Monday, 20 February 2017

सुशील भोले जछपा के मीडिया प्रभारी बने



रायपुर। जय छत्तीसगढ़ पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष अरविंद नेताम ने साहित्यकार, पत्रकार एवं संस्कृति मर्मज्ञ सुशील भोले को पार्टी का मीडिया प्रभारी नियुक्त किया है।

जछपा के केन्द्रीय सचिव दिलीप चन्द्राकर ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी उपाध्यक्ष सोहन पोटाई, टीकाराम साहू, ललित चन्नाहू, विष्णु बघेल, दाऊ आनंद कुमार, राजेन्द्र चंद्राकर एवं विनोद नागवंशी ने श्री भोले को बधाई दते हुए आशा व्यक्त की है कि मीडिया प्रभारी के पद पर श्री भोले की नियुक्ति से छत्तीसगढिय़ावाद और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए हमारे संघर्ष को एक नई दिशा मिलेगी।

राजिम के संत समागम में छत्तीसगढिय़ा संतों की उपेक्षा....

रायपुर। जय छत्तीसगढ़ पार्टी के मीडिया प्रभारी सुशील भोले ने राजिम के काल्पनिक कुंभ में आयोजित किए जाने वाले संत समागम में छत्तीसगढिय़ा मूल के संतों की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार यहां के मूल धर्म और सांस्कृतिक पहचान को समाप्त कर उसके ऊपर बाहरी धार्मिक प्रतीकों को थोपने का लगातार प्रयास कर रही है।

सुशील भोले ने प्रेस को जारी वक्तव्य में कहा है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति मेला-मड़ई की संस्कृति है, लेकिन यहां के गैर छत्तीसगढिय़ा मूल के धर्मस्व मंत्री को शायद इस बात का ज्ञान नहीं है। इसीलिए वे यहां की मूल धार्मिक पहचान को समाप्त कर उसके ऊपर बाहरी धार्मिक प्रतीकों को थोपने षडयंत्र कर रहे हैं। राजिम में पारंपरिक रूप से भरने वाला मेला यहां की संस्कृति के मूलाधार भगवान कुलेश्वर महादेव के नाम पर भरता था। लेकिन जब से यहां कुंभ के नाम पर पाखण्ड किया जा रहा है, तब से इस मूल धार्मिक पहचान को समाप्त कर इसे राजिव लोचन के नाम पर भरने वाला कुंभ कर दिया गया है। उन्होंने प्रश्न किया है, क्या महाशिवरात्रि के अवसर पर भरने वाला मेला महादेव की बजाय किसी अन्य के नाम पर भरा जाता रहा होगा?

सुशील भोले ने कहा, हम मेला को वृहद रूप दिए जाने का स्वागत करते हैं, लेकिन उसकी मूल पहचान और स्थानीय संतों की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को किराए में लाकर यहां थोपने की घोर निंदा करते हैं। छत्तीसगढ़ की मेला-मड़ई की संस्कृति के संवाहक यहां के मूल निवासी वर्ग के संत और धार्मिक जन रहे हैं, लेकिन इन्हें ही अब इस आयोजन से बेदखल कर दिया गया है।

सुशील भोले ने आउट सोर्सिंग के चौपाये पर बैठी भाजपा सरकार से प्रश्न किया है, यहां आयोजित होने वाले काल्पनिक कुंभ के संत समागम में गोंडी धर्मावलंबी संतों, सतनाम धर्मावलंबी संतों, रमरमिहा धर्मावलंबी संतों, बुद्ध और कबीर धर्मावलंबी संतों को क्यों आमंत्रित नहीं किया जाता? जबकि यही लोग यहां की संस्कृति और परंपरा के संवाहक रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यहां के मूल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचानों की हत्या करने से बाज आएं अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
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* सुशील भोले
मीडिया प्रभारी, जय छत्तीसगढ़ पार्टी
मो. नं. 98269 92811

Wednesday, 18 January 2017

मया होगे हे एक जोगिन संग....














मया होगे हे एक जोगिन संग कइसे बितही जिनगी
बिच्छल पेंड़वा अउ डारा हे, जेमा बइठे हे वो फुनगी
कइसे चढ़बे सरग निसैनी, थेगहा तो कुछू के नइए
बस चकवा सहीं बीत जाही का ए जिनगी के खनगी

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811

Tuesday, 17 January 2017

जे समाज के मुखिया अउ ....

जे समाज के मुखिया अउ बुद्धिजीवी हो जाथें दलाल
वो समाज के हो जाथे तब तो फेर निच्चट बाराहाल
भोगथें गुलामी अइसन मन, इंकर संग म पूरा राज
जइसे छत्तीसगढ़िया होगें हें आज अपनेच घर बेहाल

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811

Thursday, 12 January 2017

माघ महीना आगे हे संगी....










माघ महीना आगे हे संगी आमा म लगगे मउर
अमरइया म आके कोइली देख छेड़ दिए हे सुर
मन कुलकत हे भाग जही अब तो दिन जाड़ के
अबड़ दंदोरत रिहिसे, जे आंखी-मुंह ल फार के

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811

Monday, 9 January 2017

छेरछेरा...



छत्तीसगढ़ में पौस माह की पूर्णिमा तिथि को *छेरछेरा* का जो पर्व मनाया जाता है, वह भगवान शिव द्वारा पार्वती के घर जाकर भिक्षा मांगने के प्रतीक स्वरूप मनाया जाने वाला पर्व है।

आप सभी को यह ज्ञात है कि पार्वती से विवाह पूर्व भोलेनाथ ने कई किस्म की परीक्षाएं ली थीं। उनमें एक परीक्षा यह भी थी कि वे नट बनकर नाचते-गाते पार्वती के निवास पर भिक्षा मांगने गये थे, और स्वयं ही अपनी (शिव की) निंदा करने लगे थे, ताकि पार्वती उनसे (शिव से) विवाह करने के लिए इंकार कर दें।

छत्तीसगढ़ में जो छेरछेरा का पर्व मनाया जाता है, उसमें भी लोग नट बनकर नाचते-गाते हुए भिक्षा मांगने के लिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के मैदानी भागों में तो अब नट बनकर (विभिन्न प्रकार के स्वांग रचकर) नाचते-गाते हुए भिक्षा मांगने जाने का चलन कम हो गया है, लेकिन यहां के बस्तर क्षेत्र में अब भी यह प्रथा बहुतायत में देखी जा सकती है। वहां बिना नट बने इस दिन कोई भी व्यक्ति भिक्षाटन नहीं करता।

ज्ञात रहे इस दिन यहां के बड़े-छोटे सभी लोग भिक्षाटन करते हैं, और इसे किसी भी प्रकार से छोटी नजरों से नहीं देखा जाता, अपितु इसे पर्व के रूप में देखा और माना जाता है। और लोग बड़े उत्साह के साथ बढ़चढ़ कर दान देते हैं। इस दिन कोई भी व्य्क्ति किसी भी घर से खाली हाथ नहीं जाता। लोग आपस में ही दान लेते और देते हैं।

इस छेरछेरा पर्व के कारण यहां के कई गांवों में कई जनकल्याण के कार्य भी संपन्न हो जाते हैं। हम लोग जब मिडिल स्कूल में पढ़ते थे, तब हमारे गुरूजी पूरे स्कूल के बच्चों को बैंडबाजा के साथ पूरे गांव में भिक्षाटन करवाते थे, और उससे जो धन प्राप्त होता था, उससे बच्चों के खेलने के लिए और व्यायाम से संबंधित तमाम सामग्रियां लेते थे।

मुझे स्मरण है, हमारे गांव में कलाकारों की एक टोली थी, जो इस दिन पूरे रौ में होती थी। मांदर-ढोलक और झांझ-मंजीरा लिए जब नाचते-गाते, डंडा के ताल साथ कुहकी पारते (लोकनृत्य में यह एक शैली है ताल के साथ मुंह से आवाज निकालने की इसे ही कुहकी पारना कहते हैं) यह टोली निकलती थी तो लोग उन्हें दान देने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते थे। उस टोली को अपने यहां आने का अनुरोध करते थे। छेरछेरा का असली रूप और असली मजा ऐसा ही होता था, जो अब कम ही देखने को मिलता है।

ज्ञात रहे कि छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति, जिसे मैं आदि धर्म कहता हूं वह सृष्टिकाल की संस्कृति है। युग निर्धारण की दृष्टि से कहें तो सतयुग की संस्कृति है, जिसे उसके मूल रूप में लोगों को समझाने के लिए हमें फिर से प्रयास करने की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ लोग यहां के मूल धर्म और संस्कृति को अन्य प्रदेशों से लाये गये ग्रंथों और संस्कृति के साथ घालमेल कर लिखने और हमारी मूल पहचान को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

मित्रों, सतयुग की यह गौरवशाली संस्कृति आज की तारीख में केवल छत्तीसगढ़ में ही जीवित रह गई है, उसे भी गलत-सलत व्याख्याओं के साथ जोड़कर भ्रमित किया जा रहा। मैं चाहता हूं कि मेरे इसे इसके मूल रूप में पुर्नप्रचारित करने के सद्प्रयास में आप सब सहभागी बनें...।

सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

Friday, 6 January 2017

मोर स्वतंत्रता दिवस साल म ....















मोर स्वतंत्रता दिवस साल म एके बेर आथे
जब तीजा मनाए बर वो अपन मइके जाथे
तब आजादी के गीत ह संगी गजब के सुहाथे
करमा-ददरिया के धुन म मन-अंतस ह गाथे

* सुशील भोले
मो. 98269 92811, 80853 059315