Sunday, 9 August 2015

पंचमुखी महादेव.. आरंग...

राजा मोरध्वज की एेतिहासिक नगरी आरंग स्थित स्वायंभू पंचमुखी महादेव...
राजा मोरध्वज की एेतिहासिक नगरी आरंग स्थित स्वायंभू पंचमुखी महादेव...


पीपल वृक्ष को चीर कर प्रकट हुए हैं स्वायंभू पंचमुखी महादेव...

 स्वायंभू पंचमुखी महादेव... आरंग...

Thursday, 6 August 2015

जोहार दाई...



















मोतियन चउंक पुरायेंव... जोहार दाई
डेहरी म दिया ल जलायेंव ....जोहार दाई
छत्तीसगढ़ महतारी परघाये बर,
अंगना म आसन बिछायेंव... जोहार दाई...

ओरी-ओरी धान लुयेन, करपा सकेलेन
बोझा उठा के फेर, सीला बटोरेन
पैर बगरायेन अउ दौंरी ल फांदेन
रात-रात भर बेलन घलो, उसनिंदा खेदेन
तब लछमी के रूप धरे, धान-कटोरा जोहारेंव... जोहार दाई...

बस्तर के बोड़ा सुघ्घर, सरगुजा के चार
जशपुर के मउहा फूल सबले अपार
शबरी के बोइर गुत्तुर, रइपुर के लाटा
नांदगांव के तेंदू पाके, हावय सबके बांटा
महानदी कछार ले, केंवट कांदा मंगायेंव..... जोहार दाई...

छुनुन-छानन साग रांधेंव, गोंदली बघार डारेंव
मुनगा के झोर सुघ्घर, बेसन लगार मारेंव
इड़हर के कड़ही दाई, अम्मट जनाही
अमली के रसा सुघ्घर, कटकट ले भाही
दही-लेवना के मथे मही, आरुग अलगायेंव..... जोहार दाई...

चूरी-पटा साज-संवागा, जम्मो तो आये हे
खिनवा-पैरी सांटी-बिछिया, करधन मन भाये हे
चांपा के कोसा साड़ी, जगजग ले दिखथे
रायगढ़ के बुने कुरती, सुघ्घर वो फभथे
राजधानी के सूती लुगरा, मुंहपोंछनी बनायेंव..... जोहार दाई...

खनर-खनर झांझ-मंजीरा, पंथी अउ रासलीला
करमा के दुम-दुम मांदर, रीलो के हीला-हीला
भोजली के देवी गंगा, जंवारा के जस सेवा
गौरा संग बिराजे हे, देखौ तो बूढ़ा देवा
कुहकी पारत ददरिया संग, सुर-ताल मिलायेंव...जोहार दाई...

सुशील भोले 
54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

सावन के ठढ़बुंदिया असन....



















सावन के ठढ़बुंदिया असन हावय तोर बोली
कभू तो रमिझिम बरसा सहीं करते गोई ठिठोली
कोन बैरी के संग सीखे हस तैं अनटेरहा चाल
मया के सोत सूखागे तइसे करथस जी बरपेली

सुशील भोले
मोबा. 080853-05931, 098269-92811

Tuesday, 4 August 2015

चंदा लुकागे....













ये बैरी, दिन आगे हावय बरसात के

चंदा लुकागे आधा रात के, कइसे खवावौं दूध-भात के....

कोन दिशा ले आथे बिलवा रे बादर
अइसे घपटथे जइसे सबले हे आगर
फेर पानी रितोथे जुड़वास के.....

जेठ-बइसाख ठउका जुगजुग ले दिखय
खेलत चंदैनी संग मुच-मुच करय
तभो बेरा निकालय मुलाकात के.....

खेती-किसानी तो गदबद ले मात गे हे
धनहा मन परी सहीं सुघ्घर सज गे हे
फेर मोर होगे बिरहा बिना बात के.....

   सुशील भोले
म.नं. 41-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

Monday, 3 August 2015

गुरु घासीदास जी की जन्म एवं कर्म भूमि...

*मनखे मनखे एक समान* का जयघोष करने वाले महान संत गुरुघासीदास जी की जन्म भूमि, तप भूमि एवं कर्म भूमि में एक साथ जाने का अद्भुत संयोग रविवार 2 अगस्त 2015 को बना। अवसर था अखिल भारतीय गुरु घासीदास साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. जे. आर. सोनी एवं मिनी माता फाउंडेशन के रामशरण टंडन के संयुक्त संयोजन में गिरौदपुरी, छाता पहाड़ एवं पंचकुंड की यात्रा।
सतनाम धर्म के संस्थापक गुरू घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर सन् 1756 को एक कृषक परिवार में महानदी के किनारे बसे गिरौदपुरी ग्राम में हुआ था। उन्होंने दलित-शोषित और उपेक्षित वर्ग के लोगों को अाध्यात्मिक शक्ति के साथ जोड़ने का वंदनीय प्रयास किया। उन्होंने अपनी जन्म भूमि से कुछ ही दूरी पर घनघोर जंगल के बीच बसे छाता पहाड़ पर साधना की और आत्मज्ञान प्राप्त किया। आज लाखों और करोड़ों की संश्या में उनके अनुयायी इन पुण्य स्थलों का दर्षन कर अपने आप को धन्य समझते हैं। फाल्गुम माह में यहां पर विशेष मेला का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लोग लाखों की संख्या में दर्शन लाभ हेतु आते हैं। और अपनी मनोकामना पूर्ण कर आनंदित हो अपने-अपने घरों को वापस लौट जाते हैं।
इस यात्रा में छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त डा. सुशील त्रिवेदी, सद्भावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज, सृजन गाथा डाट काम के संपादक जयप्रकाश मानस, डा. सुधीर शर्मा, किरण अवस्थी, सुशील भोले, प्रवीण गोधेजा, रामस्वरूप टंडन, मुकेश वर्मा आदि शामिल थे।
 गुरुघासीदास जी की जन्म भूमि

 गुरुघासीदास जी की जन्म भूमि में रायपुर के प्रतिष्ठित साहित्यकार

जन्म भूमि में अखण्ड ज्योति कलश

 तप एवं कर्म भूमि गिरौदपुरी मंदिर का प्रवेश द्वार

 तप एवं कर्म भूमि गिरौदपुरी मंदिर 

 विश्व का सबसे उंचा जैतखंब और लेखक सुशील भोले

 विश्व के सबसे उंचे जैतखंब से प्रकृति का विहंगम दृश्य

पीयौ-पीयौ हो भोले बाबा भांग...















पीयौ-पीयौ हो भोले बाबा भांग
मोर भक्ति के ये रसदार बने हे....
नागिन बारी ले लाने हौं भांग पाना
धथुरा के जड़ अउ मिले हे चार दाना
तभे तो ये हर लसदार बने हे.... पीयौ.....
हिरदे के सिल म घिस-घिस पीसेंव
सुरहिन गइया के दूध म खिंधोलेंव
देखौ चिखौ ये तो मजेदार बने हे.. पीयौ..
काली रतिहा के एला मैं बोरे रेहेंव
मया के रस म सरबस चिभोरे रेहेंव
पी लौ बाबा ये हर मयादार बने हे.. पीयौ..
सुशील भोले
म.नं. 41-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

शिवरी नारायण


भगवान राम को जूठा बेर खिलाकर आध्यात्मिक संसार में अमर हो जाने वाली माता शबरी की पुण्य भूमि शिवरी नारायण जाने का मन बड़े दिनों से कर रहा था लेकिन एेसा कोई संयोग नहीं बन पा रहा था। रविवार 2 अगस्त को रायपुर नगर निगम के अपर आयुक्त डा. जे. आर. सोनी ने मनखे मनखे एक समान के उद्घोषक बाबा घासीदास जी की जन्म एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम जाने का कार्यक्रम बनाया तो इसमें से कुछ समय निकाल कर शिवरी नारायण का भी दर्श कर आये। साथ में थे- छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त डा. सुशील त्रिवेदी, सद्भावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज, सृजन गाथा डा काम के संपादक जयप्रकाश मानस, डा. सुधीर शर्मा, किरण अवस्थी, सुशील भोले, प्रवीण गोधेजा, रामस्वरूप टंडन, मुकेश वर्मा।