छत्तीसगढ़ी म पद्य लेखन....
दुनिया म जतका भाखा हे, सबो के लेखन अउ उच्चारण म कोनो न कोनो किसम के मौलिकता जरूर हे, एकरे सेती वोकर आने सबले हट के अलग अउ स्वतंत्र पहचान बनथे।
हमर छत्तीसगढ़ी के पद्य लेखन म घलो एक अलग अउ स्वतंत्र चिन्हारी हे, एकर लेखन स्वर अउ ताल के माध्यम ले लिखे के हे। छत्तीसगढ़ी पद्य ल स्वर अउ ताल बद्ध लिखे जाथे। महान संगीतकार स्व. खुमान लाल जी साव एकर संबंध म एक बहुत बढ़िया उदाहरण देवंय। उन बतावंय के "चंदैनी गोंदा " के रिकार्डिंग खातिर जब वोमन मुंबई गे राहंय, त एक करमा गीत म ताल पांच मात्रा के बाजय। उन बतावंय के दुनिया म अउ कहूं पांच मात्रा के विषम ताल नइ होवय। सब म दू अउ चार मात्रा के सम ताल होथे।
उन बतावंय, बंबई के जतका संगीतकार उहां राहंय, सब माथा धर लिए राहंय, वोमन म के एको संगीतकार वो पांच मात्रा के ताल ल बजा नइ पाइन।
आज छत्तीसगढ़ी म घलो अपन मौलिक चिन्हारी ल छोड़ के दूसर भाषा मन के परंपरा ल लादे के रिवाज चल गे हवय। दूसर भाषा के लेखन शैली ल थोर बहुत अपनाना तो स्वागत योग्य बात आय। फेर आरुग उहिच ल हमर मूड़ में खपल देना ल स्वीकार नइ करे जा सकय। आजकाल छंद के नांव म हिन्दी अउ उर्दू के परंपरा के जइसन बढ़वार देखे ले मिलत हे, वो ह सोचे के बात आय।
कोनो भी भाषा के विकास अउ सम्मान वोकर खुद के लेखन रूप के बढ़वार हो सकथे, आने के परंपरा ल थोपना नहीं।
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811
Tuesday, 25 June 2019
छत्तीसगढ़ी म पद्य लेखन....
Tuesday, 18 June 2019
रामगढ़ की नाट्य शाला...
देश की प्राचीनतम् नाट्यशाला रामगढ़ छत्तीसगढ़ में..
जहां आषाढ़ मास के प्रथम दिवस नाट्यमंचन किया जाता है...
न्यायधानी बिलासपुर से 170 कि.मी. दूर तुर्रापानी बस स्टाफ से 3 कि.मी.पैदल रामगढ़ की पहाड़ी जिसका आकार दूर से ही एक सूंड उठाए हुए हाथी की शक्ल में दिखाई दे जाती है। इस पहाड़ी को ही रामगढ़ कहते हैं। यह सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लाक में है। छत्तीसगढ़ शासन यहां प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय स्तर की नृत्यांगनाओं को आमंत्रित कर नृत्य आयोजन करती है।
मान्यताओं के अनुसार महाकवि कालिदास ने जब राजा भोज से नाराज हो उज्जैनी का परित्याग किया था, तब यहीं महाकवि कालीदास ने शरण लिया एवं महाकाब्य "मेघदूतम्" की रचना इसी जगह पर की। यहीं पर एक नाट्यशाला जो सीताबेंगरा गुफा के ऊपर में है, जिसे देखकर यह आभाष होता है कि प्राचीन में नाट्यशाला के रूप उपयोग किया जाता रहा होगा, पूरी ब्यवस्था ही कलात्मक है। गुफा के बाहर 50-60 लोगों के बैठने परिसर अर्धचन्द्राकार में आसन बने हुए है। गुफा में प्रवेश स्थल की फर्श पर 2 छेद है , जिनका उपयोग सम्भवतः पर्दे में लगाए जाने वाली लकड़ी के डंडों को फंसाने के लिए किया जाता था।पूरा परिदृश्य रोमन रंगभूमि की याद दिलाता है।
सुशील भोले
Monday, 17 June 2019
भूपेश सरकार का छह माह पूरा....
डंका बजगे माटी पुत के, गाँव-गाँव आगे सुराज
हमर मुंह के कौंरा ल अब नइ झपटय कोनो बाज
नइ अदियावन सहीं, कोनो अब डरभय म राहय
लोकतंत्र के जय-जय होगे, हमर जी सरी राज
(भूपेश सरकार का छह माह पूरा होने पर)
सुशील भोले
मोबा. नं. 098269-92811
Thursday, 13 June 2019
सुकरात और आईना....
सुकरात और आईना....
दार्शनिक सुकरात दिखने में कुरुप थे। वह एक दिन अकेले बैठे हुए आईना हाथ मे लिए अपना चेहरा देख रहे थे।तभी उनका एक शिष्य कमरे मे आया; सुकरात को आईना देखते हुए देख उसे कुछ अजीब लगा। वह कुछ बोला नही सिर्फ मुस्कराने लगा।
विद्वान सुकरात शिष्य की मुस्कराहट देख कर सब समझ गए और कुछ देर बाद बोले, *”मैं तुम्हारे मुस्कराने का मतलब समझ रहा हूँ…….शायद तुम सोच रहे हो कि मुझ जैसा कुरुप आदमी आईना क्यों देख रहा है ?”*
शिष्य कुछ नहीं बोला, उसका सिर शर्म से झुक गया।
सुकरात ने फिर बोलना शुरु किया , *“शायद तुम नहीं जानते कि मैं आईना क्यों देखता हूँ”*
*“नहीं ”,* शिष्य बोला ।
गुरु जी ने कहा *“मैं कुरूप हूं इसलिए रोजाना आईना देखता हूँ। आईना देख कर मुझे अपनी कुरुपता का भान हो जाता है। मैं अपने रूप को जानता हूं। इसलिए मैं हर रोज कोशिश करता हूं कि अच्छे काम करुं ताकि मेरी यह कुरुपता ढक जाए।"*
शिष्य को ये बहुत शिक्षाप्रद लगी । परंतु उसने एक शंका प्रकट की-
*” तब गुरू जी, इस तर्क के अनुसार सुंदर लोगों को तो आईना नही देखना चाहिए ?”*
*“ऐसी बात नही!”* सुकरात समझाते हुए बोले,
*” उन्हे भी आईना अवश्य देखना चाहिए”! इसलिए ताकि उन्हे ध्यॉन रहे कि वे जितने सुंदर दीखते हैं उतने ही सुंदर काम करें, कहीं बुरे काम उनकी सुंदरता को ढक ना ले और परिणामवश उन्हें कुरूप ना बना दे ।*
शिष्य को गुरु जी की बात का रहस्य मालूम हो गया। वह गुरु के आगे नतमस्तक हो गया।
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Monday, 10 June 2019
शिवलिंग की वैज्ञानिकता....
एक वैज्ञानिक विश्लेषण....
शिवलिंग की वैज्ञानिकता ...
भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा लें, तब हैरान हो जायेगें ! भारत सरकार के नुक्लिएर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योत्रिलिंगो के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है।
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शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लिअर रिएक्टर्स ही हैं, तभी उन पर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे।
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महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे किए बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले हैं। क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है, तभी जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता। भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिव लिंग की तरह है।
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शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है। तभी हमारे बुजुर्ग हम लोगों से कहते कि महादेव शिव शंकर अगर नराज हो जाएं गे तो प्रलय आ जाएगी।
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ध्यान दें, कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है। ये इस देश का दुर्भाग्य है कि हमारी परम्पराओं को समझने के लिए जिस विज्ञान की आवश्यकता है, वो हमें पढ़ाया नहीं जाता और विज्ञान के नाम पर जो हमें पढ़ाया जा रहा है, उससे हम अपनी परम्पराओं को समझ नहीं सकते है।
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जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो सनातन है, विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।
ॐ नमः शिवाय।
Sunday, 2 June 2019
तोरे भरोसा चुल्हा सजथे तोरे भरोसा खार...
घर-बाहिर जम्मो के जोखा तोरे बांटा आय
जनम देवइया तहींच अउ पालनहारी माय
तहीं घर के साज-संवांगा, बाहिर के रखवार
तोरे भरोसा चुल्हा सजथे, तोरे भरोसा खार
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो./व्हा. 9826992811
Saturday, 1 June 2019
रिश्ता अइसन ले बांचथे...
सरी मंझनिया साथ देवइया केवल बिरला होथे
कोन हे संगी हित-पिरित एकरे ले परखो मिलथे
रिश्ता-नाता कहत भर के भाई-भतीजा बोचकथे
तब बिन मुंह के अइसन संगी ले रिश्ता ह बांचथे
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811