Friday, 29 January 2016

गीत मेरा बन जाता है...













जब-जब पाँवों में कोई कहीं, कांटा बन चुभ जाता है।
दर्द कहीं भी होता हो,  गीत मेरा बन जाता है।।

मैं वाल्मीकि का वंशज हूं, हर दर्द से नाता रखता हूं
कोई फूल टूटे या शूल चुभे, हर जख्म मैं ही सहता हूँ
क्रंदन करता क्रौंच पक्षी, पर मन मेरा कंप जाता है.....
                                                   
मैं सावन का घुमड़ता बादल हूँ, सुख की फसलें उपजाता हूँ
कोई राजा हो या रंक सभी को, जीवन गीत सुनाता हूँ
आँखों में किसी की तिनका चुभे, तो आँसू मेरा बह जाता है..
                                                       
मैं श्रमवीरों का सहोदर हूँ, कल-पुर्जों को धड़काता हूँ
देश की हर गौरव-गाथा में, ऊर्जा बन बह जाता हूँ
सीमा पर कभी फन उठता तो, लहू मेरा बह जाता है...

 सुशील भोले 
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

Wednesday, 27 January 2016

महाशिवरात्रि मेला - महादेव के नाम पर या किसी अन्य के नाम पर..?

छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति को बिगाड़ने, भ्रमित करने और उसे गलत संदर्भों के साथ जोड़कर लिखने का कुत्सित कार्य कई वर्षों से चल रहा है। अन्य प्रदेशों से लाये गये ग्रंथों और संदर्भों के मापदण्ड पर लिखे जा रहे इन कारगुजारियों के चलते यहां के वास्तविक धर्म और संस्कृति के समक्ष अस्तित्व रक्षा का संकट उत्पन्न हो गया है,  लेकिन आश्चर्य होता है  इन सब दृश्यों के चलते भी यहां के कथित विद्वान खामोश कैसे रह जाते हैं..?


यहां की संस्कृति मेला-मड़ई की संस्कृति है। यहां सुरहुत्ती (दीपावली) के पश्चात आने वाली द्वितीया तिथि को मातर का पर्व मनाया जाता। मातर पर्व में मड़ई जगाने का कार्य भी होता है, और इसके साथ ही यहां मड़ई-मेला का एक लंबा दौर प्रारंभ हो जाता है, जो महाशिवरात्रि तक चलता है।

छत्तीसगढ़ के प्राय: सभी गांव-कस्बों में मड़ई या मेला का आयोजन होता है। ये छोटे स्तर के मड़ई-मेले गांव के बाजार स्थल पर या किसी अन्य स्थल पर आयोजित कर लिए जाते हैं। लेकिन जो बड़े स्तर के मेले होते हैं वे सभी किसी न किसी सिद्ध शिव स्थलों पर ही होते हैं। इसलिए हम यह प्राचीन समय से सुनते और देखते आ रहे हैं कि राजिम मेला कुलेश्वर महादेव के नाम पर भरने वाला मेला कहलाता था।

 एक गीत हम बचपन में सुनते थे-  *चल ना चल राजिम के मेला जाबो, कुलेसर महादेव के दरस कर आबो...* लेकिन जब से इस मेला को कुंभ के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है, तब से इसे राजीव लोचन के नाम पर भरने वाला कुंभ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जो कि यहां की मूल संस्कृति को समाप्त कर उसके ऊपर अन्य संस्कृति को थोपने का षडयंत्र मात्र है।

मुझे लगता है कि इस मेला के राजीव लोचन नामकरण के पीछे राजनीतिक षडयंत्र भी एक मुख्य कारण है। आप सब इस बात को जानते हैं कि राजीव लोचन भगवान राम का ही एक नाम है, और राम भारतीय जनता पार्टी का चुनावी एजेंडा भी है। शायद इसीलिए भारतीय जनता पार्टी के शासन में परिवर्तित इस आयोजन को कुलेश्वर महादेव के स्थान पर राजीव लोचन के नाम पर भराने वाला मेला के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

मेरा प्रश्न है कि केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं अपितु पूरे देश में जो कुंभ का आयोजन होता है, वह केवल शिव स्थलों पर और उसी से संबंधित तिथियों पर आयोजित होता है, तब भला वह राजीव लोचन या राम के नाम पर आयोजित होने वाला कुंभ कैसे हो सकता है? राम के नाम पर तो अयोध्या में भी मेला या कुंभ नहीं भरता तो फिर राजिम में कैसे भर सकता है? वह भी महाशिवरात्रि के अवसर पर?

महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाला मेला या कुंभ कुलेश्वर महादेव के नाम पर भरना चाहिए या राजीव लोचन के नाम पर?

मुझे छत्तीसगढ़ के तथाकथित बुद्धिजीवियों पर, उनके क्रियाकलापों पर आश्चर्य होता है। वे इस तरह की सांस्कृतिक विकृतियों पर कैसे खामोश रहकर सरकार की जी-हुजूरी में लगे रहते हैं..?

सुशील भोले
डॉ. बघेल गली, संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

बंजारी धाम, मढ़ी...

रायपुर से बिलासपुर रेल मार्ग पर बैकुंठ स्टेशन से उतरकर जाना होता है ग्राम मढ़ी, जहां पर माँ बंजारी अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं।

 आज से करीब बीस वर्ष पहले मैं वहां जब गया था, तब वह एक निर्जन स्थल के ही समान था। माता जी एक नीम वृक्ष के नीचे विराजित थीं, और आसपास कुछ भी नहीं था। लेकिन इस गणतंत्र दिवस पर सुश्री जागृति बघमार जी के साथ वहां पुनः जाना हुआ तो वहां का रौनक देखकर सुखमय आश्चर्य हुआ।

अब यह स्थल एक पूर्ण तीर्थ और पर्यटन स्थल का रूप धारण कर चुका है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। वहां बहुत सारे मंदिर और बाग-बगीचे बन गये हैं, जिन्हें देखकर मन आनंदित हुए बिना नहीं रहता।

वैसे तो छत्तीसगढ़ में बहुत सारे प्राचीन और एेतिहासिक मंदिर हैं, जिन्हें देखने का अपना ही आनंद है, लेकिन वर्तमान जो नये देव स्थल बन रहे हैं, वे भी दर्शनीय और प्रशंसनीय हैं, जिन्हें समय निकालकर अवश्य देखा जाना चाहिए।
माँ बंजारी धाम का गर्भगृह..

गर्भगृह में जागृति बघमार जी के साथ मैंं सुशील भोले

विशाल शिव प्रतिमा के समक्ष

ब्रम्हलोक का एक दृश्य

छत्तीसग़ढ़ महतारी की बहुत ही सुंदर प्रतिमा 

माँ बंजारी

Monday, 25 January 2016

गणतंत्र दिवस की शुभकामननाएँ...


छियांसठवें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ... बधाई... जय हिन्द... जय भारत...

* सुशील भोले
sushil bhole 

Sunday, 24 January 2016

वंदे मातरम्....


 ( हमारे देश में आज भी कई एेसी परिस्थियां निर्मित होती हैं, जब हमारे गौरव के विषयों पर प्रश्न जिन्ह अंकित किए जाते हैं। एेसे ही जब संसद भवन में बीएसपी के एक सांसद द्वारा वंदेमातरम् गान का बहिष्कार किया गया, तब उससे दुखी होकर लिखा गया यह गीत...)

हर मज़हब से ऊँचा है ये वंदेमातरम्
भूखों का भगवान सरीखा वंदेमातरम्

चलो बढ़ाएं कदम मिलाकर फिर से आगे
आज प्रश्न फिर जाग उठा है देश के आगे
कोई कहीं ललकार रहा है वंदेमातरम्...

आजादी दिलवाई जिसने जोश जगाकर
हर सूबे को गले लगाया स्नेह बढ़ाकार
फिर कोई क्यों नकार रहा है वंदेमातरम्...

गण को तंत्र का राज दिलाया बनाया राजा
मुक्त हुआ सामंतों से यह शुभ दिन आया
लोकतंत्र लहराया तब, गूंजा फिर वंदेमातरम्...

नवभारत में स्वर्णिम सवेरा आया जिससे
बच्चा-बच्चा जन-मन-गण को गाया जिससे
आज हिसाब सब मांग रहा है वंदेमातरम्...

अंधियारे में सूर्य सरीखा है यह वंदेमातरम्
जेठ की दुपहरी में छांव की ठंढक वंदेमातरम्
अरे बच्चों की मुस्कान सरीखा वंदेमातरम्...

सुशील भोले
54 /191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा), रायपुर (छ.ग.)
मो.नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल -  sushilbhole2@gmail.com

Friday, 22 January 2016

मातृभाषा में संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था की मांग *जबर गोहार* का भव्य आयोजन...

छत्तीसगढ़ की मातृभाषा की उपेक्षा और उड़िया सहित अन्य प्रदेशों की भाषा को यहां जबरिया थोपने के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा शुक्रवार 22 जनवरी को प्रातः 11 बजे से राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब, श्याम टाकीज के बाजू स्थित धरना स्थल पर आयोजित महाधरना के रूप में *जबर गोहार* का आयोजन कर सरकार को चेतावनी दी गई कि वह अपने बेवकूफी भरे निर्णय को तुरंत वापस ले और इस प्रदेश की मातृभाषाओं को संपूर्ण शिक्षा का माध्यम बनाये.

छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-आरती के साथ प्रारंभ हुए धरने में साहित्यकार सुशील भोले ने सरकारल को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपने
मूर्खता भरे निर्णय को तुरंत वापस ले। इस प्रदेश में उड़िया या अन्य किसी भी भाषा को तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता जब तक यहां की मातृभाषा में संपूर्ण शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि हम राजनीतिक दलों की तरह पुतला दहन का दिखावा नहीं करेंगे, जो भी हमारी मातृभाषा की उपेक्षा कर अन्य प्रदेशों की भाषा को यहां थोपेगा, हम उन्हें जिन्दा दहन करेंगे।

क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष अमित बघेल ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार अपने मूर्खता भरे निर्ण को तरंत वापस ले। जब तक यहां की मातृभाषा में संपूर्ण शिक्षा लागू नहीं हो जाती, हम उड़िया भाषा को या किसी भी अन्य प्रदेश प्रदेश की किसी भी भाषा को यहां स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि सरकार एक महीने के अंदर अपने इस बेवकूफी भरे निर्णय  को वापस नहीं लेती तो पूरे छत्तीसगढ़ में आग लगा दिया जायेगा। यहां का समस्त व्यापार-व्यवसाय को बंद कर दिया जायेगा। और इन सबकी जिम्मेदारी सरकार की अपनी खुद की होगी।

वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर शुक्ला ने मातृभाषा के महत्व को प्रतिपादित करते हुए इस प्रदेश में तुरंत छत्तीसगढ़ी में संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ स देश का पहला राज्य है जहां अपनी खुद की मातृभाषा में पढ़ाई देने की बजाय अन्य प्रदेशों की भाषा को लादा जा रहा है। हमारा उड़िया या किसी भी अन्य भाषा से कोई वैचारिक विरोध नहीं है, लेकिन जब तक यहां की मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक किसी भी अन्य भाषा ओं को यहां स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महाधरना *जबर गोहार* को विष्णु बघेल, श्याम मूरत कौशिक, दाऊ आनंद कुमार, अजय यादव, ऋतुराज साहू, ललित साहू, तुकाराम साहू, संजीव साहू, देव लहरी, सोनू नेताम, गजेन्द्र चंद्राकर, रामशरण टंडन, राजेन्द्र चंद्राकर, सुश्री दुर्गा झा, कल्याण सिंह आदि ने भी संबोधित किया। महाधरना में पूरे प्रदेश भर से आये सैकड़ों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 

Thursday, 21 January 2016

दूरदर्शन में देशभक्ति कविगोष्ठी...

रायपुर दूरदर्शन में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2016 को अपरान्ह 3.30 बजे से देशभक्ति से ओतप्रोत कवि गोष्ठी का प्रसारण किया जाएगा। प्रतिभागी कवि- सुशील भोले, मयंक शर्मा, राममूरत शुक्ल एवं गणेश सोनी प्रतीक होंगे । संचालन पद्मलोचन शर्मा मुंहफट करेंगे।