Monday, 16 December 2024

कोंदा भैरा के गोठ-28

कोंदा भैरा के गोठ-28

-ए बछर कुंभ नहाय बर जाबो नहीं जी भैरा.
   -टार बुजा ल.. मोला कुंभ के नॉव सुनते झझकासी चकचकासी असन लागथे जी कोंदा.
   -अइसे काबर जी संगी.. 12 बछर म एक पइत भराथे तेकर अबड़ महात्तम होथे.
   -अच्छा.. तैं ह अभी प्रयागराज म 13 जनवरी ले महाशिवरात्रि 26 फरवरी तक महाकुंभ भराही तेमा असनाँदे बर जाए खातिर काहत रेहे का जी? 
   -हव.. त तैं ह अउ का समझत रेहे? 
   -अरे.. मैं ह एदे हमर परोस म पुन्नी मेला ल बलद के नकली कुंभ के चोचला चलत हे तेमा जाए बर काहत हे का हावस सोचत रेहेंव.
   -टार बइहा.. तहूं ह कहाँ ले अंते-तंते ल टमड़ डारथस.. हमर देश म सिरिफ चारे जगा- प्रयागराज, नासिक, उज्जैन अउ हरिद्वार म ही कुंभ लगथे.. उहू म अभी प्रयागराज म जेन महाकुंभ होही ना.. तेकर महात्तम ल गुनिक मन सबले जादा बताथें.
   -हाँ.. प्रयागराज म तो पक्का जाबो संगी.. उहाँ खातिर तो हमर मन म जबर श्रद्धा अउ भरोसा हे.
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-अभी तो शिक्षा के नॉव म भइगे तोता रटंत भर चलत हे जी भैरा.
   -सिरतोन कहे जी कोंदा.. हमर घर के लइका मनला देखथौं त अपन ले जादा गरु के बस्ता बोह के जाथे अउ तहाँ ले उहिच मनला रटत रहिथे.
   -सबो घर के एके हाल हे.. फेर मोला लागथे संगी कागजी शिक्षा के संगे-संग तर्क शक्ति घलो होना चाही.
   -बिलकुल होना चाही.. हमन तो बड़का बड़का डिग्री धर के किंजरइया मनला पाँचवीं फेल ढोंगी पाखंडी मन के पाँव तरी घोनडइया मारत देखे हावन.
   -हव जी सिरतोन आय.. जहाँ धरम-करम के गोठ होइस, तहाँ ले तोर सब पढ़ई लिखई मन एक कोंटा म तिरिया जथे.
   -हव भई.. ‌एकरे सेती तो मोला सियान मन के वो बात ह बने सुहाथे .. उन काहँय- ' तेकर ले तो पढ़े ले कढ़े बने'.
   -पढ़े ले कढ़े बने होबेच करथे.. एमा मनखे अपन आत्मज्ञान अउ अनुभव के अनुसार ही कोनो ल पतियाथें अउ आज एकरे सबले जादा जरूरत हे.
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-मोला अइसे जनाथे जी भैरा के कोनो मनखे के एको अंग ह कहूँ दिव्यांग गढ़न के रहिथे तेला उप्पर वाले ह कोनो अलग ले विशेष गुण अउ प्रतिभा दे देथे, जेकर ले वो सफलता के सिढ़िया चढ़ सकय. 
   -ए बात ल तो महूँ आकब करे हौं जी कोंदा.. बिलासपुर के रहइया आशीष सिंह ठाकुर ह जेन रायपुर म घलो पदस्थ रिहिसे अभी कर्नाटक के मैसूर जिला म डाक निदेशक के पद म आसीन हे, अउ तैं जानथस संगी आशीष ह दृष्टिहीन हे तभो ले हमर देश के सबले कठिन माने जाने वाला यूपीएससी के परीक्षा पास करे हे.
   -सही म ए ह उप्पर वाला के देन ही आय जी.. अइसने हमर इहाँ के छत्तीसगढ़ी कवि मेहतरू मधुकर अउ बोधनराम निषादराज ल तैं जानथस नहीं? 
   -जानबे कइसे नहीं जी.. शारीरिक रूप ले भले वो मन ह दिव्यांग हे फेर वोकर रचना मन अगास ल अमरे कस ऊँचहा भाव लिए रहिथे.
   -सही कहे संगी.. अउ ए सब ह उप्पर वाले के विशेष कृपा के बिना नइ हो सकय.
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-मोला सिख समाज के ए प्रायश्चित वाले परंपरा ह गजबेच निक लागथे जी भैरा.
  -कइसन प्रायश्चित के परंपरा ह जी कोंदा? 
   -सिख समाज के जेन कोनो भी सदस्य ल धार्मिक सदाचार के दोषी पाए जाथे वोला तनखैया घोषित करे जाथे.
   -अच्छा.. काली उहाँ के जुन्ना मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल अउ वोकर मंत्रीमंडल के सदस्य रेहे विक्रम सिंह मजीठिया मन अपन टोटा म दोषी होय के तख्ती ओरमाए सेवादार के नीला डरेस पहिने हाथ म भाला धरे स्वर्णमंदिर परिसर के दरवाजा म घंटा भर सेवा बजाइन तेला कहिथस का? 
   -हव जी वो मन ल राम रहीम वाले मामला म धार्मिक रूप ले दोषी पाए गे रिहिसे तेकर सेती सिख धर्मगुरु मन तनखैया घोषित करे रिहिन हें.
   -सही म उँकर मन के ए न्याय व्यवस्था महूँ ल गजब सुहाथे संगी काबर ते एमा कोनो किसम के ऊँच नीच छोटे बड़े के भेदभाव नइ करे जाय सबो ल एक बरोबर माने जाथे अउ वोकरे मुताबिक व्यवहार या कहिन न्याय करे जाथे.
   -कभू कभू मैं गुनथौं संगी.. का हमरो समाज म बिना भेदभाव वाला अइसन न्याय परंपरा या व्यवहार देखे बर मिल पाही?
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-गीता जयंती के जोहार जी भैरा.
   जोहार संगी कोंदा.. आज मोर मन म एक बात ह गजब उठत हे जी संगी- मैं देखथौं ते कतकों झन अइसन साधू, संत अउ तपस्वी हें, जे मन कोनो न कोनो किसम के शारीरिक दुख-पीरा.. रोग-राई म बूड़ेच असन दिखथें. भई हमर असन लंदर-फंदर मनखे के अइसन तकलीफ ह तो फभ जथे, फेर तपस्वी मन घलोक अइसनेच म अभरे रहिथें! 
   -हाँ.. अइसन तो होथेच जी भैरा.. एला अध्यात्म म प्रारब्ध भोग कहे जाथे.
   -अच्छा.. प्रारब्ध भोग? 
   -हहो.. अउ एला पूरा करे बिना कोनो ल मोक्ष या कहिन सद्गति नइ मिलय.
   -अच्छा... ताज्जुब हे भई! 
   -ए ह वो तपस्वी मन के पाछू जनम मन म कोनो भी कारन ले होय गुण-दोस मनला बराबर करे के एक प्रक्रिया होथे, जेला अध्यात्म के भाखा म प्रारब्ध भोग कहे जाथे. मान ले वो तपस्वी ह ए जनम म ए प्रारब्ध भोग ल पूरा नइ करही, त वोला फेर दूसर जनम ले बर लागही, फेर वोला पूरा करेच बर लागही.
   -अच्छा..! 
   -हव.. बिन प्रारब्ध पूरा करे कोनो ल सद्गति नइ मिलय.
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-रामायण महाभारत काल के जबर युद्ध के घाव मनला तुरते भर दे के कमाल करइया औषधि जेला शल्यकर्णी के नॉव ले जाने जावय तेकर अति दुर्लभ पौधा ह अभी अमरकंटक के जंगल म मिले हे कहिथें जी भैरा.
   -अच्छा.. जेकर ले बड़का बड़का घाव ह रात भर म भर जावय कहिथें तेने ह जी कोंदा? 
   -हव जी वो शल्यकर्णी के पौधा ल रीवा के वन संरक्षक अनुसंधान केंद्र म बो के बढ़वार करत हें.. अभी पौधा मन पाँच ले दस फीट तक ऊँचहा होए हे कहिथें.
   -वाह भई.. ए तो बहुते सुग्घर बात आय.. वइसे भी हमर इहाँ के जड़ीबूटी मन म अबड़ गुन हे, बस जरूरी हे त इँकर संरक्षण अउ बढ़वार के.
   -सही आय.. मोला तो इही आयुर्वेद के परंपरा ऊपर जादा भरोसा जनाथे.. मोर खुद के बीमारी ह एकरे ले थोरिक राहत बरोबर जनाय हे.
   -अभी पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ह प्रेस कांफ्रेंस म बताय रिहिसे के वोकर सुवारी के केंसर के बीमारी ह जड़ीबूटी अउ संतुलित खान पान ले ठीक होइस हे कहिके, फेर दुर्भाग्य हे संगी हम अपन ए ज्ञान के संगे-संग जड़ीबूटी के विविध रूप अउ उपयोग ल बिसरावत जावत हन.. उहू म जानबूझ के.
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-भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व ल अब दुनिया ह जाने समझे अउ माने ले धर लिए हे जी भैरा.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा.. अभी हमर इहाँ के जेन ध्यान के परंपरा हे, तेला अवइया 21 दिसंबर ले हर बछर 'विश्व ध्यान दिवस' के रूप म मनाए जाही.
   -अच्छा.. जइसे इहाँ के योग के महत्व ल समझ के विश्व योग दिवस मनाए के चलन शुरू होइस हे तइसने? 
   -हव.. संयुक्त राष्ट्र महासभा ह 21 दिसंबर ल विश्व ध्यान दिवस के रूप म घोषित कर दिए हे. ए प्रस्ताव ल पारित करवाए म भारत के संगे-संग लिकटेंस्टीन, श्रीलंका, नेपाल, मैक्सिको अउ अंडोरा घलो ह बड़का भूमिका निभाए हे.
   -ए तो बढ़िया बात आय जी.. ध्यान ल कोनो धर्म विशेष संग जोड़ के नइ देखना चाही, जइसे योग ल आज शारीरिक अउ मानसिक समृद्धि खातिर दुनिया के हर देश ह अपनावत हे, वइसने ध्यान ल घलो सबो ल सहजता ले स्वीकार करना चाही.
   सही आय जी.. ध्यान ले लोगन ल नवा नजरिया प्राप्त होथे.. सोचे-समझे के अउ कोनो बात ल फोरिया के गोठियाय बताय म सोहलियत होथे अउ सबले बड़का बात.. ध्यान ह हमर तीर-तखार के नकारात्मकता ल दुरिहा के सकारात्मक स्थिति बनाथे.
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-अब हमर इहाँ के महापुरुष मन के जीवनी ल घलो गाथा के रूप म गाये के परंपरा चलही तइसे जनावत हे जी भैरा.
   -ए तो बढ़िया बात आय जी कोंदा.. कब तक आने आने देश राज के लोगन ल हमन अपन गायन-वादन के हिस्सा बनावत रहिबोन? 
   -सही आय जी.. आज 10 दिसंबर के हमर छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जी के जीवनी ल पंडवानी शैली म प्रसिद्ध गायक चेतन देवांगन जी गाहीं.
   -ए तो बढ़िया शुरुआत आय जी.. इहाँ के सबो गायक कलाकार मनला अइसन करना चाही.. हमर इहाँ एक ले बढ़ के एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व होए हें, जेकर मन के जीवनी ल गाथा गायन के रूप म लोगन तक अमराना चाही.
   -हव जी.. आज वीर नारायण सिंह जी के शहादत दिवस घलो आय न तेकर सेती उँकर शहादत ठउर रायपुर के जय स्तंभ चौक म पंडवानी शैली म गायन करे जाही संग म उनला अपन अपन श्रद्धा के मुताबिक लोगन श्रद्धांजलि घलो देहीं.
   -बहुत बढ़िया संगी.. हमरो डहर ले अमर शहीद ल जोहार.. पैलगी.. शहीद वीर नारायण सिंह जी अमर रहँय.
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-विश्व ध्यान दिवस के जोहार जी भैरा.
   -जोहार संगी कोंदा.. हमर संत महात्मा मन के ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा अउ अध्यात्म संग जुड़े के ए ध्यान के परंपरा ह कतेक सुग्घर अउ सरल हे ना.. उन एकांत गुफा-कुँदरा म रहि के घलो देश दुनिया अउ अपन आराध्य संग जुड़ जावत रिहिन हें.
   -हव जी सही आय.. ध्यान के परंपरा ह तभो गजब मयारुक रिहिसे अउ आजो हे.
   -अइसे ना? 
    -हव जी.. मैं खुद एकर बड़का उदाहरण हावौं.. छै बछर ले आगर होगे हे मोला खटिया धरे.. अब न कहूँ मंदिर देवाला जा सकौं न घरे के पूजा ठउर ल अमरे सकौं, तभो इही ध्यान के भरोसा वो जम्मो आवश्यक ऊर्जा अउ ज्ञान स्रोत ल अमर डारथौं, जेकर मोला आवश्यकता होथे.
   -अइसे ना? 
   -मोर खटिया ही ह अब जप-तप अउ साधना के ठउर बनगे हे ए ध्यान परंपरा के भरोसा.. अब मोला अपन कोनो किसम के दिनचर्या म कोनोच किसम के कमी महसूस नइ होवय.
   -चलौ बनेच हे.. अब दुनिया के लोगन घलो हमर ध्यान परंपरा के महात्तम ल जानहीं, परखहीं अउ अपनाहीं.
   -जरूर अपनाहीं, तभे तो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आज के दिन ल विश्व ध्यान दिवस घोषित करे के निर्णय ह सुफल होही.
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-राजनीतिक लाभ हानि के सेती स्कूल मन म लइका मन के पढ़ई घलो लट्टे-पट्टे हो पावत हे जी भैरा.
   -वाजिब कहे जी कोंदा.. फलाना समाज ल खुश करे बर वोकर कोनो परब म छुट्टी अउ तहाँ ले फेर कोनो समाज के लोगन ल खुश करे बर फेर छुट्टी.. भइगे छुट्टी उप्पर छुट्टी चलत हे.
   -भइगे.. काला कहिबे.. मोर नाती मनला जब देखथौं त घरेच म रहिथे आज फलाना के छुट्टी त आज ढेकाना के.. शिक्षा विभाग के नियमावली के मुताबिक बछर भर म 220 दिन स्कूल संचालित होना चाही, फेर थोक के भाव म छुट्टी देवई के सेती लट्टे-पट्टे 180 ले 185 दिन ही स्कूल संचालित हो पाथे.
   -ले तो भला अइसने म लइका मन के पढ़ई कइसे बने गतर के हो पाही? 
   -अरे.. उँकर कोर्स घलो पूरा नइ हो पावय.. एकरे सेती तो निजी स्कूल वाले मन चिथियागे हें.. उँकर कहना हे के पाँचवी अउ आठवीं बोर्ड के परीक्षा ल इहू बछर सामान्य ही लिए जाय.
   -सरकार ल एती खंँचित चेत करना चाही.. सार्वजनिक छुट्टी के संख्या मनला कम करना चाही, भले ऐच्छिक छुट्टी के संख्या ल बढ़ो देवय.. फेर जिहाँ तक पाँचवी अउ आठवीं के बोर्ड परीक्षा के बात हे त वोला तो लिए ही जाना चाही.. एमा कोनो ढील या छूट नहीं.
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-कोनो भी नवा विचार या गोठ ल लोगन एकदमेच नइ पतियावयँ जी भैरा.
   -कहाँ ले पतियाहीं जी कोंदा.. जइसे पहिली ले बने बुनाए चातर रद्दा म ही लोगन ल रेंगन भाथे, नवा बने एकपइँया रद्दा ल लोगन कन्नेखी तक नइ देखय न.. ठउका नवा गोठ संग घलो अइसनेच होथे.
   -हव भई महूँ आकब करे हौं.. अभी हमन छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अउ इतिहास के वाजिब बात ल करथन त लोगन हमन ल गुरेरे अस देखथें काबर ते हमर मन जगा वोकर जुन्ना बेरा के कोनो लिखे साहित्य नइए.. अउ वोकर मन के बात ल झट पतिया लेथें जेकर मन के पहिली ले लिखे साहित्य या किताब हे, भले वो साहित्य ल अन्ते के लोगन अपन डहार के चलागन म लिखे रहिथें, जेकर हमर परंपरा संग कोनो तालमेल नइ राहय तभो.
   -अइसन तो होथेच संगी.. सच ल पहिली लोगन के हिनमान सहे बर लागथे, तेकर पाछू विरोध घलो झेले बर लागथे अउ फेर तब कहूँ जाके आखिर म वोला लोगन के स्वीकृति मिलथे.. दम धरौ.. तुँहरो संग अइसने होही, आखिर म लोगन तुँहरे गोठ ल पतियाहीं.. अपन गरब के चिन्हारी मानहीं.
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-मंदिर-देवाला मन म नरियर खुरहोरी या लइची-लाड़ू आदि के परसाद तो सबो जगा बाँटे जाथे जी भैरा फेर हमर रायपुर के माँ मरही माता मंदिर म संझा-बिहनिया दूनों जुवर बिहनिया 10 ले 12 बजे तक अउ संझौती 6 ले 8 बजे तक जेवन घलो बाँटे जाथे.
   -अच्छा.. डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के बाजू वाले मरही माता मंदिर म जी कोंदा? 
   -हव जी.. जब विश्वव्यापी महामारी कोरोना ह बछर 2020 म दंदोरे ले धरे रिहिसे ना तब अंबेडकर अस्पताल म इलाज कराए बर अवइया लोगन  के रिश्ता-नता मन खोंची भर जेवन बर तरस जावत रिहिन हें, इही सब ल देख के गणेश भट्टर नॉव के मनखे के करेजा पसीज जावत रिहिसे.
   -हव.. कतकों दयालु धरमी मन संग अइसन होथे.
   -सही कहे.. तब भट्टर जी ह मरही माता मंदिर‌ समिति वाले मन संग गोठबात कर के इहाँ जेवन बाँटे के शुरू करिस.. पहिली तो इहाँ जेन कोनो भी वो तीर म आवय सबो ल जेवन दे दिए जावय फेर अब जेकर मन जगा अंबेडकर अस्पताल के पास होथे तेही मनला जेवन दिए जाथे.
   -बने हे.. दया-धरम के पुन्न‌ परसाद ल योग्य पात्र मनला ही मिलना चाही.
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-धरम के लंबरदार मन के भारी चरित्तर हे जी भैरा.
   -कइसे का होगे जी कोंदा? 
   -अभी मोर हाथ म एक ठ प्रमाण पत्र आय हे.. जानथस ए ह कारक प्रमाण पत्र आय? 
   -तैं बताबे तब तो जानहूँ संगी.
   -ए ह "पाप मुक्ति प्रमाण पत्र" आय. 
‌‌  -ददा रे.. पाप मुक्ति के प्रमाण पत्र? 
   -हव भई.. ए प्रमाण पत्र ल 16 जून 2023 के श्री गौतमेश्वर महादेव अमीनात कचहरी, गौतमेश्वर थाना अमनोद जिला प्रतापगढ़ राजस्थान के सिल मोहर ले जारी करे गे हवय, जेमा पुजारी क्षितिज अउ अमीन के हस्ताक्षर हे.
   -वाह भई.. 
   -जेन मनखे ल पाप मुक्ति के प्रमाण पत्र दिए गे हे वोकर नॉव राधाकृष्ण मीणा पिता रामसिंह मीणा गाँव कैमला जिला करौली राजस्थान लिखाय हे, जेला श्री गौतमेश्वर जी के मन्दाकिनी पाप मोचनी ‌गंगा कुंड म नहवा के प्रायश्चित करवाए गे हे लिखाय हे.
   -अच्छा..! 
   -हव.. अउ खाल्हे म वोकर जाति समाज म वापस ले के बात कहे हे.
   -अच्छा.. त हो सकथे उँकर जाति समाज म कोनो कारण से अइसे करवाए जावत होही.
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-तंत्र-मंत्र अउ ठुआँ-टोटका के नॉव म अभी तक कुकरा बोकर के पुजवन देके बात सुने रेहेन जी भैरा फेर सरगुजा के छिंदकालो गाँव ले खबर आए हे के उहाँ के एक झन आनंद यादव नॉव के छोकरा ह जीयत चीयाँ ल ही खा डरिस.
  -अच्छा.. कुकरी पिला ल जी कोंदा? 
   -हव भई.. बताथें के 15 बछर होगे रिहिसे वोकर बिहाव होय, फेर लइका नइ होवत रिहिसे, लइका के आस म जीयत चीयाँ ल खा डरिस अउ मर घलो गे.
   -मरबे करही.. चीयाँ ह वोकर टोटा म फँस गिस होही.
   -हव.. समझ म नइ आवय भई लोगन अइसन कइसन उजबक किसम के सलाह दे देथें अउ लोगन वोला पतिया घलो लेथें! डॉक्टर मन बतावत रिहिन हें के चीयाँ के पाँव ह वोकर श्वांस नली म अउ मुड़ ह आहार नली म यू आकार म फंसे रिहिसे, जेला पोस्टमार्टम के बेरा निकाले गिस.
   -कलंक हे संगी.. बइगा गुनिया मन के विचित्र सलाह अउ लइका सुख पाए बर अलकरहा जीवलेवा उपाय!
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-धरम-पंथ ह लोगन ल एक-दूसर संग जोड़थे जी भैरा.. मीत-मितानी सीखोथे अउ देश राज म सुख शांति के स्थापना करत विकास के रद्दा ल चातर करथे.. वोमा बढ़वार करथे.
   -सही आय जी कोंदा.. धरम-पंथ के इही कारज ह लोगन के हिरदे म वोला ऊँचहा आसन देवाथे.
  -फेर मोला एक बात ह अचरज बानी के जनाथे संगी- तब फेर लोगन धरम-पंथ, जाति समाज के नॉव म एक-दूसर संग पटकिक-पटका तिरिक-तीरा करत नफरत अउ भेदभाव काबर बगरावत रहिथें.. का अइसन करइया मनला सही मायने म धार्मिक कहे जा सकथे? 
   -बिल्कुल नहीं.. जाति, धरम, संप्रदाय अउ देवी देवता के नॉव म तनाव, भेदभाव अउ ऊँच-नीच के नार लमइया मन भला धार्मिक कइसे हो सकथे? अइसन मन धरम के कोचिया दलाल हो सकथें.. उँकर रखवार‌ या खेवनहार नहीं.

Sunday, 1 December 2024

मयारु माटी बछर 2 अंक 2 पीडीएफ

छत्तीसगढ़ी भाखा के पहला संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' ह वो बेरा म कइसन निकलत रिहिसे ए बात ल जाने खातिर कतकों संगी मन गोठियावत राहँय, उँकर जिज्ञासा शांत करे खातिर पहिली बछर 1988 के देवारी अंक के पीडीएफ ल पोस्ट करे गे रिहिसे.. अब 'मयारु माटी' के बछर 2 अंक 2 के पीडीएफ जे ह हमला रायगढ़ के साहित्यकार भाई बसंत राघव जी के माध्यम ले मिले पोस्ट करे जावत हे. देखव वो बखत हमर महतारी भाखा खातिर कइसन बुता होवत रिहिसे...

Saturday, 30 November 2024

मुख्यमंत्री ने कोंदा भैरा के गोठ का विमोचन किया

मुख्यमंत्री के हाथों "कोंदा भैरा के गोठ" विमोचित.. 
   रायपुर। साहित्यकार सुशील भोले द्वारा सोशलमीडिया के सभी मंच पर प्रतिदिन धारावाहिक के रूप में पोस्ट किए जा रहे छत्तीसगढ़ी धारावाहिक "कोंदा भैरा के गोठ" का छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्ण देव साय के हाथों विमोचन किया गया। रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे एवं इतिहासकार डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र विशेष अतिथि के रूप में मंचस्थ थे.
   सिविल लाइन, रायपुर स्थित सर्किट हाउस के कम्यूनिटी हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश भर से आए साहित्यकार उपस्थित थे। 
   छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित "कोंदा भैरा के गोठ" में प्रतिदिन लिखे जा रहे धारावाहिक के प्रारंभिक दिनों की 177 कड़ियों को समाहित किया गया है। कोंदा भैरा के गोठ की भूमिका पं. सुंदर लाल शर्मा राज्य अलंकरण से सम्मानित साहित्यकार डॉ. सत्यभामा आड़िल ने लिखी है, तथा शुभकामना के दो शब्द सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने प्रेषित किया है।

Sunday, 24 November 2024

कोंदा भैरा के गोठ-27

कोंदा भैरा के गोठ-27

-अपन धरम-पंथ के लोगन मन के बीच बिहाव करना ही ह बने जनाथे जी भैरा.
   -बने जनाथे घलो अउ बने जिनगी भर खटाथे घलो जी  कोंदा.
   -हव जी सही आय.. बिलासपुर के विकास चंद्रा संग एक मसीही समाज के नोनी ह मया बंधना के सेती हिंदू रीति ले बिहाव तो करे रिहिसे, फेर वो ह हिंदू परंपरा के कभू सम्मान नइ करत रिहिसे अउ ते अउ अपन पति संग पूजा पाठ घलो म नइ संघरत रिहिसे उल्टा चर्च जवई करत रिहिसे, तेकरे सेती विकास ह फेमिली कोर्ट ले वोला तलाक़ दिए रिहिसे.
   -बने करिस.. भई जेन माईलोगिन ह अपन आदमी के धरम परंपरा के कारज म संघरत नइ रिहिसे वोला तो तलाक़ देना ही चाही.
   -हव.. फेर वो माईलोगिन ह फेमिली कोर्ट के फैसला ल हाईकोर्ट म चुनौती दे रिहिसे, त हाईकोर्ट ह घलो फेमिली कोर्ट के फैसला ल सही बतावत कहिस- पति संग सहधर्मिणी के कर्तव्य पूरा नइ करना ह धार्मिक मान्यता के अपमान अउ मानसिक क्रूरता आय.

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-गौरा-ईसरदेव परब के बेरा म काली काँसी डोरी वाला सोंटा मरवाए नहीं जी भैरा? 
   -इहू पूछे के बात आय जी कोंदा.. हर बछर मैं गौरा-ईसरदेव के आशीर्वाद पाए बर सोंटा मरवाथौं.
   -बहुत बढ़िया.. वइसे ए ह आय तो हमर पुरखा मन के बनाए एक परंपरा ही, फेर ए ह वैज्ञानिक दृष्टि ले घलो बड़ महत्तम के होथे.
   -अच्छा.. अइसे का जी? 
   -हहो.. ए सोंटा ल काँसी के काँदी (सुक्खा पैरा) के डोरी ल बने पाँच दिन तक तेल म बोर के राखे जाथे, जेकर हाथ म सटाक ले परे ले हमर नस के सफेद रक्त कोशिका  (white blood cells) मन ह सक्रिय हो जाथें.. सफेद रक्त कोशिका मन के सक्रिय होय ले करीब पचास किसम के बीमारी मन अपने अपन ठीक हो जाथें.. ए सोंटा के माध्यम ले शरीर ल मिले एक्यूप्रेशर के क्रिया ले कैंसर के लक्षण कहूँ जनावत होही त उहू ल ए सफेद रक्त कोशिका मन खतम कर देथें.
   -वाह भई.. तब तो अब मैं ह हर बछर अपन घर के लइका मनला घलो सोंटा मरवाए बर कइहौं.

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-हमर देश म तइहा जुग ले गाय ल महतारी बरोबर मानत आवत हावन‌ जी भैरा तभो ले अब इहाँ 'कत्लखाना' मन के संख्या म होवत बढ़ोत्तरी ह भारी ताज्जुब बरोबर जनाथे.
   -हव जी कोंदा.. पहिली गाँव के कोनो घर अइसन नइ राहत रिहिसे जिहाँ एको ठन गाय गरुवा नइ राहत रिहिस‌ होही, फेर अब टेक्टर अउ हार्वेस्टर जइसन मशीन ले खेती होय के सेती बने असन किसान घर घलो गाय गरुवा दिखे ले नइ धरय. 
   -हव जी.. ए ह देश म होवत धार्मिक सांस्कृतिक अउ औद्योगिक बदलाव के सेती घलो होही तइसे जनाथे.
   -कुछू होवय, फेर इहाँ अभी कोनो कोनो संत महात्मा मन गाय ल राष्ट्रमाता घोषित करे के माँग करथें ना, ते ह मोला वाजिब जनाथे.
   -गाय के महत्ता ल तो अफ्रीकी देश सूडान के मुंदरी आदिवासी मन ठउका जानथें, उहाँ एला सबले बड़े धन अउ खजाना माने जाथे.
   -अच्छा..! 
   -हव.. एकरे सेती गाय के रखवारी बर वोमन‌ खाँध म एके 47 जइसन हथियार टाँग के किंजरत रहिथें.

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-धर्म खातिर आस्था ह बहुते सुग्घर बात आय जी भैरा, फेर एकर नॉव ले बगराए जाने वाला अफवाह ल समझना अउ बाँचना घलो जरूरी होथे.
   -सही आय जी कोंदा.. कतकों अफवाह ह बिन मुड़ी पूछी के होथे तभो लोगन वोमा झपाए परथें.
   -हव जी.. अभी वृंदावन के बाँकेबिहारी मंदिर ले खबर आए हे- उहाँ हाथी के मुँह ले टपकत पानी ल लोगन भगवान के चरणामृत आय कहिके पीये बर लुलुवावत झपाय परत हें.
   -वाह भई..! 
   -हव.. फेर उहाँ मंदिर म सेवा करइया आशीष गोस्वामी ह बताइस के असल म वो पानी ह मंदिर म लगे एसी अउ सफाई आदि ले निकलने वाला पानी आय. 
   -भाग भइगे..! 
   -राजस्थान पत्रिका म छपे ए खबर ह वायरल होवत हमन ल चेतावत हे, के कोनो ह कौवा कान ल लेगे कहि दिस त अपन कान ल टमड़े बिन कौवा के पाछू नइ भागना चाही.

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-छत्तीसगढ़ी म एक कहावत हे- 'बेर्रा अबड़ भोगावत हे' एकर मतलब समझथस जी भैरा? 
   -कोन जनी जी कोंदा.. रोगहा.. बेर्रा ल हम गारी होही कहिके भर समझथन! 
   -दू अलग अलग प्रजाति के जिनिस ले सिरजे जिनिस ल 'संकरनस्ल' कहिथन न उही आय.. बेर्रा.
   -अच्छा.. जेकर दाई अलगे अउ ददा अलगे जात समाज के होथे तइसने? 
‌  -हव.. अब ठउका समझे.. अउ ए संकरनस्ल के जिनिस मन उत्ताधुर्रा बाढ़थें.. उही ल हमर सियान मन 'बेर्रा अबड़ भोगावत हे' काहँय.. अब इहाँ के राजनीति म अइसने बेर्रा मन के संख्या म भारी बढ़ोत्तरी आवत हे, ए मन खाथे-पीथें तो इहाँ के अन्न-जल ल फेर गुन गाथें अनगँइहा मन के.
   -अच्छा.. अभी भिलाई के विधायक ह कुरूद के तरिया के नॉव ल अनगँइहा गायिका के नॉव म धर दिए हे तइसने.. जबकि वो तरिया के नॉव ह नगर पालिक निगम के रिकॉर्ड म पहिली ले पंथी सम्राट देवदास बंजारे के नॉव म दर्ज‌ हे.
   -हव संगी.. हमन ल अब अइसने बेर्रा किसम के राजनीतिक मन ले इहाँ के परब-तिहार, नदिया-तरिया, गाँव-गँवई जइसन सबो चिन्हारी ल बँचा के राखे बर लागही, तभे छत्तीसगढ़ ह छत्तीसगढ़ रहि पाही नहीं ते इहू ह परदेशियागढ़ बन जाही.

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-रायपुर के दादाबाड़ी म चलत प्रवचन के श्रृंखला म विराग मुनि जी कहिन जी भैरा के आज सबो झन अपने मान्यता ल ही सबो के ऊपर थोपना चाहत हें, उनला लागथे के उहिच भर सही हे अउ बाकी सब गलत हें.
  -ए बात तो महूंँ ल वाजिब जनाथे जी कोंदा.. जतका धरम-पंथ के संत मनला सुन ले सब अपनेच ल श्रेष्ठ कहिथें अउ आने मनला कमजोरहा.
   -विराग मुनि जी कहिन के आज हम कहाँ ले कहाँ पहुँच गे हावन.. हमर देश म विद्या ल कभू बेचे नइ जावत रिहिसे.. अन्न देवई या काकरो ईलाज खातिर मदद करई ल सेवा अउ पुन्य परसाद माने जावत रिहिसे, फेर आज इही तीनों ह सबले बड़े कारोबार बनगे हे.
   -सिरतोन आय संगी.. धरम-करम के परिभाषा अंते-तंते जनाथे.
   -हव.. वो मन के कहना हे के आज के कतकों संत मन तो भगवान के भक्ति उपासना ल छोड़ के अपने भक्त बनाय म मगन रहिथें.. संत समाज म घलो विकृति आगे हवय.
   -सही आय.. काकर ल मानन अउ काकर ल नहीं तइसे होगे हावय.

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-हरदेव लाला मंदिर म काली छत्तीसगढ़ी चिन्हारी मन के 'उजियार' देखे ले गे रेहे नहीं जी भैरा? 
   -हव.. अइसन सुग्घर उदिम मन म तो मैं कइसनो कर के पहुँची जथौं जी कोंदा.. लइका मन के सुग्घर सुग्घर चित्रकारी, कलाकारी अउ कविता पाठ ल देख सुन के मन गदगद होगे रिहिसे.
   -होबेच करही जी, फेर मोला लागथे के अब हमन ल  पंडवानी या भरथरी जइसन अनगँइहा मन के गाथा के बलदा हमर आरंग के राजा मोरध्वज के वो गाथा ल गाना चाही, जेन ह अपन बेटा ल आरा म दू फाँकी चीर के भगवान के आगू म मढ़ा दिए रिहिसे.
   -हव जी.. भगवान कृष्ण ह जइसे इंद्रदेव के पूजा परंपरा ल बंद करवा के अपन तीर के गोवर्धन पूजा के परंपरा चालू करवाए रिहिसे तइसने.
   -हव.. हमूं मनला अइसने करे बर लागही, अंते तंते के लोगन अउ पात्र मन के गाथा ल छोड़ के अपन इहाँ के गौरव मनला दुनिया भर बगराए के उदिम करना चाही.
   -मैं तो इहू कहिथौं संगी के हमला अइसन जम्मो आयोजन मनला मनोरंजन के संग ज्ञान अउ जनजागरण के माध्यम घलो बनाना चाही.

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-अब तो हमरो इहाँ चार लइका बियाय बर जोर देवत हें जी भैरा.. कइसे करबे तैं ह? 
   -कोन ह अइसन काहत हे जी कोंदा? 
   -दूसर धरम-पंथ वाले मन के बाढ़त जनसंख्या ल देखत हमरो धरम के रखवार मन अइसने करे बर काहत हें जी.
   -वइसे सुने म अइसन गोठ ह बड़ा निक बानी के जनाथे ना, फेर जेकर घर-परिवार हे चोरो-बोरो लोग-लइका हे, ते मन जानथें के उँकर मन के सम्मान जनक शिक्षा अउ भरन-पोसन खातिर कतका मरे-खपे ल परथे.
   -सही आय जी.. डिड़वा मनखे जेकर लोग न लइका परिवार के व्यवस्था कइसे होही तेकर चिंता न फिकर.. वइसन मन का जानहीं चार लइका बियाय ले कइसे का हो जाही तेला? 
   -तभो ले ए गोठ ऊपर चिंतन होना चाही अइसे लागथे मोला.
   -चितन तो सबो गोठ ऊपर होना चाही के वोकर मन के पाले-पोसे के जिम्मेदारी कोन लेही या फेर वो मनला कीरा-मकोरा बरोबर जिनगी जीए बर ढकेल दिए जाही?

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-हमर शहर म तो अभी ले बिन पँखा के सूते-बसे नइ सकन तभो ले काली जेठौनी परब म भुर्री तापे के नेंग ल करे हावन जी भैरा.
   -गरमी ह तो हमरो कोती थिरावन नहीं काहत हे जी कोंदा तभो ले हमूँ मन जुन्ना सूपा, झेंझरी मनला बार के आगी तापे हावन.
   -पहिली के बेरा म जेठौनी के आवत ले जाड़ ह बनेच दँदोरे ले धर ले राहय तभो सियान मन भुर्री बारे अउ तापे खातिर जेठौनी के शुभ परब के अगोरा करँय.
   -हव जी.. जइसे गरमी के मौसम म अक्ती परब ले ही नवा करसी म पानी पीए के शुरुआत करथन तइसने गढ़न.
   -सही आय जी.. जाड़ होवय चाहे गरमी फेर उन दूनों ले राहत पाए के शुरुआत खातिर शुभ परब के अगोरा करे जावय इही ह आज हमर परंपरा बनगे हावय.

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-बिन गुरु के काकरो उद्धार नइ होय काहत रिहिसे जी भैरा.. गाँव के मंडल ह. 
   -बने तो काहत रिहिसे जी कोंदा.. हर मनखे ल अपन जिनगी म एक आध्यात्मिक गुरु जरूर बनाना चाही, काबर ते पूजा-उपासना के फल तो ऊपर वाला ही देथे, फेर वोला गुरु के माध्यम ले ही देथे.
   -अच्छा.. अउ गुरु बनाए बिन पूजा उपासना करत रहिबे तभो फल नइ देवय? 
   -देथे.. फेर अधूरा देथे.. विधिवत गुरु बनाए के पाछू ही पूरा देथे.
   -एकरे सेती तो महूँ ह थथमराए असन होगे हौं.. काला गुरु बनावौं अउ काला नहीं, काबर ते आजकाल रंग-रंग के गुरु देखब म आथे.
   -ऊपर के चकाचक अउ रूप-रंग भर ल देखबे ते अलहन हो जाथे.. वोकर कर्म अउ जीवन दर्शन ल घलो देखना चाही.. आजकाल वंश परंपरा के रूप म फलाना ह गुरु के बेटा आय कहिके घलो नइ अभरना चाही.
   -हव जी बने काहत हस.. तभे तो सियान मन 'गुरु बनावौ जान के अउ पानी पीयौ छान के' काहँय.
   -हव.. फेर आजकाल तो सिधवा बरोबर चोला खाप के हुँड़रा भेड़िया मन घलो किंजरत रहिथें.. अइसन मनला कहूँ गलती म गुरु बना परबे त वो तोला कुकरी चोरा के खवई ल घलो पुन्न के कारज बता देही.

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-राजनीति के अगास म 'बँटोगे तो कटोगे' नारा ह गजब चलत हे जी भैरा.
   -नारा भर के चले ले का होथे जी कोंदा.. नारा लगइया मन के चाल-चरित्तर म घलो तो वइसन दिखना चाही.
   -हव जी सिरतोन आय.. हमर इहाँ तो मंदिर-देवाला तक म भेदभाव देखे ले मिलथे.. वीआईपी मन बर खुसरे के आने रद्दा अउ आम लोगन बर आने.
    -वाह.. आजकाल तो टिकट घलो मिले लगे हे.. अतका के टिकट म एती ले अउ वतका के टिकट म वोती ले.. अब तहीं बता अइसन भेदभाव ले कोनो भी समाज ह एक हो सकथे? मोला तो सिख समाज के वो दृश्य गजब मनभावन लागथे संगी, जिहाँ गुरुद्वारा मन म बड़े बड़े वीआईपी मन घलो लोगन के जूठा बर्तन अउ जूता के सफाई करत रहिथें.
   -अरे अतके ल कहिथस.. जब ज्ञानी जैलसिंह जी राष्ट्रपति रिहिन हें तब उनला तनखैया घोषित कर के स्वर्णमंदिर म जूता साफ करे के आदेश दिए गे रिहिसे.. अउ सिरतोन म संगी जैलसिंह जी वो आदेश के पालन करे रिहिन हें.. अब तैं बता तोर समाज म अइसन संभव हे? 
   -कहाँ पाबे संगी? 
   -हांँ.. जब तक ऊँच-नीच छोटे बड़े के मानसिकता ल पोंस के राखबे, तब तक भइगे नारा भर लगावत रहिबे.. एक नइ हो सकस.

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-देश सेवा खातिर फौज म ही जाना जरूरी नइए जी भैरा.. हम जिहाँ रहिथन उहेंच ले देश सेवा के रद्दा निकाल सकथन. 
   -हाँ ए बात ल तो महूँ मानथौं जी कोंदा.. काबर ते देश सेवा के कतकों रूप हो सकथे.
   -सही आय.. हमर रायपुर के फाफाडीह चौक म एक होटल हे- नीलकंठ रेस्टोरेंट.. इहाँ फौजी मन के विशेष रूप ले सम्मान करे जाथे.
   -अच्छा.. वो कइसे? 
   -इहाँ जे फौजी ह वर्दी पहिन के जाथे वोला पचास प्रतिशत छूट म भोजन करवाए जाथे, अउ कोनो फौजी ह सिविल ड्रेस म चल देथे त वोला पचीस प्रतिशत छूट दिए जाथे.
   -वाह भई..! 
   -रेस्टोरेंट के संचालक मनीष बताथे- वोकर सियान के संगे-संग उन तीनों भाई एनसीसी कैडेट रहें हें, तेकर सेती देश सेवा म जाए के बहुत इच्छा रिहिसे, फेर पारिवारिक ज़िम्मेदारी के सेती फौज म जा नइ पाईन, एकरे सेती देश सेवा खातिर फौजी भाई मनला विशेष छूट के साथ भोजन करवाए के बुता करत हावन.. वो बताथे के उँकर रेस्टोरेंट म रोज 10-15 फौजी आ जाथें.. कभू कोनो शहीद के माता पिता आ जाथें त उनला नि:शुल्क भोजन करवाए जाथे.

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-छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस अवइया हे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. 28 नवंबर के हर बछर मनाथन न.. इही दिन बछर 2007 म छत्तीसगढ़ विधानसभा म छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा के रूप म मान्यता देवइया विधेयक ह सर्वसम्मति ले पास होए रिहिसे, तेकरे सेती जम्मो भाखा प्रेमी मन ए दिन ल छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के रूप म मनाथन.
   -हव बने कहे.. फेर तैं जानथस संगी हमर सरकार ह आजतक छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा के रूप म मनाए खातिर विधिवत शासकीय परिपत्र जारी नइ करे हे.
   -डॉ. रमन सिंह जी मुख्यमंत्री रिहिन हें तब तो हर बछर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए के घोषणा करे रिहिन हें ना? 
   -हव करे रिहिन हें ना, फेर वो ह आजतक सिरिफ घोषणा ही बन के रहिगे हे.. एकर संबंध म शासन द्वारा विधिवत परिपत्र जारी नइ करे गे हे, एकरे सेती हमर इहाँ के जम्मो शासकीय संस्थान मन म छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए नइ जाय.
   -वाह भई.. सरकार ल ए डहार चेत करना चाही अउ "हमन बनाए हावन त हमींच मन सँवारबो" के नारा ल सच साबित करत तुरते परिपत्र जारी कर के जम्मो शासकीय संस्थान मन म छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए के ठोसहा बुता करना चाही.

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-किन्नर मनला सुप्रीम कोर्ट ह जब तृतीय लिंग के रूप म स्वतंत्र चिन्हारी दिए रिहिसे तब मैं रायपुर के किन्नर मन संग भेंट कर के एक लंबा लेख अउ उँकर पीरा ल रेखांकित करत गीत लिखे रहेंव जी भैरा- "घर म रहि के घलो मैं बिरान होगेंव, कइसे बहिनी-भाई बर घलो आन होगेंव.'
  - किन्नर मन के जीवन तो होथेच पीरा के खदान जी कोंदा.
   -सही कहे संगी, फेर अभी बलौदाबाजार जगा के एक खदान म मिले किन्नर काजल के हत्या अउ लाश ले संबंधित खबर ह मोला झकझोर डरिस.
   -वो कइसे? 
   -खबर म बताए गे हवय- रायपुर के जोरा बस्ती म किन्नर मन के मठ हे, जिहाँ के मुखिया बने बर या कहिन उहाँ के वर्चस्व खातिर निशा अउ तपस्या नॉव के किन्नर मन काजल नॉव के किन्नर ल सुपारी दे के मरवा दिस.
   -वाह भई..! किन्नर मठ के वर्चस्व खातिर सुपारी..? 
   -हव जी.. उहू म 12 लाख रुपिया के सुपारी! बलौदाबाजार पुलिस ह ए पूरा मामला के खुलासा करे हे, जेमा दूनों किन्नर संग तीन झन सुपारी लेवइया मनला गिरफ्तार करे हे.
   -बाप रे.. अइसन किन्नर मन ले संवेदनशील होय के बलदा सचेत रहे के जरूरत जनावत हे.

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-अब के लइका मन तो भइगे चिरई पिला कस होगे हें जी भैरा.. पाँखी ह थोक-बहुत जामे अस होइस तहाँ ले कुँदरा ले उड़िया जाथें.
   -ठउका कहे जी कोंदा.. पढ़ा-लिखा के बर-बिहाव करे तहाँ ले नौकरी के ओढ़र म शहर के रद्दा धर लेथें.
   -हव भई.. दाई-ददा मन इहाँ घिलरत हन.. केपकेप करत बिदागरी के रद्दा जोहत हन, फेर हमर मन के देखइया-जतनइया कोनोच नइए.. कभू-कभार उन हमर सुध ले बर आ घलो जथें, त भइगे पहुना बरोबर.. बिहनिया आईन अउ संझा चले गेईन.. रतिहा तक ल नइ बिलमयँ.
   -ए ह अब हमरे भर मन के बात नइ रहिगे हे जी संगी पूरा बस्ती उजार परत हे.. सबोच गाँव के.. इहाँ गाँव के गौंटिया मंडल मन बरोबर सुग्घर जिनगी ल छोड़ के शहर के धुर्रा धुँगिया म बिट्टाए बर लुलुआए परे हें.
   -सही कहे संगी.. शहर के चकाचौंध ह दुरिहा ले देखत भर के आय.. तीर म जाबे त जानबे कतका मुश्किल हे उहाँ जिनगी जीना, फेर ए परलोखिया मनला कोन समझावय.

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-हमर देवी देवता मन म कालभैरव ही अइसे देवता आय जी भैरा जेला मंद-मउहा के भोग लगाए जाथे.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा बताए जाथे के ए ह शिव जी के पाँचवा अवतार आय जे ह देवी के रक्षा खातिर अवतार लिए रिहिन हें.. बताथें के वोमन युद्ध के मैदान म रहिथें.. भोलेनाथ ह कालभैरव जी ल कोतवाल घलो नियुक्त करे रिहिन हें, तेकर सेती ए मन हर देवी मंदिर म बिराजे रहिथें.
   -अच्छा..! 
   -हव.. वइसे तो जम्मो जगा के मंदिर मन म कालभैरव जी ल मंद के ही भोग लगथे, फेर हमर छत्तीसगढ़ के रतनपुर महामाया मंदिर म अगहन महिना के अँधियारी पाख के आठे के दिन सात्विक भोग लगाए जाथे.
   -अच्छा.. वो काबर? 
   -ए दिन इँकर जयंती होथे, तेकरे सेती इनला ए दिन बाल स्वरूप मान के सात्विक भोग लगाए जाथे. बाकी दिन आने मंदिर मन असन मंद के भोग लगथे.. असल म कालभैरव ल तामसिक देवता माने जाथे जे ह युद्ध के मैदान म रहिथे.. एकरे सेती इनला मंद जइसे तामसिक भोग चढ़ाए जाथे.

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-हमर परब तिहार, देवता-धामी अउ उपास-धास सबो ह बेटी माई मन के ही भरोसा बाँचे रहिगे हे जी भैरा.
   -ए बात ल तो सिरतोन कहे जी कोंदा.. उहू म वो बेटी माई मन ए सबला माने जाने म अगुवा हें, जेकर मन के नेरवा ह गाँव-गँवई म गड़े हे, शहरिया चोला ओढ़े मन म एमा थोरिक कमी देखे जाथे.
   -सिरतोन कहे संगी, फेर कभू-कभू मैं इहू गुनथौं के ए मनला हमर देश के संविधान ह उनला उँकर अधिकार अउ सुरक्षा खातिर कतका अकन व्यवस्था करे हे, तेकरो जानकारी रहिथे ते नहीं? 
   -हाँ.. इहू ह बड़ जरूरी बात आय.. आज सबो वर्ग अउ ठउर के बेटी माई मनला एकर खँचित जानबा होना चाही.. उँकर दाई-ददा, भाई-बंद सबो ल ए डहार चेत करना चाही, काबर ते जतका जरूरी हमर परब-संस्कृति के बढ़वार हे, वतकेच जरूरी महतारी बेटी मन के सुरक्षा अउ अधिकार घलो हे.
   -हव जी आज 26 नवंबर के संविधान दिवस के बेरा म आवव परन करीन के हमन ए मुड़ा म ठोसहा कारज करबोन.. काबर ते बेटी माई मन सम्मान के साथ रइहीं, तभे हमर परब-संस्कृति घलो सम्मान जनक स्थिति म बाँचे रहि पाही.
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Sunday, 17 November 2024

आगाज में कविता..

हमरूह प्रकाशन दिल्ली के साझा काव्य संकलन 'आगाज-1' के पृष्ठ 111 एवं 112 पर प्रकाशित मेरी रचना- इतिहास बोल रहा है..

Thursday, 14 November 2024

कविता.. विकास होगे..!

विकास होगे..! 
निच्चट कोलकी म हे
मोर कुँदरा ह. 
ए मुड़ा 
न कार आ सकय
न फटफटी
एकरे सेती
कार म रेंगइया
अउ फटफटी म बुलइया
न तो सरकार
एती आवय
न उँकर कोनो डारा-शाखा.
तभे तो
हमर कोलकी
आज ले अद्दर परे हे.
फेर लोगन बताथें-
सरकार के रिकॉर्ड म
हमर कोलकी ह
पक्का चमचमावत
सिरमिट के
गली म 
लहुट गे हे.
कोनो कोनो बताथें-
बिजली के
डेड़हत्था सादा पोंगरी
घलो ओरमे हे, 
फेर रतिहा 
कभू कुछू जिनिस 
बिसर जाथे त
देशी मंद के बोतल ल
कुलुप के बनाए 
चिमनी के अँजोर म
टमड़ के 
वोला उचा लेथन
आजो ले.
-सुशील भोले