Thursday, 13 June 2013
Monday, 10 June 2013
गुन-गुन आथे हांसी....
(कवि सम्मेलन के मंचों पर छत्तीसगढ़ी भाषा की इस रचना को मेरी प्रतिनिधि रचना के तौर पर सुना जाता है।)
पहुना मन बर पलंग-सुपेती, अपन बर खोर्रा माची
उंकर दोंदर म खीर-सोंहारी, हमर बर जुच्छा बासी
मोला गुन-गुन आथे हांसी, रे मोला......
जेन उमर म बघवा बनके, गढ़ते नवा कहानी
तेन उमर म पर के बुध म, गंवा डारेस जवानी
आज तो अइसे दिखत हावस, जइसे चढग़े हावस फांसी ... रे मोला...
ठग-जग बनके आथे इहां, जइसे के ज्ञानी-ध्यानी
पोथी-पतरा के आड़ म उन, गढ़थें किस्सा-कहानी
तुम कब तक उनला लादे रइहौ, कब तक रही उदासी... रे मोला...
धरम-करम के माने नोहय, पर के बुध म रेंगत राहन
दुख-पीरा अउ सोसन ल, फोकट के साहत राहन
ये तो आरुग अंधरौटी ये, नोहय अंजोर उजासी... रे मोला...
सुशील भोले
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 098269-92811
फेसबुक -http://www.facebook.com/kavisushil.bhole
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com
पहुना मन बर पलंग-सुपेती, अपन बर खोर्रा माची
उंकर दोंदर म खीर-सोंहारी, हमर बर जुच्छा बासी
मोला गुन-गुन आथे हांसी, रे मोला......
जेन उमर म बघवा बनके, गढ़ते नवा कहानी
तेन उमर म पर के बुध म, गंवा डारेस जवानी
आज तो अइसे दिखत हावस, जइसे चढग़े हावस फांसी ... रे मोला...
ठग-जग बनके आथे इहां, जइसे के ज्ञानी-ध्यानी
पोथी-पतरा के आड़ म उन, गढ़थें किस्सा-कहानी
तुम कब तक उनला लादे रइहौ, कब तक रही उदासी... रे मोला...
धरम-करम के माने नोहय, पर के बुध म रेंगत राहन
दुख-पीरा अउ सोसन ल, फोकट के साहत राहन
ये तो आरुग अंधरौटी ये, नोहय अंजोर उजासी... रे मोला...
सुशील भोले
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 098269-92811
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यूटूब पर मेरे गीतों को सुनने के लिए क्लिक करें-
मित्रों मेरे गीतों को यूटूब पर सुनने के लिए इस लिंक पर जायें-https://www.youtube.com/channel/UCJkmrUNIZo155cxuLV31rPQ/feed?activity_view=1
Friday, 7 June 2013
चलो आज फिर दीप जला दें श्रम के...
यूट्यूब का लिंक - चलो आज फिर दीप जला दें श्रम के...
http://www.youtube.com/watch?v=u2x7bd7mlgY&feature=youtu.be
सुनिए मेरा एक गीत - जंउरिहा ल का हो जाथे रे....
इसे यूट्यूब पर भी देखा जा सकता है- http://www.youtube.com/watch?v=NfVAaQUnZJI&feature=youtu.be
Thursday, 6 June 2013
मेरा संक्षिप्त परिचय
मूल नाम - सुशील कुमार वर्मा
प्रचलित नाम - सुशील भोले
जन्म - 2-7-1961 (आषाढ़ कृष्ण पंचमी, संवत् 2018, दिन-रविवार, रात्रि-8 बजे, स्थान-भाठापारा, जिला-बलौदाबाजार (छ.ग.)।
माता - स्व. श्रीमती उर्मिलादेवी वर्मा
पिता - स्व. श्री रामचंद्र वर्मा
पत्नी - श्रीमती बसंतीदेवी वर्मा
संतान - तीन पुत्रियां। 1- श्रीमती नेहा-रवीन्द्र वर्मा, 2- श्रीमती वंदना-अजयकांत वर्मा, 3- श्रीमती ममता-वेंकटेश वर्मा।
पैतृक गांव - नगरगांव (धरसींवा, जिला-रायपुर )
वर्तमान निवास - 41/191, डॉ. बघेल गली, संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर-492001 (छत्तीसगढ़)
मोबा. नं. 098269 92811
ब्लॉग -http://www.mayarumati.blogspot.in/
फेसबुक -http://www.facebook.com/kavisushil.bhole
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com
प्रकाशित कृतियां-
1- छितका कुरिया (छत्तीसगढ़ी काव्य संकलन)
2- दरस के साध (लंबी कविता)
3- जिनगी के रंग (छत्तीसगढ़ी गीत एवं भजनों का संकलन)
4- आखर अंजोर (छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति पर आधारित आलेखों का संकलन)
5- ढेंकी (छत्तीसगढ़ी कहानियों का संकलन)
प्रकाशकाधीन-
1- भोले के गोले (छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संकलन)
संपादन-
1- मयारु माटी (छत्तीसगढ़ी भाषा की ऐतिहासिक मासिक पत्रिका)
सह-संपादक-
1- दैनिक तरुण छत्तीसगढ़, 2- दैनिक अमृत संदेश, 3- दैनिक छत्तीसगढ़, 4- साप्ताहिक इतवारी अखबार।
इनके अलावा अनेक सामाजिक एवं साहित्यि पत्र-पत्रिकाओं का संपादन एवं सह-संपादन।
कालम लेखन-
1- तरकश अउ तीर (दैनिक नवभास्कर 1990)
2- आखर अंजोर (दैनिक तरुण छत्तीसगढ़ 2006-07)
3- डहर चलती (दैनिक अमृत संदेश 2009)
4- गुड़ी के गोठ (साप्ताहिक इतवारी अखबार 2010 से लेकर अभी तक जारी)
5- बेंदरा बिनास (साप्ताहिक छत्तीसगढ़ी सेवक 1988-89)
6- किस्सा कलयुगी हनुमान के (मासिक मयारु माटी 1988-89)
प्रसारण-
1- आकाशवाणी रायपुर से आलेख, कहानी एवं कविताओं का नियमित प्रसारण।
2- अनेक सांस्कृतिक मंचों द्वारा मेरे लिखे हुए गीत एवं भजनों का गायन-प्रदर्शन।
ऑडियो कैसेट-
छत्तीसगढ़ी भाषा में लहर एवं फूलबगिया नाम से दो कैसेटों का लेखन, गायन एवं निर्देशन। साथ ही अनेक कैसेटों का निर्देशन।
विशेष-
1- कवि सम्मेलन के मंचों पर हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी में गीतों का सस्वर पाठ।
2- छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति पर विशेषज्ञ के रूप में अनेक स्थानों पर वक्तव्य।
3- अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी, कविता, समीक्षा एवं साक्षात्कार आदि का नियमित रूप से लेखन-प्रकाशन।
सम्मान-
छ.ग. शासन के छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा 2010 में प्राप्त 'भाषाÓ सम्मान सहित अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा अनेकों सम्मान प्राप्त।
प्रचलित नाम - सुशील भोले
जन्म - 2-7-1961 (आषाढ़ कृष्ण पंचमी, संवत् 2018, दिन-रविवार, रात्रि-8 बजे, स्थान-भाठापारा, जिला-बलौदाबाजार (छ.ग.)।
माता - स्व. श्रीमती उर्मिलादेवी वर्मा
पिता - स्व. श्री रामचंद्र वर्मा
पत्नी - श्रीमती बसंतीदेवी वर्मा
संतान - तीन पुत्रियां। 1- श्रीमती नेहा-रवीन्द्र वर्मा, 2- श्रीमती वंदना-अजयकांत वर्मा, 3- श्रीमती ममता-वेंकटेश वर्मा।
पैतृक गांव - नगरगांव (धरसींवा, जिला-रायपुर )
वर्तमान निवास - 41/191, डॉ. बघेल गली, संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर-492001 (छत्तीसगढ़)
मोबा. नं. 098269 92811
ब्लॉग -http://www.mayarumati.blogspot.in/
फेसबुक -http://www.facebook.com/kavisushil.bhole
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com
प्रकाशित कृतियां-
1- छितका कुरिया (छत्तीसगढ़ी काव्य संकलन)
2- दरस के साध (लंबी कविता)
3- जिनगी के रंग (छत्तीसगढ़ी गीत एवं भजनों का संकलन)
4- आखर अंजोर (छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति पर आधारित आलेखों का संकलन)
5- ढेंकी (छत्तीसगढ़ी कहानियों का संकलन)
प्रकाशकाधीन-
1- भोले के गोले (छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संकलन)
संपादन-
1- मयारु माटी (छत्तीसगढ़ी भाषा की ऐतिहासिक मासिक पत्रिका)
सह-संपादक-
1- दैनिक तरुण छत्तीसगढ़, 2- दैनिक अमृत संदेश, 3- दैनिक छत्तीसगढ़, 4- साप्ताहिक इतवारी अखबार।
इनके अलावा अनेक सामाजिक एवं साहित्यि पत्र-पत्रिकाओं का संपादन एवं सह-संपादन।
कालम लेखन-
1- तरकश अउ तीर (दैनिक नवभास्कर 1990)
2- आखर अंजोर (दैनिक तरुण छत्तीसगढ़ 2006-07)
3- डहर चलती (दैनिक अमृत संदेश 2009)
4- गुड़ी के गोठ (साप्ताहिक इतवारी अखबार 2010 से लेकर अभी तक जारी)
5- बेंदरा बिनास (साप्ताहिक छत्तीसगढ़ी सेवक 1988-89)
6- किस्सा कलयुगी हनुमान के (मासिक मयारु माटी 1988-89)
प्रसारण-
1- आकाशवाणी रायपुर से आलेख, कहानी एवं कविताओं का नियमित प्रसारण।
2- अनेक सांस्कृतिक मंचों द्वारा मेरे लिखे हुए गीत एवं भजनों का गायन-प्रदर्शन।
ऑडियो कैसेट-
छत्तीसगढ़ी भाषा में लहर एवं फूलबगिया नाम से दो कैसेटों का लेखन, गायन एवं निर्देशन। साथ ही अनेक कैसेटों का निर्देशन।
विशेष-
1- कवि सम्मेलन के मंचों पर हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी में गीतों का सस्वर पाठ।
2- छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति पर विशेषज्ञ के रूप में अनेक स्थानों पर वक्तव्य।
3- अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी, कविता, समीक्षा एवं साक्षात्कार आदि का नियमित रूप से लेखन-प्रकाशन।
सम्मान-
छ.ग. शासन के छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा 2010 में प्राप्त 'भाषाÓ सम्मान सहित अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा अनेकों सम्मान प्राप्त।
Monday, 3 June 2013
एक नया अनुभव...
अभी तक साहित्यिक गोष्ठियों में या फिर कवि सम्मेलन के मंचों पर कविता पाठ करते थे। लोग तालियां बजाते थे, वाह..वाह.. कहते थे, तो उत्साहिक होकर और भी मस्त हो जाते थे। लेकिन अभी बीते रविवार को एक वीडियो शूट के लिए रिकार्डिग स्टूडियो में अकेला खड़े होकर कविता पाठ करने का अवसर मिला। न कोई वाह कहने वाला... न ताली बजाने वाला... समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं सही-सलामत पढ़ रहा हूं या नहीं.... हेडफोन जरूर था कान में... लेकिन हम लोग तो दूसरों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही अच्छा या बुरा मानने के आदि हो चुके हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन में भी कविता पाठ करने का अवसर आता रहा है... लेकिन वहां अन्य कवि मित्रों की वाहवाही तो मिल ही जाती थी।
निश्चित रूप से रिकार्डिंग स्टूडियो का यह अनुभव... बिल्कुल नया अनुभव रहा.....
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