Saturday, 28 June 2025

सुशील भोले साक्षात्कार -केके अजनबी

साक्षात्कार कर्ता :- कृष्ण कुमार अजनबी
साक्षात्कार  :- श्रीमान सुशील भोले जी 

सवाल:1.आपका शुभनाम और तखल्लुस, जन्म कब, कहाँ, शिक्षा-दीक्षा, पिता-माता व पारिवारिक पृष्ठ-भूमि पर विस्तार से जानकारी दीजिएगा  ?

जवाब:1 शासकीय अभिलेख में मेरा नाम है- सुशील कुमार वर्मा
सार्वजनिक जीवन में प्रचलित नाम- सुशील भोले है , लेकिन यह साहित्य वाला या कहें तखल्लुस नहीं है. दरअसल यह आध्यात्मिक दीक्षा के पश्चात गुरु के द्वारा दिया गया नाम है।
मेरा जन्म भाठापारा शहर में 2 जुलाई सन् 1961 को हुआ था. माता जी का नाम श्रीमती उर्मिला देवी और पिताजी का नाम श्री रामचंद्र वर्मा है.
प्रारंभिक शिक्षा भाठापारा शहर में ही हुई, फिर मेरे पैतृक गाँव नगरगाँव थाना-धरसींवा, जिला-रायपुर में और फिर उसके पश्चात छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में. पिताजी शिक्षक थे साथ व्याकरण के अच्छे जानकार भी थे. उनकी लिखी हुई किताब प्राथमिक हिंदी व्याकरण एवं रचना उस समय संयुक्त मध्यप्रदेश के पाठ्यपुस्तक में कक्षा तीसरी, चौथी और पाँचवीं में पढ़ाई जाती थी. 
उनके इसी लेखकीय गुण से प्रभावित होकर ही मैं भी लेखन के क्षेत्र में आया.
   हमारी माताजी गृहिणी थीं, किंतु उन्हें छत्तीसगढ़ी लोककथाओं एवं गीतों का अद्भुत ज्ञान था. अगहन बिरस्पत, कमरछठ जैसे पर्व पर उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम स्थलों पर आमंत्रित कर उनसे कहानी सुनी जाती थी. हमारे घर पर मोहल्ले की महिलाएँ उन्हें हमेशा घेरे रहती थीं. मोहल्ले की महिला मंडली की अध्यक्ष भी रहीं.

सवाल 2. लेखन की ओर कब कैसे आकृष्ट हुए और पहली रचना कब कैसे रची गई ? क्या किसीने प्रोत्साहित किया अथवा स्वतः आत्म प्रेरित हुए  ?

जवाब 2 पिताजी को घर पर लिखते-पढ़ते देखकर लेखन की ओर मैं भी आकर्षित हुआ.
प्रारंभिक रचनाएँ तुकबंदी के रूप में हुईं जो मिडिल और हाईस्कूल के समय से ही लिखी जाने लगी थीं.

सवाल:3. आपकी पहली रचना कब, कहाँ से प्रकाशित हुई  ? प्रसन्नता तो हुई होगी ? पहली अनुभूति  कैसी रही ? 

जवाब:3 मैं सन् 1982 के अंतिम दिनों में ही दैनिक अग्रदूत प्रेस के साथ जुड़ गया था, इसलिए 1983 से ही मेरी कविता और कहानी अग्रदूत के साहित्यिक परिशिष्ट पर प्रकाशित होने लगी थी.
   उस समय अग्रदूत प्रेस में छत्तीसगढ़ के तीन बड़े पत्रकार और साहित्यकार सर्वश्री स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी, विनोद शंकर शुक्ल जी और टिकेन्द्रनाथ टिकरिहा जी कार्यरत थे, मुझे उन तीनों का ही सानिध्य, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ.
   सन् 1984 से आकाशवाणी रायपुर से मेरी कविताओं का प्रसारण प्रारंभ हो गया था.

सवाल:4. कौन- कौन सी पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं छ्प चुकी हैं ? इस पर पाठकों की प्रतिक्रियाएं कैसी रही ?

जवाब:4 छत्तीसगढ़ के प्रायः अधिकांश पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

सवाल:5. साहित्य के क्षेत्र में आप कबसे जाने-पहचाने जाने लगे ? अर्थात आपको एक नई पहचान मिली ?

जवाब:5. अखबारों में छपना तो 1983 से प्रारंभ हो गया था, लेकिन मुझे विशेष पहचान तब मिली जब मैं सन् 1987 में छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रथम संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' का प्रकाशन संपादन करने लगा.

सवाल:6. किन किन विधाओं में आपकी रचनाएं उपलब्ध हैं ? वास्तव में किस विधा में आपको सफलता अधिक मिली  है ? 

जवाब:6. कविता, कहानी, व्यंग्य, संस्मरण आदि सभी विधाओं में लेखन हुआ. अब गद्य लिखना ज्यादा अच्छा लगता है. अभी सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रथम धारावाहिक 'कोंदा भैरा के गोठ' का लेखन नियमित रूप से चल रहा है.

सवाल:7. कभी साहित्य में या साहित्य से आत्मसंतोष मिला है ? अथवा  कोई गहरा अफसोस  ?

जवाब:7 मेरा साहित्य लेखन आत्मसंतुष्टि के लिए नहीं अपितु मिशन के लिए है. 
हम लोग छत्तीसगढ़ राज्य आन्दोलन से जुड़े रहे हैं, तभी से मन में यह संकल्प लिए लेखन कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए निरंतर लिखना है.

सवाल:8. किसे आप अपना आदर्श मानते हैं ? और किन किन साहित्यकारों का आपको सान्निध्य मिला ? किसी से मिलने की खास तमन्ना है ?

जवाब:8 मेरा आदर्श तो कोई नहीं है. चूंकि मैं पत्रकारिता से जुड़ा रहा हूँ, इसलिए साहित्यकारों का सान्निध्य स्वतः ही प्राप्त होता रहा. छायावाद के प्रवर्तक कवि पं. मुकुटधर पाण्डेय जी का सानिध्य प्राप्त होना मेरे लिए अविस्मरणीय है.
मेरे प्रथम काव्य संग्रह 'छितका कुरिया' के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखकर अपना आशीर्वचन दिया था, और मुझसे यह कहा भी था कि सुशील तुम पहले व्यक्ति हो जिसके लिए मैं छत्तीसगढ़ी भाषा में संदेश लिखा हूँ. मैंने भी उनके लेटरपैड पर लिखे उस संदेश का  ब्लॉक बनवाकर अपने संकलन में प्रकाशित किया था.

सवाल:9. किन किन साहित्यिक संस्थान अथवा मंच से आप सम्बद्ध रहे हैं ?

जवाब:9 छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के साथ ही रायपुर की प्रायः सभी समितियों के साथ जुड़ाव रहा.

सवाल:10. अब तक कोई विशेष उपलब्धि मिली है ? ऐसा आप मानते हैं ?

जवाब:10 मेरी छत्तीसगढ़ी कहानी 'ढेंकी' को पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में एमए छत्तीसगढ़ी के द्वितीय सेमेस्टर में पढ़ाया जाता है. चूंकि मैं छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रथम संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' का संपादक रहा हूँ, इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य में आयोजित होने वाली व्यावसायिक परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं. 

 सवाल:11.क्या आप पुरस्कार अथवा सम्मान में विश्वास रखते हैं ? कौन कौन से पुरस्कार या सम्मान से आप नवाजे जा चुके हैं ? कोई विशेष आकांक्षा हो तो बताइए ?

जवाब:11. पुरस्कार तो अनेक मिले हैं, लेकिन इसमें मेरी कोई रुचि नहीं है, क्योंकि मेरा लेखन एक मिशन के लिए है.

सवाल:12.. अगले जनम में आप क्या बनना पसंद करेंगे और क्यों ?
इस जनम से आप संतुष्ट हैं या नहीं ?

जवाब:12 मैं पूरी तरह से आध्यात्मिक व्यक्ति हूँ, इसलिए अगले जनम के बजाय मोक्ष की आकांक्षा रखता हूँ.

सवाल:13. अब तक आपकी कितनी किताबें छ्प चुकी हैं और कौन- कौन सी व कहाँ कहाँ से ? आगामी योजना आपकी क्या है ?

जवाब:13. 1. छितका कुरिया (काव्य संग्रह 1989), 2. दरस के साध (लंबी कविता 1990), 3. जिनगी के रंग (गीत एवं भजन संग्रह 1995), 4. ढेंकी (कहानी संकलन 2006, दूसरा संस्करण 2022), 5. आखर अँजोर (छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति पर आधारित आलेखों का संकलन 2006, दूसरा संस्करण 2017), 6. भोले के गोले (व्यंग्य एवं लेख संकलन 2015), 7. सब वोकरे संतान ए संगी (चार डाँड़ के संकलन 2017), 8. सुरता के संसार (संस्मरण संग्रह 2022), 9. बिहनिया के जोहार (चार डाँड़ के चित्रमय संकलन 2022), 10. कोंदा भैरा के गोठ (सोशल मीडिया का पहला धारावाहिक 2024)

सवाल:14. प्रकाशन को लेकर  कोई सुखद अनुभूति अथवा कटु अनुभव है तो बताइएगा ?

जवाब:14. छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रथम संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' का प्रकाशन संपादन मेरे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है.

सवाल:15. साहित्य मनुष्य के लिए क्या आवश्यक है अथवा एक व्यसन  मात्र ?

जवाब:15. समाज को दिशानिर्देश देते रहना ही साहित्य का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए.

सवाल:16. आपकी रूचि और किन किन में है ? समय कैसे निकाल पाते हैं ?

जवाब:16 छत्तीसगढ़ी अस्मिता से संबंधित सभी विधाओं में रुचि है. सभी के लिए थोड़ा बहुत समय तो निकल ही जाता है. 

सवाल:17. जीवन यापन हेतु आप करते क्या हैं ? नौकरी,व्यापार, कृषि या फिर अन्य कोई कर्म  ?

जवाब:17. पत्रकारिता.

सवाल:18. क्या आप अपने बच्चों को भी अपने जैसे (कवि, लेखक, शायर या साहित्यकार ) बनाना चाहेंगे ? हां तो क्यों और नहीं तो क्यों नहीं ?

जवाब:18. ऐसा कुछ भी नहीं है, लोगों को अपनी रुचि के अनुरूप कार्य करना चाहिए.

सवाल:19. क्या आप अपने आपको सफल मानते हैं ?  हाँ तो इसका श्रेय किसे देंगे ? यदि सफल नहीं हैं तो वजह क्या है ?

जवाब:19. मैं आध्यात्मिक रूप से पूर्ण सफल हूँ. इसके लिए मेरे मार्गदर्शक की अनुकम्पा ही मुख्य वजह है.

सवाल:20. आपको नहीं लगता कि आज की पीढ़ी किताब से दूर भाग रही है ? अर्थात पढ़ने में रूचि कम हो गई है ? इसका कारण क्या हो सकता है ?

जवाब :20. अब ज्ञान और मनोरंजन के लिए अनेक साधन आ गए हैं, इसलिए स्वभाविक तौर पर लोग किताबों से दूर हो रहे हैं. 

सवाल:21. मनोरंजन के साधनों (टीवी, फेसबुक, इन्टरनेट व मोबाइल ) को आप साहित्य का सहायक मानते हैं या वाधक और कैसे ?

जवाब: मेरे लिए ये सभी आविष्कार वरदान से कम नहीं हैं. चूंकि मैं 24 अक्टूबर 2018 से लकवा ग्रस्त हूँ, ऐसे में यही आविष्कार मेरे लिए जीने, लिखने पढ़ने और मित्रों के संपर्क में रहने का मुख्य साधन है. 

सवाल:22. पाठकों और श्रोताओं
 की संख्या बढ़ाने हेतु क्या किया जा सकता है ?

जवाब: 22. श्रेष्ठ लेखन ही 
पाठकों को आकर्षित करने का एकमात्र उपाय है.

सवाल:23. साहित्य का भविष्य उज्जवल  है या अंधकार  ? क्या किया जाना  चाहिए  ?

जवाब:23. उज्जवल था है और भविष्य में भी रहेगा.

सवाल:24.अगर आप बुरा न मानें साहब तो एक निजी सवाल पूछूं ... आपको पहले  प्यार का पहला अहसास कब और कैसे हुआ ? क्या आप उस अहसास को अब भी अपने दिल में महसूस कर पा रहे हैं ? इस से कोई कालजयी रचना हो तो बताइए ?

जवाब:24. मेरे जीवन में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. चूंकि हम लोग गाँव के रहने वाले हैं, जहाँ कम उम्र में शादी कर दी जाती है, ऐसे में मन के भटकाव का रास्ता ही बंद हो जाता है.

सवाल:25. आगामी पीढ़ी के लिए कोई संदेश, प्रेरणा या मार्गदर्शन देना चाहेंगे ? कुछ और कहना बाकी रह गया हो तो भी कह सकते हैं ?

जवाब:25. चूंकि मैं छत्तीसगढ़ राज्य आन्दोलन के साथ जुड़ा रहा हूँ तथा जीवन भर छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए कार्य करता रहा हूँ, इसलिए चाहता हूँ कि लोग भी मेरे इस मिशन में सहभागी बनें. छत्तीसगढ़ की मूल आध्यात्मिक संस्कृति, जीवन पद्धति और उपासना विधि को पुनर्जीवित करने का भगीरथ प्रयास करें.

फोटो सहित आप अपना बायोडाटा व पता संलग्न कर मेल कर दीजिएगा ...👏

प्रस्तुति :- कृष्ण कुमार अजनबी.
मोबाइल:- 9691194953
Email ajnabikrishna@gmail.com

Wednesday, 28 May 2025

कोंदा भैरा के गोठ-33

कोंदा भैरा के गोठ-33

-अब कइसन-कइसन खबर सुने ले मिलत हे जी भैरा.. काकरो जगा गोठियाबे तेनो ह फदित्ता बरोबर जनाथे!
   -कइसे का होगे जी कोंदा..?
   -अरे.. बड़ा लजलजावन कस गोठ हे संगी.. हमरे रायपुर उरला के ई रिक्शा चलइया पवन देवांगन ए.. बुजा ह कुकुर बिसाय बर अपन महतारी जगा दू सौ रुपिया माँगिस.. बपरी जगा नइ रिहिस होही त नइ दिस.. भइगे अतके म अपन महतारी के मुड़ ल हथौड़ी म हकन के मार डरिस.
   -वाजिब म अनफभिक कस गोठ हे संगी.. कुकुर बिसाय बर पइसा नइ दिस ततके म अपन महतारी ल मार डरिस!
  -हव.. वो ह जर्मन शैफर्ड बिसाना चाहत रिहिसे.. वोकर जगा छै सौ रुपिया रिहिस घलो हे, फेर दू सौ खँगत रिहिसे तेने ल अपन दाई जगा माँगिस.. वो ह नइ दिस त खटिया म सूते दाई के मुड़ ल हथौड़ी म हकन दिस.. वोकर सुवारी हल्ला गुल्ला सुन के वो तीर आइस तेकरो ऊपर हमला कर दिस.. उहू बपरी घायल होगे हे.. वोकर 15 बछर के बेटा ह भाग के परोसी मनला बताइस त जाके मामला म पुलिस कार्रवाई होइस.
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-सड़क म एक्सीडेंट होए के सेती खोरावत कल्हरत गरुवा मनला देख के राम देवांगन के मन म उँकर सेवा चाकरी करे के भाव का जागिस.. अब ए गौ सेवा ह मिशन के रूप धर ले हवय जी भैरा जेमा आसपास के जवनहा लइका मन सरलग जुड़त हें.
   -अच्छा.. ए कहाँ के बात आय जी कोंदा?
  -अरे हमरे रायपुर के नवा बस स्टैंड वाला भाँठागाँव के.. ए मन हर हफ्ता अपन जेब खर्चा के पइसा बचा के चार हजार रुपिया सकेलथें अउ हरियर साग भाजी बिसाथें.. कभू कुशालपुर, रायपुरा, महादेव घाट अउ लाखेनगर तक के गाय मनला चारा जेवा आथें.. अउ कहूँ कोनो गरुवा ह बीमार असन दिखथे तेला जरवाय जगा के लीलावती गौशाला म अमरा के उहाँ के डाक्टर ले इलाज करवाथें.
   -वाह भई.. ए तो लइका मन के सुग्घर उदिम ए.. आज जब ए उमर के लइका मन दारू चित्ती.. लँदर-फँदर म बिपतियाय रहिथें अइसन म गौवंश खातिर अइसन सेना भाव ह सँहराए के लाइक हे.
   -हव जी छै बछर होगे ए लइका मनला गौमाता मन के सेवा करत एमा राम देवांगन के संग विजय साहू, कृष्णा साहू, किशन देवांगन, मनीष देवांगन, हरीश वर्मा, अजय शर्मा, विवेक पंडित अउ उमेश साहू घलो हे.. अब एकर मन संग आने लइका मन घलो जुड़त हें.
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-मोला ए समझ म नइ आवय जी भैरा के मुख्यमंत्री साय ल घेरी-बेरी ए कहे के काबर जरूरत पर जाथे के आदिवासी मन सबले बड़े हिंदू आयँ?
   -आजकाल आदिवासी मनला एती-तेती भरमाए भटकाए के जबर उदिम चलत हे न जी कोंदा तेकर सेती होही.
   -कहूँ अइसे तो नहीं के वोला इहिच बुता खातिर मुखियई के पागा पहिनाए गे होही?
   -कोन जनी संगी.. मैं राजनीति के अंते तंते ल जादा नइ समझँव.. वो ह रायपुर म आर्य समाज के स्थापना दिवस वाले कार्यक्रम म काहत रिहिन हें- हमन सरना पूजा म भरोसा राखथन.. वो मन स्पष्ट करत कहिन के हमर डहार शिव पार्वती के प्रतीक मढ़ाए जाथे .. कतकों जगा गौरा गौरी मढ़ाए जाथे.. आखिर दूनों एकेच तो आय.
   -एक पइत मैं ह जशपुर जिला के बगीचा क्षेत्र के गाँव राजपुरी गे रेहेंव.. उहाँ के मुखिया ह मोला सरना तरिया अउ पूजा स्थल संग एक रिंगनी पेड़ के खाल्हे म स्थापित देवी ल देखावत बताए रिहिसे के ए ह पार्वती आय.. हमन एकरे पूजा करथन.
   -फेर हमर ए चातर राज के कतकों झन तो आने बताथें जी.. का आने आने मुड़ा के आदिवासी मन के आने आने देव प्रतीक अउ परंपरा होथे?
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-पहलगाम म होय आतंकी हमला के बाद केंद्र सरकार ह हमर देश म राहत जम्मो पाकिस्तानी मनला तुरते भारत ल छोड़ के जाए के आदेश जारी करे हे जी भैरा तब इहाँ आगू च ले राहत पाकिस्तानी नागरिक मनला काबर नइ खेदारे जावत हे तेने ह मोला थोकिन अनफभिक जनावत हे.
   -हमरो इहाँ पहिलीच ले पाकिस्तानी नागरिक मन हें जी कोंदा?
   -वाह.. रायपुरे जिला म 18 सौ पाक नागरिक हें.. एमा के कतकों झन हमर देश के नागरिकता माँगत हें, फेर अभी उनला मिल नइ पाए हे.
   -वाह भई.. हमला तो एकर गमे नइ रिहिसे?
   -गजब दिन होगे संगी ए मनला इहाँ आके राहत, फेर अभी तक ए मन इहाँ के भाखा संस्कृति ल आत्मसात नइ करे हें.. मोला लागथे के जे मन संबंधित क्षेत्र के भाखा संस्कृति ल आत्मसात नइ करयँ उनला वो क्षेत्र म रहे बसे के अनुमति नइ देना चाही.. हमर छत्तीसगढ़ ल तो धरमशाला बना डारे हें.. बंगलादेशी अउ तिब्बती मनला इहें लान के खुसेरिन अउ अब पाकिस्तानी मन बर घलो अइसने करे जावत हे.. कूड़ादान बना डारे हें ए पबरित भुइया ल.. कहूँ के कचरा होवय इहें लान के कूढ़ो देथें.
   -केंद्र सरकार ल संबंधित क्षेत्र के लोगन के उँकर भावना के घलो चेत राखना चाही तब कोनो किसम के अनुमति देना चाही.
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-अंते-अंते ले आके इहाँ बसुंद्रा बरोबर बसे कतकों अपराधी किसम के लोगन धर्म के मुखौटा खापे इहाँ के धार्मिक सांस्कृतिक ठउर मन म अवैध कब्जा करत हें कहिथें जी भैरा.
   -ठउका सुने हावस जी कोंदा.. इहाँ के कतकों मंदिर देवाला मन म जा उहाँ वो मन कब्जा कर के बइठगे हावयँ जिंकर न तो इहाँ के पुरखौती परंपरा ले कोनो संबंध हे न धार्मिक पूजा या जीवन पद्धति ले.
   -हव जी.. अभी लइका मन बतावत रिहिन हें- हमर रायपुर के महादेव घाट म घलो अइसने अवैध धार्मिक कब्जा होगे हे, जिहाँ अंते ले आए लोगन हमर पारंपरिक पूजा परंपरा के सत्यानाश करत रहिथे कहिथें.
   -हव जी.. हमर दाई-माई मन के नहाए-धोए के ठउर मन म सीसीटीवी लगा डारे हें बताथें..  सिरतोन संगी इहाँ धरम के आड़ म जेन नँगरा नाच करे जावत हे वो ह अनफभिक अउ अभियावन हे.
   -मैं तो कब के अइसन अलहन खातिर चेतावत हावौं.. राष्ट्रीयता के नॉव म क्षेत्रीय संस्कृति अउ परंपरा के जेन किसम ले हत्या करे जावत हे, तेकर खातिर इहाँ के जम्मो लोगन ल एक फेंट होए बर लागही तभे हमर पुरखौती परंपरा अउ संस्कृति के रक्षा हो पाही.
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-अक्ती के बजार सजगे हे काहत हें जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. अब के लइका मनला अतके भर के तो चेत रहिथे.. हमर असली परब परंपरा के उन कहाँ आरो लेथें?
   -कइसे गढ़न के कहे संगी?
   -अक्ती ह सिरिफ पुतरा-पुतरी के बिहाव के परब नोहय संगी तेमा बजार म कइसन-कइसन समान सजे हे तेकर गोठ करन.
  -त जी संगी?
   -या तहूँ ह नेवरिया लइका मन बरोबर चेंधे असन करथस जी! अरे बइहा ए ह हमर किसानी संस्कृति के नवा बछर नोहय जी?
   -अरे हौ जी संगी.. मोरो चेत ह कती अभर गे रिहिसे ते.. हमर किसानी के शुरुआत करबो.. बइगा बबा ह सिद्ध कर के जे धान ल दिही तेला अपन खेत म ओनारबो.. मूठ धरबो.
   -हव जी अउ संझा बेरा जम्मो पौनी-पसारी मन संग कमइया-बनिहार मन के नवा बछर खातिर नियुक्ति करबोन.
   -सही आय संगी.. हमर मन के असली नवा बछर तो इही ह आय.. वइसे देश के जादातर क्षेत्र अउ राज मन म हमरे इहाँ असन खेती किसानी ले जुड़े परब ल ही नवा बछर के रूप म मनाथें.
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-डॉक्टर मन जेन माईलोगिन ल रेंगे-बुले म असमर्थ बता के बैसाखी धरा दिए रिहिन हें, तेही ह अभी दुबई म होय 11 वाँ अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह म 3 सोनहा अउ एक चाँदी के पदक जीत के न सिरिफ छत्तीसगढ़ के भलुक भारत के गौरव ल बढ़ा दिए हे जी भैरा.
   -अच्छा.. डॉक्टर मन जेला बैसाखी धरा दिए रिहिन ते ह जी कोंदा?
   -हव जी संगी.. मनेंद्रगढ़ के 67 बछर के कमला देवी मंगतानी के गोठ आय.. पाछू 30 बछर ले डायबिटीज ले जूझत कमला देवी ह जब डॉक्टर मन वोला बैसाखी धर के रेंगे अउ अपन माड़ी ल बदलवाए के सुझाव दिन त वो ह बैसाखी ल लात मार के  एक एक पाँव उचावत जिम जाए लागिस अउ उहाँ पछीना गारिस तेकर सेती वेटलिफ्टिंग म अब तक 100 ले जादा पदक बटोर डारे हे, एमा अभी हालेच म संपन्न अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह ह सबले जादा गरब करे के लाइक हे.
   -सही आय जी.. जेन उमर म लोगन खटिया ल पोटारे चाय के चुस्की म दिन पहावत रहिथें तेन उमर म अंतरराष्ट्रीय स्तर म गोल्ड जीतना ह अद्भुत अउ प्रेरणादायी हे.
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-हमर गाँव-गँवई के बैद अउ बइगा-गुनिया मन के पारंपरिक ज्ञान ल सकेले-जोरे अउ उजरा के जनोपयोगी बनाय के उदिम अब फेर चलही तइसे जनावत हे जी भैरा.
   -ए तो बने बात आय जी कोंदा.. हमन आधुनिकता के नॉव म अपन पारंपरिक ज्ञान ल बिसरावत जावत हावन तेकर सेती कतकों किसम के खर्चीला अउ फोकटइया चिभिक म बूड़त हावन.
   -सही आय जी.. काली मुख्यमंत्री ह छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा अउ औषधि पादप बोर्ड के नवा अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह म काहत रिहिसे के हमन अपन जम्मो किसम के पारंपरिक ज्ञान स्रोत के संरक्षण संवर्धन करत रहिबोन त स्वास्थ्य जीवन के संगे-संग आर्थिक रूप ले घलो जादा लाभ कमाबोन.
   -सही तो काहत हें जी महूँ ह ए बात के समर्थक हौं.. जतका इहाँ के पारंपरिक औषधि मन के महत्व हे वतकेच माँत्रिक परंपरा मन के घलो हे.
   -हव वो मन काहत रिहिन हें- अभी हमन धान के खेती म जतका कमा लेथन कहूँ वोकर बलदा औषधि पौधा के खेती करबो त कतकों गुना जादा लाभ पा सकथन.
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-सबो धरम के अपन मान्यता होथे जी भैरा फेर कभू-कभू वो ह एक-दूसर के मान्यता संग विरोधाभास जनाथे.
   -हाँ.. ए बात तो हे जी कोंदा तभे तो कोनो मन ईश्वर ल साकार कहिथें त कोनो निराकार त कोनो-कोनो अइसनो होथें जे मन साकार निराकार के झंझट म परे के बलदा सबोच रूप ल मानथें.
   -हव जी.. अभी इंदौर म एक तीन बछर के नान्हे नोनी ल जैन धर्म के संथारा परंपरा के अंतर्गत देंह त्याग के प्रक्रिया पूरा करवाए गिस जेला गिनिज बुक ऑफ विश्व रिकार्ड ह सबले कम उमर म संथारा के माध्यम ले देंह त्याग करइया नोनी के रूप म प्रमाणपत्र दिए हे.. जैन धर्म म कोनो तपस्वी या आम लोगन जेन कोनो किसम के लाइलाज़ बीमारी या अउ कोनो कारण ले मुक्ति खातिर अन्न जल आदि सब त्याग कर के अपन देंह के त्याग करथे वोला संथारा करना कहे जाथे.
   -वाह भई.. त वो तीन बछर के नोनी ह ए सब कारण अउ महत्व ल समझे के लायक होगे रिहिस होही जी?
   -असल म वो नोनी ह एक पीरादायी बीमारी ले ग्रसित रिहिसे तेकर सेती उँकर सियान मन एक संत के मार्गदर्शन म संथारा करवाए रिहिन हें.
   -आश्चर्य हे संगी.. हमर धरम परंपरा म तो अइसन बीमारी ल प्रारब्ध भोग मान के वोला भोगत ही जिनगी जीथन.
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-धरम के नॉव म कट्टरता अउ आपसी जलन ह लोगन ल मूर्खता के दलदल म कतेक ढकेल देथे तेकर ठउका उदाहरण अभी बंगलादेश ले आए हे जी भैरा.
   -बंगलादेश म तो वइसे भी अभी धार्मिक उन्माद ह भारी अतलंगी करत हे जी कोंदा.
   -सही कहे संगी, फेर ए खबर ह अउ उजबक बानी के हे..उहाँ के मदारीपुर जिला के आलम मीर कंडी गाँव के बर पेंड़ ल कट्टरपंथी  मन सिरिफ ए सेती काट डरिन काबर ते हिंदू मन वो बर पेंड़ के खाल्ले ह दीया बार के पूजा करँय.
   -वाह भई.. हमर धरम परंपरा म तो तरिया नँदिया, रूख राई, डोंगरी पहार सबोच के पूजा करे जाथे.. ए बात ल धार्मिक आस्था ल छोड़ देबे तभो प्रकृति के संरक्षण के रूप म तो सम्मान दिए ही जा सकथे.
   -हव जी, फेर उहाँ के कट्टरपंथी मौलवी मन वोला 'शिर्क' माने इस्लाम म अल्लाह के संग कोनो अउ ल जोड़े के हराम हरकत बतावत फतवा जारी करे रिहिसे.
   -ए ह तो धार्मिक अंधियारी के जबर उदाहरण आय संगी.
   -सही कहे.. वो बर पेंड़ ह 200 बछर जुन्ना प्राकृतिक विरासत रिहिसे संगी जेकर पूजा अउ दरस बर दुरिहा दुरिहा ले लोगन आवयँ.
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-अपन बेटा ल सरकारी नौकरी म अनुकंपा नियुक्ति देवाय बर वोकर महतारी ह अपने जाँवरजोड़ी ल मरवा डरिस जी भैरा.
   -बड़ा उजबक बानी के खबर बताथस जी कोंदा.
   -हव जी संगी, फेर ए ह हमरे परोस के खबर आय..तिल्दा जगा के बेमता गाँव के राजू भट्ट ह रायपुर मंत्रालय म चपरासी रिहिसे, तेला वोकरे सुवारी रौशनी शर्मा ह अपन मइके के उमाशंकर शर्मा अउ मुकेश शर्मा ल इहाँ बलवा के मरवा डारिस.
   -मोला तो सुने म ही अनफभिक जनावत हे संगी.
   -हव..तिल्दा पुलिस ह ए मामला म मृतक के गोसइन, वोकर बेटा, सास अउ वो दूनों मरइया मनला गिरफ्तार करे हे.
   -ले इही ल दूध गय ते गय संग म दुहना घलो गय कहिथें तइसे कस होगे कहिदे.
   -अउ का.. नौकरिहा आदमी तो मरिच गे.. अनुकंपा के आस लगाय बेटा घलो जेल के भीतर हमागे.. एक किसम ले वो ह राँड़ी के संगे-संग ठगड़ी बरोबर घलो होगे.
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-बैसाख पुन्नी जोहार जी भैरा..
   -जोहार संगी कोंदा.
   -अध्यात्म के रद्दा अबड़ अलकर हे जी संगी.. एक डहार तो तुँहर असन मन देवी-देवता के पूजा-उपासना के गोठ करथव त ए रद्दा म अइसनो लोगन हें, जे मन कोनो देवी-देवता या ईश्वर के कोनो अस्तित्व नइए कहिथें.
   -अपन-अपन ज्ञान अउ अनुभव के बात आय जी संगी.. अब तहीं बता मोला- अतेक विशाल ब्रम्हांड ल कोनो शक्ति तो संचालित करत होही, ते ए सब ह अपने अपन व्यवस्थित रूप म अपन बुता ल करत होहीं? 
   -अपने अपन रेंगतीन.. मनमर्जी ले बुता करतीन तब तो सब छदर-बदर हो जातीस जी संगी.
   -हव.. ठउका कहेस- सब अंते-तंते अउ छदर-बदर हो जातीस, अउ अइसन नइ होवते त एकर मतलब तो ए हे ना के कोनो न कोनो तो सुपर पॉवर हे, जे ह ए सबला  संचालित करत हे.
    -तोर बात तो वाजिब जनाथे संगी.
   -बस.. इही वाजिब ह वो सुपर पॉवर आय, जेला कोनो भगवान कहि देथे त कोनो ईश्वर या गॉड त कोनो रब अउ खुदा या फेर प्रकृति शक्ति.. बस नॉव ल कुछू भी गढ़ लेथें, फेर मानथें सब उही ल.. उही सुपर पॉवर ल.
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-ए बछर छत्तीसगढ़ी व्याकरण ल लिखाय पूरा 140 बछर होगे जी भैरा.
   -एक सौ चालीस बछर जी कोंदा?
   -हव.. बछर 1880 ले बछर 1885 तक वोकर लिखई कारज ल काव्योपाध्याय हीरालाल चंद्रनाहू ह पूरा करे रिहिसे.. माने 1885 म छत्तीसगढ़ी व्याकरण के लेखन कारज ह सिध परगे रिहिसे.
   -अच्छा..
   -हव.. फेर वोकर छपई ह बछर 1890 म छत्तीसगढ़ी अउ अंगरेजी म समिलहा होय रिहिसे.
   -अंगरेजी संग समिलहा?
   -हव जी.. सर जार्ज ग्रियर्सन ह छत्तीसगढ़ी व्याकरण ल अंगरेजी म अनुवाद कर के बछर 1890 म दूनों भाखा म समिलहा छपवाए रिहिसे.. अउ तैं जानथस संगी.. जब छत्तीसगढ़ी व्याकरण छप के आइस वो बखत तक हिंदी के व्याकरण बन नइ पाए रिहिसे.
   -ताज्जुब हे संगी.. हमन तो हिंदी ल जम्मो बुता म अगुवा होही समझत रेहेन.
   -हिंदी के व्याकरण ह बछर 1920 म कामता प्रसाद गुरु के माध्यम ले आइस.
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-घुड़ुर घाड़र के दिन के लकठियाते करा पानी संग गाज गिरे के घलो खबर आए लगे हे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. चम्मास म कतका जुवर कती मुड़ा ले गरजत बादर ह आके दमोर देही तेकर ठिकाना नइ राहय.
   -बिजुरी लउका के संग गाज गिरे के घटना तो घलो बाढ़ जाथे.. एदे अभीच्चे धमतरी जिला के भाँठागाँव ले खबर आय हे उहाँ रोहित सिन्हा नॉव के तीस बछर के छोकरा के गाज के अभेरा म आए के सेती मौत होगे.
   -अइसन बेरा म मौसम विभाग ह जेन सावधानी के गोठ बताए रहिथे, तेकर खँच्चित चेत राखना चाही संगी.
   -हहो.. फेर आजकाल तो मोबाइल नॉव के एक नवा चरित्तर आगे हे.. जेन ल देख तेकरे खीसा म अमाय रहिथे.
   -हव जी.. अभी रोहित सिन्हा के जेन मौत होय हे वोकरो कारण मोबाइल ल ही बताए गे हावय.. बताथें के गरज चमक के बेरा म वो अपन घर बारी म सेप्टिक बनाय के बुता चलत रिहिसे तेने ल देखत मोबाइल म काकरो संग गोठियावत रिहिसे.
   -अइसने ह तो जउँहर आय.
   -हव.. डॉक्टर के कहना हे के वो बेरा म रोहित के मोबाइल के डाटा माने इंटरनेट चालू रिहिस होही तेकर सेती गाज माने आकाशीय बिजली ह वो डहार आकर्षित होइस होही.
   -अच्छा.. त गरज चमक के बेरा म मोबाइल डाटा ल बंद रखना ह सही होही कहिदे.
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-कतकों झन मोला पूछ देथें जी भैरा के छत्तीसगढ़ी म धन्यवाद कइसे कहिथें?
   -जे मन छत्तीसगढ़ी के परंपरा ल नइ जानँय जी कोंदा ते मन अइसन पूछ देथें.. कोनो कोनो ल इहू भरम होथे के छत्तीसगढ़ी भाखा के शब्दभंडार ह कमती होही तेकर सेती ए भाखा म धन्यवाद शब्द ही नइए.
   -हव जी.. फेर का हे ना..हर भाखा के अपन मौलिक परंपरा होथे, तेकर सेती वोला कोनो आने भाखा संग एकमई कर के नइ देखना चाही.. अउ हो सकय त वो भाखा अउ शब्द ले जुड़े परंपरा ल समझना चाही.. अब हमरे इहाँ देख ले धन्यवाद के सीधा सीधा रूपांतरित शब्द नइए, फेर धन्यवाद दे के परंपरा तो हे..अउ सिरिफ जुच्छा धन्यवाद भर नहीं भलुक संग म शुभकामना घलो दिए जाथे.
   -अच्छा.. अइसे.?
   -हव.. जब कोनो हमर खातिर बने सँहराय के लाइक बुता करथे त कहिथन ना- बने करे बाबू.. भगवान तोर भला करय या तोर जस बाढ़य.. अइसने अउ कतकों  अकन शुभकामना या आशीष घलो संग म देथन.. त अब तहीं बता.. जुच्छा धन्यवाद भर कहे ले हमर परंपरा जेमा आभार व्यक्त करे के संग शुभकामना घलो देथन ए ह जादा मयारुक हवय ते नहीं?
   -सही म संगी.. हमर परंपरा ह जादा निक जनावत हे.
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-पानी-बादर के दिन आइस तहाँ ले साँप-डेड़ू मन के घलो दिन आ जाथे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. तहाँ ले चारों मुड़ा ले साँप चाबे के खबर आए लगथे.
   -सही आय.. हमर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला के तो  ए मामला म नागलोक के रूप म प्रसिद्ध हे.
   -पहिली इहाँ अइसन बिखहर जीव मन ले बाँचे खातिर 'नगमत' के परंपरा रिहिसे.. नागपंचमी, हरेली या फेर कोनो कोनो गाँव म पोरा परब म मनाए जाय 'नगमत'  ल.. एमा माँत्रिक शक्ति के माध्यम ले साँप मन के जहर उतारे के विधि म लोगन ल पारंगत तो करे ही जावय संग म साँप आदि बिखहर जीव मनले पूजा सुमरनी कर बाँचे के अरजी  बिनती करे जावय.
   -सही आय संगी.. अभी घलो कतकों गाँव मन म 'नगमत' के परंपरा देखे म आथे.. अच्छा तैं जानथस के सबो किसम के साँप मन जहरीला नइ होय.
   -अच्छा.. अइसे?
   -हव.. हमर देश म 550 किसम के साँप पाए जाथे तेमा के सिरिफ 10 प्रजाति भर मन जहरीला होथें.
   -वाह भई..!
   -हव.. जानकार मन के कहना हे के जादातर मनखे साँप के जहर ले नहीं भलुक वोकर झझक के सेती मरथें.. तेकर सेती साँप के चाबे म फोकटइहा डर्राय के बलदा वोकर उपचार के उदिम करना चाही.
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-लोगन कोनो किसम के भावना म बोहा के साधु बैरागी के भेस तो खाप लेथें जी भैरा फेर अइसे जनाथे के वो मन घर-परिवार के माया लोक ले उबर नइ पावँय.
   -कतकों लोगन तो सिरिफ देखाय के खातिर ही सँवागा करे जनाथें जी कोंदा.. जबकि सही म जेकर भीतर साधुता या कहिन अध्यात्म के लगन लग जाथे वोला कोनो किसम के सँवागा खापे के जरूरत नइ परय.. वो आम आदमी के पहनावा म ही मुक्ति के रद्दा पा जाथे.
   -सही आय जी.. अंतस म अध्यात्म के भाव रहना चाही.. कपड़ा-लत्ता या साज-सँवागा म नहीं.
   -हव.. अभी खरोरा ले खबर आए हे.. उहाँ के 74 बछर के बिसरू धीवर ह जेन पाछू बीस बछर ले साधु के चोला खापे अयोध्या म राहत रिहिसे.. उहाँ ले  लहुट के वापिस आइस अउ अपन 71 बछर के सुवारी के टोटा ल मसक के मार डरिस.
   -वाह भई.. माने वो ह अपन डोकरी ल मारेच के नॉव म अयोध्या ले लहुटे रिहिसे कहिदे.
   -कोन जनी संगी.. 74 बछर के  साधु चोला खापे बुढ़वा ल अपन 71 बछर के डोकरी म का जिनिस नइ सुहाइस ते.?
   -बताथें के वो ह अपन सुवारी के जुन्ना बेरा के चाल-चलन के सेती झगरा करय.
   -टार बुजा ल.. साधु चोला खापे मनखे ल जुन्ना दिन के का सरेखा?
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-ए बछर नवतपा के शुरुआत ह  अँकरस के जबर बरसा संग होय हे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. जेठ म झड़ी -झखर बरोबर.. फेर मौसम ह जिहाँ घुरूर घारर करथे यहाँ ले शरीर ह घलो खुसुर खासर करे लागथे.
   - बिहनिया रगरग ले घाम त सँझौती के होवत ले रदरद रदरद पानी.. अइसन म हमर सियाना देंह कतेक ले थेबही.. बपरा एती-तेती हो जाथे.
   -नान्हे लइका मन के देंह-पाँव ल जान ते सियनहा मन के दूनों च ल अइसन बेरा म सावचेत राखे ल परथे.
   -हव जी.. डॉक्टर मन के कहना हे- ए बेरा म इम्युनिटी पॉवर बढ़ाय बर पोषण तत्व लेवत रहना चाही.. नान्हे लइका मनला हर दू घंटा म पोषण तत्व देना चाही त सियनहा मनला गिलोय, करिया मरीच, दालचीनी, अदरक अउ गुड़ ले बनाय काढ़ा के सेवन करना चाही.
   -सही आय जी.. हीमोग्लोबिन के स्तर ल अइसन बेरा म बढ़ाय खातिर गहूँ के रोटी के बलदा मोटहा अनाज जेला मिलेट कहिथन न.. तेकर रोटी दे म पाचुक बने होए संग म इम्युनिटी घलो ल बढ़ाथे.
   -इम्युनिटी पॉवर बढ़ाय बर मौसमी फल अउ साग-भाजी घलो बनेच खाना चाही.
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-अभी दूअर्थी गीत गवइया मन के खिलाफ लइका मन बने जोम मढ़ाए हें जी भैरा.
   -हव जी कोंदा महूँ ल खबर मिले हे.. थाना म उँकर नॉव सुद्धा रिपोर्ट करे हे काहत रिहिन हें.
   -ए दूअर्थी चरित्तर ह बैतलराम साहू, पंचराम मिर्झा, शिवकुमार तिवारी, दिलीप लहरिया आदि मन ले होवत अभी के नेवरिया गायक मन तक हबरे हे.
   -बीच म जब विडीयो फिलिम के दौर चलत रिहिसे तभो तो समधिन के झटका, मोर डौकी के बिहाव जइसन टाइटल देखे सुने ले मिलत रिहिसे संगी.
   -मोला ए समझ नइ आवय संगी के लोगन अलकर-सलकर गा बजा के कइसे लोकप्रिय हो जाबो गुन लेथें?
   -सही कहे.. जबकि आज घलो चंदैनी गोंदा, नवा बिहान, सोनहा बिहान जइसन सांस्कृतिक मंच के गीत मन अजर अमर बरोबर सबके मया अउ दुलार पावत हे, तब लोगन अइसन मयारुक गीत-संगीत डहार काबर चेत नइ करँय?
   -लोगन के कहना हे के ए मनला व्यावसायिक कंपनी वाले मन लंदर-फंदर गाए बजाए बर सोरियाथें.
    -असल म जइसे केंद्र म फिल्म प्रमाणन बोर्ड हावय न वइसने इहाँ घलो ए सब के देख-रेख बर एको बोर्ड या निगम के गठन करे जाना चाही, जेमा मंच म प्रस्तुत होवइया हर विधा के सरेखा होवय.
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-हमन गँवई गाँव म डोकरी ढाकरी मनला कतकों किसम के टोटका करत देखे रेहेन जी भैरा फेर शहर म घलो देव-धरम के नॉव म टोटका करत देखेन त ताज्जुब लागीस!
   -कइसे का होगे जी कोंदा?
   -बीते अमावस के शनि महराज के जयंती रिहिसे न त रायपुर के जम्मो शनि मंदिर मन म ए दिन भक्त मन के जबर भीड़ रिहिसे.
   -रहिबे करही जी.. जे मनला शनि ग्रह के कोनो किसम के दोष लगे रहिथे ते मन तो ए दिन जरूर जाथें.
   -हव जी.. लोगन तेल अउ तिली संग शनि महराज के अभिषेक करीन.. कतकों विधि ले पूजा अर्चना करीन.. दान पुन्न करीन.. इहाँ तक तो बने जनाइस, फेर मंदिर ले लहुटती बेर कतकों लोगन अपन पनही अउ चप्पल ल उहें छोड़ दिन तेने ह मोला थोकिन अलकर जनाइस.
   -अच्छा.. मंदिरे म पनही चप्पल ल छोड़ दिन जी?
   -हव जी.. चूरी लाईन वाले जुन्ना शनिदेव मंदिर के पुजारी ह बतावत रिहिसे के हजार दू हजार के पुरती पनही चप्पल उहाँ परे हे जेला कोनो मेर के घुरुवा म फेंकवाय के व्यवस्था अब उही ल करे बर लागही.. पुजारी बतावत रिहिसे के लोगन पनही चप्पल ल मंदिर म छोड़े के टोटका ल ए सेती करथें के एकर ले उनला लगे शनि के दोष ह उहें छूट जाही अउ वो मन वो दोष ले मुक्त हो जाहीं.
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Monday, 5 May 2025

मटपरई शिल्प कला अउ अभिषेक सपन

मटपरई शिल्प कला अउ अभिषेक सपन..
    मटपरई शिल्प कला ह सुने म थोकिन कुछू नेवरिया उदिम कस जनाही, फेर ए ह जुन्ना परंपरा आय. मोला सुरता हे- हमर महतारी ह गरमी के छुट्टी म बछर भर के सकेले जुन्ना कागज मनला पानी म बोर देवय तहाँ ले वोला कुछू जिनिस म गदगद ले कुचर के लुद्दी बना लेवय. फेर ए कागज के लुद्दी म खेत ले लाने करिया माटी, जेला हमन मुड़मिंजनी माटी घलो कहिथन ल बने कुचर के मिला देवय अउ फेर रोटी पोए बर पिसान ल बने मसल मसल के सानथन तइसने सानय. जब वो माटी अउ कागज के मिश्रण ह बने गुँथा जावय, तब कोनो करसी या मरकी ल उल्टा खपल के वोमा टोपली के आकार म थाप देवय.
   अइसने कभू-कभू बिन माटी मिलाए आरुग कागज के टोपली घलो बनावय. कागज के बने टोपली ह बनेच हरू होथे, तेकर सेती एकर उपयोग करई ह सोहलियत जनावय. हमन तो करा बाँटी (कंचा) धरे बर घलो एकर उपयोग कर लेवत रेहेन. बोइर खोइला ल घलो लुका के धरे बर वोकर बने उपयोग होवय. 
   आज वैज्ञानिक आविष्कार के चलत टोपली जइसन जिनिस के विकल्प के रूप म कतकों जिनिस आगे हवय, तेकर सेती अब माटी अउ कागज के मिश्रण ले बनाय जाने वाला टोपली कहूँ देखब म नइ आवय.
   अभी गाँव डुमरडीह (उतई) जिला दुर्ग के युवा कलाकार अभिषेक सपन ल मैं कागज के टोपली बनाय के बुता म नवाचार करत देखेंव त गजब निक लागिस. हमर दाई महतारी मन तो कागज अउ माटी ले टोपली भर बनावत रिहिन हें, फेर अभिषेक ह एक ले बढ़ के एक पुतरा पुतरी अउ खेलौना संग कतकों किसम के मयारुक जिनिस बनाथे. अभिषेक ह अपन ए नवाचार के प्रदर्शन ल कतकों जगा करत रहिथे. छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के बेरा म होवइया राज्योत्सव म घलो कर डारे हे. कतकों स्कूल अउ कॉलेज मन म अपन ए नवाचार के प्रशिक्षण दे के बुता घलो अभिषेक ह करत रहिथे.
   अभिषेक बताथे के वो ह ए नवाचार जेला 'मटपरई' शिल्प कला कहे जाथे, एला बनाय म माटी अउ कागज के संगे-संग अरसी के खरी (घानी म तेल पेरे के बाद निकले अरसी के शेष भाग) के उपयोग करथे. वोकर कहना हे के अरसी के खरी मिलाय ले मटपरई शिल्प म कीरा-मकोरा के हमला जादा नइ होवय.
   अभिषेक ए मटपरई शिल्प कला के क्षेत्र म आए के संबंध म बताथे के वोकर महतारी के मइके जेन रायपुर के कोटा म हे उहाँ वोकर ममादाई भगइया बाई ह मटपरई कला के अंतर्गत सुग्घर सुग्घर पुतरा पुतरी अउ आने खेलौना बनावय, जेला ए मन सबो भाई बहिनी मिल के पिड़उरी छूही, गेरू, चूरी रंग जइसन मयारुक रंग म रंगयँ किसम किसम के कलाकारी करँय अउ फेर बने बने कपड़ा लत्ता पहिरावँय अउ अपन महतारी संग धर के महादेव घाट के मेला म बेचे बर जावयँ. अभिषेक के ममियारो म चना, मुर्रा, लाई आदि फोर के पसरा लगावँय. 
   बछर 1979 म वोकर महतारी लीलादेवी के बिहाव उतई डुमरडीह जिला दुर्ग म होइस. इहाँ वोकर सास माने अभिषेक के बूढ़ीदाई राजिम बाई घलो मटपरई कला ले टुकना आदि बनावँय. ए किसम अभिषेक ल अपन महतारी के संगे-संग ममादाई अउ बूढ़ीदाई सबोच के कला विरासत अउ मार्गदर्शन मिलिस. 
   अभिषेक सपन ह आज मटपरई कला शिल्प ल एक मिशन अउ अभियान के रूप म आगू बढ़ावत हे. खुद घलो नवा नवा कलाकृति मन के सिरजन करत हे अउ नवा सिखइया लइका मनला घलो प्रेरित अउ प्रोत्साहित करत हे. वोकर ए नवाचार खातिर शुभकामना हे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर

Thursday, 17 April 2025

कोंदा भैरा के गोठ-32

कोंदा भैरा के गोठ-32

1.
-होली परब ल लेके लोगन के मान्यता अउ आस्था घलो आने-आने देखे ले मिलथे जी भैरा.
   -ए तो सिरतोन आय जी कोंदा.. अब गरियाबंद जिला के गाँव गोहरापदर (मैनपुर) के ही बात ल देख लेवौ.. इहाँ होले जलाए के बाद वोकर धधकत आगी म उखरा पाँव रेंगे के परंपरा हे.
   -वाह भई.. आगी म उखरा पाँव?
   -हव.. गाँव के पुजारी देवीसिंह नेताम, मेघराम बघेल, नरसिंह यादव अउ गुरुनारायण तिवारी के कहना हे- ए परंपरा ल हमन पुरखौती बेरा ले इहाँ देखत आवत हवन.. एकर संदर्भ म मान्यता हे के एकर ले गाँव म कोनो किसम के आपदा नइ आवय.
   -अच्छा.. अइसे..?
   -हव.. वो मन बताइन के लइका ले लेके बुढ़वा अउ जवान सब होले के आगी म हर बछर रेंगथें, फेर काकरो पाँव ह न तो जरय या वोमा फोरा परय..गाँव के जम्मो देवी-देवता मन के पूजा-पैलगी करे के बाद देवी दाई के जयकारा लगावत ए परंपरा ल निभाए जाथे.. इहू बछर ए परंपरा ल पूरा उत्साह के साथ मनाए गिस.
   -वाह भई.. जय हो देवी दाई.
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2.
-होली मान के अँगना म सूते के  चालू हो जावय जी भैरा.. फेर जब ले गाँव के भाँठा म रकसा बरोबर करिया धुँगिया उगलत फैक्टरी आय हे तब ले अकबकावत कुरियच म खुसरे राह कस होगे हे.
   -हव जी कोंदा.. हमरो मन के इही हाल हे.. ए धुँगिया उगलत फैक्टरी मन के मारे तो गाँव के कुआँ अउ तरिया ह घलो आरुग नइ बाँचे हे.. देखबे ते पानी के उप्पर म पपड़ी बरोबर जमे असन दिखथे राख ह, बने ससन भर न नहाए सकस न गुरतुर पानी आय कहिके अँखमुंदा पीए सकस.
   -हव भई.. अउ तोला सुरता हे.. पढ़त राहन त गरमी के छुट्टी भर रतिहा के सूतई ल तरिया पार के मंदिर के छत ऊपर करन.
   -हव जी अड़बड़ नींद परय.. मार फुरुर-फुरुर हवा.. एक चद्दर के जाड़ वोमा पूरा सीजन भर जनावय, फेर अब तो फैक्टरी के धुँगिया ह उहों पट्टाय रहिथे.. मार करियच करिया.. उहाँ सूतई तो दुरिहा जाय बइठे म घलो अलकर अस जनाथे.
   -सही आय संगी.. हमन अपन पीरा ल कतकों गोहरावत हवन.. लोगन ल जनवावत हावन, फेर प्रदूषण विभाग ल ए सब ले कोनो  लेना देना नइए न हमर ए तीर के कोनो जनप्रतिनिधि मनला.
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3.
-बने गतर के गरमी अभी आए नइए अउ बिजली रानी ह दँतनिपोरई चालू कर डारे हे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. जेन किसम ले बिजली के माँग बाढ़त हे, तेकर मुकाबला वोकर उत्पादन म कमी आवत जावत हे, इही पाय के पंखा उंखा मन घलो ढेरियाय असन करे लगे हें.. बतावत हें- कभू हमर सरप्लस बिजली वाले राज म ए बछर आने राज ले बिजली बिसाय बर परत हे.
   -करलई हे संगी.. एक डहार हमन बिजली के नॉव म जंगल के विनाश झन होवय कहि के गुनत रहिथन अउ दूसर डहार बिन पंखा कूलर अउ एसी-फेसी के बिना दिन ल नइ पहवा पावन त कइसे होही?
   -मोला लागथे संगी हमन ल वैकल्पिक ऊर्जा डहार चेत करे बर लागही.. पीएम सूर्य घर मुफ्त योजना जइसन योजना मनला गंभीरता के साथ हमन ल अपनाना चाही.
   -हाँ.. अपन घर के छत के ऊपर सौर ऊर्जा के माध्यम ले अतिरिक्त बिजली के जुगाड़ जमाना चाही.
   -बहुत अकन अइसन माध्यम हो सकथे जेकर ले बिजली पाए जा सकथे, हमन ल वो जम्मो साधन के सदुपयोग करना चाही, एकर ले हम अपन कोयला, जंगल जइसन प्राकृतिक संसाधन के बचाव घलो कर सकथन अउ जरूरी जिनिस मन खातिर बिजली घलो पा सकथन.
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4.
-जे लइका मन अपन सियान मनला अपन संपत्ति अउ वसीयत ल उँकर नॉव म करे के बाद उनला सरकारी अस्पताल म छोड़ के चल देथें वोकर मन के वसीयत अउ जम्मो संपत्ति के लेखा-जोखा ल रद्द कर देना चाही काहत हे जी भैरा.
   -हव ए बात ले तो महूँ सहमत हावौं जी कोंदा.. वृद्धाश्रम म धँधाय सियान मन के लइका मन संग घलो अइसने होना चाही.. कतकों उजबक किसम के लइका मन जम्मो चीज-बस ल अपन नॉव म चढ़वाए के बाद दाई-ददा मन संग अतलंगी करथें.
   -हव जी अभी कर्नाटक के मंत्री  शरण प्रकाश पाटिल ह ए विषय ल गंभीरता के साथ ले खातिर जम्मो लोगन अउ सरकार ल गोहराय हे, उँकर कहना हे के वो मन अइसन कई ठन मामला देखे हें, जेमा लइका मन अपन सियान मन के संपत्ति अउ वसीयत ल अपन नॉव म चढ़वाय के बाद दाई-ददा ल कोनो सरकारी ठीहा म छोड़ देथें.. अइसन कोनो भी मामला आगू आवत हे त वो लइका मन के नॉव म चघे संपत्ति अउ वसीयत ल कानूनी रूप ले रद्द कर दिए जाना चाही.
   -रद्द करे जाना चाही, संग म वइसन लइका मनला कोनो किसम के सरकारी सुविधा मिलत होही तेनो ल रोके-छेके जाना चाही.
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5.
-हमर देश के सांस्कृतिक विविधता म एके असन जनइया कतकों अइसे परब हे जी भैरा जेला देखे गुने म अलगेच लागथे फेर उनला समझे म निक घलो जनाथे.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा.
   -अभी देख राजधानी रायपुर म   राजस्थान म धूमधाम ले मनाए जाने वाला गणगौर परब मनाए जावत हे.. ए ह ईसर-गौरा के बिहाव के रूप म भगवान शिव अउ माता पार्वती के बिहाव के परब आय, जेला सोला दिन तक विविध आयोजन के रूप म मनाए जाही.
   -अच्छा.. हमर छत्तीसगढ़ म जइसे कातिक अमावस के गौरी-गौरा पूजा के रूप म गौरा-ईसरदेव के बिहाव के परब मनाथन तइसने?
   -गौरा-ईसरदेव शब्द ल सुन के एके असन जनावत हे ना, फेर एमा बनेच अंतर बताए जाथे.. रायपुर म चलत ए गणगौर उत्सव म काली जुवर गौरा, ईसरदेव, सूरजमल, रोवा अउ मालन के प्रतिमा के स्थापना करे गिस.. जानकार मन बताइन के इही पाँचों के पूजा ए परब के अंतर्गत करे जाथे.. वो मन बताइन के कुँवारी नोनी मन भगवान शिव असन वर पाए खातिर उँकर आशीष माँगिन.. ए बेरा म उँकर मन के द्वारा अउ कतकों किसम के सांस्कृतिक कार्यक्रम घलो करे गिस अउ आगू घलो करे जाही.
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6.
-बॉलीवुड के मयारुक कलाकार रेहे हेमामालिनी जगा अभी धरम संकट के स्थिति पैदा होगे हे कहिथें जी भैरा.
   -अइसे काबर जी कोंदा.. वो तो हिंदू धरम के सम्मानित सदस्य आय तब धरम संकट काबर?
   -भगवान जगन्नाथ के दरस खातिर जब वो गे रिहिसे त उहाँ के श्री जगन्नाथ सेना संगठन ह ए ह मुसलमान आय एकर मंदिर म अमाय ले धार्मिक भावना आहत होय हे कहिके एफआईआर लिखवा दिए हे.
   -वाह भई ताज्जुब हे..!
   -हव.. असल म 21 अगस्त 1979 के जब हेमामालिनी ह धर्मेंद्र संग बिहाव करे रिहिसे त धरम परिवर्तन कर डारे रिहिसे.
   -वाह भई..!
   -तब धर्मेंद्र ह तो पहिलीच ले लोग-लइका वाले रिहिसे, तेकर सेती वो हिंदू धर्म के मुताबिक दुसरइया बिहाव नइ कर सकतीस.. इही समस्या ल देखत मुंबई के काजी अब्दुल्ला फैजाबादी जगा जाके इस्लाम कबूल करे रिहिन हें अउ इस्लामी पद्धति ले ही बिहाव घलो करे रिहिन हें.
   -ददा रे.. बिहाव करे बर अतका चरित्तर रचे रिहिन हें कहि दे?
   -हव.. काबर ते इस्लाम म चार बिहाव तक के छूट हे ना.
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7.
-सिरपुर के नॉव लेते मन म गरब के भाव जाग जाथे जी भैरा,  फेर अभी तक एला विश्व धरोहर के सूची म सँघारे नइ जा सके हे.
   -वाह भई.. दक्षिण कौशल के जुन्ना राजधानी के रूप म अपन चिन्हारी रखइया धरोहर घलो ल गा..?
   -बताथें के एकर निर्धारण खातिर जेन टीम इहाँ देखे बर आए रिहिसे तेन ह एला वो योग्य नइ पाइस.. विश्व धरोहर के सूची म सँघरे खातिर बहुत अकन मानक ल पूरा करे बर लागथे, फेर प्रशासनिक उपेक्षा के सेती वो मन पूरा नइ हो पाइन..अब देखव अवइया बेरा म सँघर पाथे के नहीं ते.. वइसे अभी लोकसभा म महासमुंद सांसद ह एकर बारे म आवाज उठाए हे, फेर लोकसभा म बात उठाए ले का होथे.. असल बात तो ए हे, के जब तक विश्व धरोहर के रूप म सँघरे के जेन मानक होथे वोला पूरा नइ करे जाही तब तक अइसन संभव नइए.
   -मोला बड़ा ताज्जुब लागत हे संगी.. वइसे विश्व धरोहर सूची म सँघरे ले का फायदा होतीस?
   -सबले बड़े फायदा तो ए होतीस के सिरपुर के मेंटेनेंस खातिर यूनए ले फंड मिलतीस वो  फंड ले उहाँ के लोगन के रोजगार विकसित होतीस.. उहाँ देश-विदेश ले लोगन पर्यटन अउ परीक्षण खातिर आतीन धीरे-धीरे उँकरो मन के सुविधा विकसित होतीस.
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8.
-आजकाल जेने ल देखबे तेने ह अपन आप ल इहाँ के मूल निवासी घोषित करे के नॉव म माटी पुत्र के संबोधन लगावत रहिथे जी भैरा.
   -असली म का हे ना.. जे मन माटी के पुतला बरोबर होथें, तेही मन माटी पुत्र कहाए बर जादा सधाए रहिथें अउ तैं आकब करे हावस जी कोंदा..अइसन रोग ह राजनीति वाले मनला जादा लगे हे, आम लोगन ल ए सब ले का लेना देना हे.
   -सही आय जी.. आम लोगन ल अपन चिन्हारी न बताए के जरूरत हे अउ न लुकाए के.. उन  जइसन हें तइसन जगजाहिर हे.
   -फेर मोला अइसे लागथे संगी के जेकर मन के इहाँ के भाखा, संस्कृति अउ अस्मिता क्षेत्र म कोनो किसम के पोठहा योगदान नइए वो मनला माटी पुत्र के संबोधन ले चिन्हारी नइ करे जाना चाही.
   -बिल्कुल नइ करे जाना चाही..  तोर ए बात ले महूँ सहमत हौं .. सिरिफ ए माटी म जनम धरे भर ले ही कोनो कइसे माटी पुत्र हो सकथे?
   -सहीआय.. अब ले तो एक मनखे ह इहाँ छठ पूजा म सार्वजनिक छुट्टी के परंपरा चालू करवा दिस त दूसर ह इहाँ बिहार तिहार के नेंव रच दिस.. अब तहीं बता अइसन मनला माटी पुत्र कहे जाना चाही या माटी के पुतला?
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9.
-अइसन नजारा कभू कभार देखे म आथे जी भैरा के कोनो राज के मुखिया ह कोनो साहित्यकार के घर जाके वोकर सम्मान करथे.
   -हव जी कोंदा सही आय.. एकर कारण मोला अइसे जनाथे के आज साहित्य अउ साहित्यकार मन खातिर समाज के नजरिया म पहिली असन सम्मान के भाव कम देखे म आवत हे, तेकरे सेती अइसन कम देखे जाथे.
   -मोला एकर एक कारण तो इहू जनाथे संगी के आज साहित्य के नॉव म मंच ले जेन किसम के जोक्कड़ई अउ राजनीतिक चापलूसी परोसे जावत हे उहू ह लोगन के मन म एकर गरिमा अउ सम्मान के भाव ल कम करत हे.
   -खैर.. अभी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह ज्ञानपीठ पुरस्कार ले सम्मान होय के घोषणा के बाद सियान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी के घर जाके प्रदेश के जनता के डहार ले उँकर सम्मान करिस ते ह मोला गजबे सुग्घर अउ मयारुक लागिस.
   -सुग्घर लागे के बाते आय संगी.. जे मन समाज खातिर ठोस अउ प्रेरणादायी साहित्य के सिरजन करत हें, राजसत्ता के द्वारा उँकर सम्मान तो होना ही चाही.
   -सही आय जी.. कोनो राज के मुखिया ह वोकर घर जाके सम्मान करथे, त वो सम्मान के गरिमा ह अउ बाढ़ जाथे.. हमरो डहार ले शुक्ल जी ल बधाई अउ जोहार.
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10.
-आजकाल कतकों धन्नासेठ मन म अपन कुकुर के जनमदिन मनाए के नवा रिवाज देखे म आवत हे जी भैरा.. फेर बीते इतवार के धमतरी के सोरिद वार्ड म रहइया बाबूलाल सिन्हा अउ वोकर सुवारी ह अपन घर जमने बछिया के जनमदिन मना के गउमाता मन खातिर मया के अच्छा संदेश दिस हे.
   -अच्छा जी कोंदा.. बछिया के जनमदिन..!
   -हव पूरा विधिविधान ले.. दू सौ नेवता कारड छपवा के लोगन ल नेवता पठोए रिहिसे, जे मनला केक काटे के बाद बढ़िया जेवन करवाइस.. अउ अतके भर नहीं संगी.. बिहनिया कार्यक्रम के शुरुआत भगवान सत्यनारायण के पूजा ले होइस तहाँ ले बछिया के नॉव धरे गिस 'राधिका' फेर गँड़वा बाजा संग पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीत चलिस.. रतिहा म रामायण होइस तेकर पाछू बछिया अउ गउमाता के नवा कपड़ा ओढ़ा के आरती करे गिस ..फटाका फोरे गिस केक काटे गिस यहाँ ले उहाँ जुरियाए सबो लोगन ससन भर नाचिन-कूदिन.
   -वाह भई.. सुन के ही निक जनागे.. गौवंश के संरक्षण खातिर ए बड़ा सुग्घर संदेश बनगे.
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11.
-मुख्यमंत्री साय ह अभी इन्वेस्टर कनेक्ट मीट म भाग ले बर बेंगलुरु गे रिहिसे जी भैरा जिहाँ छत्तीसगढ़ म निवेश करे खातिर अबड़ अकन टेक कंपनी मन लिखा-पढ़ी करे हें काहत रिहिन हें.
   -हव जी कोंदा महूँ ए खबर ल सुने हौं अउ एमा सबले निक मोला पैरा ले कंप्रेस्ड बायो गैस (हरित इंधन) बनाए जाही काहत हें तेन ह लागिस.
   -सही आय जी.. अब तो पैरा मन खेत म परे रहि जाथें न तो वोला किसान मन लेगयँ न गरुवा मन चगलँय.
   -कहाँ ले चगलहीं.. हार्वेस्टर म कटाय के सेती मार ठाढ़े-ठाढ़ काँटा अस जनाथें .. एकरे सेती कतकों लोगन वोमा आगी ढील देथें.
   -हव जी एकर ले चारों मुड़ा प्रदूषण भर बाढ़त हे.. लोगन गाय गरुवा पोसई ल घलो कमतिया डारें हें, तेकरो सेती एकर कोनो पुछइया नइ मिलय.. अइसन म कहूँ वो पैरा मन ले बायोगैस बन जाही त ए ह किसान बर घलो उपराहा लाभ के रद्दा बन जाही संग म प्रदूषण ले घलो बँचई हो जाही.
   -हव जी.. एक जमाना अइसन रिहिसे जब घरों घर गरुवा दिख जावय.. एकक डारा पैरा मन अनमोल राहय.. हमन तो सिला बीन के धान सकेले राहन उहू ल पाँव म रमँज के वोकर पैरा ल गरुवा कोठा म डार देवत रेहेन.
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12.
-तोला वो पइत के सुरता हे जी भैरा जब हमन छोटे लाईन के रेलगाड़ी म रायपुर ले अभनपुर होवत राजिम जावन?
   -कइसे सुरता नइ रइही जी कोंदा कोनो-कोनो वोला धकपकहा गाड़ी काहय त कोनो भँइसा गाड़ा घलो कहि देवय ना, फेर अब तो वो ह इतिहास के बात होगे संगी.
   -सही आय जी.. हमन कतकों पइत तो वो गाड़ी म चघे के नॉव म ही राजिम चल देवत रेहेन.. मोला अइसने छोटे लाईन के गाड़ी म एक पइत गोंदिया ले जबलपुर जाय के घलो अनुभव हे.
   -वो मुड़ा के गाड़ी ह तो अउ लट्टे-पट्टे रेंगय बताथें.
   -हव सही आय.. चातर असन जगा म तो बने चलय, फेर जइसे पहाड़ी जगा आवय तहाँ ले घिलरे बरोबर हो जावय.. हमन तो गाड़ी ले उतर के रेंगत म ही वोकर ले अगुवा जावन.
   -हव.. फेर अब रायपुर ले अभनपुर जाय बर नवा जमाना के रेलगाड़ी आगे हावय.. कालेच प्रधानमंत्री ह एकर उद्घाटन करिन हें.. ए मेमू स्पेशल ह जबर आरामदायक हे बताथें.. नवा रायपुर जवइया मनला घात सोहलियत परही.
   -तब तो एको दिन एकरो सेवाद ले खातिर ही नवा रायपुर अउ अभनपुर ल किंजर के आबो जी.
   -हव जी जरूर.
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13.
-सरहुल जोहार जी भैरा.
   -जोहार संगी कोंदा.. अच्छा आज चैत अंजोरी तीज आय न..  धरती महतारी अउ सुरुज देवता के बिहाव के परब.
   -हव संगी.. अउ अतकेच भर नहीं ए ह उराँव/कुडुख मन के नवा बछर के शुरुआत घलो आय.. उराँव/कुडुख साहित्य के जानकार डॉ. तेतरू उराँव कहिथें- ए ह प्रकृति के संवेदनशीलता अउ मनखे के रिश्ता के अद्भुत उदाहरण आय.. वो मन बताइन- ए परब ल वो मन अपन भाखा म- 'खे-खेल बेंज्जा' कहिथें, जेकर अरथ होथे-  धरती के बिहाव.
   -वाह भई.. अद्भुत हे.
   -हव जी.. हमर देश कतेक विविधता ले भरे हावय ना.. सबके अलग-अलग मान्यता अउ परब.
   -सही आय संगी.. तभे तो हमर देश ल बहुभाषी अउ बहु संस्कृति वाले देश कहे जाथे.. अउ हमर देश के ए  सांस्कृतिक विविधता के एकमई बढ़वार घलो जरूरी हे.
   -सही कहे.. सबो के बढ़वार अउ संरक्षण.
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14.
-हमन राजनीति ल आज तक जनसेवा के कारज मानत रेहेन जी भैरा.. फेर अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ह एक पत्रकार संग करे मुँहाचाही म कहे हे के ए ह रोजगार आय.
   -हव जी कोंदा.. हमन जनसेवा के कारज ही समझन तभे तो एमा सँघरे नेता मनला जनसेवक कहे जाथे या माने जाथे.
   -सिरतोन आय संगी.. फेर मुख्यमंत्री योगी ल जब भविष्य के प्रधानमंत्री बने के बारे म पूछे गिस त वो कहिन- मैं तो असल म योगी हौं.. राजनीति मोर 'फुल टाइम जॉब' नोहय.. 'जॉब' शब्द के उपयोग तो हमन रोजी-रोजगार.. नौकरी या व्यवसाय ले जुड़े बुता खातिर ही करथन न?
   -हव जी सही आय.. अउ जब राजनीति ह वोकर फुल टाइम 'जॉब' नोहय त योगी बने हे तेन ह आय का?
  -बड़ा बिचित्र गढ़न के बात आय संगी.. मैं तो साधु बैरागी या योगी बनई ल आजतक भगवान पाए के रद्दा समझत रेहेंव.. मोक्ष या कहिन सद्गति पाए के रद्दा समझत रेहेंव, फेर आज जाने पाएँव के उहू ह 'जॉब' आय!
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15.
-राजशाही के अत्याचार ल भोगे लोगन के गोठ ल सुरता कर के हमन लोकतांत्रिक व्यवस्था ल मयारुक समझत रेहेन जी भैरा, फेर अभी परोसी देश नेपाल म राजशाही के वापसी खातिर चलत आन्दोलन ह एकरो ऊपर सोचे बर दँदोरत हे.
   -सही आय जी कोंदा.. 28 मई 2008 के उहाँ राजशाही ल घुँचा के लोकतंत्र के स्थापना करे गे रिहिसे.
   -हव जी महूँ ल सुरता हे, तब जनाय रिहिसे के उहाँ खुशहाली के दर्शन होही, फेर सिरिफ 16 बछर के लोकतांत्रिक व्यवस्था म अइसन का होगे के लोगन उहाँ राजशाही के वापसी खातिर सड़क म उतर गे हें?
   -महूँ ल अचरज लागत हे संगी, तेमा उहाँ के जुन्ना राजा ज्ञानेंद्र शाह ह राष्ट्रीय एकता के नॉव म ए आन्दोलन के आगी म घी डारे के उदिम करत हे.
   -वो तो करबेच करही संगी.. भला कोन मनखे ह अपन हाथ म  आवत सत्ता बर लार नइ चुचवाही?
   -मोला उहाँ के राजनीतिक अस्थिरता ह घलो एकर एक कारण जनाथे संगी.. अब देख लेना सिरिफ 16 बछर के लोकतांत्रिक व्यवस्था म उहाँ दर्जन भर के पुरती प्रधानमंत्री बनगे हें.. अब तहीं बता अइसन म लोगन जुन्ना स्थायी व्यवस्था डहार भागहीं ते नहीं?
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16.
-तैं ह एक बात ल आकब करे होबे जी भैरा.. इहाँ अइसन कतकों शहर हे जेकर नॉव के आखिर म 'पुर' शब्द लगे रहिथे.
   -हमर रायपुर के पाछू म ही पुर जुड़े हे जी कोंदा.. अइसने सिरपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर जइसन कतकों जगा हे जेकर नॉव संग पुर जुड़े हे.
   -ठउका कहे संगी.. एकर मतलब जानथस वोमन म पुर काबर जुड़े हे?
   -अब तहीं ह बतादे संगी.
   -'पुर' के मतलब शहर या किला होथे.. पुर शब्द ह अड़बड़ जुन्ना शब्द आय, एकर उल्लेख जुन्ना ग्रंथ ऋग्वेद म घलो मिलथे.. पुर शब्द के इस्तेमाल वो बखत उहि शहर मन म करे जावय, जेला कोनो राजा ह बसाय राहय.. जेकर तीर-तखार म किला घलो राहय.
   -वाह भई.. हमर रायपुर के इतिहास ल पढ़े म तो अइसने जानबा मिलथे.. राजा रायसिंह ह एला बसाए रिहिसे अउ बूढ़ा तरिया के उप्पर म किला रिहिसे जेकर चिनहा आजो ले दिखथे.
   -हव.. अब जान लेवौ के इहाँ जतका जुन्ना शहर मन के नॉव के  पाछू म पुर शब्द जुड़े हे सबो ल कोनो न कोनो राजा ह बसाय हे अउ उहाँ किला घलो रेहे हे.
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17.
-जेन किसम ले अभी तरिया, डबरी अउ कुआँ बावली मनला तोप-पाट के वो मन म बड़का बड़का बिल्डिंग अउ कॉलोनी बनाए जावत हे, ते ह चिंता के बात तो आय जी भैरा फेर ए बीच दुरुग जिला के धमधा ले उहाँ के तरिया मनला खोज-ढूँढ़ के वापिस जलरँग बनाए के सोर मिलत हे ते ह सँहराए के लाइक हे.
    -अच्छा.. छै आगर छै कोरी वाले धमधा ले जी कोंदा?
   -हव जी..अब कहावत भर म छै आगर छै कोरी रहिगे हे, फेर असलियत ल देखबे त दुख के मारे दूनों आँखी ह तरिया बरोबर हो जाथे.
   -चारों मुड़ा के एके हाल हे संगी.. हमर पुरखा मन तरिया नदिया के जतका महत्व ल जानिन समझिन ततके आज के पीढ़ी ह उनला उजारे अउ तोपे-ढाँके म भीड़े हे.. धमधा के तरिया मनला बचाए बर धर्मधाम गौरवगाथा के नॉव ले एक समिति बनाए गे हे तेकर संयोजक वीरेंद्र देवांगन बताथे- गाँव म अभी घलो 121 तरिया हे, जेमा के 70 तरिया जीवित हे जबकि 51 तरिया मन म अवैध कब्जा होगे हे, इही अवैध कब्जा मन ले हमन 7 तरिया ल बचा पाए हावन अउ बाँचे ल प्रशासन ले मुक्त कराए बर अरजी करे हावन.
   -वाजिब म सँहराए के लाइक बुता आय संगी.. सबो डहार के लोगन म अपन तरिया मन खातिर अइसन जागरूकता आ जावय त अभी जेन सरलग भूजलस्तर गिरे के खबर मिलत हे, तेमा निश्चित रूप ले सुधार आही.
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18.
-हमर पुरखा मन तरिया बावली, रूख राई जइसन जम्मोच के बिहाव के परंपरा बनाय रिहिन हें जी भैरा जेला वो मन पूरा निष्ठा अउ परंपरा के मुताबिक मनावयँ घलो.. फेर अब अइसन कभू कभार ही देखे म आथे.
   -सही आय जी कोंदा.. फेर एदे अभी गरियाबंद जिला के गाँव तेतलखुटी (धरनीबहाल) ले खबर आय हे के उहाँ के जयसिंह ठाकुर ह अपन बारी के आमा के बिहाव पूरा विधिविधान के साथ करिस हे, जेमा गाँव भर के लोगन सँघरे रिहिन हें, उन सबो ल पंगत घलो जेवाए गिस.
   -हमर ममादाई घलो अपन अँगना के आमा ह जब पहिली बेर फर धरीस त अइसने बिहाव करवाए रिहिसे जी कठवा के दुल्हा बनवा के.
   -हव अइसने करे जाथे आमा के बिहाव ल.. आमा के पेड़ म पहिली बेर फर आय म कठवा के  बने दुल्हा ल वोकर तीर म मढ़ा के तेल हरदी चूरी पटा भेंट करे अउ माँग भराय जइसन जम्मो नेंग ल करे जाथे.. पुरोहित ह मंत्रोच्चार घलो करिस .. माईलोगिन मन मंगल गीत गाईन..  सात भाँवर के रसम ल आमा पेड़ के मालिक जयसिंह अउ वोकर सुवारी निभाइस.. तहाँ ले प्रतीक स्वरूप घरतिया अउ बरतिया बने जम्मो लोगन ल माँदी खवाए गिस.
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19.
-मंदिर म बरपेली दान दक्षिणा खातिर जोजियाय के बुता म रोक लगाय के सलाह देवई ह सुप्रीम कोर्ट ल आ बइला मोला मार कहिथें तइसे बरोबर होगे हे जी भैरा.
   -कइसे का होगे जी कोंदा?
   -सुप्रीम कोर्ट ह मंदिर मन म दान दे खातिर बरपेली जोजियाना ह बने नोहय एमा रोक लगना चाही कहिके सलाह दे रिहिसे.. वोकर कहना रिहिसे के श्रद्धालु मन ल बिना रोकटोक के दर्शन करन देना चाही.
   -त बने तो आय.. मंदिर देवाला म लोगन अपन श्रद्धा ले जेन कुछू भी देथे चढ़ाथे तेकरे फल मिलथे कहिथें.
   -हव बने काहत हावस, फेर ओडिशा के पुरी के मंदिर के सेवादार नरसिंह पूजापांडा ल ए गोठ ह नइ सुहाइस.. वो ह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ल पाती लिख के अपन जिनगी ले मुक्ति पाए के अरजी करे.
   -ए दई.. करलई हे.. दान म रोक के बात कहे म जिनगी ले मुक्ति माँगे के बात ह अनफभिक जनाथे संगी.
   -सेवादार नरसिंह पूजापांडा के कहना हे- वो मन के परिवार ह करीब हजार बछर ले लोगन ले भिक्षा माँग के ही जीवकोपार्जन करत हे, वोकर मन के एकर छोड़ जीए के अउ कुछू साधन नइए.. अउ जब इही ल बंद कर दिए जाही तब तो मर जाना ही सही हे.
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20.
-हमन तइहा बेरा म सरवन कुमार के नॉव सुनन के वो ह अपन महतारी बाप ल काँवर म बइठार के तीरथ-बरत करवाए रिहिसे, फेर आज घलो अइसन लोगन मिल जाथें जी भैरा जे मन अपन दाई-ददा के सेवा ल ही देवता के सेवा मान के उँकर चाकरी म लगे रहिथें.
   -बिरले होथे अइसन सपूत जी कोंदा नइते आज तो दाई-ददा ल वृद्धाश्रम के मुँहाटी म अमरइया जादा होथें.
   -सही कहे संगी.. फेर अभी कर्नाटक के मैसूर निवासी डॉ. कृष्णमूर्ति अपन बीस बछर जुन्ना स्कूटर म अपन महतारी चूडारलम्मा ल दुनिया घूमावत रायपुर आए हे.. वोकर कहना हे के वो इही स्कूटर म अपन महतारी ल पूरा दुनिया घूमा के रइही.
   -वाह भई.. अद्भुत हे..!
   -हव संगी.. 16 जनवरी 2018 के वो मन दुनिया किंजरे बर निकले हें.. नेपाल, भूटान, म्यांमार जइसन कतकों देश के संगे-संग केरल, गोवा जइसन कतकों राज्य ल किंजर डारे हें.. उन बतावत रिहिन के अभी तक 96 हजार 205 कि.मी. यात्रा कर डारे हे.. अब रायपुर ले ओडिशा जाहीं.
   -खाथे-पीथे अउ रहिथे कहाँ?
   -कोनो भी मंदिर देवाला म परसाद के रूप म जेवन मिल जाथे.. स्कूटर म कोनो किसम के गड़बड़ी आय म वो खुद बना डारथे.
   - महतारी ल दुनिया किजारे के उँकर संकल्प ल हमरो शुभकामना हे.
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21.
-सड़क म एक्सीडेंट होए के सेती खोरावत कल्हरत गरुवा मनला देख के राम देवांगन के मन म उँकर सेवा चाकरी करे के भाव का जागिस.. अब ए गौ सेवा ह मिशन के रूप धर ले हवय जी भैरा जेमा आसपास के जवनहा लइका मन सरलग जुड़त हें.
   -अच्छा.. ए कहाँ के बात आय जी कोंदा?
  -अरे हमरे रायपुर के नवा बस स्टैंड वाला भाँठागाँव के.. ए मन हर हफ्ता चार हजारों के हरियर साग भाजी बिसाथें अउ कभू कुशालपुर, रायपुरा, महादेव घाट अउ लाखेनगर तक के गाय मनला चारा जेवा आथें.. अउ कहूँ कोनो गरुवा ह बीमार असन दिखथे तेला जरवाय जगा के लीलावती गौशाला म अमरा के उहाँ के डाक्टर ले इलाज करवाथें.
   -वाह भई.. ए तो लइका मन के सुग्घर उदिम ए.. आज जब ए उमर के लइका मन दारू चित्ती.. लंदर-फंदर म बिपतियाय रहिथें अइसन म गौवंश खातिर अइसन सेना भाव ह सँहराए के लाइक हे.
   -हव जी छै बछर होगे ए लइका मनला गौमाता मन के सेवा करत एमा राम देवांगन के संग विजय साहू, कृष्णा साहू, किशन देवांगन, मनीष देवांगन, हरीश वर्मा, अजय शर्मा, विवेक पंडित अउ उमेश साहू घलो हे.. अब एकर मन संग आने लइका मन घलो जुड़त हें.
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Tuesday, 11 March 2025

कोंदा भैरा के गोठ-31

कोंदा भैरा के गोठ-31
1.
-अपन भाखा खातिर कतका मया अउ निष्ठा होथे तेला देखना हे त महाराष्ट्र म देखे जा सकथे जी भैरा.
   -उहाँ अइसे का होगे जी कोंदा तेमा आने जगा अइसन देखे म नइ आवय?
   -अभी उहाँ के सरकार ह एक आदेश निकाले हे, जेकर मुताबिक अब उहाँ के जम्मो सरकारी दफ्तर मन म मराठी म ही जम्मो कामकाज होही.
   -अच्छा.. अइसे?
   -हव.. अतके च नहीं संगी.. उहाँ के जम्मो कार्यालय मन म लगे कंप्यूटर मन म की पैड अउ प्रिंटर मराठी देवनागरी म टेस्ट लिखना जरूरी होगे हे.. जे मन उहाँ के दफ्तर मन म कुछू काम बुता खातिर जाहीं उहू मन ल जम्मो गोठबात अउ कागजात के लिखा पढ़ी मराठी म ही करे बर लागही.
   -ए तो स्थानीय भाखा मन के बढ़वार खातिर ठउका बुता आय संगी.
   -हव जी.. फेर मैं ए गुनथौं के हमर इहाँ के सत्ताधारी मन के चेत ह महतारी भाखा खातिर कब जागही?

2.
-राजधानी रायपुर के नवा महापौर अउ जम्मो पार्षद मन महाकुंभ म असनाँदे खातिर प्रयागराज गे हवयँ कहिथें जी भैरा.
   -हव जी कोंदा बने सुने हावस..   महाकुंभ म असनाँद के आए के पाछू फेर वोकर मन के शपथग्रहण होही.
   -अच्छा.. अइसे.. फेर मैं ए गुनत रेहेंव संगी- हमर छत्तीसगढ़ के राजिम कुंभ कल्प के राहत ले वो मन ल प्रयागराज काबर जाय बर परगे.. अइसने इहाँ के जम्मो मंत्री अउ विधायक मन घलो गे रिहिन हें.
   -असली कुंभ अउ नकली कुंभ म फरक तो होथे संगी.. भई हमर इहाँ के ह असल म माघी पुन्नी मेला आय अउ प्रयागराज के ह पौराणिक महत्व के असली कुंभ, तभे तो जे मन खुद इहाँ ल कुंभ कुंभ कहिके चिहुर पारत रहिथें तेही च मन दलबल के साथ राजिम म असनाँदे बर नइ गिन.
   -हव जी तभे तो ए बछर राजिम के मेला ठउर ह हेल्ला हेल्ला दिखथे.. आने बछर बरोबर बने चिरो-बोरो करत नइ जनावत हे.

3.
-महतारी मन के जतका गुन-जस गा सब कमती च हे जी भैरा.
   -ए बात तो ठउका कहे जी कोंदा, तभे तो उनला हमर साक्षात देवी-देवता कहे जाथे.
   -सिरतोन आय संगी.. अइसने महतारी के देवी कस रूप के आरो करावत अभी दिल्ली रेलवे स्टेशन म ड्यूटी बजालत महिला पुलिस वाली के विडीयो ह गजब वायरल होवत हे, जेमा वो ह अपन नान्हे लइका ल बेल्ट म फँसा के अपन छाती म ओरमाए हे अउ एक हाथ म पुलिसिया लाठी धरे मुँह ले सुसरी बजावत भीड़ ल सावचेत करत हे.
   -हव जी संगी.. वोकर विडीयो ल महूँ देखे हौं.. वो ह महतारी अउ पुलिस के ड्यूटी ल सँघरा करत हे.
   -हाँ अइसन कतकों जगा देखे बर मिल जाथे.. कतकों रेजा के बुता करइया मन अपन लइका ल पीठ म ओरमाए मुड़ म ईंटा-पखरा डोहारत रहिथे.. मोला वो पइत के जबर सुरता हे संगी.. जब बस्तर के जंगल म नक्सली मन संग हिमानी मानवरे नॉव के महिला पुलिस ह अपन नान्हे लइका ल धरे मुबाकला करत रिहिसे.
   -अइसन महतारी मन ले गरब हे संगी.. जोहार हे उनला.

4.
-महाशिवरात्रि के लकठाते भाँग के माँग बाढ़गे हे काहत हें जी भैरा.
   -भोलेनाथ के भक्त मन भोग-परसाद चढ़ाए बर अगुवा के बिसा के रख लेथें न जी कोंदा.
   -हव जी.. रायपुर म ए बछर हरियर भाँग ल तीन हजार रुपिया किलो त वोकर पावडर ल चार हजार किलो बेचावत हे बताथें.. वइसे तैं ह बिसाथस नहीं जी?
   -हव भगवान म चढ़ाए खातिर तो बिसाथौं.
   -भइगे भगवान म चढ़ाए खातिर ते खुदो के चढ़ाए बर?
   -अरे नहीं संगी.. हमन अइसन नइ करन.
   -कतकों लोगन तो भगवान म चढ़ाथन त हमूँ म चढ़ा लेथन कहिथें.
   -ए ह सही नोहय संगी.. भगवान ल चढ़ाए के मतलब होथे- गाँजा भाँग जइसन जम्मो किसम के नशा के जिनिस मनला   उनला अर्पित कर के खुद वोकर ले मुक्त रहना होथे.
   -फेर कतकों लोगन तो भगवान ह पीथे तेकर सेती हमू मन पीथन कहिथें.
   -उँकर सोच अउ समझ दूनों गलत हे.. भगवान ह तो समुद्र मंथन ले निखले जहर ल घलो पीए रिहिसे, त वोकर नकल करत हन कहइया मन जहर काबर नइ पीययँ?

5.-मोला एक चीज ह भारी अचरज बानी के लागथे जी भैरा.
   -का जिनिस ह जी कोंदा..?
   -मैं जेन कोनो ल वोट देथौं ना.. वो बुजा मन हारिच जाथें का पाय के ते..!
   -सिरतोन काहत हस जी संगी..?
   -ले.. त तोर जगा बेलबेली करिहौं गा.. एदे अभी के पंचइती चुनाव म घलो मैं जे-जे मन ल वोट देंव सब ढलंग गिन.. वोकर पहिली विधानसभा अउ लोकसभा म घलो जेन-जेन छापा के गुदाम ल मसके रेहेंव.. सबोच बैरी मन पटिया गिन.
   -वाह भई बड़ा ताज्जुब गढ़न के जनाथे तोर पसंद के मनखे ल वोट देवई ह.. तैं ह पार्टी के आधार म वोट नइ देवस का?
   -मैं तो कभू च पार्टी उर्टी के झमेला म नइ परेंव..जेन कोनो मनखे ह बने सादा-सरबदा कस जनाथे, तेकरे छापा के गुदाम ल टमड़ परथौं गा.
   -अब सादा-सरबदा के बेरा पहागे जी संगी.. अब तो साम-दाम अउ पार्टीबंदी वाले मन के बेरा आए हे, जे मन ए रंग म रंग के चुनावी मैदान म आथें, तेही च मन चुनावी बैतरनी ल नहाक पाथें.

6.

-बेरा-बेरा म दक्षिण भारत म हिंदी भाखा के विरोध के सुर उठत देखे म आवत रहिथे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. अभी फेर अइसने होवत हे.
   -तोला का लागथे  छत्तीसगढ़ म घलो इहाँ के महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ल शासन-प्रशासन अउ शिक्षा के माध्यम बनाए खातिर हिंदी के विरोध करे जाना चाही?
   -पहिली बात तो ए हे संगी.. मैं ए देश के कोनो भी भाखा या संस्कृति के विरोध नइ करवँ..  हाँ हम इहाँ छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति के बात करथन त एला इहाँ के स्वतंत्र चिन्हारी खातिर करथन.. जइसे भारत भूमि म रहि के घलो एक अलग राज्य के रूप म छत्तीसगढ़ के अपन स्वतंत्र चिन्हारी हावय वइसने.. हमन जब छत्तीसगढ़ राज्य आन्दोलन म सँघरे रेहेन तभो कतकों लोगन हमन ल भरमाए अउ भटकाए के उदिम रचयँ.. उन काहयँ- तुमन अलग छत्तीसगढ़ राष्ट्र के माँग करथौ का..? त हमन काहन- नहीं संगी हम अलग देश के नहीं, भलुक अलग प्रदेश के माँग करथन भारतीय संविधान के अंतर्गत, ठउका अइसनेच इहाँ के भाखा संस्कृति के अलग चिन्हारी चाहथन, त उहू ल भारतीय संविधान के अंतर्गत ही.

7.
-कैलाश पर्वत म आज घलो भगवान भोलेनाथ अउ देवी पार्वती के बसेरा हे कहिथें जी भैरा.
   -हव जी कोंदा अइसने गढ़न तो महूँ सुने हौं तभे तो एमा चढ़े खातिर रोक लगा दिए गे हवय काबर ते एला पवित्र ठउर माने जाथे.. वइसे घलो आज तक वोमा कोनोच मनखे नइ चढ़ पाए हें कहिथें.
   -अच्छा..?
   -हव जी.. जबकि कैलाश ह एवरेस्ट ले दू हजार मीटर छोटे हे.. बताथें बछर 2001 म एक पर्वतारोही दल ह चघे के उदिम करे रिहिसे, फेर चढ़ाई पूरे करे बिन लहुट आए रिहिसे.
   -कतकों लोगन बताथें के कैलाश पर्वत ह रेडियोएक्टिव क्षेत्र आय कहिके?
   -हव भई अगसने तो महूँ सुने हौं.. बताथें के वोमा चढ़े के उदिम करइया मन दिशा भ्रम के स्थिति म पर जाथें उन समझे नइ पावयँ के कोन मुड़ा जाना हे अउ कोन मुड़ा नहीं? एक पइत एक पर्वतारोही वोमा चढ़े के उदिम करत रिहिसे त वोकर देंह के चूंदी, नख अउ रूआँ मन उत्ताधुर्रा बाढ़े लागिन तहाँ ले उहू ह डर के मारे उतरगे.
   - माने कुल मिला के आज तक कैलाश पर्वत ह रहस्यमय जगा बने हुए हे कहि दे.

8.
-हमर गाँव के जकला ह आजकाल धरम-संस्कृति के बड़का जानकार लहुट गे हे जी भैरा.
   -कोन जकला ल कहिथस जी कोंदा?
   -अरे .. उही का चँदोर-फँदोर कहिथे तेने ह जी.. काली महाशिवरात्रि परब के बेरा म वो काहत रिहिसे- 'शिव सम्प्रदाय के महापर्व आय महाशिवरात्रि ह'.
   -अच्छा..!
   -हव.. त एक बड़का साहित्यकार ह वोकर जगा पूछिस के हमन कोन आन? शैव ते वैष्णव? त वो कहिस दूनों म के कोनो एक होबे.
   -तैं ए संबंध म का कहिथस संगी?
   -देख भई.. हमर छत्तीसगढ़ के संस्कृति म माघी पुन्नी के भगवान राजीव लोचन के जयंती परब मनाथन अउ फेर महाशिवरात्रि के कुलेश्वर महादेव के महापरब अउ ए दूनों ल  सँघरा.
   -हव जी.. हमर राजिम के जग प्रसिद्ध  मेला ल माघी पुन्नी ले शिवरात्रि तक एक साथ मनाथन त फेर वो मन हमर बर दू अलग-अलग कइसे होइस?
   -सिरतोन आय संगी.. तभे तो मैं कहिथौं हमन सिरिफ छत्तीसगढ़िया सम्प्रदाय के आन.. आने-ताने अउ कुछू नहीं.
   -हव जी सिरतोन आय.. पुरखौती बेरा ले हमन भगवान राजीव लोचन अउ कुलेश्वर महादेव के परब अउ मेला ल सँघरा मनावत आए हवन अउ आगू.घलो सँघरच मनाबो..  त फेर हमन आने-आने सम्प्रदाय के काबर? दूनों के एकमई काबर नहीं?

9.
-ए बछर के कुंभ नहवइया मन ल तैं आकब करत रेहे जी भैरा.. वोमा के कतकों झन ह नाकर चिरई बरोबर नाक ल चपक के टुप ले बूड़य अउ धरारपटा निकल जावत रिहिसे.
   - हव जी.. अइसन मन घर म डोलची भर पानी ल लोटा म झलकइया आयँ जी कोंदा हमर असन चिभोरा मार के नहवइया नोहयँ बपरा मन.
   -फेर जब तक तरिया नदिया म चिभोरा मार के नइ नहाए त मजच नइ आवय न.. हमन तो खँड़ भर नरवा ल एके साँस म नहाक देवत रेहेन अउ तरिया ल तो कई पइत ए पार ले वो पार  तउँर देवन.
   -हव जी अउ तोला सुरता हे.. अइसने गरमी के दिन-बादर आवय तहाँ ले भइँसा के पीठ म चढ़े मझनिया भर तरियच म बूड़े राहन न.
   -हव जी भइँसा के पीठ म चघे रहना अउ बीच-बीच म पानी म कूद के मछरी टमड़ना कतेक मजा आवय न?
   -तइहा के बात ल बइहा लेगे संगी.. अब तो तरिया नदिया म छाती कटार तक पानी नइ बाँच पावय त कहाँ के भइँसा चघे के मजा अउ कहाँ के मछरी टमड़े के सुख.

10.
-मोला एक बात समझ म नइ आवय जी भैरा के हमन जब काकरो नाहवन म जाथन त तरिया ले नहा के आए के बाद फेर वो मनखे के घर म मढ़ाए पानी म पाँव धोथन.. अरे भई जब तरिया म चिभोरा मार के नहाए रहिथन त फेर पाँव धोए के काबर जरूरत?
   -ए ह हमर पहुनई परंपरा के निर्वहन आय जी कोंदा.. जइसे हमर घर कोनो सगा-पहुना आथे त उनला पाँव धोए बर लोटा म पानी दिए जाथे न.. बस वइसने.
   -अच्छा.. फेर सगा तो बिचारा तालाबेली घाम म पसीना म बोथाय धुर्रा-माटी म सनाय आए रहिथे तेकर सेती वोला लोटा भर पानी दिए जाथे, फेर तरिया ले नहाए-धोए आए मनखे मनला फेर गोड़ धोए बर पानी देवई ह मोला थोकिन अनफभिक जनाथे.
   -अरे भई.. तरिया ले घर तक आवत ले वोकर मन के पाँव ह फेर धुर्रा माटी म सना नइ जाए रहिथे जी?
   -हाँ.. वो तो हे.
   -त धुर्रा म सनाय पहुना मनला वइसने बिन गोड़ धोए अपन घर ले जावन दे जाही जी?

11.
-ए बछर के बजट म पेट्रोल के भाव कमतियागे हे काहत हें जी भैरा.. अब तैं ह फटफटी म बने बोंय-बोंय किंजरबे अपन डोकरी ल पाछू म बइठार के.
   -हमर मन के दिन-बादर पहागे हे जी कोंदा.. हमन किसान घर के लइका अन त हमन ल खेती-किसानी ले जुड़े बात मन ऊपर जादा चेत करना चाही.
   -सही आय संगी.. मोला ए पइत के बजट म सबले बने ए बात ह जनाइस के महानदी इंद्रावती अउ सिकासार कोडार बाँध मनला जोड़े के उदिम करे जाही.
   -सिरतोन आय संगी .. हमर छत्तीसगढ़ म अतेक नदिया नरवा हावय ते ए सब ल जोड़ के अच बरखा  के पानी के रोक-छेंक के सदुपयोग करे जा सकथे.
   -हव जी बरखा के जम्मो पानी ह छेंका के अभाव म बोहा के समुंदर म चल देथे, कहूँ वो जम्मो पानी ल इहें के भुइया म रूँधे-छेके के बनौका बन जाय त बारों महीना हमन ल पानी के कमी नइ जनाही.

12.-बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन ह दुबई म हमर देश खातिर चैम्पियन ट्रॉफी क्रिकेट खेलत मोहम्मद शमी ल मैदान म जूस पीयत देख के ए ह इस्लाम म गुनाह आय काहत हे जी भैरा.
   -वाह भई.. मैदान म खेलत बेरा जूस पीना ह गुनाह कइसे हो सकथे जी कोंदा?
   -वोकर कहना हे- अभी रमजान चलत हे, अइसन म मो. शमी ल रोजा रखना रिहिसे.. रोजा के बेरा म कुछू भी खाना पीना ह गुनाह होथे, जबकि शमी ह भरे मैदान म जूस पीयत हे, जेला लाईव टीवी प्रसारण के माध्यम ले पूरा दुनिया देखिस हे.
   -देख संगी मैं दूसर मन के धरम संस्कृति के बारे म तो नइ जानवँ,  फेर मोला लागथे के कोनो भी धरम म कोनो बीमारी मनखे, सफर म निकले या फेर खेल-कूद के प्रतियोगिता म जूझत मनखे मन बर अइसन बिना कुछू खाए पीए रहे वाला नियम लागू नइ होवत होही तइसे लागथे.
   -हव जी.. मोहम्मद शमी के समर्थन म कुछ मौलाना मन घलो अगसने काहत हें.. फेर मोला ताज्जुब लागथे संगी कोनो भी धरम-पंथ के लोगन अइसन अनफभिक बानी के गोठ ल कइसे बड़ा सहजता के साथ कहि देथें!

13.

-एक दुखद अउ चिंताजनक खबर आए हे जी भैरा.
   -कइसे ढंग के खबर जी कोंदा?
    -खबर मिले हे के हमर छत्तीसगढ़ के 41 कलाकार नोनी मनला सांस्कृतिक कार्यक्रम म डांस करवाए के नॉव म बिहार लेगे रिहिन हें अउ उहाँ लेग के वोकर मन ले देंह व्यापार करवावत रिहिन हें!
   -बाप रे...!
   -हव भई डांस करे के सेती हर महीना 15 ले 20 हजार रुपिया देबो केहे रिहिन हें अउ पाछू दू बछर ले उँकर मन जगा देंह व्यापार करवाए जावत रिहिसे.. अउ जाने ए जम्मो नोनी मन नाबालिग हावयँ.
   -बहुतेच संसो के बात आय संगी, फेर मैं ए गुनथौं के इहाँ के लइका मनला डांस के नॉव म अइसन अंते-तंते जाए के का जरूरत हे?
   -कलाकार मन के मंच म प्रस्तुति के आकर्षण ह जीवलेवा होथे संगी तभे तो अइसन अलहन म वो मन छँदा जाथें.. नवा नवा कलाकारी के सउँख उपजे लोगन के परिवार वाले मनला चेत करे के जरूरत हावय के वोकर लइका मन डांस आदि के नॉव म सही लोगन मन के संगति म जावत हें ते कोनो धंधाबाज षडयंत्रकारी मन के?

14.
-चलना भैरा होले डाँड़ डहार नइ जावस जी? 
   -जाहूँ संगी कोंदा अगोर.. एदे पँचलकड़िया खातिर पाँच ठी छेना हेर लेथौं
   -अरे बइहा दू-चार ठी किन्नी, पिस्सू अउ ढेकना मनला घलो एको ठन शीशी उशी म धर ले रहिबे.
   -वोला काबर जी? 
   -वाह.. एकर ले गाँव म खुरहा-चपका जइसन कोनो किसम के महामारी या रोग नइ संचरय ना.
   -अच्छा! 
   -हव.. तभे तो हमर पुरखौती बेरा ले अइसन रोग-राई महामारी मन ले बाँचे खातिर अइसने खून चूसक जीव मनला घलो होले म डारे के परंपरा हे जी.
   -अच्छा अइसे.. तब तो जरूर धरहूँ जी.. हमर गंज अकन परंपरा ह आने-आने राज ले आके इहाँ बसे शहरिया लोगन मन ले अलगेच जनाथे न..?
  -अलगे हईच हे.. होली म हमन होलाष्टक कहाँ मनाथन? वइसने हमर इहाँ माईलोगिन मन होली के पूजा करे बर घलो नइ जावयँ.
   -पूजा करे बर नइ जावयँ कहिथस.. वोकर तीर म तक नइ ओधयँ.. काबर ते हमर इहाँ होलिका के नहीं, भलुक कामदहन के परब मनाए जाथे.

Friday, 21 February 2025

छत्तीसगढ़ी भाखा के जबर खासियत..।

** हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी के जबर खासियत **
शब्द ल एक बार उचारे म आने अरथ अउ दू पइत सँघरा उचारे म उहिच शब्द के  आनेच अरथ... 
   हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी के ए जबर खासियत आय, के एमा कुछ अइसनो शब्द हे, जेला एक पइत उचारे म वोकर अरथ आने जनाथे, त उचिह शब्द ल सरलग दू पइत उचारे म वोकर अरथ बदल जाथे. आवौ देखथन अइसने एकाद शब्द मनला-
   हमर इहाँ एक शब्द हे- गाड़ा. गाड़ा ल सबो जानथें, एकर छोटे रूप ल गाड़ी कहिथन, जे बइला फाँद के कहूँ आए-जाए या कुछ समान डोहारे के काम आथे. हमन लइका राहन त भॅंइसा गाड़ा अउ बइला गाड़ी दूनों च म बरात जावन. कभू-कभू धान लुवई के सीजन म सीला बीने बर घलो वो खार म जवइया गाड़ा या गाड़ी म बइठ के चल देवत राहन.
   
गाड़ा शब्द के दूसर अरथ इहाँ धान नापे के एक इकाई के रूप म घलो होथे. सियान मन धान मिंजाई के सीजन म पूछ परथें- ए बछर तुँहर घर के गाड़ा धान लुएव गा?. ए जगा इही गाड़ा शब्द ह कतका बोरा या कतका क्विंटल धान होइस एकर रूप म बउरे जावत हे. तब इहाँ नापे खातिर बड़े काठा अउ छोटे काठा के उपयोग करे जावय. बड़े काठा म लगभग तीन किलो असन धान आवय त छोटे काठा म दू किलो के पुरती. इही काठा ल जब बीस बार नापे जावय, त वो एक खॉंड़ी कहावय अउ फेर बीस खॉंड़ी हो जावय त वोला एक गाड़ा कहे जावय.
   अब देखौ इही गाड़ा शब्द के दू पइत सँघरा उचरई ल. गाड़ा-गाड़ा बधाई कहे म एकर अरथ ह एकदम बदल जाथे. अब एकर अरथ ह सैकड़ों अउ हजारों गुना बधाई देवई हो जाथे. अनंत अउ अनगिनत बधाई देना हो जाथे.

    ठउका अइसने एक अउ शब्द देखन- झारा. झारा शब्द ल सुनते मन म बरा-सोंहारी बनाए के बेरा तेलहा कराही ले चुरे-पके बरा-सोंहारी ल निकाले के काम आने वाला एक औजार के सुरता आ जथे. 

   अब इहीच झारा शब्द ल दू पइत सँघरा कर के देखन, त ए ह राँधे-चुरोए के अपन औजार वाले रूप ल छोड़ के जेवन-पानी खातिर नेवता देवइया शब्द बन जाथे- आज फलाना मंडल घर कुल देवता पूजा के नेवता हे गा, तुमन ल उॅंहचे जेवन खातिर झारा-झारा नेवता हे. अब ए नेवता खातिर इही झारा शब्द ह दू पइत सँघरा उचारे म जम्मो परिवार ल सँघरा या समिलहा नेवता देवइया शब्द बनगे हे.
   अइसने एक अउ शब्द देखव- गोंदा.. गोंदा ह छत्तीसगढ़ के मयारुक फूल आय.. इहाँ कतकों किसम के गोंदा फूल होथे. चंदैनी गोंदा तो गजबे प्रसिद्ध हे.. अब ए  गोंदा शब्द ल सँघार के देखव- गोंदा-गोंदा .. अब ए टुकड़ा टुकड़ा माने कूटा कूटा होगे.. तोला गोंदा गोंदा पउल देहूँ रे.

   ए आय हमर छत्तीसगढ़ी भाखा के महानता अउ मौलिकता. जय हो छत्तीसगढ़.. जय हो छत्तीसगढ़ी.

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Sunday, 2 February 2025

कोंदा भैरा के गोठ-30

कोंदा भैरा के गोठ-30

-ठलहाचंद मनला सरकार ह फोकट म एला- वोला बाँटत हे जी भैरा अउ जे मन पूरा ईमानदारी के साथ अपन काम-बुता ल करत हें तेकर मन के पगार दे बर सरकारी खजाना म पइसा नइए कहिके ठेंगा देखाय असन गोठिया देथें.
   -हव जी कोंदा.. सत्ता पाय के नियम बड़ा बिचित्तर हे.. फोकट म ए.. फोकट वो.. सबो पार्टी अउ सरकार के प्राथमिकता बनगे हवय जेकर सेती सरकारी खज़ाना मन जुच्छा परे असन होवत हे.. रिजर्व बैंक ह जम्मो राज सरकार मनला चेताय घलो रिहिसे के फोकट वाले चलागन ल अब थिरवावौ कहिके तभो ले देखत तो हावस.
   -हव जी.. अभी सुप्रीम कोर्ट ह घलो एकर ऊपर चिंता जताए हे मंगलवार के जस्टिस बी आर गवई अउ जस्टिस ए जी मसीह के खंडपीठ ह कहिस- राज सरकार जगा वो लोगन बर खूब पइसा हे, जे मन कुछू काम-बुता नइ करयँ अउ हमन वित्तीय बाधा के बात कहिथन त हमला पगार अउ पेंशन आदि खातिर वित्तीय संकट के गोठ सुने ले मिलथे.
   -करलई हे भगवान..!

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-हमर छत्तीसगढ़ म अभी धरम परिवर्तन ले जुड़े गजबे खबर आवत हे जी भैरा.
   -पूरा देश अउ दुनिया ले अइसन सोर आवत रहिथे जी कोंदा.
   -तोला अइसे का जनाथे जेमा लोगन अपन पुरखौती परंपरा अउ पूजा प्रतीक ल छोड़ के आने के चलागन ल धर लेथें? 
   -एकर संबंध म स्वामी विवेकानंद जी के विचार ह पोठ अउ वाजिब जनाथे संगी.. वोकर मन के पत्रावली नॉव के किताब म एकर संबंध म उँकर विचार ल समोए गे हवय.. "आइए, देखिए तो सही, त्रिवांकुर में जहाँ पुरोहितों के अत्याचार भारतवर्ष में सब से अधिक है, जहाँ एक एक अंगुल जमीन के मालिक ब्राह्मण हैं, वहाँ लगभग चौथाई जनसंख्या ईसाई हो गयी है! (पत्रावली भाग 1. पृ. 385)  .. अइसने पत्रावली भाग 3, पृ. 330, नया भारत गढ़ो, पृ. 18 म लिखाय हे- भारत के गरीबों में इतने मुसलमान क्यों हैं? यह सब मिथ्या बकवाद है कि तलवार की नोंक पर उन्होंने धर्म बदला। जमीदारों और पुरोहितों से अपना पिंड छुड़ाने के लिए ही उन्होंने ऐसा किया और फलतः आप देखो कि बंगाल में जहाँ जमींदार अधिक हैं, वहाँ हिंदुओं से अधिक मुसलमान हैं.
   -महूँ ल ए सब वाजिब जनाथे संगी.. लोगन पइसा या सेवा के लालच म नहीं, भलुक समानता के सम्मान पाए के आस म चले जाथें.

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-कोनो कोनो पत्रकार मन पुचपुचहा किसम के होथे जी भैरा बिन जाँचे-परखे कुछू भी जिनिस ल नकली या अंधविश्वास घलो कहि देथें.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा.. महूँ आकब करे हौं कतकों देवी देवता अउ सिद्ध पुरुष मन के संबंध म घलो उन उजबक किसम के गोठियाय परथें.
   -हव जी.. अभी अइसने एक झन पत्रकार ह प्रयागराज म चलत महाकुंभ म झुँझकुर काँटा म आसन लगा के बइठे बाबा जी ल ए काँटा ह असली आय ते नकली कहिके पूछ परीस.
   -तहाँ ले? 
   -तहाँ ले का.. बाबा जी ह रोसिया के पत्रकार ल धर के अपन डहार तिरिस अउ वोकर कान के खाल्हे म एक थपरा हकनिस.
   -बने करीस.. संत तपस्वी मन बेलबेली करे के जिनिस नइ होय.
   -हव.. बाबा जी के अपन डहार तीरे म पत्रकार ल काँटा गड़िस होही संग म थपरा म कान के खाल्हे ह झन्नइस होही त वो पत्रकार ह काँटा ह असली हे कहे लागिस.
   -असली च काँटा म बइठथें गा.. हमन राजिम, रायपुर अउ शिवरीनारायण के मेला म घलो अइसन साधक तपस्वी मन ल देखे हावन.

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-प्रयागराज महाकुंभ म अभी साधु‌ संत मन ले घलो जादा एक झन माला बेचइया नोनी मोनालिसा ह वायरल होवत जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. महूँ आकब करे हौं.. सोशलमीडिया के जेन मंच ल देखे तेनेच म वो नोनी के मुस्कीढारत विडियो दिखीच जाथे.
   -लोगन वोकर आँखी के सुघरई के घात चर्चा करत हें, काहत हें के वोकर आँखी ह दुनिया के सब ले मयारुक आँखी हे.
   -हव जी.. अउ एक जिनिस आकब करे हावस? 
   -का..? 
   -वो नोनी के सुघरई अउ रहन-सहन बोली-बचन म कोनो च मेर ले बनावटी पन के आरो नइ मिलय.. एकदम निरमल फरी झिरिया ले ओगरत पानी कस आरुग.
   -हव जी.
   -आजकाल जे नोनी मन रील बना के फेमस होय के चक्कर म चिरहा-फटहा अउ उघरा-उघरा कपड़ा लत्ता देंह म ओरमाए नाचत रहिथें, ते मन ल एकर ले सीख लेना चाही, के लोगन के खूबसूरती अंते-तंते कूदे-फाँदे या देंह-दरस करवाए ले नहीं, भलुक शांत सरल अउ संस्कारी बने रेहे ले बाढ़थे.. लोगन वो मन ल जादा सँहराथें अउ दुलारथें.

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-अब के गुरुजी मन कहूँ लइका मन ल रोसहा असन मार परथें त वोकर दाई-ददा मन गुरुजी संग झगरा करे बर चल देथें जी भैरा अउ हमर पाहरो म..? 
   -अरे ददा रे.. हमर पाहरो म जी कोंदा.. दाई-ददा मन गुरुजी मन ल अउ चेतावँय बने हकने कर गुरुजी पढ़ई लिखई नइ करय त कहिके.
   -हव भई.. अउ कक्षा ले बाहिर चरचरावत घाम कुकरा बनावय ते ह अउ जउँहर लागय.
   -हमर गुरुजी ह तो आधा घंटा ले कुकरा बने राह काहय तेकर आजो ले सुरता हे, फेर तैं एक बात जानथस संगी? 
   -का जी..? 
   -कुकरा बनई ह आसनात्मक क्रिया के एक अंग आय. 
   -अच्छा.. दूनों गोड़ के खाल्हे ले हाथ ल बुलका के कान ल धरन तेन ह? 
   -हव.. कुकरा बने ले बहुत अकन लाभ होथे.. गुनिक मन के कहना हे- एकर ले वायु के निष्कासन बने होथे, चेहरा म रक्तसंचार बाढ़े के सेती  चेहरा के ओज म बढ़ोत्तरी होथे अउ झुर्री मन समाप्त होथे.. स्मरण शक्ति घलो बाढ़थे.. आँखी खातिर घलो फायदा के होथे.. सरलग अभ्यास करे ले माइग्रेन म लाभ होथे.. नितंब, जाँघ अउ मेरूदंड के मांसपेशी म खिचाव होय ले रक्तसंचार बाढ़थे अउ उँकर विकार दूर होथे.
   -वाह भई.. कुकरा बने ले अतेक लाभ होथे.. पहिली ए सब गुन ल जाने रहितेन त गुरुजी मन जतका काहयँ तेकरो ले उपराहा कुकरा बने रहितेन.

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-निकाय चुनाव खातिर पार्टी मन के घोषणा पत्र आए के शुरू होवत हे जी भैरा.
   -बढ़िया खबर सुनाए हस जी कोंदा मैं तो ए घोषणा पत्र मन के जबर अगोरा करथौं.
   -वाह भई..अइसे काबर.. अब महीना भर बर चेपटी अउ कुकरा के जुगाड़ होगे कहिके गदकथस का? 
   -वो तो हइच हे संगी.. मैं ह सबो पार्टी के घोषणा पत्र मन ल बने सकेल-सकेल राखथौं घलो.
  -अच्छा.. सबो पार्टी के घोषणा पत्र मन ल.. वो काबर संगी? 
   -जड़हा मौसम म भुर्री तापे के बने काम आथे ना.
   -अच्छा.. घोषणा पत्र मन के भुर्री तापथस! 
   -हव जी.. भुर्री तापे बर एकर ले बढ़ के अउ कोनो साफ सुथरा कचरा नइ मिलय.
   -वाह भई.. त सबो पार्टी के घोषणा पत्र मन के भुर्री के आँच आने-आने जनावत होही? 
   -आँच ह तो ककरो कमती त ककरो ह थोकिन रोसहा जनाथे, फेर वोमा ले निकलइया धुँगिया मन जरूर अलग अलग किसम के जनाथे.
   -अच्छा.. धुँगिया मन अलग अलग किसम के जनाथे? 
   -हव जी.. कोनो पार्टी के घोषणा पत्र के धुँगिया ह खरखराथे त ककरो ह भखरइन असन जनाथे.
   -वाह भई.. माने चुनाव के हर उदिम के तैं ह जबर सेवाद लेथस.

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-ए बछर देश के राजधानी दिल्ली म गणतंत्र दिवस के अवसर म होवइया भारत पर्व 2025 म हमर छत्तीसगढ़ के झाँकी म रामनामी समाज ल देखाय जाही जी भैरा.
   -ए तो बढ़िया खबर आय जी कोंदा.. झाँकी म इहाँ रामनामी समाज के उदय काबर अउ कइसे होइस तेनो ल देखाय जाही का जी? 
   -नहीं जी वो इतिहास अउ कारण ल तो नइ देखाय जाय बस एक रामनामी माईलोगिन अउ एक आदमी ल अपन देंह भर राम राम गोदवाय अउ मुड़ म मयूर पाँखी के मुकुट पहने रामायण पढ़त देखाय जाही.
   -वाह.. इतिहास ल देखाय जातीस त जादा निक जनातीस संगी के कइसे परसुराम नॉव के मनखे ह जब वोला गाँव के मंदिर भीतर नइ खुसरन देइन त वो ह रोसिया के अपन देंह भर राम राम गोदवा लिस अउ एकरे माध्यम ले निराकार ब्रह्म के उपासना चालू कर दिस जेन ह आज एक आध्यात्मिक समाज के रूप धारण कर लिए हे.. अउ सबले बड़े बात तो ए आय के रामनामी मन अयोध्या वाले राजा दशरथ के बेटा राम के नहीं, भलुक निराकार ब्रह्म के उपासक आयँ.

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-छेरछेरा परब म झोंके धान ले हमर गाँव नगरगाँव के मिडिल स्कूल भवन ल बनवाय रेहेन जी भैरा अउ हर बछर छेरछेरा माँग के स्कूल खातिर खेलकूद के सामान घलो लेवन.. हमर गुरुजी मन बढ़िया बैंड बाजा संग हमन ल छेरछेरा मंगवाय बर लेगय संग म उहू मन गाँव भर किंजरयँ.
   -सबो जगा छेरछेरा के सकलाय धान ल लोकहित के कारज म लगाय जाथे जी कोंदा.
   -हव जी.. कतकों गाँव म रामकोठी बढ़ाए के परंपरा घलो हे, फेर अभी कांँकेर जिला के दुर्गूकोंदल ब्लॉक ले खबर आए हे के उहाँ के प्राथमिक शाला पलाचुर के गुरुजी रामकुमार कोमरा ह छेरछेरा म लइका मन जेन धान सकेले रिहिन हें, तेला बेच के दारू पी दिस.
   -वाह भई.. अइसनो होथे गुरुजी मन गा..! 
   -हव जी.. ताज्जुब लागथे संगी.. उहाँ के जिला शिक्षा अधिकारी ह जाँच खातिर टीम भेजे रिहिसे, जेकर प्रतिवेदन मिले के बाद नशेड़ी गुरुजी ल निलंबित कर दिए गे हवय.

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-बाॅलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ह केरल साहित्य महोत्सव के कार्यक्रम म कहे हवय जी भैरा के आज ले सौ बछर बाद के भारत ल जाने बर कहूँ बॉलीवुड सिनेमा ल देखे जाही त ए ह एक त्रासदी बरोबर जनाही.
   -अच्छा.. अइसे काबर जी कोंदा? 
   -वोकर कहना हे के सिनेमा ल सत्य ऊपर आधारित ईमानदारी के साथ बनाए जाना चाही, फेर एकर दर्शन तो होवय नहीं, त सौ बछर बाद एला त्रासदी के छोड़ अउ का माने जाही? 
   -छत्तीसगढ़ के संदर्भ म घलो अइसन स्थिति बन सकथे संगी.. आज इहाँ जेन किसम के छत्तीसगढ़ी फिलिम बनत हे का ए मन ल सौ बछर बाद छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति अउ धरोहर के मानक माने जा सकही? 
   -कोन जनी संगी.. मैं तो एक दू ठ छत्तीसगढ़ी सिनेमा देखे रेहेंव तहाँ ले अब कोनो डहार जाए के मन नइ होवय.
   -अइसे काबर? 
   -बस चारों मुड़ा ले नकल चोट्टई ही देखे ले मिलथे.. हाथ-गोड़ कोनो कोती के त मुड़ी-पूछी अउ कोनो कोती के.. थर खाए असन लागथे.. लोगन के मौलिक सोच, समझ अउ विषय कब उद्गरही तेने ल गुनथौं.

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-तैं एक चीज आकब करे हस जी भैरा.. जेला लोगन जकला, बइहा अउ ना जाने का-का कहिके हिनमान करे अस गोठियाथें उहि च मनखे ह ऐतिहासिक बुता कर डारथे.
   -ए तो दुनिया के चलागन आय जी कोंदा.. जे मनखे ह भीड़ ले अलग हट के कुछू नवा उदिम करथे, लोगन वोला जकला भकला सबो च कहिथें.
   -हव जी.. भेड़िया धसान म रेंगत लोगन बर वो ह अजूबा होथे, काबर ते वो कुछू नवा रद्दा ल धरे रहिथे, उहू म परिया टोरे कस एकपइयाँ जेमा काकरो रेंगे के चिनहा नइ दिखत राहय, तेकर सेती चिक्कन चातर रद्दा म रेंगइया मन बर वो ह अजूबा ही होथे, एकरे सेती वो अजूबा के डगर धरइय्या ल लोगन जकला भकला सब कहि देथें.. फेर कुछू होवय संगी ऐतिहासिक बुता ल अइसने च मन सिध पारथें.. अइसने मन के नॉव इतिहास म शोभा बढ़ाथे.
   -हव‌ जी.. अउ फेर तब जे मन वोला जकला भकला काहत रहिथें, उही मन तरुवा धर के पछताथें.

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-निकाय अउ पंचायत के चुनाव ल देखत बइगा गुनिया मन के खोज खबर ह बाढ़ गे हे जी भैरा.
   -अंधविश्वास के सवारी करइया मन तो अइसन करबे करथें जी कोंदा.
   -हव भई.. अभी मोर संगी ह बतावत रिहिसे- कुकरा अउ बोकरा के बिक्री घलो बाढ़ गे हवय कहिके.
   -मतदाता मनला खुश करे के उदिम खातिर होही जी चेपटी के संगी होथे कुकरा अउ बोकरा ह? 
    -अभी मतदाता मन ले जादा बइगा गुनिया मन के देवता मनला खुश करना ह जादा जरूरी हे बताथें.. बिन पूजवन के उँकर देवता मन कोनो बुतच नइ करयँ कहिथें.. बताथें के जब बइगा मन सुमर-जाप के पूजवन देथें तब उँकर देवता मन मतदाता मन के मति ल पूजवन देवइया प्रत्याशी डहार लेगथे.
   -टार बुजा ल मोला ए सब ह पतियासी असन नइ जनावय.. अरे अइसन होतीस त पूजवन दे दे के सबो झन नइ जीत जातीन? सिरिफ एके झन भर ह काबर जीतथे.. उहू म बिन पूजवन दे प्रत्याशी ह जीतथे, जेकर करम-कमई अउ चाल-चरित्तर बने मयारुक रहिथे.

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-इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के महासचिव पीएमए सलीम के कहना हे जी भैरा के महिला अउ पुरुष एक बरोबर नइ होय.. वोकर कहना हे- हमन लैंगिक न्याय के समर्थक तो हावन, फेर लैंगिक समानता के नहीं.
   -वाह भई.. शारीरिक बनावट म भले आदमी अउ औरत म थोर बहुत अंतर हे, फेर ज्ञान, प्रतिभा अउ शक्ति के मामला म दूनों बरोबर होथें कहिके हमन तो दूनों ल आज तक बरोबर ही समझन जी कोंदा.
   -हव जी सही आय.. वोकर कहना हे- ओलंपिक म महिला पुरुष दूनों के अलग-अलग श्रेणी होथे, तेकर कारण इही आय के दूनों अलग होथे.. वो इहू कहिस- दूनों ल एक बरोबर मानना हकीकत ले आँखी मूंदे बरोबर आय. 
   -वोकर सोच अउ समझ ले अइसन हो सकथे जी संगी, फेर हमन तो हर जीव ल शिव के रूप म देखत आज तक सबो ल एक बरोबर मानत आए हावन अउ आगू घलो मानत रहिबोन.

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-बॉलीवुड अभिनेत्री रहे ममता कुलकर्णी ल जब ले किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर बना दिए रिहिन हें, तेने दिन ले मोर मन उभुक-चुभुक करत रिहिसे जी भैरा अब एदे किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास ह ममता के संगे-संग वोला महामंडलेश्वर के उपाधि देवइया लक्ष्मी नारायण ल घलो महामंडलेश्वर के पद ले निष्काषित करिस हे त थोकन बने जनाइस हे.
   -सिरतोन आय जी कोंदा.. महूँ ल बड़ा अकबकासी असन लागत रिहिसे के एक माईलोगिन ल किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर कइसे बनाए जा सकथे? 
   -हव भई.. हमर देश म तो किन्नर मन ल तीसरा लिंग के स्वतंत्र चिन्हारी मिले हे, त फेर वोमा कोनो भी आने लिंग के सदस्य ल कइसे संँघारे जा सकथे? 
   -ए बात तो हइच हे संगी.. मोला एकरो ले जादा ताज्जुब तो ए बात ह लागे रिहिसे के का कोनो भी मनखे ल महामंडलेश्वर के पद ल चना-मुर्रा बरोबर बाँटे जा सकथे? का ए महत्वपूर्ण पद खातिर कोनो किसम के योग्यता निर्धारित नइ राहय?
   -धरम के ठीहा म अइसन विचित्तर गोठ कभू नइ सुने रेहेन भई.. तभे तो सबो डहार ले संत महात्मा मन एकर विरोध अउ निंदा करत रिहिन हें.

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-काली वक्ता मंच के कवि गोष्ठी म एक बात गजब निक जनाइस जी भैरा.. उहाँ गैर छत्तीसगढ़ी भाषी कवि अउ कवयित्री मन घलो छत्तीसगढ़ी भाखा म रचना सुनाए के उदिम करीन.
   -वाह.. ए तो गजब सुग्घर बात आय जी कोंदा.. लोगन जिहाँ के अन्न-जल खा-पी के जीयत हें उहाँ के भाखा संस्कृति के सम्मान करत वोला आत्मसात करे के कोशिश तो करना ही चाही.
   -हव जी फेर मोला कोनो कोनो छत्तीसगढ़ी कवि मन के सारी-भाँटो वाला रचना मन एको नइ सुहाइस.
   -तोला का कोनो च ल अइसन रचना मन नइ सुहावय.. अरे भई मंच के रचना मन ल भले मनोरंजन के दृष्टि ले अइसन किसम के सुने या सुनाए जा सकथे फेर गोष्ठी म तो गंभीर रचना आना चाही.
   -हव जी सही आय.. एक डहार हमन छत्तीसगढ़ी ल आठवीं अनुसूची म सँघारे के बात करत हावन.. प्राथमिक ले लेके उच्च शिक्षा के माध्यम बनाए के गोठ करत हावन अउ दूसर डहार सारी-भाँटो तक ही अपन सोच ल सकेले बइठे रहिबोन त हमर अपन महतारी भाखा ल शिक्षा के माध्यम बनाए के बात ह कइसे सिध पर सकही?

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