Monday, 17 December 2018

राजभाखा बनाम जोक्कड़ आयोग के बदलही का भाग....?

राजभाखा बनाम जोक्कड़ आयोग के बदलही का भाग....?
नवा छत्तीसगढ़ राज बने के बाद इहां के भाखा, इहां के संस्कृति अउ  जम्मो चिन्हारी के आरुग अउ अलग रूप दिखही अइसे भाखा-साहित्य अउ कला-संस्कृति संग जुड़े लोगन ल भारी भरोसा रिहिसे, फेर पहिली अउ ओकर पाछू के दुसरइया सरकार के कारज ल देख के ए भरोसा आंसू ढारे बर धर लिए रिहिसे।
दूसरइया सरकार तो "छत्तीसगढ़ राजभासा आयोग" गठन कर के थोक-बहुत उछल-कूद घलोक करे के उदिम करत रिहिसे, फेर जेन मनखे के खांध म एकर बोझा ल बोहाय गे रिहीस हे, तेने ह उजबक किसम के मतवार होगे रिहीसे। एकरे सेती ए आयोग ह राजभाखा के बदला जोक्कड़ आयोग के रूप म जादा.देखब म आवय।
भाखा बर जतका कारज होवय ओकर ले जादा हा-हा भक-भक के उदिम जादा होवय। कविता के नांव म अश्लिल चुटकिला सुनाने वाले ले एकर ले जादा उम्मीद घलो कइसे करे जातीस? फेर वाह रे सरकार अउ ओकर जम्मो खेवनहार तुंहर सोच ल काय भूत धर लिए रिहिसे, ते ओकरे भरोसा जम्मो जुवाबदारी। अध्यक्ष के पद म बइठय तेनो मन थथमराय बरोबर रेहे राहय। चापलूसी करइया मन गदगद राहंय बस, फेर जे मन सही म भाखा-साहित्य-संस्कृति बर मरथें-खपथें तेकर मन के हिरदे उहां अउ ओकर संग हमर भाखा के होवत करलई अउ दुरगति ल देख के कलप डारंय।
अब नवा सरकार शपथ ग्रहण कर के बिराजमान होगे हवय, त लोगन ल भरोसा होवत हावय के अब दूसर विभाग के जइसे भाग बदले के उम्मीद दिखत हे, ठउका वइसने भाखा, साहित्य, संस्कृति अउ इहां के इतिहास ले जुड़े विभाग मन के भाग घलो बहुरही। हमर अस्मिता के छापा जगजग ले उज्जर अउ सुघ्घर दिखही।
वइसे भी नवा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ह आरुग छत्तीसगढ़िया अउ किसान के बेटा आय, अउ एकरो ले जादा उन खुद छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन संग जुड़े रिहिन हें, ओकर अगुवाई करत रिहिन हें। तेकर सेती राज आन्दोलन ले जुड़े जम्मो किसम के भावना अउ मांग ल उन अच्छा से जानत हें। इही पाय के उंकर ले उम्मीद घलोक जादा जाग गे हवय, के उन हमर भाखा, संस्कृति अउ जम्मो अस्मिता के गौरव ल बढ़ाहीं। भाखा अउ संस्कृति के क्षेत्र म चापलूसी अउ दलाली के खेल खेलने वाला.मन के षडयंत्र-जाल ले एला उबारहीं, अउ सही मायने  म अलग राज बने के सपना ल साकार करहीं। हमर पुरखा मन जे उद्देश्य ल ले के अलग राज के सपना देखिन, ओकर खातिर आन्दोलन चलाईन, वोला पूरा करहीं।
जय छत्तीसगढ़.. जय छत्तीसगढ़ी...
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826993811

Thursday, 13 December 2018

नवा मुखिया के नवा कारज.....

नवा मुखिया के नवा कारज अब दिखय चारों ओर
घोषणा-पत्र झन बन के राहय केवल चुनावी सोर
मजदूर-किसान महिला-जवान होवंय सब खुशहाल
मध्यम वर्गीय अउ छोटे बैपारी घलो झन राहय बेहाल
हमर भाखा-कला अस्मिता के दिनों-दिन होय बढ़वार
चोर-उचक्का भ्रष्टाचारी मन झन बनय इहां रखवार
मेला-मड़ई के संस्कृति के अब दिखय आरुग रूप
फर्जी कुंभ के नांव म झन बिगड़य इंकर सरूप
झन बिगड़य इंकर सरूप, बाहरी बिलई झन खाय खीर
राष्ट्रीयता के नांव म स्थानीय मन के झन बाढ़य अब पीर
-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान रायपुर
मो. 9826992811

Wednesday, 12 December 2018

सत्ता के हाल-चाल बदलगे....

साल बदलगे हाल बदलगे कतकों के सुर-ताल बदलगे
कथनी-करनी के तउलई म कतकों झन के चाल बदलगे
हित-पिरित के गिनती म मीत-हितवा के मोहजाल बदलगे
अइसे आइस नवा बयार के सत्ता के हाल-चाल बदलगे
-सुशील भोले-9826992811
संजय नगर, रायपुर

Tuesday, 11 December 2018

अपन-बिरान के पहचान...

बीपत के बेरा होथे अपन-बिरान के पहचान
ठउका कहें हें हमर पुरखा, गुनिक-सुजान
जिंकर बर कभू हम रात-दिन एक कर देवन
नइ झांके आइन कभू जेकर बर जी दे-देवन
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

Monday, 10 December 2018

कोनो बनय मंत्री-संत्री....

ककरो मुड़ म पागा खपय हमला का करना हे
कोनो बनय मंत्री-संत्री हमला तो नइ धरना हे
हमर बुता तो सिरिफ एक हे एके कारज करना हे
हमर अस्मिता के बढ़वारी होय इही चेत करना हे
-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान रायपुर
मो. 9826992811

शरद की वह रातशरद की वह रात...... शरद ऋतु के आगमन के साथ ही मौसम में ठंड का हल्का सा अहसास होने लगा था। रात के आठ बज चुके थे, चांद दुधिया रोशनी लिए आसमान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था। आमदी नगर, भिलाई के "अगासदिया परिसर" में छत्तीसगढ़ के लोकप्रसिद्ध कलाकार और शब्दभेदी बाण के संधानकर्ता रहे, स्व. कोदूराम जी वर्मा की स्मृति में आयोजित "शरदोत्सव" कार्यक्रम अपने पूरे शबाब पर था। इसी बीच कार्यक्रम के संयोजक अंचल के सुविख्यात कथाकार डा. परदेशी राम वर्मा जी माइक पर आकर मुझे कविता पाठ के लिए आमंत्रित किए। शरद पूर्णिमा को महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी होती है, इसलिए मैंने छत्तीसगढ़ के तुरतुरिया में उनके आश्रम होने की बात बताकर, उनके दुनिया के प्रथम कवि होने का स्मरण करा कर उनके दर्द से निकली कविता को आगे बढ़ाने का प्रयास इन पंक्तियों से किया -"जब-जब पांवों में कोई कहीं कांटा बन चुभ जाता है, दर्द कहीं भी होता हो गीत मेरा बन जाता है।" गीत के समाप्त होते ही तालियों की गड़गड़ाहट मेरे कानों में सुनाई दी। स्टेज से उतरकर मैं नीचे जाने का प्रयास करने लगा, पर अपनी जगह से हिल नहीं पाया, वहीं पर गिरने लगा। तब कुछ लोग आगे बढ़कर मुझे सम्हाले और स्टेज से नीचे लाए। कुर्सी पर बिठाने का प्रयास किए, लेकिन मैं बैठ नहीं पाया, तब पास के कक्ष में ले जाकर मुझे जमीन पर लिटाया गया। कुछ लोगों ने मुझसे प्रश्न किया- क्या पहले भी ऐसा हो चुका है? मैंने नहीं कहा। मेरी जुबान लड़खड़ाने लगी थी, तभी किसी के कहने की आवाज मेरे कानों में गूंजी -"जा इसे तो पैरालिसिस हो गया।" गत वर्ष यह शरद पूर्णिमा 24 अक्टूबर को आई थी, अब के 13 अक्टूबर को है। लगभग एक वर्ष पूरा होने को है, तब से लेकर आज तक मैं एक बिस्तर पर ही हूँ। हां, इस बीच इतना अवश्य हुआ कि हजारों मित्र और रिश्तेदार मुझे देखने के लिए आते रहे, अपनी दुआएं और शुभकामनाएं व्यक्त करते रहे, उन्हीं दुआओं के परिणाम स्वरूप अब तक मैं करीब 70 प्रतिशत तक स्वस्थ हो गया हूँ। एकाद लकड़ी का सहारा लेकर थोड़ा बहुत चलफिर लेता हूँ। लेकिन पूर्ण स्वस्थ होने में अभी भी आप लोगों की दुआओं की आवश्यकता है। शुभेच्छु सुशील भोले