Friday, 29 March 2013

बोरे-बासी के दिन आगे...


दही-मही संग बोरे-बासी के लगिन धरागे रे
गोंदली संग सुघ्घर झड़के के दिन आगे रे..........

सुरुज नरायन देखत हावय आँखी ल गुर्रा के
पवन बड़ोरा बनगे हावय वोकर संग धुर्रा के
हमर तो भंइसा म चढ़के तरिया तंउरे के दिन आगे रे........

ऐसन-फैसन का कहिबे उघरा-उघरा घुमथन
झंझकुर-झबड़ी के छइहाँ म मंझनी-मंझनिया खेलथन
बाँटी-भौंरा कभू त कभू छू-छुवाउल छुवागे रे.............

नंदिया खंड़ के लाल कलिंदर अड़बड़ जी ललचाथे
झिथरी बानी के केकड़ी टूरी ह टुहूं नंगत देखाथे
अइसे नखरा देखाथे, जइसे सजन आगे रे.........

पों-पों करत सइकिल चढ़के बरफ के गोला आथे
झिम-झाम कोलकी-संगसी म पइसा धरके बलाथे
हमर तो तरुवा के गरमी ह ठउका जुड़ागे रे........


सुशील भोले
संपर्क : 41-191, कस्टम कालोनी के सामने,
 डॉ. बघेल गली, संजय नगर (टिकरापारा)
रायपुर (छ.ग.) मोबा. नं. 098269 92811

2 comments:

  1. बहुत सुघ्घर रचना

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  2. धन्यवाद भाई...

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