मौन के मारे मर जाथे जी कतकों निरलज मनखे
हे अतेक ताकत एमा चाहे वो राहय कतकों तनके
एकरे सेती गुनिक जन मन एकरे सीख सिखाथें
चटर-पटर लपराही गोठ ले बांचे के रद्दा धराथें
धरम भूमि म आए हौ त करम के कोठी भरना परही
उप्पर वाला जिनगी देहे फेर खुद वोला गढना परही
भाग के रेखा तो मारग ए जेमा चलना अपने ल परथे
इही सफलता के मंत्र ए तभे दिया के अंजोर बगरथे