित्यकार मनला आवेदन के प्रक्रिया ले गुजरे ले झन परय.
लोक संगीत के ए महान पुरोधा, कला गुरु के 90 बछर के अवस्था म 9 जून 2019 के देवलोक गमन होगे. उंकर सुरता ल डंडासरन पैलगी 🙏🙏
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
Wednesday, 9 June 2021
खुमान साव... सुरता
Monday, 7 June 2021
कोसमनारा के तपस्वी बाबा के दरबार म
सुरता//
कोसमनारा के तपस्वी बाबा के दरबार म हाजरी...
छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा म एक ले बढ़ के एक साधू, संत, तपस्वी अउ कर्मयोगी मन के बेरा-बेरा म अवतरण होवत रेहे हे. एक अइसने हठयोग के तपस्वी बाबा हें, रायगढ़ ले लगे गाँव कोसमनारा म, जिहां उन 16 फरवरी 1998 ले आज तक सरलग तपस्यारत हें.
बाबा जी के जनम कोसमनारा ले 19 किमी दुरिहा बसे गाँव डूमरपाली म 12 जुलाई 1984 के किसान पिता दयानिधि अउ महतारी हंसमती साहू के घर होए हे. बचपन म उंकर नांव धरिन हलधर, फेर उंकर पिता उनला मया करके 'सत्यम' कहिके बलावंय. इही सत्यम ह आगू चलके बाबा सत्यनारायण के रूप म चिन्हारी बनगे.
मोर उहाँ पहुंचे के संजोग दुएच पइत होए हे. पहिली बार साहित्यिक यात्रा के संगे-संग आध्यात्मिक यात्रा के रूप म अउ दूसर पइत विशुद्ध आध्यात्मिक यात्रा.
सन् 2014 के जनवरी महीना म एक दिन नवापारा- राजिम के शिक्षक- साहित्यकार दिनेश चौहान जी मोला फोन करीस, चलना भैया कोनो डहार घूमे ले जाबो, घर म खुसरे खुसरे जी असकटागे हे. मैं वोला बताएंव, डॉ. सुखदेव राम साहू जी घलो अइसने काहत रिहिन हें, त चलव कोनो डहर चलथन.
बाते-बात म जोंग डारेन के रायगढ़ जाबोन. जाए के दिन के आवत ले रायगढ़ जाए खातिर चार झन होगेन. चेतन भारती जी घलो तैयार होगे. मैं डा. बलदेव जी ल फोन कर के बात दिएंव के फलाना दिन हमन रायगढ़ आवत हवन चार झन. एती सुखदेव राम जी घलो रायगढ़ नगर निगम म तब इंजीनियर के रूप म कार्यरत भागवत प्रसाद साहू जी ल बता देइन के हमन चार झन इतवार के बिहनिया वाले गाड़ी म आबो, अउ दूसर दिन सोमवार के बिहनियच लहुट जाबो, तेमा सब अपन- अपन काम बुता म चले जावन.
इतवार के मंझनिया करीब एक बजे रायगढ़ पहुंचेन. रेलवे स्टेशन म भागवत प्रसाद साहू जी गाड़ी ले के हमन ल लेगे खातिर पहुँचगे राहंय. एती डा. बलदेव के घलो फोन आगे के तुंहर मन के सम्मान म रायगढ़ के सब साहित्यकार मन कवि गोष्ठी के आयोजन रखे हें. जेवन-पानी के बेवस्था घलो इहें हे.
इंजीनियर साहेब हमन ल लेके बताए ठउर म पहुंचाइन. हमन देखेन ते उहाँ कोरी भर के पुरती वो डहर के साहित्यकार मन पहुंचे राहंय. हमर मन के उहाँ पहुंचते सम्मान अउ गोष्ठी के तैयारी करे लागिन. हमन वोमन ल बताएन, हमर मन के असली उद्देश्य तो कोसमनारा वाले बाबा जी के दरबार म हाजरी देके उंकर दर्शन करना आय. फेर आपमन साहित्यिक कार्यक्रम घलो रख दिए हव, त एला जतका जल्दी हो सकय निपटाए के उदिम करव.
वोमन बताइन, मई-जून के उसनत मंझनिया म अभी उहाँ कहाँ जाहू. अतका जुवर उहाँ कोनो नइ राहय, बस बाबा जी भर समाधि म बइठे होहीं. सांझ के होवत ले इहाँ साहित्यिक कार्यक्रम म संघरव. हमन राजधानी रायपुर ले चार झन साहित्यकार आए हें कहिके आपमन के सम्मान म ए उदिम ल करे हवन. उंकर मनके बताए-समझाए म हमन कार्यक्रम म पूरा रेहेन.
इंजीनियर साहेब ही हमर मनके वोती के मार्गदर्शक रिहिन हें. वोमन कहिन, दिन बूड़े के बाद जाबोन. वोमन बताइन, नगर निगम के द्वारा वो डहर के सड़क आदि ल बनवाय के जवाबदारी मुंही ल मिले रिहिसे, तेकर सेती वोती के सबो रद्दा अउ लोगन मनला जानथंव. आपमन चाहहू त बाबा जी संग गोठबात घलो करवा देहूं, फेर वोकर खातिर रतिहा म 12 बजे के बाद तक रूके बर लागही, काबर ते बाबा जी अर्धरात्रि के बाद ही चोबीस घंटा म एक बार आधा-एक घंटा खातिर समाधि ले उठथें अउ जेन भी नित्यकर्म, दूध फल आदि लेना हे तेला करथें.
हमन कहेन, कभू अउ आबो त भले गोठिया लेबो, अभी बस दर्शन भर करबो अउ लहुट आबो. काबर ते दिन भर के सफर फेर साहित्यिक कार्यक्रम देंह थरथरा गेहे. वोमन ठीक हे कहिन अउ फेर हमन बाबा जी के दरबार जाए बर निकल गेन. उहाँ पहुंचेन त लोगन के गजब भीड़ राहय. उहाँ पता चलिस के गर्मी के दिन म रतिहा बेरा ही दर्शनार्थी मन के जादा भीड़ रहिथे.
जब हमन लाईन म लगके बाबा जी के तीर म पहुंचेन त उन समाधि के अवस्था म आगे रिहिन हें. सुखदेव राम जी मोर जगा पूछिस, बाबा जी ह दूनों आंखी ल मूंदे कइसे अंटियाए असन बइठेच बइठे ऊपर-नीचे होवत हे?
तब मैं उनला बताएंव, यही तो समाधि के अवस्था आय. ए अवस्था म जीव अउ शिव एकेच हो जाथे. वोकरे सेती ए अवस्था म समाधिस्थ मनखे ल न भूख लागय न पियास, न जाड़ जनावय न घाम. सुखदेव राम जी कहिस- हां भई, एकर मरम ल तहीं जान सकथस, काबर ते तहूं साधना मार्ग के मनखे अस.
हमन बाबा जी के दर्शन कर के बाद दरबार म चारों मुड़ा किंजर-किंजर के बाकी सब जगा ल देखेन. घर अउ अपन खातिर प्रसाद झोंकेन, तहाँ ले वापस इंजीनियर साहेब के घर आए बर निकल गेन. रद्दा म इंजीनियर साहेब बाबा जी के उंकर जन्मभूमि डूमरपाली ले कोसमनारा आए के घटना ल बताइन. उन बताइन, बाबा जी बचपन ले ही आध्यात्मिक किसम के रिहिन हें. एक बार गाँव के तरिया के बाजू म जेन शिव जी के मंदिर हे, उही म लगातार 7 दिन तक तपस्या म बइठगे रिहिन हें. गाँव वाले के संगे-संग उंकर सियान मन के समझाए ले वोमन घर तो लहुट आइन, फेर शिव भक्ति के चिभिक म उन बूड़गे रिहिन.
14 बछर के उमर म एकदिन वोमन स्कूल जाए खातिर घर ले बस्ता धर के तो निकलिन फेर स्कूल नइ गेइन. सफेद कुर्ता अउ खाकी रंग के हाफ पेंठ जेन स्कूल के ड्रेस होथे उहिच म रायगढ़ डहर रेंग परिन. अपन गाँव ले 19 किमी दूरिहा रेंगते रेंगत कोसमनारा बस्ती ले थोक दुरिहा बंजर भुइयां म तीर तखार म बगरे पथरा मनला सकेल के वोला शिवलिंग के रूप देइन अउ अपन जीभ ल काट के वोमा चढ़ा दिन. कुछ दिन तो लोगन ल उंकर कोनो किसम के सोर-संदेशा नइ मिलिस, फेर पाछू चारों मुड़ा के लोगन ल एकर खबर मिलगे. तहांले लोगन के उंकर दर्शन खातिर आना घलो चालू होगे.
इंजीनियर साहेब बताइन के बाबा जी अपन जीभ ल काट के शिव जी ल चढ़ा दिए हें, तेकर सेती गोठिया तो नइ सकंय फेर समाधि ले घंटा भर खातिर जब उठथें, त उहाँ जुरियाए भक्त मन संग इशारा म जरूर गोठियाथें.
मोर उहाँ दुसरइया पइत जवई 2018 के सावन महीना म होइस. हमर समिति 'आदि धर्म जागृति संस्थान' के उपाध्यक्ष अउ इहाँ के लोकप्रिय लोकगायिका अनुसुइया साहू जी एक दिन मोला फोन कर के कहिस, कोसमनारा वाले बाबा जी के बारे म अबड़ सुने हंव, एको दिन दर्शन करे ले जातेन का?
मैं तुरते तैयार हो गेंव. वइसे भी सावन के महीना म सोमवार के दिन मंदिर जाए के मोर छात्र जीवन ले ही आदत हे. मैं कहेंव, ठीक हे अवइया इतवार के इहाँ ले निकलबोन, रतिहा रायगढ़ म बीताबो अउ सोमवार के बिहनियच ले बाबा जी के दरबार म हाजरी लगा लेबो. फेर अइसे घटना घटिस ते अनुसुइया तो वो दिन नइ जा पाइस, तभो मैं अकेल्लच जाके बाबा जी के दर्शन कर आएंव.
आज तो रायगढ़ तीर के ए कोसमनारा गाँव ह एक तीर्थ के रूप धर लिए हे. बारों महीना दर्शनार्थी मन के आवक-जावक लगे रहिथे. बाबा जी के तपस्या ठउर ह घलो दर्शनीय स्थल के रूप म विकसित होगे हवय, फेर आज घलो उन अपन मुड़ ऊपर छइहां नइ करन दे हें. उहिच खुल्ला छत के अवस्था म ही आज घलो उंकर घोर तपस्या चलतेच हे.
उंकर तप, साधना अउ निष्ठा ल नमन..
ऊँ नमः शिवाय 🙏🌹🙏
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
Sunday, 6 June 2021
गेंड़ी नृत्य सुभाष बेलचंदन
सुरता//
'गेंड़ी नृत्य' ल अंतर्राष्ट्रीय स्तर म चिन्हारी देवाय के सपना देखइया सुभाष बेलचंदन
छत्तीसगढ़ म 'गेंड़ी' के नांव सुनते 'हरेली' तिहार के सुरता आ जथे. इहाँ के अइसन कोनो गाँव नइ होही, जिहां हरेली म लइका मन गेंड़ी नइ चघत होहीं. हमन लइका राहन त अपन गाँव म गेंड़ी दौड़ के आयोजन घलो देखन. कोनो-कोनो गाँव मन म अभी घलो गेंड़ी दौड़ के आयोजन हो जावत होही. फेर ये गेंड़ी ल एक कला के रूप म परिष्कृत कर के एला राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्ट्रीय स्तर म चिन्हारी देवाय के सपना कोनो बिरले कलाकार या कला पारखी ही कर सकथे.
सुभाष बेलचंदन अइसने कला पारखी रिहिसे, जेन हरेली परब बखत जब वोकर दूसर दिन लइका मन ल गेंड़ी म चढ़ के चिखला म बड़ा होशियारी के साथ खेलत अउ नाहकत देख के ए कला ल अंतर्राष्ट्रीय स्तर म चिन्हारी देवाय के गुनिस अउ एकर खातिर उदिम घलो करीस.
एकर पहिली हमन ए गेंड़ी नृत्य ल कभू-कभार रायपुर के पुलिस मैदान म गणतंत्र दिवस समारोह म देख लेवत रेहेन, जब छत्तीसगढ़ शासन के पुलिस विभाग के कलाकार मन एकर प्रदर्शन करंय. एकाद पइत दिल्ली के राजपथ म घलो एकर प्रदर्शन दूरदर्शन के माध्यम ले देखे ले मिले रिहिसे. फेर एकर मन के प्रदर्शन ह सिरिफ कुछ सरकारी आयोजन तक ही सीमित रहय. सुभाष बेलचंदन ह जइसे एला आम जनता के पहुँच तक लेगिस, जन-जन के आगू म अउ हर किसम के छोटे-बड़े मंच म एला लोकप्रिय बनाइस, वइसन देखे बर कभू नइ मिलत रिहिसे.
दुरुग जिला के गाँव तिरगा म 24 अगस्त सन् 1984 के माता श्रीमती लता बेलचंदन अउ पिता नंदकुमार बेलचंदन जी के घर जन्मे सुभाष के शिक्षा बी. काम., एम. ए. अंग्रेजी साहित्य, समाज शास्त्र, प्रोग्राम इन रिटेल मैनेजमेंट के संगे संग तबला म विद अंतिम तक रिहिसे. अपन कला क्षेत्र के प्रेरणास्रोत वोमन अपन नाना जी दाऊ नर्मदा प्रसाद गौतम जी ल मानंय, जेकर ले तबला अउ हारमोनियम के प्रारंभिक शिक्षा पाइन. बाद म तबला के शास्त्रीय शिक्षा भूषण देवांगन जी ले, अभिनय के संगे संग छत्तीसगढ़ी कला, अस्मिता अउ कलाकार मन खातिर चिंतन गुरु नारायण चंद्राकर जी ले पाइन, जेकर भारत विभूति आल्हा दल म उन गायक के रूप म जुड़े रिहिन. उंकर नाचा के गुरु डोमार सिंह कुंवर जी रिहिन. वोमन अपन मुख्य प्रेरणास्रोत जितेंद्र देशमुख जी ल मानंय.
सन् 2008 ले सुभाष बेलचंदन द्वारा वनांचल गेंड़ी नृत्य संस्था चिलमगोटा के नाम ले शुरू करे गे गेंड़ी नृत्य के प्रदर्शन हमर छत्तीसगढ़ सहित पूरा देश अउ विदेश म 500 ले जादा मंच मन म हो चुके रिहिसे, फेर मोला एला प्रत्यक्ष देखे के सौभाग्य 19-20 मार्च'21 म तब मिलिस, जब रायपुर के होटल क्लार्क इन म छत्तीसगढ़ी साहित्य महोत्सव के दू दिनी जबर जलसा होए रिहिसे. वइसे तो मीडिया के माध्यम ले एकर सोर अबड़ देखे, सुने अउ पढ़े ले मिलत रिहिसे, फेर सुभाष बेलचंदन अउ उंकर जम्मो संगी मनला प्रत्यक्ष देखे अउ सुने के इही पहला बेरा रिहिसे. तब एकर मनके पहनावा ल देख के मैं उंकर जगा एक प्रश्न घलो पूछे रेहेंव.
आम तौर म हमर छत्तीसगढ़ के मैदानी भाग म जेन भी कला के प्रदर्शन होथे, वोकर पहिरावा अउ सिंगार ह धोती, कुरता अउ कौड़ी आदि सिंगार ले सजे होथे. फेर सुभाष भाई मन के पहिरावा मोला हमर वनांचल म बसे बस्तर क्षेत्र के आरो देवत रिहिसे. मोर पूछे म वो बताइस, हमर बालोद जिला के ए डौंडीलोहारा क्षेत्र ह बस्तर क्षेत्र के संस्कृति ले प्रभावित हे, तेकर सेती हमर मन के पहिरावा अउ सिंगार घलो वइसने दिखथे.
बालोद जिला मुख्यालय ले करीब 50 किमी दुरिहा म बसे डौंडीलोहारा विकास खंड के गाँव रेंगाडबरी म सहायक शिक्षक के पद म लइका मनला पढ़ातेच पढ़ावत वोमन करीब 200 ले जादा लइका सियान मनला गेंड़ी नृत्य म पारंगत कर डारे हें. आज तो वो गाँव के ए स्थिति हे, के उहाँ के एको घर अइसे नइहे, जिहां गेंड़ी नइ बनत होही, अउ वोमा चढ़ के लइका मन अपन बाल सुलभ कला के प्रदर्शन नइ करत होहीं. इही सीखे-गढ़े कलाकार म के जितेन्द्र साहू (गायक), अशोक निषाद (दफड़ा), मोरजध्वज ईस्दा (डमऊ), टेकराम नायक (गुदुम), राधेश्याम बघेल (बेंजो), जनताराम जमडारे अउ लक्ष्मण गंधर्व (मोहरी), अंकालूराम यादव (खड़पड़ी), शेषलाल रावटे (गोला) के संगे-संग नृत्य म पिनेश कुमार, विनय कुमार, खिलेन्द्र कुमार, घनश्याम, मेघनाथ, भूपेश कुमार, बाबूलाल, विकेश कुमार अउ गिरवर आदि कलाकार संगी मनला अपन संग म लेग के उन अपन प्रस्तुति देवत रिहिन हें. जेकर चलत लोकेन्द्र यादव समाज सेवा सम्मान 2016, धरती पुत्र सम्मान 2013, माता कौशल्या सम्मान 2015, दाऊ ढालसिंह दिल्लीवार सम्मान 2017, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान 2019 के संगे-संग अउ कतकों सम्मान ले उनला सम्मानित करे गे रिहिसे. फेर उंकर कहना राहय, के जनता के द्वारा जेन सम्मान मिलथे, वो ह सबले बढ़के होथे.
बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे सुभाष शिक्षा के क्षेत्र म आए ले पहिली एक मल्टीनेशनल कम्पनी म काम करत रिहिसे, फेर वोला लगिस, के इहाँ रहिके तो समाज अउ कला खातिर कुछु करेच नइ पावत हे. त फेर वो कंपनी के नौकरी ल छोड़ के सन् 2008 म सहायक शिक्षक के रूप म चयन होइस, अउ उंकर पद स्थापना चिलमगोटा म होगे. इहें ले फेर उंकर शिक्षा के संगे- संग गेंड़ी नृत्य के सफर घलो चल परिस, जे आज एक बड़का रूख के आकार धरे कतकों नवा पीढ़ी के लइका मनला अपन छांव म कला अउ शिक्षा के अंजोर देवत हे.
गेंड़ी नृत्य के संगे-संग वोमन शिक्षा विभाग के "धरोहर" कार्यक्रम म बालोद जिला ले परीक्षण संपादन टीम ल सक्रिय सदस्य के रूप म अपन सहयोग घलो देवत रिहिन हें. एमा 'देवार गीत' खातिर उंकर द्वारा करे गे काम विशेष रूप ले उल्लेखनीय हे. 2010 म 'शिक्षा म कठपुतली कला' ले प्रशिक्षण ले के बाद लइका मनला कठपुतली बनाना, कबाड़ ले जुगाड़, कागज के खिलौना बनाए के घलो प्रशिक्षण देवत रिहिन हें.
छत्तीसगढ़ म देवार ल एक घुमंतु जाति माने जाथे, फेर ए मन कला म भारी सिद्ध होथें. इहाँ तो गीत के एक परंपरा ही हे, जेला 'देवार गीत' के नांव ले जाने जाथे. ए गीत म कई अइसन कहानी हे, जेला एकर माध्यम ले गाये जाथे. प्राचीन लोक साहित्य के अध्ययन ले जानकारी मिलथे, के गोंड़ राजा मन के दरबार म एमन गीत गावत रिहिन हें. फेर कोनो कारण ले उंकर दरबार ले निकाला होगे, तब ले एकर मन के जीवन घुमंतु कस होगे. सुभाष बेलचंदन बालोद क्षेत्र के कलाकार गुलाब मंडावी अउ मनबोध देवार के माध्यम ले इहू विधा खातिर ठोसहा बुता करे रिहिन हें.
सुभाष बेलचंदन वइसे तो बहुमुखी प्रतिभा के धनी रिहिसे, कतकों कला म पारंगत रिहिसे फेर उंकर मुख्य पहिचान गेंड़ी नृत्य के माध्यम ले ही ठउका बनत रिहिसे. अपन संस्था 'वनांचल गेंड़ी नृत्य संस्था ग्राम चिलमगोटा' के जम्मो प्रस्तुति खातिर वोमन गीत लेखन के काम ल घलो खुदेच करत रिहिन हें. अतेक अद्भुत प्रतिभा के धनी ले छत्तीसगढ़ महतारी के अस्मिता ल उजियार करे के भारी आशा बंधत रिहिसे फेर भाग के लेखा ल कोनो बदल नइ सकय, तभे तो विश्वव्यापी महामारी कोरोना ह 2 जून'21 के ये कला रत्न ल पत्नी तरुणा, पुत्र अनुराग अउ पुत्री दीया बेलचंदन के संगे-संग उंकर जतका हितु पिरितु अउ प्रशंसक रिहिन हें, तेकर मनले हमेशा खातिर अलग कर दिस.
हम कभू सोचे नइ रेहेन, अतेक कम उमर म सुभाष बेलचंदन खातिर 'सुरता' लिखे बर लाग जाही. आज उंकर सुरता ल अंतिम जोहार करत, गेंड़ी नृत्य खातिर उंकर खुद के लिखे ए चार लाइन के रचना संग सादर जोहार...
बंदन, बंदन, बंदन, पान-लिमऊ, नरियर
तोला भेंटे हे वो दंतासिरी हिंगलाजिन
धंउरा, लाली अउ हे करिया
डांग सुघ्घर से ना गढ़वाली कंकालीन
तोला भेंटे हे वो दंतासिरी हिंगलाजिन....
...
हो...
बुढ़ादेव, मड़ियादेव, दूल्हादेव, भंईसासुर,
हो... कंकालीन डोंगरवाली
गोंदला चढ़ाबोन दाई, झंडी चढ़ाबोन दाई
मन के मनौती ल मनाबो..
उंकर संस्था के जम्मो सदस्य मन मिल जुल के उंकर अधूरा सपना ल पूरा करही, इही भरोसा के संग अंतिम सेवा जोहार..
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
Thursday, 3 June 2021
घानी मुनी बोर दे पानी दमोर दे
सुरता//
घानी मुनी बोर दे पानी दमोर दे
छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक मंच के जय घोष करइया 'चंदैनी गोंदा' के ए गीत ल तब आकाशवाणी आदि के माध्यम ले अबड़ सुनन. रविशंकर शुक्ला जी बरसा के माध्यम ले हमर देश म सुख अउ समृद्धि के कामना करत कहंय-
घानी मुनी बोर दे पानी दमोर दे
हमर भारत देस ल भइया दही दूध म बोर दे
दुगना तिगुना उपजय धान
बाढ़े खेत अउर खलिहान
देस म फइले भूखमरी ल, संगी तंय झकझोर दे...
देश ल दूध दही म बोरे के कल्पना कवि के अतिशयोक्ति हो सकथे, फेर तब हमन पानी म चोरो-बोरो बूड़त ए धरती ल जरूर देखे हावन. हफ्ता दस दिन के झड़ी तो सहज राहय. कभू-कभू पंदरही घलो सुरुज नरायन के दरस नइ हो पावत रिहिसे. तब नरवा-नंदिया म पूरा घलो वइसने आवय, जेला बइहा पूरा अउ उड़ेरा पूरा आदि के नांव के चिन्हारी करे जाय. खंड़ भर पूरा अवई ह तो तब सहज राहय. जहाँ एकाद-दू सरवर पानी गिरतीस, तहांले नंदिया-नरवा उमे ले धर लेवय.
अब अइसन नजारा मन के देखई ह दुरलभ होगे हे. जब बरसच ह वइसन नइ होवय, त पूरा घलो कहाँ ले वइसन आही? आज के लइका मन तो झड़ी काला कहिथे? पूरा अउ बइहा पूरा का होथे, उड़ेरा पूरा कइसन रार मचाथे, तेकरो बारे म सुने नइ होही.
अभी छत्तीसगढ़ म मौसम विभाग के आंकड़ा ल पतियाईन त 120 ले 125 से. मी. तक बरसा हो जाथे. इहाँ सबले कम बरसा मैकल पर्वत श्रेणी के तीर-तखार माने राजनांदगाँव अउ कवर्धा जिला म होथे अइसे बताए जाथे. उहें भानुप्रतापपुर अउ जशपुर जिला मन म सबले जादा बरसा होथे अइसे बताए जाथे. हमर इहाँ के अबूझमाड़ क्षेत्र ल बरसा के मामला म छत्तीसगढ़ के चेरापूंजी घलो कहे जाथे.
पहिली इहाँ अतेक बरसा होवय, त अब काबर नइ हो पावय? ए विषय ह गुने अउ वोला फेर पहिली जइसन बेरा म लेगे के उदिम करई के होना चाही. एकर सबले बड़का कारन जेन आज जगजग ले दिखथे, तेन ह तो पर्यावरण के दुर्दशा ह चकचक ले देखब म आथे. पर्यावरण ह दुरगत बिगड़े असन दिखही त मौसम के हाल घलो वइसनेच दिखही.
अपने तीर-तखार ल देखव, कतका रूख-राई अउ तरिया नंदिया राहय. अउ अब चारों मुड़ा पटपर भांठा अउ सुक्खा सुक्खा भुइयां नजर आथे. छत्तीसगढ़ राज्य के कुल क्षेत्रफल 1,35,191 वर्ग किलोमीटर हे, जेकर कुल 59,772 वर्ग किलोमीटर म जंगल हे. ए ह सरकारी आंकड़ा के मुताबिक हे ना. माने कुल भौगोलिक क्षेत्र के 44.21 प्रतिशत भाग म जंगल हे.
का ए आंकड़ा ह आप मनला भरोसा करे असन लागथे? चारों मुड़ा के जंगल मन म घुसरिहव त असलियत के पता चलथे. पक्की सड़क के तीरे-तीर तो मार हरियर हरियर ऊंच ऊंच रूख-राई दिख जाही. फेर जिहां सड़क ल छोड़ के सौ दू सौ फीट भीतर घुसरव त जंगल के असलियत दिखे लगथे. चारों मुड़ा के रूख मन के ठुड़गा ह उंकर मन के अंधाधुंध हत्या करे के गोहार पारत नजर आथे.
ए दृश्य ह सिरिफ जंगल मन के नहीं, भलुक हमर मन के चातर राज के खेत-खार अउ नान्हे नान्हे झबड़ी मन ल देखव, सब के एके गति दिखही. त भला बतावव अइसन म बरसा के पहिली जइसन रूप कइसे देखे म आही?
ए समस्या ह सिरिफ हमर छत्तीसगढ़ या भारत भर के नहीं, भलुक पूरा दुनिया के आय. पूरा दुनिया म पर्यावरण के राही छंड़ाए जावत हे. इही सबला देख के सन् 1972 म संयुक्त राष्ट्र संघ ह स्टाकहोम (स्वीडन) म पहला विश्व पर्यावरण सम्मेलन आयोजित करिस, जेमा कुल 119 देश मन वोमा जुरियाए रिहिन. उही सम्मेलन म 5 जून के हर बछर पर्यावरण दिवस मनाए के निर्णय लिए गिस. हमर देश के तब के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ह 'पर्यावरण के बिगड़त स्थिति अउ वोकर विश्व के भविष्य ऊपर प्रभाव' विषय ऊपर अपन विचार रखे रिहिन हें. तभेच ले हमर देश म 5 जून के पर्यावरण दिवस मनाए जाथे.
एकर खातिर 19 नवंबर 1986 के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम घलो लागू करे गिस, जेमा पानी, हवा अउ जमीन ए तीनों ले संबंधित जम्मो जिनिस के संरक्षण संवर्धन के उदिम करना आय.
आप सब देखत हव, ए अधिनियम के कतका अकन पालन भुइयां म देखे बर मिलथे? हर बछर 5 जून के सरकारी अउ गैर सरकारी कतकों आयोजन होथे. लोगन वृक्षारोपण के संगे-संग अउ कतकों उदिम करथें. चारों मुड़ा के पेपर अउ मीडिया मन एकरे ले भरे रहिथे. फेर जइसे ए दिन पहाथे, वोकर बाद साल भर तक का हाल होथे? एला जादा फोरियाए के जरूरत नइए.
संगी हो, जब तक हम ए पर्यावरण संरक्षण के बुता ल सिरिफ देखावा या नेंग छूटे के रूप म करत रहिबो तब तक अपन इहाँ के वो बरखा के जुन्ना रूप अउ वोकर माध्यम ले होवत जम्मो किसम के समृद्धि अउ बढ़वार ल नइ देखे सकन. एकर बर जरूरी हे, के हम ए बुता ल मिशन के रूप म करिन, तभे वो जुन्ना बेरा के दर्शन फेर हो पाही.
धरती दाई गोहरावत हे हरिया दव फेर कोरा
आगी ढिलहू जंगल म त तुंहरोच परही फोरा
देख मौसम के चाल बिगड़गे तुंहरे करनी आय
ठन-ठन भुइयां म लहुटगे सुग्घर धान कटोरा
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811