Friday, 18 June 2021

लइकई के खेल.. सुरता..

सुरता//
लइकई के खेल
  जिनगी के संझौती बेरा म पाछू डहर झांक के देखथौं, त सबले जादा सुरता अपन लइकई के आथे. कतका गुरतुर अउ निक रहिसे. न कुछु काम-बुता के चिंता न कुछु अउ के फिकर. बस खावव, पियव अउ नंगत ले खेलव. नदी- पहाड़, घाम- छांव, रेस- टीप, पिट्ठूल, बांटी, भौंरा, डंडा- पचरंगा, केऊं- मेऊं, गिल्ली- डंडा, भटकउल अउ आनी-बानी के खेल. अपन लइकई के छापा ल आज के लइका मन म खोजे के मन करथे, त कभू नइ जनावय, के वइसन दिन फेर कभू देखे म आ पाही? तब ए डांड़ अंतस ले निकल परिस-
तैं कहाँ गंवा गेस मोर लइकई के हांसी
सुरता कर देथे मोला अब तोर रोवासी...

कन्हैया कस महूं ह फुदुर-फुदुर रेंगव
मंद पिये कस कभू भदरस ले गिरंव
महतारी ह धरा-रपटा उठावय
ठउका कूदे हस कहिके हंसावय
फेर पलथिया के झड़कंव मैं बासी...

थोरके बाढ़ते फेर फुतकी म खेलन
पावडर कस देंह भर उही ल चुपरन
घर-घुंदिया कभू ते सगा-पहुना खेलन
गुठलू ल फोर के चिरौंजी ल रांधन
घानीमुंदी किंजरत फेर आवय मतासी...

पीपर छइहां म इब्भा हम खेलन
कभू-कभू बांटी अउ भौंरा रट्ठोवन
डंडा-पचरंगा ते कभू खेलन खुडवा
कभू-कभू गम्मत कस बनन हम बुढ़वा
ये सब उछाह ल आज लगगे फांसी...
    सिरतोन आय, वो उछाह न आज हमर मन म दिखय, न आज के लइका मन म. समय के संग जम्मो परंपरा अउ जिनगी जीए के साधन अउ तरीका घलो बदलत जावत हे. अब के लइका मन वैज्ञानिक आविष्कार के मोहजाल म अभरगे हें. सूत के उठे ले सोवा के परत ले. एकरे सेती आज के लइका मन म पहिली कस तंदुरुस्ती घलो देखे म नइ आवय.
   पहिली लइकई ले लेके सियानी तक किसम-किसम के खेल. तिहार-बार म खेल, अलग- अलग मौसम म अलग- अलग खेल. गीत गावत जीवन दर्शन के खेल. आज ए सबला गुनबे त अपन परंपरा ऊपर गरब होथे. हमन तो वइसे घलो चारों मुड़ा के लोक परंपरा के संरक्षण संवर्धन म लगे रहिथन. फेर मोला लागथे लोक खेल के दिशा म ए ह अउ जादा जरूरी हे. अभी ए बुता म हमर साहित्यकार संगी चंद्रशेखर चकोर ह बनेच भीड़े हे. तीस बछर असन होगे वोला ए उदिम म.
  चकोर के ए रद्दा उदिम नवा लइका मन बर प्रेरणा दे के लाइक हे. जब ए 21 बछर के रहिस तब एकर मन म गिल्ली डंडा ल प्रतियोगिता के रूप म आयोजित करे के चेत आइस. नवा सुम्मत नांव के एक समिति बनाइस अउ गाँव के लइका मनला जोर सकेल के एकर तैयारी म भीड़गे.
    छेरछेरा हमर छत्तीसगढ़ के 'दानी' परब आय. तब ए परब ह 11.1.1990 के अभरे रिहिसे, जे हा एक ऐतिहासिक तिथि के रूप म चिन्हारी बनगे हे.  चकोर ह अपन गृहग्राम कांदुल के लइका मन के तब 8 टोली बना के एमा भागीदारी कराए  रिहिसे. सबले मजेदार बात ए आय, के ए 'लोक खेल' के पहला आयोजन के मुख्यअतिथि मोला बनाए गे रिहिसे. तब मैं छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' के प्रकाशन-संपादन करत रेहेंव. आज ए आयोजन के पूरा प्रदेश भर म बढ़वार के संगे-संग शासकीय स्तर म घलो एला प्रोत्साहित करत देख के गरब होथे, के जेन नान्हे पौधा के बीजारोपण म एको खोंची पानी रितोए के जस मोरो हाथ ले होगे रिहिसे, तेन आज कतका विशाल छायादार रूख के रूप धर लिए हे.
   चंद्रशेखर ह गिल्ली डंडा के संगे-संग अउ अबड़ अकन खेल मनला अपन ए आयोजन संग जोड़त चले लागिस, तेकर सेती आज ए एक पूरा लोक खेल महोत्सव के रूप धर लिए हे.
   लोक खेल के आयोजन के संगे-संग वो ह एला साहित्यिक रूप घल़ो देके उदिम करीस. "छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक खेल" के नांव ले एक शोधपूर्ण ग्रंथ के सिरजन करीस. जेमा हमर इहाँ के जम्मो किसम के खेल मनके बारे म विद्वता पूर्ण ढंग ले बताए के बुता करीस. उंकर वेबसाइट www.ritualgames.in म एला विस्तार ले पढ़े जा सकथे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Friday, 11 June 2021

संस्कृति संवाहक सुशील भोले..

*छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति के संवाहक सुशील भोले*

दोहा छंद:

आदि धर्म  संस्थान के, हवै  प्रणेता आज।
साहित सेवा जागरण,सुग्घर करथे काज।।

नाम सुशील कुमार हे,लेखक बड़ विख्यात।
रामचंद्र  शिक्षक  पिता, हवै उर्मिला मात।।

सन् इकसठ उन्नीस सौ,जन्म जुलाई मास।
सुग्घर शुभ तारीख दू,आइस ले के आस।।

नगरगाँव  पुरखा  रथे, धरसीवां के पास।
वर्तमान संजय नगर,टिकरापारा खास।।

डॉक्टर गली बघेल जी,जिला-रायपुर जान।
राज  हवै  छत्तीसगढ़, कथे  कटोरा धान।।

हवै  बसंती  श्रीमती, पत्नी बड़ गुणवान।
ममता - नेहा - वंदना, बेटी  मोर  परान।।

सबो विवाहित घर बसे,बेटा कस दामाद।
पक्का सब कर्तव्य के,घर कुरिया आबाद।।

शिक्षा :-

श्री भोले जी हा हायर सेकेन्ड्री पास करिन अउ संग मा आई.टी.आई. डिप्लोमा घलो प्राप्त करिन हे।

इँखर प्रकाशित किताब-
1. छितका कुरिया (काव्य  संकलन) 
2. दरस के साध (लम्बा कविता)
3. जिनगी के रंग (गीत अउ भजन संकलन)
4. ढेंकी (कहानी संकलन)
5. आखर अंजोर (छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति उपर आधारित लेख मन के संकलन)
6. भोले के गोले (व्यंग्य संकलन)
7. सब ओखरे संतान (चारगोडि़या मन के संकलन)
8. सुरता के बादर (संस्मरण मन के संकलन)

समाचार अउ पत्रिका लेखन -
1. तरकश अउ तीर (दैनिक नवभास्कर सन-1990)
2. आखर अँजोर (दैनिक तरूण छत्ती‍सगढ़ 2006-07)
3. डहर चलती (दैनिक अमृत संदेश- 2009)
4. गुड़ी के गोठ (साप्ताहिक इतवारी अखबार 2010 से 2015)
5. बेंदरा बिनास (साप्ताहिक छत्तीसगढ़ सेवक 1988-89)
6. किस्सा कलयुगी हनुमान के (मासिक मयारू माटी 1988-89)

अउ अन्य लेखन -
1.देश अउ प्रदेश स्तर के कतको पत्र-पत्रिका मा लेख, कविता, कहानी, समीक्षा, साक्षात्कार आदि मन के सरलग रूप ले प्रकाशन।
2. ‘लहर’ एवं ‘फूलबगिया’ ऑडियो कैसेट मा गीत लेखन एवं गायन घलो करिन।
3. कतको सांस्कृतिक मंच द्वारा गीत अउ भजन गायन करिन।

सम्मान मिलिस-
1. छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के द्वारा सन् 2010 मा ‘भाषा सम्मान’ सहित कतको साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ सामाजिक संगठन मन के द्वारा सम्मान मिलिस।

संपादन अउ प्रकाशन-
1. मयारु माटी (छत्तीसगढ़ी भाषा के पहिली संपूर्ण मासिक पत्रिका)

सह संपादन-
1. दैनिक अग्रदूत
2. दैनिक तरूण छत्तीगढ़
3. दैनिक अमृत संदेश
4. दैनिक छत्तीसगढ़ ‘इतवारी अखवार’
5. जय छत्तीसगढ़ अस्मिता (मासिक)
6. कतको साहित्यिक अउ सामाजिक पत्र-पत्रिका मा संपादन।

खास बात-
1. छत्तीसगढ़ के मूल आदि धर्म अउ संस्कृति खातिर विशेष रूप ले लेखन, वाचन, प्रकाशन अउ जमीनी स्तर मा पुनर्स्थापना खातिर कार्यरत। एखर बर सन 1994 ले 2008 तक (लगभग 14 बछर) साहित्य, संस्कृति कला अउ गृहस्थ जीवन से अलग रहिके विशेष आध्यात्मिक साधना  ले आत्मज्ञान प्राप्त करिस।

2. गुजरात के राजधानी अहमदाबाद मा 8 अक्टूबर 2017 के भारत सरकार के साहित्य अकादमी डहर ले गुजराती अउ छत्तीसगढ़ी साहित्य के आयोजन करे गे रहिस जेमा श्री भोले जी घलो प्रतिभागी के रूप मा कवितापाठ करिस हे। छत्तीसगढ़ी के अउ प्रतिभागी मा डॉ. केशरीलाल वर्मा, डॉ. परदेशी राम वर्मा, रामनाथ साहू अउ मीर अली मीर जी मन घलो प्रतिभागी बनिस।

वर्तमान मा-
24 अक्टबूर 2018 से लकवा रोग मा पीडि़त होय के कारण श्री भोले जी हा घर मा ही रहिके साहित्य साधना करत हवै।

प्रेरणा मिलिस-
पिताजी स्व. श्री रामचंद्र वर्मा,जेखर द्वारा लिखित प्राथमिक हिन्दी  व्याकरण अउ रचना (प्रकाशक- अनुपम प्रकाशन, रायपुर) सँघरा मध्यप्रदेश के बखत कक्षा तीसरी, चौथी अउ पाँचवीं मा पाठ्य पुस्तक के रूप मा चलत रिहिस, एखर ले प्रेरित होके लेखन के क्षेत्र मा श्री भोले जी आगू आइस

भोले जी के मन पसंद लेखक- 
अध्यात्म मा – कबीर दास जी
अंतर्राष्ट्रीय मा – गोर्की
राष्ट्रीय मा – मुंशी प्रेमचंद
स्थानीय मा – लोक जीवन अउ जन चेतना ले जुड़े प्राय: जम्मों लेखक अउ कवि।

श्री भोले जी के इच्छा-

छत्तीसगढ़ के मूल आदि धर्म अउ संस्कृति के मापदंड मा इहाँ के सांस्कृतिक-इतिहास के पुर्नलेखन होना चाही। काबर कि अभी तक इहाँ के बारे मा जउन भी लिखे गे हे, या लिखे जावत हे, वो उत्तर भारत ले आए ग्रंथ मन के मापदंड मा लिखे जावत हे। एखर सेती ये किसम के कोनो भी ग्रंथ ला छत्तीसगढ़ के धर्म, संस्कृति अउ इतिहास के संदर्भ मा मानक नइ माने जा सकय। एखर सेती आवश्यक हे कि छत्तीसगढ़ के संस्कृति ला, धर्म या इतिहास के संदर्भ मा लिखे जाना चाही।

पारिवारिक स्थिति-

श्री भोले जी के पिताजी स्व. श्री रामचंद्र वर्मा प्राथमिक शाला मा शिक्षक रिहिस हे, एखर सेती निम्न-मध्यम वर्गीय परिवेश मा पालन-पोषण होइस। अभी घलो आर्थिक रूप ले लगभग इही स्थिति हवै। एखर पहिली सन् 1994 ले 2008 तक के आध्यात्मिक साधना काल मा सबो प्रकार के आर्थोपार्जन के कारज ले अलग रहे के कारन बहुत ही गरीबी के सामना करे बर परिस, जेखर असर लइका मन  के भरण-पोषण ऊपर घलो परिस।श्री भोले जी के पिताजी के पास मा पुरखा गाँव नगरगाँव मा पुरखा के संपत्ति के रूप मा एक कच्चा मकान, खलिहान अउ लगभग दू एकड़ खेत रिहिस। फेर इँखर चार भाई के बीच बँटवारा के बाद अब स्थायी संपत्ति के नाम मा श्री सुशील भोले जी के पास मा संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर स्थित एक छोटकुन मकान के अलावा अउ कुछ भी नइ हे। चार भाई अउ दू बहिनी मा श्री भोले जी दूसरा नंबर के आय। एखर ले बड़े एक अउ भाई हे- सुरेश वर्मा अउ एखर ले छोटे दू भाई मिथलेश वर्मा अउ कमलेश वर्मा हे। अइसने श्री भोले जी के दू बहिनी मा एक श्रीमती प्रभा-कृष्ण कुमार वर्मा (प्रभा के निधन हो चुके हे) अउ दूसरी श्रीमती सरोज (चित्रा)- चंद्रशेखर वर्मा हे।श्री भोले जी के तीन संतान हे, तीनोंझन लड़की हे, इँखर मन के बर बिहाव हो चुके हे।श्री भोले जी के पत्नी श्रीमती बसंती देवी वर्मा सिरिफ प्राथमिक तक पढ़े-लिखे हे,एखर सेती लेखन या पठन-पाठन के क्षेत्र मा श्री भोले जी ला कोई सहयोग नइ मिल पाइस अउ श्री भोले जी के कई महत्वपूर्ण प्रकाशन के कतरन अउ किताब आदि पत्नी के अज्ञानता के भेंट घलो चढ़ गे। खासकर वो समय जब भोले जी आध्यात्मिक साधना काल लीन रिहिस हे।

श्री भोले जी के जीवकोपार्जन-

आई.टी.आई. ले डिप्लोमा प्राप्त करे के बाद कुछ प्रेस मा कम्पोजिटर के काम करिन।  दैनिक अग्रदूत (तब वो साप्ता‍हिक रिहिस) उहाँ श्री भोले जी के साहित्यिक प्रतिभा ला देखके कम्पोजिटर ले संपादकीय विभाग मा लाय गिस। दैनिक अग्रदूत मा ही सन् 1983-84 मा श्री भोले जी के पहली कविता अउ कहानी संग्रह के प्रकाशन होइस। प्रदेश के यशस्वी व्यंग्यकार प्रो. विनोद शंकर शुक्ल जउन अग्रदूत के साहित्यिक परिशिष्ट के संपादक रिहिस, उही श्री भोले जी के रचना मन मा आवश्यक संशोधन (संपादन) करिस अउ
प्रकाशित करिस। एखर बाद फिर श्री भोले जी के लेखनी सरपट दौड़न लगिस, अउ अब तक (आध्यात्मिक साधना काल ला छोड़के) सरपट दौड़त हवै।
दैनिक अग्रदूत के बाद कुछ दिन दैनिक तरूण छत्तीसगढ़, दैनिक अमृत संदेश अउ दैनिक छत्तीसगढ़ मा सह संपादक के पद मा घलो कार्यरत रिहिस हे। बीच मा सन् 1988 ले 2005 तक स्वयं के व्यवसाय- प्रिटिंग प्रेस संचालन, मासिक पत्रिका ‘मयारू माटी’ के प्रकाशन-संपादन अउ ऑडियो कैसेट रिकार्डिंग स्टूडियो के  संचालन घलो करिस।

श्री सुशील भोले जी के वर्तमान पता-
54/191, डा. बघेल गली, संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.) मोबाइल नम्बर: 98269-92811.

आलेख:-
बोधन राम निषादराज"विनायक"
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)
मोबाइल : 9893293764

गिरौदपुरी यात्रा... सुरता

सुरता//
साहित्यकार मन के गिरौदपुरी धाम यात्रा..
    हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी म धर्म उपदेश देवत "मनखे-मनखे एक बरोबर" के जयघोष करइया गुरु घासीदास बाबा जी के जन्म भूमि, कर्म भूमि अउ तपो भूमि के दर्शन करे के अबड़ दिन के साध रिहिसे. फेर ए साध ह तब पूरा होइस, जब 2 अगस्त 2015 दिन इतवार के अखिल भारतीय गुरु घासीदास साहित्य अकादमी अउ मिनी माता फाउंडेशन द्वारा रायपुर के वरिष्ठ साहित्यकार मनला गिरौदपुरी के जन्म अउ कर्म भूमि,  तप भूमि छाता पहाड़ अउ पंचकुंड यात्रा के संगे-संग माता शबरी के धाम शिवरीनारायण के घलो एक संग दर्शन करवाए गिस.
   साहित्यकार मन के ए आध्यात्मिक यात्रा म छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त साहित्यकार डा. सुशील त्रिवेदी, सद्भावना दर्पण के संपादक साहित्यकार गिरीश पंकज, सृजन गाथा डाट काम के संपादक जयप्रकाश मानस, डा. सुधीर शर्मा, अजय किरण अवस्थी, सुशील भोले, प्रवीण गोधेजा, मुकेश वर्मा के संगे-संग यात्रा के आयोजन संस्था डहर ले डा. जे.आर. सोनी अउ रामस्वरूप टंडन जी शामिल रहिन.
    ए बात ल तो आज सबो जानत हें, वर्णव्यवस्था अउ मूर्ति पूजा के नांव म ए देश म जब भेदभाव अउ अत्याचार अपन चरम म पहुंचत गिस, तब कतकों महात्मा अउ गुरु मन पीड़ित वर्ग के उत्थान खातिर जबर अभियान चलाए रिहिन हें. ए रद्दा म गौमत बुद्ध, गुरु नानक देव ले लेके कबीर दास जी जइसे महान विचारक अउ समाज सुधारक मन सामाजिक अउ धार्मिक जागरण कर के पीड़ित वर्ग के लोगन ल आध्यात्मिक अउ सामाजिक ताकत देइन. अइसने हमर छत्तीसगढ़ राज म गुरु घासीदास जी ह सतपुरूष के उपासना करत शोषित पीड़ित अउ उपेक्षित लोगन ल एकफेंट कर के सामाजिक उत्थान के जबर बुता करे रिहिन हें.
  गुरु घासीदास जी के जनम के संबंध म जेन जानकारी मिलथे, वोमा सबले जादा प्रमाणित शासकीय तौर म लिखे गजेटियर ल माने जाथे. सन् 1993 म लिखे गे रायपुर जिला के गजेटियर के अनुसार गुरु घासीदास जी के जनम अगहन पूर्णिमा दिन सोमवार 18 दिसंबर 1756 ई. के एक कृषक परिवार म ग्राम गिरौदपुरी जिला -रायपुर (अब बलौदाबाजार) म होए रिहिसे. घासीदास जी के पूर्वज पवित्र दास जी संपन्न किसान रिहिन. पवित्र दास ले मेदिनी दास, दुकालु दास, सगुन दास, मंहगु दास अउ फेर घासीदास जी होइन. घासीदास जी के पीढ़ी ल 1756 ले 1850 तक माने गे हे. घासीदास जी के बिहाव सिरपुर निवासी किसान अंजोरी दास जी के बेटी सफुरा संग नान्हेपन म होगे रिहिसे. उंकर चार बेटा अउ एक बेटी होइन. बेटा म अमरदास, बालकदास, आगरदास अउ अड़गढ़िया दास होइन. बेटी के नांव सुभद्रा बाई रिहिस, जेकर बिहाव बिलासपुर जिला के गाँव कुटेला म होए रिहिसे.
   हमन 2 अगस्त'15 के बिहनिया 9 बजे रायपुर ले निकलेन. डा. जे.आर. सोनी जी हमन ल रस्ता म जावत खानी बतावत रिहिन हें, रायपुर ले सीधा गिरौदपुरी जाबो. पहिली जन्मभूमि के दर्शन करबो, फेर कर्मभूमि जाबो. उहाँ कुतुबमीनार ले भी ऊंचा जेन जैतखाम बने हे, वो सबला देखत फेर दुसरइया जुवर बाबा जी के तपोभूमि छाता पहाड़ जाबो तहाँ ले उहिच डहर ले बार नवापारा अभ्यारण होवत  वापिस रायपुर आ जाबो.
    हमर मन के गिरौदपुरी के पहुंचत ले मंझनिया के 12 बजगे राहय. उहाँ गेन त पता चलिस के जन्मभूमि तक बड़का गाड़ी मन नइ जा सकय, तेकर सेती रेंगत जाए बर लागही. अगस्त के महीना माने पानी-बादर के दिन. रेंगत गेन त गली म पानी रेंगे के चिनहा दिखत राहय. जन्मभूमि जगा पहुंचेन, त वोकर आगू म एक चौंरा असन बने रिहिसे, जेमा एक जैतखाम अउ एक बोर्ड गड़े रिहिसे. बोर्ड म गुरु घासीदास जन्म स्थान लिखाय रिहिसे. हमन ल लागिस के इही जन्मस्थान आय. तब सोनी जी बताइन, ए ह जन्मस्थान वाले घर के बाहरी भाग आय. एदे जेन घर दिखत हे न वोकर अंदर हे जन्मस्थान ह. काहत हमन ल घर के भीतर लेगिन. उहाँ घर के भीतर एक झन नोनी भर राहय, जे ह जेवन बनावत राहय. हमन ल उहाँ आए देखिस त वो नोनी ह बाबाजी जिहां जन्म लिए हें, वो कुरिया म लेगिस. वो छोटे असन कुरिया म एक अखंड जोत जलत रिहिस. उही जगा एक कुर्सी म सादा कपड़ा ऊपर खड़ाऊ माढ़े रिहिसे. हमन वोकर दर्शन पैलगी करेन. तहाँ ले कर्मभूमि जाए खातिर निकल गेन.
    कर्मभूमि स्थल पहुंचेन, त लागिस, कोनो बड़का तीरथ-बरत म आगे हावन. जन्मभूमि अउ कर्मभूमि स्थल के विकास म अतेक अंतर कइसे हे? त सोनी जी बताइन, जन्मभूमि के देखरेख अउ सबो व्यवस्था ल उही घर वाला मन ही बिना ककरो सहयोग के खुदे करथें. जबकि इहाँ कर्मभूमि म एक ट्रस्ट हे जेन ह एकर देखभाल अउ विकास के काम करथे. तेकर सेती दूनों जगा के विकास म अतका अंतर दिखत हे. उन कहिन, फेर हमन कोशिश करत हवन के जन्मभूमि के देखभाल घलो एकाद समिति या ट्रस्ट के माध्यम ले हो जाय, तेमा उहू स्थान के गरिमामय विकास हो सकय. (ए लेख संग संलग्न जम्मो फोटो उही दिन के खींचे आय).
    सोनी जी के मार्गदर्शन म हमन कर्मभूमि ल अच्छा से देखेन-घूमेन, बाबा जी के आशीष लेन. तब फेर नवा-नवा बने विशाल जैतखंभ देखे बर गेन. तब वोकर विधिवत उद्घाटन नइ हो पाए रिहिसे, तेकर सेती उहाँ कोनो ल जाए के अनुमति नइ रिहिसे. तब सोनी जी उहाँ के व्यवस्था देखइया मन ल बताइन के, ए मन सब रायपुर के वरिष्ठ साहित्यकार आंय, हमन इनला विशेष रूप ले इहाँ के दर्शन कराए खातिर ही लाने हावन. त फेर सिरिफ हमन ल ही विशाल जैतखंभ म जावन दिन. जैतखंभ म ऊपर चढ़े खातिर लिफ्ट तो लगे रिहिसे, फेर उद्घाटन नइ होए के सेती वो ह चलत नइ रिहिसे. त फेर हमन दर्शन करे बर आए हावन त वोकर महत्व तो रेंगत जवई म ही हे, काहत रेंगत ही पूरा ऊपर तक चढ़ेन.
   जैतखंभ के नीचे उतरत ले बनेच बेरा होगे राहय, त सोनी जी कहिथें- चलौ पहिली कोनो जगा जेवन कर लिए जाय, तेकर पाछू फेर आगू के रद्दा धरबोन. वोमन बताइन के इहाँ ले बस थोरके दुरिहा म महानदी के पुलिया हे, जेन ह बलौदाबाजार अउ जांजगीर जिला ल जोड़थे, उही जगा बढ़िया असन ढाबा हे, तिहां चलथन.
   ढाबा म जेवन करत बेरा पता चलिस के ए पुलिया के वो पार तो शिवरीनारायण हे. त डा. सुशील त्रिवेदी जी कहिन, अरे अतेक लकठा आगे हावन त चलौ शबरी माता के ठउर के घलो दर्शन कर लेथन.
     सबो झन हां म हां मिलाएन तहां ले शिवरीनारायण चल दिएन. उंहो बने देखेन किंदरेन. मैं पहिली घलो उहाँ गे रेहेंव, फेर मंदिर के भीतर गर्भगृह म नइ जा पाए रेहेंव. इहू बखत जब हमन उहाँ गेन त उहाँ के पुजारी मन गर्भगृह के भीतर जाए के कोनो ल अनुमति नइहे किहिस. फेर जब उनला बताए गिस के एमन सब रायपुर के साहित्यकार आंय, संग म छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे डा. सुशील त्रिवेदी जी घलो संग म हें, त फेर मुख्य पुजारी ह खुदे हमन ल भीतर लेगिस. उहाँ पहिली बार देखे बर मिलिस के भगवान शिवरीनारायण के पांव के नीचे म जलधारा प्रवाहित हे. पुजारी बताइस, के ए ह महानदी आय भगवान के चरण पखारे खातिर ए जगा स्वयं प्रकट होए हे.
   बेरा बनेच होए ले धर ले रिहिसे. सोनी जी कहिन के जल्दी चले बर लागही, काबर ते बाबा जी के तपोभूमि छाता पहाड़ ह बनेच दुरिहा हे. फेर उहाँ आप सबो साहित्यकार मन के आज के यात्रा अउ बाबा घासीदास जी के संबंध म वक्तव्य घलो लेना हे. असल म हमर मनके ए पूरा यात्रा के मिनीमाता फाउंडेशन द्वारा विडियो रिकार्डिंग करे जावत रिहिसे.
   हमन ल छाता पहाड़ के पहुंचत ले बनेच बेरा होगे रिहिसे, तभो बेरा बूड़े बर अभी बहुत जुवर बांचे रिहिसे. सोनाखान क्षेत्र के अंतर्गत अवइया ए ठउर म हमन ल आत्मिक शांति के अद्भुत अहसास होइस. छाता पहाड़ के दर्शन परिक्रमा करे के पाछू हमन वो पांच कुंड मनला देखे बर गेन, जेकर जल ल देके बाबाजी ह शारीरिक मानसिक असाध्य रोग ले ग्रसित लोगन ल उंकर ले मुक्ति देवावत रिहन हें.
  मुंधियार होए असन होए ले धरिस, तब उही जगा के चातर जगा म हमन ल बइठार  के वो दिन के यात्रा अउ अनुभव के वक्तव्य रामशरण टंडन जी एंकर के रूप म लिन. सबो झन अपन- अपन अनुभव के बात बताइन. महूं अपन बात राखेंव, संग म मिनीमाता अउ छत्तीसगढ़ महतारी के बीच सामंजस्य स्थापित करत अपन एक गीत घलो सुनाएंव-
मोतियन चंउक पुराएंव जोहार दाई
डेहरी म दीया ल जलाएंव जोहार दाई
छत्तीसगढ़ महतारी परघाए बर
अंगना म आसन बिछाएंव...
   ए गाना ल सुने के बाद डा. त्रिवेदी जी मोला कहिन- सुशील आज के तो तैं ह मंच ल लूट लिए रे.
   दिन बुड़े ले धर ले रिहिसे तइसने हमन रायपुर वापसी खातिर निकलेन. आवत- आवत मन म ए चार लाईन गूंजे लागिस-
गुरु बाबा के कहना हे- मनखे-मनखे एक समान
सतमारग अउ सत बानी ले ही आही नवा बिहान
सब सिरजे हें एक जोति ले इहीच हमर पहचान
ऊंच नीच के भेद करत करथौ कइसे फेर अभिमान
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Wednesday, 9 June 2021

खुमान साव... सुरता

सुरता//
छत्तीसगढ़ी गीत म मंदरस कस संगीत घोरइया खुमान साव
   छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत ल मंदरस कस मीठ बना के जन-जन के कंठ म बिराजे के जब कभू भी गोठ होही त स्व. खुमान लाल साव जी के नांव अगुवा के रूप म सुरता करे जाही. मोर उंकर संग पहिली बेर भेंट सन् 1988 म तब होए रिहिसे, जब मैं छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' के प्रकाशन-संपादन करत रेहेंव. उही बखत एक दिन 'चंदैनी गोंदा' के सर्जक दाऊ रामचंद्र देशमुख जी संग भेंट करे खातिर बघेरा गे रेहेंव, त दाऊजी बताइन, अवइया शनिच्चर के भिलाई पावरहाउस तीर 'चंदैनी गोंदा' के कार्यक्रम हे, तहूं वोला देखे बर आ जाबे.
   मोला आश्चर्य लगिस. काबर ते दाऊजी तब तक तो 'चंदैनी गोंदा' के विसर्जन कर के 'कारी' के मंचन म सक्रिय होगे रिहिन हें, तब भला चंदैनी गोंदा फेर कहाँ ले आगे? तब वोमन बताइन, चंदैनी गोंदा के संगीतकार रहे खुमान साव अभी घलो एला अपन अनुसार से चलावत हें, उही कार्यक्रम म उहाँ मोर सम्मान राखे हावय, तेकर सेती जाहूं. तब मैं अउ चंद्रशेखर चकोर उहाँ गे रेहेन, तब दाऊजी ह उंकर संग हमर मन के चिन्हारी करवाए रिहिन हें. फेर मोर उंकर संग सबले जादा घनिष्ठ संबंध तब बनिस जब मैं प्रेस लाईन के बुता ल कुछ बेरा तक छोड़ के 'छत्तीसगढ़ रिकार्डिंग स्टूडियो' के संचालन करत रेहेंव. सन् 1994 ले लेके 2006 तक. इही ये बेरा ह मोर साधना काल के घलो बेरा आय. तब मोर सुतना बसना सब स्टूडियो म ही होवय.
   खुमान साव जी एक- दू पइत तो हमर इहाँ रिकार्डिंग करवाए के बुता खातिर आए रिहिन हें. फेर मोर संग बइठ के साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ आध्यात्मिक चर्चा खातिर जादा आवंय. उन कहंय, सुशील तोर जगा आथंव न, त मोला एक अलगेच किसम के सुख के अनुभव होथे. काबर तैं ह साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ पत्रकारिता ले जुड़े के संगे-संग आध्यात्मिक मनखे घलो अस. तैं इहाँ के मूल संस्कृति के जेन बात बताथस न, ए ह हम कभू नइ सुने राहन तइसनो होथे. ए सबके एकाद किताब छपवाना, तेमा तोला ए साधना म ज्ञान मिले हे, तेन ह अवइया पीढ़ी खातिर घलो सुरक्षित रहि जावय. आगू चलके अइसने पुरोधा मन के सलाह अउ आशीष ले वो बखत पाए ज्ञान के आधार म  'आखर अंजोर' के प्रकाशन होइस.
   खुमान साव जी के जनम 5 सितम्बर 1929 के खुर्सीटिकुल, ब्लॉक डोंगरगांव, जिला राजनांदगाँव के दाऊ टीकमनाथ साव जी के संतान  के रूप म होए रिहिसे. उनला अपन परिवारेच म संगीत के माहौल मिलिस. उंकर सियान टीकमनाथ जी खुदे हारमोनियम बजावंय. तब लइका खुमान घरे म हारमोनियम बजाए के उदिम करे लागिस. उंकर बड़े दाई के बेटा अउ हमर इहाँ के नाचा के पुरोधा दाऊ मंदराजी घलो उनला हारमोनियम बजाए खातिर प्रोत्साहित करंय. लइका खुमान 13 बछर के उमर म बसंतपुर के नाचा कलाकार मन संग खड़े साज म पहिली बेर हारमोनियम बजाइस. मंदराजी के रवेली नाचा पार्टी म उन 14 बछर के उमर म शामिल होइन.
   उन 1950-51 म राजनांदगाँव म आर्केस्ट्रा पार्टी घलो चलाइन. छत्तीसगढ़ के संगे-संग महाराष्ट्र अउ मध्यप्रदेश के कतकों शहर म उंकर सफल कार्यक्रम होइस. वोमन 1952 म 'सरस्वती कला मंडल' के गठन करिन. संगीत म कुछ ठोसहा करे के चाह म वोमन भैयालाल हेड़ाऊ, गिरिजा सिन्हा, रामनाथ सोनी आदि संग मिलके सन् 1960 म 'शिक्षक सांस्कृतिक मंडल' के गठन करिन. म्युनिसिपल स्कूल राजनांदगाँव म करीब 30 बछर तक उंकर संगीत निर्देशन म उहाँ के लइका मन प्रतियोगिता मन म परचम लहराइन. तब वोमन राजनांदगाँव म राहत रिहिन, तहां ले सोमनी तीर के गाँव ठेकवा म बस गिन.
   गोठबात म वोमन बतावंय. 1952 म पिनकापार (बालोद) निवासी दाऊ रामचंद्र देशमुख (बाद म दाऊ जी बघेरा म आगे रिहिन) के बलावा म मड़ई के अवसर म आयोजित नाचा म हारमोनियम बजाए बर गिन. दू बछर पिनकापार के मड़ई म हारमोनियम बजाए के ए असर होइस के रवेली अउ रिंगनी नाचा पार्टी वाले मन एकमई होगे. तब उंकर संगीत निर्देशन म 1971 म आकाशवाणी रायपुर म भैयालाल हेड़ाऊ आदि के स्वर म उंकर गीत के रिकार्डिंग होइस. उही गीत मनला आकाशवाणी ले सुनके दाऊ रामचंद्र देशमुख जी खुमान साव जी ल बघेरा बलाइन. देशमुख जी वो बखत छत्तीसगढ़ के कलाकार मनला खोजे अउ उनला मांजे के कारज करत रिहिन हें. वोमा खुमान साव जी ल हारमोनियम वादक के रूप म शामिल कर लिन. एकर पाछू फेर 7 नवंबर 1971 के दिन छत्तीसगढ़ के धरती म "चंदैनी गोंदा" के प्रथम मंचन के साथ सांस्कृतिक जागरण के जोत जलिस. तहाँ ले पूरा छत्तीसगढ़ म खुमान साव के संगीत के सोर गूंजे लागिस.
    खुमान साव जी इहाँ के पारंपरिक गीत-संगीत के संरक्षण खातिर बहुत गुनंय अउ कारज घलो करंय. उन बतावंय (ए बात ल मोला लक्ष्मण मस्तुरिया घलो बतावंय), हमन पूरा छत्तीसगढ़ के गाँव गाँव म टेप रिकॉर्डर धर के किंजरन अउ कलाकार मन जगा जाके  वोमन ल गीत गाए बर काहन, तहाँ ले उनला रिकार्डिंग कर लेवन. तहांले उही गीत मनला थोड़ा बहुत सुधार के परिमार्जित कर के आज जेन सुनत हव, तेन रूप म बनावन.
   खुमान साव जी आज छत्तीसगढ़ी के नांव जेन किसम के गीत अउ खासकर के पद्य लिखे जावत हे, तेला भावत नइ रिहिन हें. उन काहंय हमर पारंपरिक शैली म लेखन होना चाही. जेमा स्वर अउ तालबद्ध गीत लिखे के परंपरा हे. हमला अपन मौलिक पहचान ल बनाए रखना चाही, न कि लघु गुरु अउ मात्रा मनला गिन-गिन के  दूसर मन के पिछलग्गू बनना चाही.
   ए संबंध म उन उदाहरण घलो देवंय- 'जब हमन चंदैनी गोंदा के गीत मनके रिकार्डिंग खातिर मुंबई गेन, त उहाँ हमर करमा के एक गीत ल सुनके उहाँ जुरियाए मुंबई के जम्मो कलाकार माथा धर लिन. ( दिया के बाती ह वो कइसे सच बात ल कहिथे जले के बेर) काबर के करमा के ए गीत म पांच मात्रा के ताल हावय. ए ह छत्तीसगढ़ी संगीत के मौलिकता आय. दुनिया के अउ कोनो संगीत म अइसन विसम ताल नइए. बाकी सब म दू मात्रा, चार मात्रा के सम ताल ही होथे. उहाँ जुरियाए सब संगीतकार ए ताल ल बजाए के कोशिश करिन फेर कोनो नइ बजा पाइन.
   ए बात ल उन मोला हमर स्टूडियो म होय गोठबात म तो बताएच रिहिन. छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा सन् 2014 के 12, 13 अउ 14 दिसंबर के रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन म आयोजित होए प्रथम "रायपुर साहित्य महोत्सव" म घलो कहे रिहिन. ए कार्यक्रम म मैं तीनों दिन के सबो कार्यक्रम म संघरे रेहेंव. पहला दिन के पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी मंडप के उद्घाटन सत्र के कार्यक्रम के संचालन महीच करे रेहेंव. छत्तीसगढ़ के साहित्यकार मन ऊपर आधारित ए सत्र म मोर संग म छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के संपादक नंदकिशोर तिवारी जी अउ डा. रमेन्द्रनाथ मिश्रा जी रिहिन. हमर मन के बगल म मुकुटधर पाण्डेय मंडप रिहिसे, जिहां दूसरा दिन लोक गीत ऊपर आधारित सत्र रिहिसे, जेमा खुमान साव जी अउ लक्ष्मण मस्तुरिया जी वक्ता के रूप म रिहिन हें अउ एकर संचालन लाल रामकुमार सिंह करे रिहिन हें. ए मंच म घलो आदरणीय खुमान साव जी मुंबई म करमा गीत के पांच ताल वाले बात के बढ़िया फोरिया के विस्तार ले उल्लेख करे रिहिन हें.
   अतेक अद्भुत प्रतिभा के धनी खुमान साव जी ल जनता के तो अथाह सम्मान मिलय, फेर उंकर शासकीय  सम्मान के गिनती नहीं के बराबर हे. वइसे 2015 म उनला संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार तो मिले रिहिसे, फेर पद्मश्री या राज्यशासन के मंदराजी आदि के सम्मान उनला नइ मिल पाइस. मोर कभू उंकर संग ए विषय म चर्चा होवय त उन कहंय, अरे टार न, सरकारी सम्मान ल. उहाँ कोन आवेदन करही. हमला जनता के जेन सम्मान मिलथे, तेन सबले बढ़के हे. बाद म मैं ए विषय म जानकारी लेंव त पता चलिस,  के अइसन सम्मान खातिर संबंधित कलाकार ल स्वयं या फेर कोनो समिति के माध्यम ले आवेदन करे बर लागथे, तभे वोकर नाम ऊपर सम्मान चयन समिति द्वारा विचार करे जाथे. आदरणीय खुमान साव जी कहंय, कोनो स्वाभिमानी आदमी ह आवेदन करही का, मोला सम्मान दे कहिके??
   वाजिब म संबंधित विभाग ल अउ वोकर सलाहकार मनला ए विषय ऊपर फिर से विचार करना  चाही, तेमा वरिष्ठ कलाकार या साहित्यकार मनला आवेदन के प्रक्रिया ले गुजरे ले झन परय.
   लोक संगीत के ए महान पुरोधा, कला गुरु  के 90 बछर के अवस्था म 9 जून 2019 के देवलोक गमन होगे. उंकर सुरता ल डंडासरन पैलगी 🙏🙏
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811