Thursday, 9 June 2022

अमर रचनाकार मुकुटधर पाण्डेय जी

30 सितम्बर जयंती म सुरता//
हिन्दी अउ छत्तीसगढ़ी के अमर रचनाकार पद्मश्री मुकुटधर जी पाण्डेय
    भीड़ ले अलग हट के कुछ मौलिक अउ आरुग अंतस के गोठ लिखने वाला साहित्यकार ल एती-तेती के गाड़ा-गाड़ा रचना लिख के खरही गाँजे के जरूरत नइ परय. वो वतकेच म ही अमर अउ कालजयी रचनाकार हो जाथे.
    जांजगीर-चांपा जिला के गाँव बालपुर म 30 सितम्बर 1895 म महतारी देवहुती देवी अउ सियान पं. चिंतामणि जी के घर जनमे पद्मश्री पं. मुकुटधर पाण्डेय जी अइसने साहित्यकार रिहिन हें, जेन मन दू-चार रचना म ही साहित्य जगत म अमर हो गय हें. एकर खातिर 'सरस्वती' के संपादक रहे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के वो पाती उंकर बर रस्ता देखाए के बुता करे रिहिसे, जेमा लिखाय रिहिसे- 'आप साल भर म तीन रचना ही भेजे करौ. उंकर सीख रिहिसे के, कम लिखौ फेर पोठ लिखौ. अच्छा लिखे म रचनाकार दू-चार रचना म ही अमर हो जाथे. जबकि जादा लिखे म घलो लोगन उनला चालीस-पचास बछर म बिसर डारथें.' आचार्य द्विवेदी जी के ए पाती ह मुकुटधर पाण्डेय जी खातिर गुरु मंत्र साबित होए रिहिसे.
    मोला पं. मुकुटधर पाण्डेय जी के दर्शन अउ घंटा भर बइठ के उंकर संग मुंहाचाही करे के सौभाग्य तब मिले रिहिसे, जब हमन सन् 1988 के दिसंबर महीना म 'छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य प्रचार समिति' के प्रदेश स्तरीय जलसा रायपुर के रामदयाल तिवारी स्कूल म करवाए रेहेन.
    असल म ए जलसा म छत्तीसगढ़ी के सियान साहित्यकार मन के सम्मान घलो होना रिहिसे, जेमा मुकुटधर पाण्डेय जी के नॉंव घलो शामिल रिहिसे, फेर उन स्वास्थ्य गत कारण के सेती रायपुर नइ आ पाए रिहिन हें. तब हमन डाॅ. व्यास नारायण दुबे जी, जागेश्वर प्रसाद जी अउ मैं, हम तीनों रायगढ़ जाके उंकर घर म ही समिति के डहार ले सम्मान करे रेहेन. ए कारज म डाॅ. बलदेव साव के संगे-संग रायगढ़ के अउ साहित्यकार मन के अच्छा सहयोग मिले रिहिसे. ए बेरा म श्रद्धेय पाण्डेय जी ह रायपुर ले गए हम तीनों झनला महाकवि कालिदास के अमरकृति 'मेघदूतम्' के छत्तीसगढ़ी अनुवाद के प्रति ल अपन हस्ताक्षर कर के दिए रिहिन हें. उही छत्तीसगढ़ी कृति के माध्यम ले ही मैं 'मेघदूत' ल पढ़ पाए रेहेंव, अउ वोकर ले प्रभावित होके छत्तीसगढ़ी म एक गीत लिखे रेहेंव-
अरे कालिदास के सोरिहा बादर, कहाँ जाथस संदेशा लेके
हमरो गाँव म धान बोवागे, नंगत बरस तैं इहाँ बिलम के
थोरिक बिलम जाबे त का यक्ष के सुवारी रिसा जाही
ते तोर सोरिहा के चोला म कोनो किसम के दागी लगही
तोला पठोवत बेर चेताय हे, जोते भुइयाॅं म बरसबे कहिके
अरे कालिदास के सोरिहा बादर...

    छत्तीसगढ़ी मेघदूत के  भाषा ल पढ़ के अइसे नइ जनावय, के ए ह अनुवाद आय. वोला पढ़े म अइसे जनाथे, के एहि ह मूल प्रति आय. देखव छत्तीसगढ़ी मेघदूत के दू डांड़-
बता मित्र के काम करे बर तैं हर मन म ठाने?
उत्तर देबे तभे तोर स्वीकृति का जाही जाने?
बिन गरजे याचक चातक ला देथस तैं जल, जलधर,
काम कर दिहिन जन के पूरा, यही सुजन के उत्तर..

    मुकुटधर पाण्डेय जी ल छायावाद के प्रवर्तक के रूप म जेन कविता 'कुररी के प्रति' ह स्थापित करिस, वो ह जुलाई 1920 के 'सरस्वती' के अंक म छपे रिहिसे-
बता मुझे, हे विहग विदेशी, अपने जी की बात.
पिछड़ा था तू कहाँ, आ रहा जो कर इतनी रात?
निद्रा में जा पड़े कभी के, ग्राम्य मनुज स्वच्छंद.
अन्य विहग भी निज खेतों में सोते हैं सानंद.
इस नीरव घटिका में उड़ता है तू चित्रित गात.
पिछड़ा था तू कहाँ, हुई क्यों तुझको इतनी रात?
    मुकुटधर पाण्डेय जी बतावंय के वोमन 'कुररी' ऊपर तीन कविता लिखे रहिन हें. शायद उंकर दूसर रचना 1917 म छपे रिहिसे-
सच पूछो तो तुममे मुझमे भेद नहीं कुछ भारी
मैं हूँ थल चारी तो तू है विस्तृत व्योम विहारी
    तीसर रचना शायद 1939 म लिखे गे रिहिसे-

सुना, स्वर्ण मय भूमि वहाँ की मणिमय है आकाश
वहाँ न तम का नाम, कहीं है रहता सदा प्रकाश

     मुकुटधर पाण्डेय जी रामायण के उत्तरा कांड ल घलो छत्तीसगढ़ी ल लिखे रिहिन हें. वोकर एक झलक देखौ-
अब तो करम के रहिस एक दिन बाकी
कब देखन पाबो राम लला के झांकी

हे भाल पांच में परिन सवेच नर नारी
देहे दुबराइस राम विरह मा भारी

दोहा - सगुन होय सुन्दर सकल सबके मन आनंद।
पुर सोभा जइसे कहे, आवत रघुकुल चंद॥

महतारी मन ला लग, अब पूरिस मन काम
कोनो अव कहतेव हवे, आवत्त वन ले राम

जेवनी आंखी औ भूजा, फरके बारंबार
भरत सगुन ला जनके मन मा करे विचार

अअब तो करार के रहिस एक दिन बाकी
दुख भइस सोच हिरदे मंचल राम टांकी

कइसे का कारण भइस राम नई आईन
का जान पाखंडी मोला प्रभु बिसराईन

धन धन तैं लक्ष्मिन तैं हर अस बड़भागी
श्रीरामचंद्र के चरन कवल अनुरागी

चिन्हिन अड़बड़ कपटी पाखंडी चोला
ते कारन अपन संग नई लेईन मोला

करनी ला मोर कभू मन मा प्रभू धरही
तो कलप कलप के दास कभू नई तरही

जन के अवगुन ला कभू चित नई लावै
बड़ दयावंत प्रभु दीन दयाल कहावै

जी मा अब मोर भरोसा एकोच आवै
झट मिलहि राम सगुन सुभ मोला जनावै

बीते करार घर मा परान रह जाही
पापी ना मोर कस देखे मा कहूं आही

दोहा
राम विरह के सिन्धु मा, भरत मगन मत होत।
विप्र रूप धर पवन सुत, पहुंचिन जइसे पोत॥

    हर मनखे ल अपन माटी, अपन भाषा अउ संस्कृति खातिर गजब मया होथे. वो एकर बखान ल कोनो न कोनो रूप म जरूर करथे. तब छत्तीसगढ़ राज एक स्वतंत्र राज के चिन्हारी पा जाही या नइ पाही, तेकर कोनो भरोसा नइ रिहिसे. तभो ले इहाँ के गुनी साहित्यकार मन छत्तीसगढ़ के एक स्वतंत्र अस्तित्व के कल्पना करत ओकर जोहार-पैलगी अउ वंदन जरूर करीन. मुकुटधर पाण्डेय जी के 'प्रशस्ति' शीर्षक ले लिखे ए रचना ल देखौ-
सरगुजा के रामगिरि ह मस्तक-मुकुट संवारे.
महानदी ह निरमल जल मा जेकर चरन पखारे..
राजिम अउ शिवरीनारायन क्षेत्र जहाँ छवि पावै.
ओ छत्तीसगढ़ के महिमा ला भला कवन कवि गावै?
हैहयवंशी राजा मन के रतनपुर रजधानी.
गाइस कवि गोपाल 'राम परताप' सुअमरित बानी..
जहाँ वीर गोपालराय का करो करय नइ संका.
जेकर नांव के जग जाहिर दिल्ली म बाजिस डंका..
मंदिर, देउर डहर-डहर आजो ले खड़े निसानी.
कारीगरी गजब के जेमा, मुरती आनी-बानी..
ये पथरा के लिखा, ताम के पट्टा अउ शिवाला.
दान-धरम अउ बल-विकरम के देवत हवै हवाला..

    आचार्य द्विवेदी जी के बताए गुरुमंत्र ल धरे उन वाजिब म कम ही लिखिन, फेर गजब पोठ अउ अंतस ल छूने वाला साहित्य रचिन. उंकर प्रमुख लेखन म- पूजा फूल, लच्छमा अनूदित उपन्यास, हृदय दान कहानी, परिश्रम निबंध संग्रह, शैलबाला अनूदित उपन्यास, मामा अनूदित उपन्यास, छायावाद एवं अन्य निबंध, स्मृति पुंज, मेघदूत के छत्तीसगढ़ी अनुवाद, विश्वबोध काव्य संकलन आदि प्रमुख हे. एकर संगे-संग उंकर व्यक्तित्व-कृतित्व ले संबंधित अउ कतकों किताब प्रकाशन के अगोरा म हे.

    मुकुटधर पाण्डेय जी के तीन किताब - पूजा फूल (काव्य संग्रह) अउ उड़िया ले अनुदित उपन्यास 'शैलबाला', अउ 'लच्छमा' के लेखक पं. मुकुटधर शर्मा (पाण्डेय) के संगे-संग उंकर बड़े भाई मुरलीधर शर्मा (पाण्डेय) घलो हे. रायगढ़ के साहित्यकार बसंत राघव (सुपुत्र डाॅ. बलदेव साव) ए बात ल प्रमाण सहित कहिन हें.

    मोर सौभाग्य आय मोर पहला कविता संकलन 'छितका कुरिया' खातिर वोमन छत्तीसगढ़ी म अपन शुभकामना संदेश दिए रिहिन हें, अउ कहे रिहिन हें- मैं अपन जिनगी म पहिली बेर ककरो खातिर छत्तीसगढ़ी म संदेश लिखे हौं. उंकर ए संदेश के पांडुलिपि ल तब मैं ब्लाक बनवा के अपन संग्रह म छपवाए रेहेंव. आज घलो उंकर वो पाती ह मोर बर धरोहर बने हुए हे.

    6 नवंबर 1989 के 94 बछर के उमर म वोमन ए नश्वर दुनिया ले बिदागरी ले लेइन. उंकर सुरता ल पैलगी- जोहार🙏
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Friday, 3 June 2022

डाॅ. बलदेव के लिखे भूमिका 'छितका कुरिया'

सुरता//
'छितका कुरिया' खातिर डाॅ. बलदेव के लिखे भूमिका
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    'छितका कुरिया' सुशील वर्मा के कविता के पहिली किताब आये। नानकन बीज में सइघो पेड़ समाय रइथे, वोइसने ए संकलन म एक जनवादी कवि के संभावना छिपे हवय | एमा उवत सूरज के अंजोर हे , जेमा लुकाय हुए चीज अउ बदले हुए मनखे के सकल-सूरत दिखे लागथे। कवि के किशोर भावना इहाँ जीवन के कटु यथार्थ ले उपजे हे। ओमा युग व्यापी असंतोष, रोष अउ विद्रोह ल व्यक्त करे के भारी छटपटाहत देखे जा सकत हे। इहाँ कवि कहूं मेर कल्पना के सरग रचत या हवाई महल खड़े करत नजर नइ आवत हे, ओकर जमीन ठोस हे, वो मुरमी जमीन म खड़े हे, एकरेच कारन वोकर बानी म ठनक हे, ओकर कविता के सेवाद अउ गंध पसीना जइसे नमकीन हवय।
      कवि परम्परा के पोषक नोहय, ओकर सोंच सुराज के बाद जटिल परिस्थिति ले उपजे सोच आय, आज के कवि के वास्तविक चिन्ता का होना चाहिए, ए बात के प्रमान ए किताव म जगा जगा मिलथे-
         गांधी के सपना सुराज आत्ते - आत नंदागे
        रोटी के दौरी म तन मन आज फंदागे
            बियाज सही बाढ़त हे छन छन म भूख
            खाता म लिखागे जिनगी भर बर दुख

   अन्तिम डांड़ सूजी के नोक असन नुकीला हे, घाव के मुड़ी ल छुवाय के देरी हे। ए देस म खास करके छत्तीसगढ़ जइसन पिछड़ा इलाका म हर साल अंकाल पड़थे। सावन म हरियर खेत उजर जाथे। चारों मुड़ा पलायन होथे, गरीब के दुख के ओर छोर नइये। नकटी के नाक कस मंहगाई बाढ़त हे। आदमी बन्धवा मजदूर हो गय हे, सुशील वर्मा ए स्थिति ल पंचतंत्र जइसन पात्र के निर्मान करकें अभिव्यक्ति देथें-
      पीठ म सील लादे आवत / बेलदार के गदहा •   
      तरिया ले गठरी आदे आवत / धोबी के गदहा ल
                                               पूछिस-
      कस जी ! बन्धवा मजदूर काला कइथें?

    दूसर डहर फक् उज्जर कपड़ा पहिने खद्दर धारी हें, जउन मौका बेमौका मेचका कस टर्राथें। इन देस के बेंदरा बिनास कर दीन इंकर सह म पनपत हे बयपारी, अप्सर, खाकी वर्दीधारी अउ पटवारी थाना म कुकरी अउ दारू के जोर हे। बहू-बेटी के इज्जत लूटे जात हे। थाना म पुलिस के मार ले कोनो मर जाही त ओहर हत्या नोहय, कानून जइसे कोनो चीज नइ रह गइस, जेकर लाठी अउ पइसा तेकर कानून। सब जगह सोसन अउ अत्याचार के बोलबाला हे। कवि ल कार्य - कारन के स्पष्ट पहिचान हे, ओकर चोट सधे हुए हवय -

      सिट्ठागे अब तो सेवा के गोठ ह
      चोरहा ल राजा बना दिस हमर वोट ह

      कवि अइसन स्थिति म खटिया म सूते नइ बर्रावें, वो अन्याय अउ सोसन के विरोध म जोमियाय लागथे, ओकर आवहान सुनो-

      अरे चलव बढ़व लाठी - गोली खाए बर फेर आघू  आवव
      अंगरेजवा के नास करेव अव अंगरेजियत के नास करव
            लेकिन आज नवा पीढ़ी दिसाहीन हे, ओती ले कवि निरास हे- ' नान- नान पतरेंगवा टुरा होगे रे मुड़पिरवा ' जइसन पंक्ति में कवि के दुख अउ रोष हर प्रकट होवत हे ।
        सन् १८५७ के गदर के बाद इहाँ लगातार दुकाल पड़िस आदमी पलायन करिन अउ महामारी के सिकार होइन, अइ समय हमर देस म पूंजीवादी सभ्यता के फैलाव होइस, वो आज ले जारी हे, कवि के व्यंग देखे लाइक हे-

     अंटावत तरिया के पिलवा मछरी पूछिस
     कस दाई - पानी नइ गिरे ले / दुकाल हर
     हमरेच बर काबर परथे?
     वो 'सादा' पांख वाला / कोकड़ा बर तो
     एकर ले एकदम सुकाल होथे

'छितका कुरिया' शीर्षक कविता कवि के विचारधारा के केन्द्रीय बिन्दु आय। एकर बहाना म वो पूरा देश के गरीबी अउ दुरदसा के बरनन करें हावय। मनखे के भाग जइसन कविता म कवि के व्यंग्य बड़ बारीक अउ असरदार हे। वो नियतवाद ' जइसन धारना के खुल के मखौल उड़ाय हे-

       कइसे के आय बगीचा विधाता
       एके जगा सब फूल फूले हे
       एक ठन देव के सीस चघत हे
       अउ एक ठन ह अइंला के मरत हे

संस्कृत के कोनो कवि के कथन हे-
         कुसुमस्तबकस्येंव द्वयी वृत्तिर्मनस्विनः
         मूदिर्नवा सर्वलोकस्य विशीर्येतवनेऽथवा

लेकिन सुशील वर्मा आज के कवि आंय 'विधाता' के नकाब ल उन खींच के निकाल देहे म भय नई करें। राजनीति के दांव - पेंच ल भले ही जुन्ना - फुन्ना पटन्तर के दुवारा व्यक्त करथे, फेर लोक प्रचलित धारना घलउ ल उन कगरिया के असली मार के जगह पहुंच जाथें। एक ठन उदाहरन देखा-

      बसन्त के उमंग ह। राँड़ी बर आन अउ
      एंहवाती बर आन होथे
      लोहा ह । कसाई बर आन, अउ मंदिर बर आन होथे

आगे उंकर व्यंग्य हर धारदार हो जाथे-

    वोइसनेच | ए पानी के कमी हवय ।
    हमर बर आन, अउ
    कोकड़ा बर आन होथे ।

     देस के संस्कृति कृषि प्रधान आय। छत्तीसगढ़ तो ठेठ खेतिहर इलाका आय। लेकिन आजो ले इहाँ जमीन रोकाय जमींदार अउ मालगुजार भरे हें, उंकर हुकूमत पहिलीच कस चले आत हे। श्रम करे म आदमी कतराय लगे हें - दुधारी कविता के मार देखा-

    जांगर खातिर जब ककरो खेती परिया परथे
   अउ बिन खेती के जब कोनो जांगर परिया परथे

कवि अपन किशोरे अवस्था म जिम्मेदार सियान कस बात करे लगत हे, ए समय तो ओला आन संगी जंवरिहा कस अपन उमर के गीत गाना रहिसें। फेर जब छय महीना के लइका ल वो खड़े मंझनिया, टूटहा घर के रखवारी करत देखथे, त अवाक हो जाथे। महतारी बेटा के बीच म गउंटिया के भूती लछमन रेखा कस खिंचाय जउन हावय। तभ्भो ले ओ गंवई - गांव के सरलता, सहज , सरस जीवन अउ प्रकृति के सुन्दरता ल अपन कल्पना के रंग देहे म नइ चूके हे। बसन्त अउ जड़कल्ला के बरतन म तो उन कमाल कर देहे हावय। कवि प्रचलित मुहाविरा के भरपूर उपयोग करे हे, लेकिन ओमा मौलिकता के भी कमी नइये। सुशील वर्मा अपन ज्येष्ठ कवि हरि ठाकुर , श्यामलाल चतुर्वेदी, नारायण लाल परमार जइसन कवि से बड़ परभावित हे। उन इंकर कविता से अपन काव्य - संस्कार ल बड़ सुघ्घर रूप में विकसित करे हाबंय। कवि समर्थ कवि मन के प्रभाव ग्रहण करय अउ उंकर मंजिल ले आघू के यात्रा सुरू करय , अइ हर जातीय चेतना कहलाथे, जे साहित्य म बहुत बड़े चीज आय। कवि सुशील वर्मा म एकर पूरा पूरा संभावना हे, संक्षेप म उन सचेत कवि आय, अउ अपन समय ले बेखवर नइये। उंकर कविता के मूल स्वर व्यंग्य आय। आवा ए निडर अउ साहसी कवि के संग मुखा - माखी करा, इंकर से, इंकर कविता से चिन्हारी करा-

    अरे एही हर तो । पंचाइती राज के सुरूआत ये .    
    अब तो रोज हत्या होही। बैंक लुटाही। इज्जत      बेचाही
    अउ राजनीति के यज्ञ म । तभे तो गांधी के भारत
    एक्कीसवीं सदी म जाही ।

                डॉ . बलदेव
  श्री शारदा साहित्य सदन,बैकुण्ठपुर ,

रायगढ़ १०-३-१९ ८ ९

मुकुटधर पाण्डेय जी के आशीर्वचन

सुरता//
मोर पहला कविता संग्रह 'छितका कुरिया' म पद्मश्री पं. मुकुटधर पाण्डेय जी के आशीर्वचन...
    छायावाद के प्रवर्तक, पद्मश्री, साहित्य वाचस्पति पं. मुकुटधर पाण्डेय जी के आशीर्वचन के सौभाग्य मोला तब मिले रिहिसे, जब मैं अपन नान्हे उमर मनके कविता ल 'छितका कुरिया' के नॉंव ले अपन जिनगी के पहला काव्य संकलन निकलवाए रेहेंव.
     महाशिवरात्रि 8 मार्च 1989 के लिखे अपन आशीर्वचन ल देवत श्रद्धेय पाण्डेय जी तब कहे रिहिन हें- 'मैं अपन जिनगी म कोनो रचनाकार खातिर पहिली बेर छत्तीसगढ़ी भाषा म संदेश या आशीर्वचन लिखे हौं.'
    वो बखत आज जइसे कम्प्यूटर अउ आफसेट प्रिंटिंग के जमाना नइ रिहिसे, तेकर सेती मैं उंकर वो आशीर्वचन के ब्लाक बनवा के संकलन म छपवाए रेहेंव. आशीर्वचन के लेखा देखव-
"श्रीराम"
नवोदित कवि सुशील वर्मा (वो बखत मैं अपन नाम सुशील वर्मा ही लिखत रेहेंव) के काव्य संकलन 'छितका कुरिया' म नाम के अनुरूप गरीबी रेखा ल पार करइया हमर मजदूर किसान मन के जीवन के विदग्धता पूर्ण चित्रण हवय. एमा एक तरफ तो गंवई गाँव के उमंग, उत्साह अउ भोलापन हे, प्रकृति सौंदर्य के सुघ्घर झॉंकी हे, तो दूसर तरफ शोषण कर्ता मन के विरुद्ध आक्रोश हे. कवि म यथार्थ अउ कल्पना के बढ़िया मेल हवय. कवि म प्रतिभा हे. उनमें अपन माटी के पीरा अउ महक समाय हवय. एतके नहीं उन मा युग के पहिचान अउ ओला वाणी देहे के सामरथ घलो हवय. भाषा शिल्प म मार्जन के जरूरत हवय. लेखनी धीरे 2 मंजाथे, ए बात ल ध्यान म रखना चाही.
    अभी तक मैं उनकर सम्पादकीय रूप के प्रशंसक रहेंव. उन कर दुवारा सम्पादित 'मयारु माटी' के छत्तीसगढ़ी साहित्य के इतिहास म स्थायी महत्व रइही, ए बात जानत हौं. फेर उन कर कवि रूप ल देख के अउ ज्यादा खुशी होइस. 'छितका कुरिया' संकलन पढ़ के मोला 'होनहार बिरवान के होत चीकने पात' वाला उक्ति याद आ गइस.
    उज्जवल भविष्य के कामना सहित..
मुकुटधर पाण्डेय
रायगढ़
महाशिवरात्रि

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Wednesday, 25 May 2022

छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान बर संघर्ष रामाधार कश्यप

6 जुलाई पुण्यतिथि म सुरता//
छत्तीसगढ़ के शोषण अउ स्वाभिमान बर जिनगी भर संघर्ष करीन रामाधार कश्यप जी....

राज बनगे राज बनगे, देखे सपना धुआँ होगे
चारों मुड़ा कोलिहा मन के, देखौ हुआँ हुआँ होगे...

का-का सपना देखे रिहिन, पुरखा अपन राज बर
नइ चाही उधार के राजा, हमला सुख-सुराज बर
राजनीति के पासा लगथे, महाभारत के जुआ होगे...

    छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन के संगे-संग छत्तीसगढ़िया मन के शोषण, स्वाभिमान अउ अधिकार खातिर जतका झन संघर्ष करे रिहिन हें, सब के मन म ए बात ह जरूर उठत रिहिसे, के का जेन उद्देश्य ल लेके छत्तीसगढ़ राज के आन्दोलन म संघरेन, वो ह आज राज बने के कोरी भर बछर बुलके के बाद घलो पूरा हो पाय हे? अउ कहूँ नइ हो पाय हे, त काबर नइ हो पाय हे? का एकर खातिर हमला सरलग संघर्ष के रद्दा ल जारी नइ रखना चाही?

     छत्तीसगढ़ राज के स्वप्नदृष्टा डाॅ. खूबचंद बघेल के संग खांध म खांध जोर के संघर्ष करइया रामाधार कश्यप जी के मन घलो ए पीरा जिनगी भर जनावय. जब कभू उंकर संग बात होवय त उन ए बात ल जरूर फोरियावयं अउ एकर बर लगातार संघर्ष करत रहे के बात करयं.

    जांजगीर-चांपा जिला के गाँव चोरभट्ठी म महतारी जानकी देवी अउ सियान भुवन प्रसाद जी कश्यप घर 26 नवंबर 1936 के जनमे रामाधार कश्यप जी संग मोर पहिली बार भेंट तब होए रिहिसे, जब वोमन राज्यसभा के सांसद रिहिन हें. रायपुर के सर्किट हाउस म रूके रिहिन हें. तब उंकर एक राजनीति क्षेत्र के संगवारी छत्रपाल सिरमौर जी ह मोला उंकर संग भेंट करवाए बर लेगे रिहिन हें. असल म रामाधार जी तब छत्तीसगढ़िया मन के शोषण अउ स्वाभिमान ल स्वर दे खातिर छत्तीसगढ़ी भाषा म एक दैनिक अखबार निकालना चाहत रिहिन हें. मोला वोकर जिम्मेदारी सौंपे खातिर बलवाए रिहिन हें.

    वो दिन करीब घंटा भर उंकर संग बइठना होए रिहिसे. छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन के शुरुआत ले लेके वर्तमान के दशा-दिशा अउ स्थिति सबके ऊपर जबर चर्चा होए रिहिसे. छत्तीसगढ़ी भाषा म अखबार निकाले के संबंध म उंकर विचार रिहिसे- छत्तीसगढ़िया मन के अधिकार, शोषण अउ संघर्ष के बात ल इहाँ अभी जतका भी मिडिया के मंच हे, कोनो ह सम्मान जनक स्थान अउ महत्व नइ देवय, तेकर सेती आम छत्तीसगढ़िया आज राज निर्माण होए के अतेक दिन बाद घलो शोषित अउ उपेक्षित हे. एकर असली कारण ए आय के, इहाँ के जम्मो मिडिया मन गैर छत्तीसगढ़िया मनके हाथ म हे. एकरे सेती वोमन अपन लोगन मनला तो सजावत-बढ़ावत रहिथें, फेर हमर आदमी मन के न्यायसंगत बात ल घलो लुकाए-तोपे के षडयंत्र करथे. बने गतर के छापय घलो नहीं.

     वोमन छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन के बेरा के सुरता करत बताए रिहिन हें- '28 जून 1969 के वोमन अपन संगी मन संग मिलके भोपाल के विधानसभा भवन म पर्ची फेंक के ए अंचल के विधायक मन जगा जवाब मांगे रिहिन हें. ए घटना के सेती तब भारी बवाल माते रिहिसे. एक दिन के सजा घलो सुनाए गे रिहिसे. तब रामाधार जी डाॅ. खूबचंद बघेल जी द्वारा स्थापित 'छत्तीसगढ़ भातृसंघ' म जुड़े रिहिन हें. वो पर्ची वाले घटना के तब अतका असर होए रिहिसे, के तत्कालीन राज्यपाल के द्वारा एक परिपत्र जारी कर के 'छत्तीसगढ़ भातृसंघ' के कोनो भी किसम के कार्यक्रम म सरकारी कर्मचारी मन के भाग ले या वोमा सदस्यता ले म प्रतिबंध लगाए गे रिहिसे. ए परिपत्र के कश्यप जी जबर विरोध करे रिहिन हें. तब सरकार ह अपन वो परिपत्र ल निरस्त कर रिहिसे. ए घटना ल छत्तीसगढ़ भातृसंघ के बड़का जीत के रूप म देखे जावत रिहिसे.

    रामाधार जी डाॅ. खूबचंद बघेल के सैद्धांतिक रूप म जबर अनुयायी रिहिन हें. एकरे सेती डाॅ. बघेल जब कभू बिलासपुर क्षेत्र के दौरा म राहयं त रतिहा ल कश्यप जी के इहाँ ही बितावयं.
    रामाधार कश्यप जी के चार बेटी अउ दू बेटा के भरे-पूरे परिवार म उंकर सबले बड़े बेटी डाॅ. शारदा कश्यप जी संग घलो मोर अच्छा संबंध रिहिसे. हमन छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अउ जम्मो अस्मिता के संरक्षण संवर्धन खातिर एक समिति 'आदि धर्म जागृति संस्थान' के गठन करे रेहेन, एमा शारदा जी के सक्रिय सहयोग मिलत रहय. उंकर माध्यम ले घलो रामाधार जी के गतिविधि मन के जानकारी मिलत रहय. हमर इही समिति के वार्षिकोत्सव जेन 3 मार्च 2021 के रायपुर के वृंदावन सभागार म संपन्न होए रिहिसे, एमा कश्यप जी घलो अतिथि के रूप म शामिल होए रिहिन हें. अउ ए ह कतेक संयोग के बात आय, के हमर समिति के इही कार्यक्रम ह कश्यप जी के जिनगी के अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम साबित होइस. तब महूं लकवा के अटैक के सेती शारीरिक रूप ले अकेला कहूँ आए-जाए के लाइक नइ रेहेंव. कश्यप जी तब मोर पीठ ल थपथपा के आशीष देवत कहे रिहिन हें- 'जल्दी ठीक हो, छत्तीसगढ़ महतारी ल तोर बहुत जरूरत हे.'

    हमर वो वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के कुछ दिन बाद ही बिलासपुर ले संदेश आइस के  6 जुलाई 2021 के उन ए नश्वर दुनिया ले बिदागरी लेके परमधाम के आसन ग्रहण कर लिन. उंकर सुरता ल पैलगी-जोहार🙏

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Sunday, 22 May 2022

मुर्गा अउ सरकार...

मुर्गा अउ सरकार के
सोच म
एक खास समानता हे.
मुर्गा जइसे समझथे-
वोकरे बाॅंग दे ले ही
सुरूज ऊथे
ठउका सरकार घलो
अइसनेच भरम म रहिथे-
वोकरेच ढिंढोरा पीटे म ही
लोगन के जिनगी म
अच्छा दिन आथे.
ए तो
सुरूज के निरंतरता
अउ
लोगन के
जबर मेहनत के भरोसा सेती
हर युग म
हर काल म
अउ हर हाल म
अंधियारी के छाती चीर के
वो ह सुख के
अंजोर परघाथे
जिनगी ल महकाथे
दुनिया ल सजाथे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811