विचार//
छत्तीसगढ़ी लेखन म शब्द अउ विषय के चयन..
वइसे तो छत्तीसगढ़ी ल शिक्षा संग राजकाज अउ रोजगार के भाखा बनाए के माँग गजब दिन के चलत हे, फेर जब ले छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के गठन इहाँ होए हे, तब ले ए माँग ह बनेच जोर धरे हे. फेर मोर मन म कभू इहू बात उठथे, के का छत्तीसगढ़ी म आज हमर जगा अतका साहित्य या लेखक हे, जेन ए जम्मो क्षेत्र के माँग अउ आवश्यकता ल वोकर गरिमा के अनुरूप पूरा कर सकथे?
अभी देखे ए जाथे के सिरिफ कविता, कहानी, कुछ लेख अउ व्यंग्य आदि मनला ही छत्तीसगढ़ी के पूरा के पूरा साहित्य मान लिए जाथे. त का अतकेच भर म समाज अउ शासन के हर वर्ग अउ क्षेत्र के आवश्यकता ल पूरा करे जा सकथे?
मोला सुरता हे, रायपुर म एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार के संपादक संग हमर मनके चर्चा होए रिहिसे, तब उन कहे रिहिन हें, के उन रोज एक पेज छत्तीसगढ़ी म छापे बर तैयार हें, फेर शर्त ए हे के एकर बर वो सबो विषय के भरपूर मटेरियल आना चाही, जेकर ले एक दैनिक अखबार के जम्मो वर्ग के पाठक मनला पढ़ाए अउ संतुष्ट करे जा सकय.
एक अखबार ह एक सामान्य रिक्शा चलाने वाला ल लेके बड़े-बड़े अधिकारी, कर्मचारी, डॉक्टर, वकील, व्यापारी, अर्थशास्त्री, इंजीनियर, वैज्ञानिक, युवा, महिला अउ लइका मन के संगे-संग राजनेता मनला घलो अपन डहार आकर्षित करे खातिर उंकर पसंद के अनुरूप सामग्री छापथे. हमन ल अइसन जम्मो विषय म रोज भरपूर अउ एक प्रतिष्ठित अखबार के गरिमा के अनुरूप सामग्री, जेमा संबंधित विषय मन म लेख अउ समाचार उपलब्ध कराए बर कहिस. हमन बहुत झन साहित्यकार मन संग चर्चा करेन अउ ए सब तमाम विषय म लिखे बर कहेन, फेर वोकर बर अपेक्षा के अनुरूप न सामग्री मिलिस न लोगन.
एक अउ बार हमन छत्तीसगढ़ी म राजनीतिक मासिक पत्रिका निकाले के उदिम करेन. मात्र एक-दू अंक ही निकाल पाएन, तहाँ ले भइगे. एकरो असली कारण उही रिहिसे. पत्रिका के मांग अउ गरिमा के अनुरूप भरपूर सामग्री के नइ मिल पाना. कतकों साहित्यकार मनला जोजियावन फेर नतीजा शून्य.
अब आप बतावव, सिरिफ सरकार ऊपर लाठी धर के भीड़े भर म ए सब आवश्यकता ह पूरा हो सकथे का? का हमन ल इहू डहार चेत करे के अउ म अपन लेखन के रद्दा ल वो सब दिशा अउ विषय डहार लेगे के जरूरत नइए? सिरिफ कविता-कहानी भर म अरझे रहिबो, त फेर समाज के हर वर्ग के लोगन के साहित्यिक आवश्यकता ल कइसे पूरा कर सकबो?
अइसन तमाम विषय मन म भरपूर लेखन के संगे-संग हमन ल भाखा के एकरूपता डहार घलो चेत करे बर लागही. एक नान्हे शब्द हे- 'अउ' एला लोगन कतका किसम ले लिखथे देखव- कोनो 'अउ' कोनो 'अऊ' त कोनो 'आउ', 'आऊ', 'अव', 'अउर', 'औ', 'आव'. अइसने कतकों शब्द हे जे मन ल जम्मो लेखक मन ल एक किसम ले लिखे के जरूरत हे. हमन ल शासन ऊपर छत्तीसगढ़ी ल शिक्षा, राजकाज अउ रोजगार के भाखा बनाए के दबाव तो बनाएच बर लागही, संगे-संग तमाम विषय अउ क्षेत्र के लोगन मन के साहित्यिक आवश्यकता ल घलो पूरा करे बर लागही तभे छत्तीसगढ़ी ह चारों मुड़ा सर्वमान्य भाखा के रूप म स्थापित हो पाही, सम्मान पा सकही.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
Thursday, 2 December 2021
छत्तीसगढ़ी लेखन म विषय अउ शब्द चयन
Sunday, 7 November 2021
शीला बिनई अउ लाड़ू खवई
सुरता//
शीला बिनई अउ भक्का लाड़ू के खवई...
जाड़ के आगमन के संग छत्तीसगढ़ के खेत-खार म धान लुवइया मन के आरो मिले लगथे. जेती देखव तेती हंसिया डोरी धरे किसान परिवार के सदस्य अपन-अपन उदिम म भीड़े दिख जाथें. कोनो ओरी धर के धान लु-लु के करपा रखत दिख जथे, त कोनो करपा मनला सकेल-सकेल के बोझा बांधत, त कोनो ओ बंधे बोझा मनला एक जगा सकेल के छोटे खरही असन रचत. इही बीच म घर-परिवार के छोटे-छोटे लइका मन किंजर-किंजर के शीला बीनत.
ए बड़ा मोहक दृश्य होथे. हर गाँव म अउ हर खार म अइसन मनभावन नजारा देखब म आथे. हमूं मन जब गाँव म राहन, त प्रायमरी ले लेके मिडिल स्कूल के पढ़त ले ए उदिम म मगन राहन. बिहनिया स्कूल जाए के पहिली तीर-तखार के खेत म धमक देवन, अउ संझा स्कूल ले लहुटे के पाछू थोक दुरिहा के खेत मन म घलो अभर जावत रेहेन.
धान लुवई ले लेके शीला बिनई अउ बढ़ोना बढ़ोई ले लेके धान मिंज के ओसाई अउ ओला कोठी म सहेजई तक अइसन बेरा होथे, जब इहाँ के किसान मन म औघड़दानी के रूप सहज देखे जा सकथे. हमन जब शीला बीने बर जावन त ए जरूरी नइ राहय के अपनेच खेत म जावन. जेने खेत म बोझा बांधे के बुता चलत राहय, उहिच म अभर जावन. खेत वाले मन घलो हमन ल देखय, तहाँ ले पढ़इया लइका मन आए हे कहिके जान-बूझ के बोझा ले धान ल गिरा देवंय, तेमा हमन ल आसानी के साथ जादा ले जादा शीला मिल सकय. कतकों खेत वाले मन तो हमन ल आज अपन खेत ले बोझा डोहारबो कहिके अपनेच मन संग गाड़ा बइला म बइठार के लेग जावंय, अउ शीला बीने के बाद लहुटती म गाड़ा म बइठार के बस्ती डहार लान देवंय घलो. जेन दिन बढ़ोना बढ़ोवंय, तेन दिन तो बढ़ोना के पूजा-नेंग के बाद खीर सोंहारी चघावंय, तेला खाए बर घलो देवंय.
स्कूल के छुट्टी राहय, तेन दिन हमर मनके गदर राहय. बस बिहनिये नहाए-धोए के बाद खेत के रद्दा. हमर मन के चार-पांच लइका के टोली राहय. इतवार या छुट्टी के दिन शीला बीने के संगे-संग खारेच म पिकनिक घलो मनावन. सबो लइका अपन अपन घर ले रांधे-गढ़े के जिनिस धर के लेगन. ए सीजन म तींवरा भाजी घलो बने फोंके-फोंक ल सिलहो के रांधे के लाइक हो जाए रहिथे, तेकर चिखना तो बनाबे करन. बोइर मन घलो गेदराए ले धर ले रहिथे, वोकरो मन के पोठ मजा लेवन. हमर गाँव म खार के बीचोबीच कोल्हान नरवा बोहाथे. एकर दूनों मुड़ा के कछार म जाम के कटाकट बारी हावय. अउ इही जाड़ के दिन ह एकर सीजन आय. जम्मो बारी मन म गौंदन मता देवत रेहेन. उहाँ साग-भाजी अउ कतकों जिनिस के खेती होवय. सबके मजा ओसरी-पारी लेते राहन.
शीला बीने ले जेन धान मिलय, तेला बने गोड़ म रमंज-रमंज के मिंजन अउ सकेलन. कमती राहय तेन दिन पसरा वाली घर जाके कभू मुर्रा, त कभू मुर्रा लाड़ू अउ कभू लाई के बने भक्का लाड़ू के सेवाद लेवन, अउ कोनो दिन शीला ह थोक जादा सकला जावय, तेन दिन वोला दुकान म बेंच के इतवार के पिकनिक खातिर जोखा करन.
फेर अपन लइकई के ए सब बात ल गुनथन, अउ आज के दृश्य ल देखथन त एमन अब सिरिफ सपना बरोबर लागथे, काबर ते आज वैज्ञानिक आविष्कार के चलत खेतिहर मजदूर मन के जगा बड़े बड़े ट्रैक्टर अउ हार्वेस्टर ह जगा ल पोगरा लिए हे. न तो खेत म बने गढ़न के धान लुवइया दिखय, न बोझा बंधइया अउ न शीला बिनइया. हाँ कभू-कभू उहू जुन्ना दृश्य मन घलो एती-तेती दिख जाथे, फेर बहुत कम संख्या म.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
Wednesday, 3 November 2021
मातर मड़ई के जोहार
मातर मड़ई के जोहार...
हमर छत्तीसगढ़ म देवारी परब ल तीनेच दिन के मनाए जाथे. कातिक अमावस के सुरहुत्ती अउ गौरा-ईसरदेव बिहाव परब. बिहान भर नवा खाई (अन्नकूट) अउ गोवर्धन पूजा अउ वोकर बिहान भर मातर परब. हमर इहाँ के परंपरा म मातर के दिन ही मड़ई जगाए के परंपरा ल घलो पूरा करे जाथे, तहाँ ले एकरे संग मड़ई अउ मेला के सरलग उमंग उत्साह चालू हो जाथे, जेहा महाशिवरात्रि म जाके पूरा होथे.
हमर गाँव म गोवर्धन पूजा के बिहान भर मातर परब मनाए के रिवाज हे. गांव भर के जतका गरुवा मन के बरदी हे, सबो ल दइहान ठउर म सकेले जाथे अउ जब गांव भर के लोगन सकला जथें, त फेर वो सकलाए सबो गरुवा मनला वो जगा आंवर-भांवर घुमाए जाथे. ए बेरा म गाँव के पहाटिया समाज डहर ले दइहान ठउर म एक पूजा स्थल बनाए जाए रहिथे, जेला कतकों झन खुड़हर देव स्थापना करना घलो कहिथें. ये खुड़हर देव स्थापना या पूजा ठउर बनाए के बुता ल गोवर्धन पूजा के दिन ही पूरा कर लिए जाए रहिथे. उही मेर बोकरा के बली दिए के नेंग ल घलो पूरा करे जाथे. कतकों बछर बोकरा के बली के बलदा कोंहड़ा ल काटत घलो देखे हावन. अपन विशेष मयारुक गाय या भइंस ल वोमन ए बेरा म सोहाई घलो बांधथें.
इही दिन हमर इहाँ मड़ई मनाए के घलो परंपरा हे. जानकर मन के अइसन कहना हे, के मड़ई ल खरीफ फसल के लुआए के बाद वोकर उल्लास के रूप म मनाए जाथे. एला अलग- अलग गाँव म अलग-अलग दिन मनाए जाथे, तेमा आसपास के दूसर गाँव वाले मन घलो अपन अपन गाँव के मड़ई ल धर के ए उल्लास म संघर सकंय. एकरे सेती गाँव के बइगा ह पंच सरपंच अउ आने सियान मन संग दिन तिथि जोंग के तीर तखार के सबो गाँव म एकर आरो कराथे.
हमर गाँव नौकरीपेशा वाले गाँव आय तेकर सेती मातर के दिन ही मड़ई के आयोजन करे जाथे, तेमा रोजी रोजगार वाले मन मड़ई मना के बिहान भर अपन अपन बुता म संघर सकंय.
मड़ई म गाँव के जतका ग्राम्य देवता होथे, वोकरे मन के नांव म अलग-अलग मड़ई उठाए जाथे. ए सबमें एक माई मड़ई घलो होथे, जेला माई मड़ई या कंदई मड़ई घलो कहिथें. हमर गाँव म ए माई मड़ई ल मछिन्दर बबा ह उठावय. गाँव म हमरे पारा म उन राहंय. उंकर असली नांव ल तो कभू जान नइ पाएन, हमन तो उनला मछिन्दर बबा अउ उंकर सुवारी ल मछिन्द्रिन दाई ही काहन. वोमन जात के केंवट रिहिन. उंकर मनके सरग सिधारे के बाद उंकर वंशज मन ही ए परंपरा के निर्वाह करथें.
अइसे कहे जाथे, के मड़ई ह अच्छा फसल होए के उल्लास म ही मनाए जाथे. अउ अच्छा फसल जब वरुण देवता प्रसन्न होके भरपूर पानी बरसाथे, त होथे. एकरे सेती मड़ई परब के माई मड़ई ल केंवट या ढीमर समाज के लोगन ही उठाथें, काबर ते एमन वरुण देवता के उपासक होथें, अइसे माने जाथे.
मातर मड़ई के परब म राउत समाज के भागीदारी अउ उत्साह ल देखतेच बनथे. एकर मन के बिना ए परब के रौनक के कल्पना घलो अबीरथा हे. जब राउत भाई मन अपन विशेष संवागा कर के गंड़वा बाजा संग दोहा पारत नाचथें, त अद्भुत दृश्य उपस्थित हो जाथे...
पान खायेन सुपारी मालिक,
सुपारी के दुई कोर.
तुम तो बइठो रंगमहल में,
जोहार लेवव मोर.
अवत दिएन गारी गोढ़ा
जावत दिएन असीस.
दूधे खाव पूते बिहाव,
जीयव लाख बरीस.
मातर परब संग मड़ई जागरण के जोहार अउ बधाई 🙏🌹😊
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
सुरहुत्ती के दीया..
सुरहुत्ती के दीया...
कातिक अमावस के मनाए जाने वाले परब ल हमर छत्तीसगढ़ म 'सुरहुत्ती' के नॉव ले जाने जाथे. सुरहुत्ती के दिन हमर इहाँ 'दीपदान' या कहिन के दीया चघाय के परंपरा हे. गाँव के नान्हे लइका मन ए दिन अपन तीर-तखार के जम्मो लोगन, पारा-परोसी अउ नता-रिश्ता जम्मो घर जा-जा के उंकर घर के तुलसी चौरा या अउ कोनो पबरित जगा म बरत दीया ल ले जाके मढ़ाथें. ए दिन घर के सियान मन लइका मनला कुंआ, तरिया, मंदिर-देवाला, घर के जम्मो खास-खास ठउर के संगे-संग बारी-बखरी अउ खेत के मेड़ मन म घलो दीया चढ़ाय खातिर कहिथें.
ए बेरा म पहिली जेन दीया बनाय जाय वोहा धान के नवा फसल ले निकले चांउर पिसान के बनाए जाय. अब धीरे-धीरे ए परंपरा म बदलाव देखे बर मिलत हे. अब तो लोगन माटी के बने दीया ले ही काम चला लेथे. मोला सुरता हे. हमन जब लइका राहन त पिसान के जेन दीया चघाय राहन, वोहा बाती म जल के सेंकाय असन हो जावय तेकर तेल ल झर्रा के खा घलो देवत रेहेन. ए रतिहा सियान मन हमन ल रात भर जागे बर काहय, त रात भर जागे बर कतकों किसम के उदिम करत राहन, जेमा पिसान के सेंकाय दीया मनला चारों मुड़ा किंजर-किंजर के खाना, जुआ ठउर मन म जाके जुआ खेले बर भिड़ जाना या खेलइया मनला ठाढ़ होके देखत रहना. गौरा-ईसरदेव बिहाव के बाजा गदकय तहाँ ले उहू डहार जाके 'एक पतरी रैनी- बैनी... अउ भड़भड़ बोकरा.. ' कहिके हुंत करावत लोगन मन संग संघर जाना, सब शामिल राहय.
हमर इहाँ नवा फसल ल अपन ईष्टदेव ल समर्पित करे के परंपरा हे, जेला इहाँ 'नवा खाई' के रूप म जाने जाथे. हमर छत्तीसगढ़ म ए नवा खाई के परंपरा ल अलग अलग समाज के लोगन तीन अलग अलग बेरा म मनाथें. इहाँ के ओडिशा सीमा ले लगे लोगन जेन उत्कल संस्कृति ल जीथें वोमन एला ऋषि पंचमी के मनाथें. गोंडी संस्कृति ल जीने वाले मन एला दशहरा के पहिली अष्टमी/नवमी के मनाथें अउ मैदानी भाग के लोगन देवारी परब म अन्नकूट के रूप म नवा खाई मनाथें.
सुरहुत्ती परब म जेन नवा फसल के पिसान के दीया बनाए जाथे, उहू ह इही परंपरा के एक किसम के निर्वहन आय.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811
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सुरहुत्ती के दीया ...
कार्तिक अमावस्या को मनाया जाना वाला पर्व दीपावली छत्तीसगढ़ में सुरहुत्ती के नाम पर जाना जाता है। इस अवसर पर यहाँ दीपदान की परंपरा है। गांव के छोटे-छोटे बच्चे अपने आसपास और परिचितों के घरों में एक छोटा सा जलता हुआ दीपक लेकर जाते हैं, और उनके यहां के तुलसी चौंरा पर या किसी अन्य पवित्र स्थल पर उसे रख आते हैं। घर के मुखिया बच्चों को कुंआ, तालाब, मंदिर, घर के प्रमुख स्थलों और बाड़ी एवं खेतों आदि में भी दीया रखने के लिए निदेर्शित करते हैं।
इस अवसर पर जो दीपक बनाया जाता है, वह धान की नई फसल से प्राप्त चावल के आटे से बना होता है, लेकिन नई पीढ़ी के लोग इस बात को विस्मृत करते जा रहे हैं। इसलिए वे मिट्टी से बने हुए दीपक या अन्य साधनों से बने दीए का इस्तेमाल कर लेते हैं।
ज्ञात रहे हमारे यहां नई फसल को अपने ईष्टदेव को समर्पित कर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है, जिसे हम *नवा खाई* के नाम पर जानते हैं। यहां नवा खाई को तीन अलग-अलग अवसरों पर मनाने का रिवाज है। कई लोग ऋषि पंचमी के अवसर पर नवा खाई मनाते हैं, कई दशहरा के अवसर पर मनाते हैं और कई दीपावली के अवसर पर।
सुरहुत्ती के अवसर पर नई फसल से प्राप्त चावल के आटे से बनाये जाने वाला दीपक भी इसी परंपरा का निर्वाह है। हम लोग जब गाँव में रहते थे. इसी नए चावल के बने दीये को बुजुर्गों के द्वारा निर्देशित स्थानों पर रखते थे. और जब दीया अपनी रोशनी बिखरने के पश्चात शांत हो जाते थे. तब हम लोग उस चावल आटे के दीए को, जो तेल और बाती से जलने की प्रक्रिया में एक प्रकार से रोटी की तरह सिंक से जाते थे. उसे उठाकर हम लोग बड़े चाव के साथ खा जाया करते थे.
* सुशील भोले -9826992811
Monday, 1 November 2021
धनतेरस पर करें अन्नपूर्णा का स्वागत..
इस धन तेरस करें अन्नपूर्णा का स्वागत...
आज "धन तेरस" है। शुभ मुहूर्त के नाम पर पूरा बाजार सज गया है. इसे धर्म और भावनाओं से जोड़कर व्यापारी व मीडिया के लोग आम जनता को ऐसे गुमराह करते हैं, जैसे धनतेरस के शुभ मुहुर्त में सामान खरीदने पर साल भर फिर कमाना ही नहीं पडे़गा. जैसे टी वी पर दिखाया जाता है, कि धन तेरस को सुबह दस बजे से रात ग्यारह बजे तक खरीदारी का शुभ मुहुर्त है। घंटे दो घंटे का नहीं, और आपके घर पर कोई आवश्यक काम हो तब यही लोग सिर्फ मिनटों का मुहुर्त बताते हैं, लेकिन यहाँ दिन भर का इसलिए बताते हैं ताकि व्यापारियों को अधिक से अधिक लाभ हो।
बाजार सज गये हैं। करोड़ों की बिक्री के आसार हैं। लोगों में खरीदारी के प्रति भारी उत्साह दिख रहा है। नकली व अनुपयोगी चीजें भी बेचने का दिन है यह धन तेरस। कोई टी वी वाला यह नहीं कहता है कि बाजार में नई फसल आ गयी है- गेहूँ, मूंग, मोठ, बाजरी व चंवला आ गये हैं, इनको किसान के घर जाकर साल भर के लिए खरीदना बहुत ही शुभ है। इनका काम है धर्म के नाम पर लोगों में डर पैदा कर व्यापारियों को लाभ पहुंचाना।
यही कारण है कि बाजार में रिडेक्शन के सामान की दुकानें सज गई हैं. शुभ दिन को घर में सामान लाने के लिए लोगों ने पूर्ण तैयारियाँ कर रखी हैं. धनतेरस को बाजार में इतनी भीड़ रहती है कि न तो व्यापारी के पास भाव ताव करने का समय रहता है, और न ही वस्तु को दिखाने का. इसलिए आओ, खरीदो, पैसे दो और जाओ. माल कैसा है घर जाकर देखो. आप को खरीदना ही है तो दीपावली के बाद ठोक बजाकर माल खरीदो बहुत शुभ है. यह तो व्यापारियों और धर्म के नाम पर गुमराह करने वालों ने धनतेरस को अपने धन्धे से जोड़ दिया है.
असल में तो इस दिन नये मूंग, मोठ, चावल धान, गेहूँ, बाजरी और तिल तिलहन आदि खरीद कर बारह महीने का स्टॉक करके किसान व अनाज की पूजा करनी चाहिए. घर में पेट भरने को अनाज आ जाये और अन्नदाता किसान के दर्शन हो जाये इससे अधिक शुभ और क्या हो सकता है?
तो आइए, आज से हम कृषि उपज के रूप में अन्नपूर्णा का स्वागत करें. सही मायने में धनतेरस मनाएं.
धन्यवाद.. जोहार...
Saturday, 30 October 2021
शिक्षा संग सेवा के अलख .. सीमा वर्मा
प्रेरक कारज//
शिक्षा संग सेवा के अलख जगावत सीमा वर्मा
बिना कोनो समिति या संस्था संग जुड़े बिना या संस्था बनाए के उदिम ले बांचे बिना घलो कइसे जनसेवा के कारज करे जा सकथे, एकर एक अच्छा अउ ठउका उदाहरण हे सीमा वर्मा.
बिलासपुर शहर के कौशलेन्द्र राव काॅलेज म एलएलबी अंतिम बछर के पढ़ई करत सीमा ल अपन संग पढ़ई करत दिव्यांग नोनी सुनीता यादव ल देख के वोकर खातिर इलेक्ट्रॉनिक ट्राईसाईकिल के विचार आइस.
बात दिसंबर 2015 के आय तब तक सुनीता यादव हाथ ले चलइया ट्राईसाईकिल म लट्टे-पट्टे काॅलेज आ पावत रिहिसे. वोकर ए दशा ल देख के सीमा के मन म वोला इलेक्ट्रॉनिक ट्राईसाईकिल देवाए के भाव जागिस. अइसने किसम वो ह पाछू पांच बछर म 13 हजार ले जादा पढ़इया लइका मन ल कापी-किताब देवा डारे हे. अभी 12 वीं तक के 34 पढ़इया लइका मन के पूरा पढ़ई के खरचा उठवत हे, संगे-संग 50 अउ लइका मनला बिना पाइसा लिए शिक्षा के अंजोर म संघारत हे.
एक भेंट म सीमा बताइस के दिसंबर 2015 म अपन संग पढ़त दिव्यांग नोनी सुनीता यादव ल इलेक्ट्रॉनिक ट्राईसाईकिल देवाय के जब मन म भाव जागिस, त काॅलेज के प्रिंसिपल जगा ए बात ल रखिस. प्रिंसिपल वोला हफ्ता भर बाद आए बर कहिस. तब सीमा गुनिस के बाजार म घलो पूछ लिए जाए के ट्राईसाईकिल कतका म मिल जाथे, तेमा काॅलेज के अउ सब पढ़इया संगी मन संग चंदा बटोर के सुनीता बर ट्राईसाईकिल लिए जा सकय.
सीमा अपन काॅलेज ले निकल के ट्राईसाईकिल के जानबा करे खातिर निकलिस. शहर के साइकिल दुकान मन म गेइस त बताइन, के मेडिकल काम्प्लेक्स म मिलही. उहाँ ले वोला जानकारी मिलिस के 35 हजार रु. म मिलथे, फेर एकर पहिली आर्डर दे बर लागथे. दिल्ली के आवत ले छ: महीना असन लाग जाथे.
उहाँ ले निकल के सीमा एक साइकिल पंचर बनइया के दुकान गेइस, त वोकर ले जानकारी मिलिस के सरकार ह तो अइसन किसम के लोगन ल नि:शुल्क देथे. एकर खातिर जिला पुनर्वास केन्द्र जाना चाही उहाँ कुछ जरूरी कागजात जमा करे बर लागथे, फेर ए प्रक्रिया म 6 महीना या साल भर तो लागिच जाही.
फेर सीमा चाहत रिहिसे, के ए कारज जतका जल्दी हो जावय वतके बने हे. त फेर वो पंचर बनाने वाले ह जिला के कलेक्टर या कमिश्नर संग भेंट करे के सुझाव दिस अउ इहू बताइस, के कमिश्नर साहब गजब कोंवर दिल अउ भावना वाला मनखे आयं, वो मन तुंहला झट मदद कर देहीं. तब सीमा कमिश्नर कार्यालय पहुंचिस अउ उहाँ के संबंधित अधिकारी मनला सुनीता के संबंध म पूरा जानकारी दिस. तब उहाँ आवश्यक कागजात जमा करे बर कहे गिस. अइसे किसम तब के कमिश्नर सोनमणि बोरा के हाथ ले सुनीता यादव ल इलेक्ट्रॉनिक ट्राईसाईकिल मिल पाइस.
सीमा बताइस, के ए पूरा घटनाक्रम म वोहा तीन बात सीखिस- पहला, कहूँ वो ह घरेच म बइठे रहितिस त वोकर सहेली ल ट्राईसाईकिल नइ मिल पातिस. दूसरा, कहूँ पंचर बनइया ह वोला नइ बतातिस त वोला सरकार के अइसन योजना के जानकारी नइ मिलतिस, जेमा दिव्यांगजन खातिर अइसन योजना चलथे. तीसरा अउ खास बात, सरकार के कतकों जनकल्याणकारी योजना हे, जेकर हमला जानकारीच नइ राहय. अइसन जानकारी आम लोगन तक पहुंचना चाही, जेकर बर हर जागरूक मनखे ल अपन तीर-तखार के जरूरी मनखे ल वोकर बारे म बताए जाना चाही.
पढ़इया लइका मनला कापी-किताब देवाय के बारे म सीमा बताइस- बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना खातिर एक-एक पइसा सकेल के वोला बनाए गे रिहिसे. मोला जब एकर जानकारी मिलिस, तब महूं 10 अगस्त 2016 ले एक रुपया अभियान चालू करेंव, जेकर चलत आज 13 ले जादा पढ़इया लइका मनला उंकर पढ़ई-लिखई के जरूरी जिनिस देवा पाएन. सीमा बताइस, अभी तक वो ह करीब 2 लाख 34 हजार रु. सकेल डारे हे, जेकर ले लइका मन के फीस भरथे. हमर ए अभियान ले प्रभावित होके कतकों अधिकारी अउ लोगन लइका मन ल गोद लेके उंकर शिक्षा के जम्मो व्यवस्था ल करथें.
एकर संगे-संग लइका मनला अउ कतकों किसम के उपयोगी अउ कानूनी जानकारी देवत रहिथें. उन बताइन- अभी विश्वव्यापी महामारी कोरोना के सेती जेन लाॅकडाउन चलत रिहिसे, तेकर सेती स्कूल- काॅलेज बंद होगे रिहिन हें. अइसन बेरा म घलो हमन लइका मनला योग क्लास, वार्षिक समारोह के तर्ज म डांस प्रतियोगिता, ड्राइंग प्रतियोगिता के संगे-संग अउ कतकों गतिविधि म संलग्न राखन.
ए सब गतिविधि मन के चलत सीमा वर्मा ल चारों मुड़ा ले लोगन के दुलार अउ सराहना के संगे-संग कतकों किसम के राष्ट्रीय अउ प्रादेशिक पुरस्कार मिलत रहिथे. शुभकामना हे, उंकर ए मुहिम आगू बढ़ते राहय. लोगन उंकर ले प्रेरणा लेके अपन अपन क्षेत्र म जरूरी लोगन मन के सेवा, सहयोग अउ मार्गदर्शन करत राहंय.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्ह. 9826992811
Tuesday, 19 October 2021
छत्तीसगढ़िन बेटी बुल्लेट सवारी..
छत्तीसगढ़िन बेटी के बुल्लेट सवारी
आरुग छत्तीसगढ़ी सवांगा पहिरे प्रभा ठाकुर जब 500cc के बुल्लेट मोटर साइकल म चढ़ के दूनों हाथ ल छोड़ के पल्ला कूदाथे, त देखनी हो जाथे. अतकेच भर नहीं, वो ह एकर संगे-संग 1942 के विलीज माडल जीप म घलो स्टंट करई ल भाथे. संग म तौरई, दौड़ई अउ जम्मो आने खेल अउ कला प्रतिभा के घलो जौहर देखाथे.
दुरुग जिला के धमधा तहसील के गाँव टठिया के पिता बिरेंद्र बहादुर सिंह राजपूत अउ महतारी चमेली सिंह राजपूत के घर 25 जून 1967 के जनमे प्रभा ठाकुर एक एथलीट के रूप म अब तक 25 ले जादा राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रतियोगिता मन म भाग ले डारे हें. एकरे छोड़े स्थानीय स्तर के कतकों रचनात्मक उदिम मन म उन संघरते रहिथें. उंकर यूट्यूब वीडियो के 17 लाख ले जादा व्युव्स हे.
उंकर सियान भिलाई इस्पात संयंत्र म अधिकारी रिहिन हें, तेकर सेती उंकर पढ़ना-लिखना घलो भिलाई म ही होइस. गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 2 ले उन हायर सेकेंडरी पास करे के पाछू कल्याण महाविद्यालय भिलाई ले हिन्दी साहित्य म एमए करिन.
छात्र जीवन ले ही उंकर एथलीट के रूप म जबर जुड़ाव रेहे हे, एकरे सेती 1984 म इंडियन पंजा कुश्ती (40 किग्रा) में राष्ट्रीय रैंक 1, 1986 म 21 किमी पुणे अंतर्राष्ट्रीय मैराथन म अंतर्राष्ट्रीय रैंक 5 वां रैंक, 1989 म 21 किमी दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मैराथन म अंतर्राष्ट्रीय रैंक 2, 1985 म पावर लिफ्टिंग म राष्ट्रीय रैंक छठवां, 1985 अउ 1987 म दिल्ली म गणतंत्र दिवस परेड म घलो भागीदारी निभाइन. 1987 म दिल्ली म दिवस परेड म 3 किमी मैराथन म राष्ट्रीय रैंक दूसरा स्थान पाइन.
प्रभा जी एक भेंट म बताइन के खेल के संग-संग कला डहार घलो उंकर झुकाव रिहिसे. कक्षा 11 वीं तक उन सितार वादन के कोर्स करे हें. एकर संगे-संग स्कूल म होवइया सामूहिक गीत अउ नृत्य के कार्यक्रम मन म घलो बढ़ चढ़ के हिस्सा लेवंय. उन बताइन, अभी रायपुर के फिलिम बनइया जसबीर कोमल के एक फिलिम "मोला उहिच लड़की चाहिए बात खत्म" म चरित्र अभिनेत्री के रोल करत एक अपहृत होवइया लड़की ल बचाए के भूमिका निभाही, जेमा उन जबरदस्त फाइट करत नजर आहीं.
आज 54 बछर के उमर म घलो उंकर कला अउ जम्मो खेल मन के प्रति लगन ल देख के गजब खुशी होथे. उंकर उज्जवल भविष्य के शुभकामना संग बधाई..
छत्तीसगढ़िन बेटी के देख ले बुल्लेट सवारी
प्रभा ठाकुर के अब तो इही बनगे हे चिन्हारी
जीप संग कतकों खेल म वो करतब देखाथे
दूनों हाथ ल छोड़ के जंउहर फटफटी कूदाथे
देश-राज जम्मो डहर वोकर सोर होगे भारी
छत्तीसगढ़िन बेटी के देख ले बुल्लेट सवारी
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811