Saturday, 25 May 2013

प्यासा पनघट पर बैठा है....











ताल-तलैये सूख गये, नदियों की भी यही कहानी।
प्यासा पनघट पर बैठा है, भरकर आँखों में पानी।।

महानदी अब रेत उगलती, शिवनाथ सकुचाती है
अरपा-पैरी सांसें मंगतीं, निर्जीव सी गुहराती हैं
मेघदूत तो आते हैं पर, अघाती नहीं है यक्षिणी...

धरती खोदी पाताल सुखाया, सोख लिया जलस्रोतों को
बारिश की कुछ बूंदें आईं, दे दी उसे कल-पुर्जों को
मौसम का फिर दोष है क्या, हमने ही की है नादानी.....

दृश्य प्रलय-सा हुआ उपस्थित, खेतों और खलिहानों में
वृक्ष नहीं अब जीवन पाते, वन-उपवन-बागानों में
हमने खुद ही आग लगाई, छिनी प्रकृति की जवानी....
                                         सुशील भोले 
                                    संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल -   sushilbhole2@gmail.com
                                     मो.नं. 098269 92811   

Wednesday, 22 May 2013

मया-पिरित बरसाबे रे बादर...


(गर्मी के तांडव से निजात पाने के लिए वर्षा के बादलों को आमंत्रित करता एक छत्तीसगढ़ी गीत....)












गरजत-घुमरत आबे रे बादर, मया-पिरित बरसाबे
मोर धनहा ह आस जोहत हे, नंगत के हरसाबे... रे बादर....

जेठ-बइसाख के हरर-हरर म, धरती ह अगियागे
अंग-अंग ले अगनी निकलत हे, छाती घलो करियागे
आंखी फरकावत झुमरत आके, जिवरा ल जुड़वाबे ... रे बादर..

तरिया-नंदिया अउ डबरी ह, सोक-सोक ले सुखागे हे
कब के छोड़े बिरहीन सही, निच्चट तो अइलागे हे
बाजा घड़कावत आके तैं ह, फेर गाभिन कर देबे ... रे बादर...

जीव-जंतु अउ चिरई-चिरगुन, ताला-बेली होगे हें
तोर अगोरा म बइठे-बइठे, आंखी ल निटोरत हें
जिनगी दे बर फिर से तैं ह, अमरित बूंद पियाबे.. रे बादर...

नांगर-बक्खर के साज-संवांगा, कर डारे हावय किसान
खातू पलागे गाड़ा थिरागे, अक्ती म जमवा डारे हे धान
अब तो भइगे आके तैं ह, अरा-ररा करवाबे... रे बादर....
                                          सुशील भोले 
                                    संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल -   sushilbhole2@gmail.com
                                     मो.नं. 098269 92811

Tuesday, 21 May 2013

मंगल-परिणय...


मित्रों,
आप सभी के आशीर्वाद से मेरी सुपुत्री सौ.कां. वंदना का चि. अजयकांत के साथ एवं सौ.कां. ममता का चि. वेंकटेश के साथ रविवार 19 मई 2013 को हर्षोल्लास के साथ विवाह संपन्न हुआ।
मैं आप सभी का आभारी हूं कि आप लोगों ने मेरी दोनों ही पुत्रियों को अपना स्नेह और अशीर्वाद दिया।
                                    धन्यवाद,






                                             सुशील भोले 
                                       कस्टम कालोनी के सामने,
                                      संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल -  sushilbhole2@gmail.com
                                     मो.नं. 098269 92811


Thursday, 16 May 2013

मेरी बेटियों की शादी...




रविवार 19 मई 2013 को मेरी दो बेटियों की शादी एक ही मंडप पर संपन्न होने जा रही है।
मेरे संजय नगर, रायपुर स्थित निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में सौ.कां. वंदना का चि. अजयकांत के साथ एवं सौ.कां. ममता का चि. वेंकटेश के साथ गोधूलीवेला में विवाह संपन्न होगा।
जिन मित्रों को किसी कारणवश निमंत्रण नहीं मिल पाया हो, कृपया इसे ही निमंत्रण स्वीकार कर वर-वधूओं को अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
                                             सुशील भोले
                                       कस्टम कालोनी के सामने,
                                      संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल - sushilbhole2@gmail.com
                                     मो.नं. 098269 92811

Saturday, 11 May 2013

चलो गांव की ओर...












चलो गांव की ओर जहां सूरज गीत सुनाता है
तारों के घुंघरू बांध, चंद्रमा नृत्य दिखाता है.....

अल्हड़ बाला-सी इठलाती, नदी जहां से बहती है
मंद महकती पुरवाई, जहां प्रेम की गाथा कहती है
बूढ़ा बरगद पुरखों की, झलक जहां दिखलाता है....

रिश्ते-नाते जहां अभी भी मन को पुलकित करते हैं
दादी-नानी के नुस्खे, जीवन में रस-रंग भरते हैं
पूरा कस्बा परिवार सरीखा जहां अभी भी रहता है...

भाषा जिसकी भोली-भाली, तुतलाती बेटी-सी प्यारी
जहां संस्कृति पल्लवित होती जैसे मालिन की फुलवारी
धर्म जहां हिमालय जैसा, अडिग आशीष लुटाता है.....

सांझ ढले जब ग्वाले की, बंशी की तान बजती है
गो-धूली गुलाल सरीखी, जब माथे पर सजती है
तब पूरा परिवेश जहां का, गोकुल-सा बन जाता है....
                                           सुशील भोले 
                                    संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल -   sushilbhole2@gmail.com
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Wednesday, 8 May 2013

महतारी के अंचरा...













जीयत-मरत जे संग-संग रहिथे, छिन-छिन करथे पहरा
मोर तो सरबस तीरथ-बरत आय, महतारी के अंचरा.....

सुख-दुख म जे पल-पल रहिथे, नीत-अनीत घलो सहिथे
संग छोड़ जाथे छइहां तबले, वो स्वांसा कस धड़कत रहिथे
जिनगी ल पबरित कर देथे, जइसे गंगा के लहरा....

अंगरी धर के रेंगेंव जे दिन, दुनिया के हर भेद बताइस
गुरु सहीं समझा-बुझा के, मनसा भरम ल भगवाइस
फेर छछले-बाढ़े के बेरा म, बनिस सावन के बदरा....

सृष्टि के संचालन खातिर, जब आइस जिनगी म बेरा
तब संग लगा दिस संगवारी, अउ बना दिस एक डेरा
फेर मोह-माया के जोरन जोर के, आंजीस आंखी म कजरा...
                                          सुशील भोले 
                                    संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
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Friday, 3 May 2013

बचपन वापस आ जाए...


ऐसा कर दो कोई करिश्मा, बचपन वापस आ जाए
जीवन चक्र घुमा दो मेरा, शाम, सवेरा हो जाए.....

मां की लोरी फिर कानों में, गंूज रही है सांझ-सवेरे
दादी किस्से सुना रही है, बाल सखाओं को घेरे
फिर आंगन में हाथों के बल, धमा-चौकड़ी हो जाए...

स्कूल के दिन फिर ललचाते, अक्षर-अक्षर मुझे बुलाते
दोहे और पहाड़े गाते, जाने क्या-क्या राग सुनाते
ऐसा कर दो कोई गुरुजी, छड़ी फिर से चमकाए....

मुझे बुलाती हैं वो गलियां, जहां कभी कंचा खेला
जीवन की पगदंडी पकड़ी, और देखा इंसा का रेला
ऐसा कर दो कोई उस पथ पर, कदम मेरा फिर चल जाए...
                                         सुशील भोले 
                                    संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
                           ई-मेल -  sushilbhole2@gmail.com
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