Tuesday, 29 January 2019

कुंभ स्नान.....

प्रेरक प्रसंग:-
"कुंभ स्नान".......
कुंभ  स्नान चल रहा था। राम घाट पर भारी भीड़ लग रही थी।
शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती ने इतनी भीड़ का कारण पूछा - आशुतोष ने कहा - कुम्भ पर्व पर  स्नान करने वाले स्वर्ग जाते है। उसी लाभ के लिए यह स्नानार्थियों की भीड़ जमा है।
पार्वती का कौतूहल तो शान्त हो गया पर नया संदेह उपज पड़ा, इतने लोग स्वर्ग कहां पहुंच पाते हैं ?
भगवती ने अपना नया सन्देह प्रकट किया और समाधान चाहा।
भगवान शिव बोले - शरीर को गीला करना एक बात है और मन की मलीनता धोने वाला स्नान जरूरी है। मन को धोने वाले ही स्वर्ग जाते हैं। वैसे लोग जो होंगे उन्हीं को स्वर्ग मिलेगा।
सन्देह घटा नहीं, बढ़ गया।
पार्वती बोलीं - यह कैसे पता चले कि किसने शरीर धोया किसने मन संजोया।
यह कार्य से जाना जाता है। शिवजी ने इस उत्तर से भी समाधान न होते देखकर प्रत्यक्ष उदाहरण से लक्ष्य समझाने का प्रयत्न किया।
मार्ग में शिव कुरूप कोढ़ी बनकर पढ़ रहे। पार्वती को और भी सुन्दर सजा दिया। दोनों बैठे थे। स्नानार्थियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुकती। अनमेल स्थिति के बारे में पूछताछ करती।
पार्वती जी रटाया हुआ विवरण सुनाती रहतीं। यह कोढ़ी मेरा पति है। गंगा स्नान की इच्छा से आए हैं। गरीबी के कारण इन्हें कंधे पर रखकर लाई हूँ। बहुत थक जाने के कारण थोड़े विराम के लिए हम लोग यहाँ बैठे हैं।
अधिकाँश दर्शकों की नीयत डिगती दिखती। वे सुन्दरी को प्रलोभन देते और पति को छोड़कर अपने साथ चलने की बात कहते।
पार्वती लज्जा से गढ़ गई। भला ऐसे भी लोग  स्नान को आते हैं क्या? निराशा देखते ही बनती थी।
संध्या हो चली। एक उदारचेता आए। विवरण सुना तो आँखों में आँसू भर लाए। सहायता का प्रस्ताव किया और कोढ़ी को कंधे पर लादकर  तट तक पहुँचाया। जो सत्तू साथ में था उसमें से उन दोनों को भी खिलाया।
साथ ही सुन्दरी को बार-बार नमन करते हुए कहा - आप जैसी देवियां ही इस धरती की स्तम्भ हैं। धन्य हैं आप जो इस प्रकार अपना धर्म निभा रही हैं।
प्रयोजन पूरा हुआ। शिव पार्वती उठे और कैलाश की ओर चले गए। रास्ते में कहा - पार्वती इतनों में एक ही व्यक्ति ऐसा था, जिसने मन धोया और स्वर्ग का रास्ता बनाया।  स्नान का महात्म्य तो सही है पर उसके साथ मन भी धोने की शर्त लगी है।
पार्वती तो समझ गई कि स्नान  महात्म्य सही होते हुए भी... क्यों लोग उसके पुण्य फल से वंचित रहते हैं?
************(संकलित)**""""""******

Friday, 25 January 2019

गणतंत्र दिवस......

गणतंत्र दिवस....
भारत गणराज्य द्वारा  मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है, जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था, क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई.एन सी.) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

जय हिन्द..... वन्दे मातरम्....

Thursday, 17 January 2019

काया लोंदा होगे रे.....

काया लोंदा होगे रे....
(करमा शैली के इस गीत को तब लिखा गया, जब शरद पूर्णिमा २०१८ को मुझे पक्षाघात का अटैक आया था। चार महीने तक मैं बिस्तर पर रहा। उसी दौरान बिस्तर पर ही इसे लिखा गया था।)

हाय रे हाय रे काया लोंदा होगे रे
अहंकार के बूढ़ना झरगे, काया लोंदा होगे रे.....

ज्ञान-गरब के चादर ओढ़े काया फूले रिहिस
कर्म-दोष अनदेखना बनके एती-ओती झूले रिहिस
हिरना कस मेछरावत सपना तब गोंदा-गोंदा होगे रे......

शरद के वो रात रहिस, अमरित बरसा के आस रहिस
भोलेनाथ के किरपा बर मोला तो बड़ बिसवास रहिस
फेर कोन कोती ले कारी छाया आइस कवि कोंदा होगे रे.....

धूप-छांव तो जिनगी म हमेशा आगू-पाछू आथे
फेर अइसन बेरा ह लोगन ल आत्म समीक्षा करवाथे
तब जानबा होथे कोन अपन अउ कोन स्वारथ के बोंडा हे....

धन ल छोड़ जन के पाछू हमेशा भागत राहंव
एकरे सेती ताना, गारी अउ अपमान पावत राहंव
जन-भावना के समंदर पा आज वो फैसला मोर हुड़दंगा होगे रे.....
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

काया लोंदा होगे रे.....

काया लोंदा होगे रे....
(करमा शैली के इस गीत को तब लिखा गया, जब शरद पूर्णिमा २०१८ को मुझे पक्षाघात का अटैक आया था। तीन महीने तक मैं बिस्तर पर रहा। बिस्तर पर ही इसे लिखा गया था।)

हाय रे हाय रे काया लोंदा होगे रे
अहंकार के बूढ़ना झरगे, काया लोंदा होगे रे.....

ज्ञान-गरब के चादर ओढ़े काया फूले रिहिस
कर्म-दोष अनदेखना बनके एती-ओती झूले रिहिस
हिरना कस मेछरावत सपना तब गोंदा-गोंदा होगे रे......

शरद के वो रात रहिस, अमरित बरसा के आस रहिस
भोलेनाथ के किरपा बर मोला तो बड़ बिसवास रहिस
फेर कोन कोती ले कारी छाया आइस कवि कोंदा होगे रे.....

धूप-छांव तो जिनगी म हमेशा आगू-पाछू आथे
फेर अइसन बेरा ह लोगन ल आत्म समीक्षा करवाथे
तब जानबा होथे कोन अपन अउ कोन स्वारथ के बोंडा हे....

धन ल छोड़ जन के पाछू हमेशा भागत राहंव
एकरे सेती ताना, गारी अउ अपमान पावत राहंव
जन-भावना के समंदर पा आज वो फैसला मोर हुड़दंगा होगे रे.....
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Monday, 14 January 2019

मूल संस्कृति के पुनर्लेखन के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन

मूल संस्कृति के पुनर्लेखन को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन.....
रायपुर। "आदि धर्म जागृति संस्थान के द्वारा छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति को यहां के मूल निवासी वर्ग के विद्विनों एवं लेखकों की देखरेख में नये सिरे से लिखवाए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल को ज्ञापन सौंपा गया।
आदि धर्म जागृति संस्थान के अध्यक्ष सुशील भोले, संगठन सचिव सत्यभामा ध्रुव, रायपुर जिला प्रभारी कृष्ण कुमार वर्मा, भोलेश्वर साहू, वेंकटेश्वर वर्मा आदि ने आज मुख्यमंत्री के निवास पर उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि जिस तरह कुंभ के नाम पर यहां की मेला-मड़ई की संस्कृति को बिगाड़ने का प्रयास किया गया था, ठीक ऐसा ही यहां की मूल संस्कृति और इतिहास के लेखन में भी गड़बड़ किया गया है, जिसे यहां के मूल निवासी वर्ग के विद्वानों एवं लेखकों के मार्गदर्शन में नये सिरे से लिखा जाना चाहिए।

Saturday, 12 January 2019

छत्तीसगढ़ के 36 गढ़.।.

छत्तीसगढ़ के 36 गढ़...
छत्तीसगढ़ में कलचुरी शासन में कलचुरियों ने दो शाखाएं बनाई थीं। शिवनाथ के उत्तर में रतनपुर शाखा और दक्षिण में रायपुर शाखा। इन दोनों ही शाखाओं में 18-18 गढ़ थे। दोनों शाखाओं के संयुक्त इन्हीं 36 गढ़ों के नाम पर ही हमारे इस प्रदेश का नाम छत्तीसगढ़ प्रदेश माना जाता है।
आइए जानें उन 36 गढ़ों के नाम......
रतनपुर शाखा के अंतर्गत...
रतनपुर, विजयपुर, खरोद, मारो, कोटगढ़, नवागढ़, सोंधी, ओखर, पडरभठ्ठ, सेमरिया, मदनपुर, लाफा, कोसागाई, केंदा, मातीन, उपरौरा, पेंड्रा, कुरकुट्टी।
रायपुर शाखा के अंतर्गत.....
रायपुर, पाटन, सिमगा, सिंगारपुर, लवन, अमीर, दुर्ग, सारधा, सिरसा, मोहदी, खल्लारी, सिरपुर, फिंगेश्वर, सुवरमाल, राजिम, सिंगारगढ़, टेंगनागडझ, अकलवाड़ा।

Thursday, 10 January 2019

आदि धर्म जागृति संस्थान ल सहयोग कर सकथव.....

"आदि धर्म जागृति संस्थान" ल सहयोग कर सकथव.....
छत्तीसगढ़ के मूल धर्म-संस्कृति,भाखा, इतिहास, गौरव अउ जम्मो अस्मिता के आरुग चिन्हारी खातिर जमीनी बुता म भीड़े "आदि धर्म जागृति संस्थान" संग खांध म खांध मिला के जुड़े अउ आर्थिक रूप ले सहयोग कर हमर कारज म बढ़ोत्तरी दे खातिर हमर बैंक खाता म सहयोग राशि जमा कर सकत हव।
बैंक अउ खाता के विवरण-
खाताधारी का नाम - आदि धर्म जागृति संस्थान, रायपुर
Account - aadi dharm jagriti sansthan, raipur
बैंक - बैंक ऑफ बड़ौदा
Bank of Baroda
शाखा - जी. ई. रोड, रायपुर
Branch : G E Road, RAIPUR
IFSC : BARB0GEROAD (नोट- IFSC code का पांचवां अंक 0 शून्य है)
Account Number : 31810100008718
अउ जादा जानकारी खातिर संस्था के रायपुर स्थित कार्यालय या मोबा. नं. 9826992811 म गोठबात कर सकथव😊
धन्यवाद...💐 सादर जोहार💐