Wednesday, 8 April 2015

अप्पत होगे टूरा निच्चट....















अप्पत होगे टूरा निच्चट नइ मानय एक्कोच बात
खोरकिंजरा कस किंजरत रइथे दिन चिन्हय न रात
महूं गुनथौं कहूं बेटी होतीस करतीस संवागा घर के
हाथ बंटातीस दाई के अउ खवातीस चुरो के भात
सुशील भोले

Tuesday, 7 April 2015

नंगत झड़क ले बासी....















दिन आगे हे गरमी के नंगत झड़क ले बासी
दही-मही के बोरे होवय चाहे होवय तियासी
तन तो जुड़ लागबे करही मन घलो रही टन्नक
काम-बुता म चेत रही नइ लागय कभू उदासी
*सुशील भोले*

Monday, 6 April 2015

आ दरपन तैं देख जउंरिहा...



















आ दरपन तैं देख जउंरिहा कइसे दिखथे चेहरा
तोर रूप तो धंस गे हावय जइसे गड्ढा-दहरा
का बात के भरम म हावस कइसे चिक्कन अंग हे
करम के कालिख तो उपकत हे रंग घलो हे गहरा
*सुशील भोले*

पहिली सुमरनी तोर....



















पहिली सुमरनी तोर गजानन तहीं विघ्ना के हरता
दाना-दाना जोर-सकेल के शुभकारज के करता
तहीं बिपत के संगी-साथी, सुख के तहीं मितान
तोर सरन म जे-जे आथें, बनथस सबके भरता
*सुशील भोले*

Thursday, 2 April 2015

कुल पाये हन कुरमी....












करम करे बर जनम लिए हन कुल पाये हन कुरमी
जांगर टोर सोना उपजाथन चाहे भुइयां राहय मुरमी
क ख ग हमर खेती-बारी इही गीता-वेद के ज्ञान
हमरे खातिर लोगन खाथें पेट भर ठेठरी-खुरमी
*सुशील भोले*

तभो कहाथे दाऊ......














पर भरोसा तीन परोसा, जांगर देखबे त फाऊ
सिरतोन निच्चट कोढिय़ा हावय तभो कहाथे दाऊ
नौकर-चाकर खटत रहिथें घर-खेत म वोकर
तबले लांघन-भूखन रहिथें, एला देखबे त खाऊ
*सुशील भोले*

नवा बहुरिया आही......



















बर-बिहाव के बजगे बाजा नवा बहुरिया आही
मोर सुघ्घर बाढ़े बेटा ल झम्मक ले ले जाही
पेट काट-काट पोसे हावंव करके भारी जतन
फेर सब कहिथें छोड़ाके मोला अकेल्ला पोगराही
*सुशील भोले*