Thursday, 31 December 2015

नववर्ष की शुभकामनाएँ...

नया वर्ष आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आये.... अनेकानेक बधाई... शुभकामनाएँ....



सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811

Wednesday, 30 December 2015

मुबारक हो नववर्ष...











मन मुदित हृदय हर्षित हो जीवन में उत्कर्ष
स्नेह-सरिता बहे सदा पग-पग पर झूमे हर्ष
मीत मेरे दुनिया में तेरे अजर-अमर हो नाम
स्वीकार करो शुभकामना मुबारक हो नववर्ष

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811

Tuesday, 29 December 2015

मैं तो बइहा होगेंव शिव-भोले...

(छत्तीसगढ़ी भाषा के इस भजन को मैंने अपने आध्यत्मिक साधनाकाल में उस समय लिखा था, जब लोग मुझे पागल हो गया है कहकर मेरे आस-पास भी नहीं आते थे। मेरे घनिष्ठ मित्र भी मुझसे दूर भागते थे। तब मैंने उन्हीं परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए इस भजननुमा गीत को लिखा था।)













मैं तो बइहा होगेंव शिव-भोले,
तोर मया म सिरतोन बइहा होगेंव.....
घर-कुरिया मोर छूटगे संगी, छूटगे मया-बैपार
जब ले होये हे तोर संग जोड़ा, मोरे गा चिन्हार
लोग-लइका बर चिक्कन पखरा कइहा होगेंव गा.....
खेत-खार सब परिया परगे, बारी-बखरी बांझ
चिरई घलो मन लांघन मरथे, का फजर का सांझ
ऊपरे-ऊपर देखइया मन बर निरदइया होगेंव गा......
संग-संगवारी नइ सोझ गोठियावय, देथे मुंह ला फेर
बिन समझे धरम के रस्ता, उन आंखी देथे गुरेर
मैं तो संगी तोरे सही बस आंसू पोछइया होगेंव गा...
सुशील भोले 
54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811

Monday, 28 December 2015

ज्ञानी व्यक्ति...

ज्ञानी व्यक्ति कथावाचक अथवा प्रवचनकार का जीवन नहीं जीता। वह तो समाज को झंझावातों से निकालने के लिए एक नये मार्ग का सृजन करता है। एक नई क्रांति को जन्म देता है।
* सुशील भोले *

नवा बिहान के आस....


मुंदरहा के सुकुवा बिखहर अंधियारी रात पहाये के आरो देथे। सुकुवा के दिखथे अगास म अंजोर छरियाये के आस बंध जाथे। चिरई-चिरगुन मन चंहचंहाये लगथे, झाड़-झरोखा, तरिया-नंदिया आंखी रमजत लहराए लगथें। रात भर के खामोशी नींद के अचेतहा बेरा के कर्तव्य शून्य अवस्था ले चेतना के संसार म संघराये लगथे। तब कर्म बोध होथे, अपन धरम-करम के गोठ सुझथे, सत्-सेवा के संस्कार जागथे, अपन-बिरान अउ अनचिन्हार के पहिचान होथे।

नवा बछर घलो बीतत बछर के अनुभव के माध्यम ले लोगन ल अइसने किसम के नवा आस देथे, नवा बिसवास देथे, नवा रस्ता देथे, नवा नता-गोता, संगी-साथी अउ हितवा मन के संसार देथे। अपन पाछू के करम मन के गुन-अवगुन अउ सही गलत के पहिचान कराथे। करू-कस्सा, सरहा-गलहा मन ले पार नहकाथे, खंचका-डबरा अउ कांटा-खूंटी मन ले अलगे रेंगवाथे। तब जाके मनखे ह मनखे बनथे, वोकर छाप ह जगजग ले उज्जर अउ सुघ्घर दिखथे। लोगन ओला संहराथें, पतियाथें अउ आदर्श मान के ओकर अनुसरण करथें।

छत्तीसगढ़ अभी विकास के दृष्टि ले भारी पिछड़े हवय। डेढ़ दसक बीत गे हे, एकर स्वतंत्र अस्तित्व के सिरजन होये। तभो कोनो बने गढऩ के सुध लेवइया नइ मिलत हे, जबकि इही अवस्था ककरो भी निर्माण के बेरा होथे। वोला सुंदर आकार, संस्कार अउ सदाचार के गुन म पागे के। आज जइसे एकर नेंव रचे जाही, तइसे काल के एकर स्वरूप बनही। सैकड़ों अउ हजारों बछर ले पर के गुलामी भोगत ये माटी के रूआं-रूआं म लूटे के, हुदरे के, चुहके के, टोरे के, फोरे के, दंदोरे के, भटकाये के, भरमाये के, तरसाये के, फटकारे के चिनहा दिखत हे।

अभी घलोक एला अपन पूर्ण स्वरूप के चिन्हारी नइ मिल पाये हे। काबर ते कोनो भी राज के चिन्हारी वोकर खुद के भाखा अउ खुद के संस्कृति के स्वतंत्र पहिचान ले होथे, जे अभी तक अधूरा हे। अउ ये स्वतंत्र स्वरूप के चिन्हारी आज के पीढ़ी ल करना परही। हमर ददा-बबा मन के पीढ़ी ह एला स्वतंत्र पहिचान देवाये खातिर एक अलग प्रशासनिक ईकाई के रूप म तो बनवाये के बुता ल पूरा कर देइन। अब एकर संवागा के जोखा हम सबके हे। कइसे एला आकार देना हे, विस्तार देना हे, पहिचान देना हे, साज अउ सिंगार देना हे, ये हमार पीढ़ी के बुता आय।

ददा-बबा मन जेन सपना ल देखे रहिन हें, वो सपना ल, वो सुघ्घर रूप ल हमन ल गढऩा हे। एकर भाखा ल, साहित्य ल, कला ल, संस्कृति ल, जुन्ना आचार-व्यवहार ल, जीये के उद्देश्य अउ धर्म-संस्कार ल हमन ल बनाना हे। एकर बर पूरा ईमानदारी के साथ हर किसम के स्वारथ ले ऊपर उठ के समरपित भावना ले काम करे के जरूरत हे। ए बुता सिरिफ राजनीति के माध्यम ले पूरा नइ हो सकय, एकर बर हर वो माध्यम अउ मंच ल आगू आये के जरूरत हे, जेकर द्वारा समाज संचालित होथे।

छत्तीसगढ़ ल अपन पूर्ण स्वरूप के चिन्हारी मिलय इही आसा अउ बिसवास के साथ आप सबो झन ला नवा बछर के बधाई अउ जोहार-भेंट.....

सुशील भोले 
54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811

Sunday, 27 December 2015

नवा बछर जब आथे....














नव-दुल्हिन कस सज-संवर के नवा-बछर जब आथे

जिनगी ल रसदार करे बर, नव-रस ल बरसाथे....

ठुडग़ा पेंड़ म जइसे बरसा, लाथे उल्हवा-केंवची पान
इही किसम के नवा-किरन ह जिनगी म लाथे नवा-बिहान
तब करू-कस्सा ह बिसराथे, अउ गुरतुर सबो जनाथे...
नवा-बछर जब आथे.....


सुशील भोले 
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811

Saturday, 26 December 2015

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा....














नया वर्ष हो, नया हर्ष हो, नव प्रभात का नव उजियारा
कलुषित भेदभाव मिटे, हरो मनुज मन का अँधियारा
नव वर्ष की स्वर्ण रश्मियों से प्रफुल्लित हो गगन-धरा
नवल दृष्टि पाये जग सारा, स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मो. नं. 080853-05931, 098269-92811