लोककला के मान बढाइस हमर छत्तीसगढ़ के
सिरतो संगी ये तो हावय गुरतुर सबले बढ़के
महासिंग के मयारुक नोनी प्रेम के जिनगी-संगी
अपनेच रद्दा रेंगावत हे पुरवी ल सुघ्घर गढ़ के
सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मोबा. नं. 8085305931, 9826992811
देश चलत हे राज चलत हे, चलत हे विधान
बाबा दिए हे हमला अइसे चुनके जी संविधान
नइहे कोनो छोटे-बड़े सबके अधिकार बरोबर
रहिथें मिलके अइसे जइसे सब बदे हें मितान
आँधी का रूप दिखाकर क्यों शांत हो गये पवन तेरे ठहाकों से गूंज रहा है, अब भी धरा-गगन काम अभी भी कई शेष हैं जो तुमने प्रारंभ किए छत्तीसगढ़ियों के सपनों को कुछ-कुछ पूर्ण किए उन्हें पूर्ण करने का हम तो, अब देते हैं वचन यही हमारी श्रद्धांजलि है, शत-शत तुम्हें नमन * सुशील भोले *
प्रेम भी उतना पावन है, जितना मंदिर में पूजा
रंग जाये जो इस रंग में, चढ़े न उस पर दूजा
राधा मीरा गोपियाँ सारी, सब थीं प्रेम दीवानी
हृदय-भाव को उनके, कब किसी ने है बूझा
*सुशील भोले*