Thursday, 29 August 2019

नवाखाई परब....

नवाखाई परब...
अपन मेहनत ले उपजाए खरीफ फसल ल अपन ईष्ट देव ल समर्पित करे के परब आय "नवाखाई परब"। फेर ये परब ल अलग- अलग वर्ग के मन अलग- अलग तिथि म मनाथें। ये ह हमर संस्कृति के विविधता के ठउका चिन्हारी आय, के एकेच ठन परब ल अलग- अलग संदर्भ या अलग- अलग तिथि म घलो मना लेथन, जबकि परब मनाए के उद्देश्य एके होथे।
छत्तीसगढ़ म " नवाखाई परब " ल घलो अइसने अलग- अलग बेरा म मनाथें। इहाँ के अनुसूचित जाति वर्ग के एक समुदाय वाले मन जे उड़िसा सीमा क्षेत्र के रहइया आयं, उन एला भादो महीना के अंजोरी पाख के ऋषि पंचमी के दिन मनाथें। इहाँ के गोंडवाना के संस्कृति ल जीने वाला मन ए परब ल कुंवार महीना के अंजोरी पाख म दशहरा तिथि के आसपास अष्टमी या नवमी के मनाथें। जबकि इही "नवाखाई परब" ल इहाँ के मैदानी भाग म रहइया सामान्य वर्ग के लोगन मन कातिक अमावस्या के मनाए जाने वाला देवारी परब बखत "अन्नकूट" के रूप म मनाथें।
ये हमर संस्कृति के विविधता के एक अच्छा उदाहरण आय, के एके ठन परब ल हमन अलग- अलग बेरा म मना लेथन, फेर ए सबके उद्देश्य एके आय अपन नवा फसल ल अपन ईष्ट ल समर्पित करना। असने बहुत अकन परब हे, जेकर संदर्भ अलग- अलग वर्ग के मन अलग- अलग बताथें या मानथें। तेकर सेती कहिथंव, के ए बाहिर ले दिखत अलगाव के नाम म लड़े-झगरे के बदला सबके सम्मान करत एक-दूसर ल सहयोग करना चाही।
-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान रायपुर
मो. 9826992811

Friday, 23 August 2019

आधा शीशी या गाभिन...?

आधा शीशी अउ गाभिन...
संगी हो काली जुवर "अवतरे हे या जमने हे" शब्द के छत्तीसगढ़ी भाखा म उपयोग के संबंध म जानेंन, आज "पांव भारी, आधा शीशी हे, या फेर गाभिन हे" शब्द के उपयोग कइसे होथे, तेकर उप्पर चरचा करबोन।
हिन्दी भाखा म ऊपर के जम्मो शब्द मन ल गर्भावस्था के सूचक शब्द कहे जा सकथे। फेर छत्तीसगढ़ी म एकर उपयोग अलग- अलग संदर्भ म करे जाथे।
जइसे कोनो मनखे ह अपन बहू खातिर ए अवस्था के जानकारी देना चाहथे, त कहिथे- हमर बहू ह भारी पांव हे गा, या आधा शीशी हे जी, या फेर पेट म हवय घलो कहि सकथे। फेर अपन बहू खातिर "गाभिन हे" शब्द के उपयोग नइ करय। ठउका इही किसम, जब वो अपन घर के गाय या भइंस के इही अवस्था के जानकारी देथे, त वोकर बर "गाभिन" शब्द के उपयोग करथे, के हमर गाय गाभिन हे गा। वो ह गाय खातिर पेट म हे, आधा शीशी हे या पांव भारी हे शब्द के उपयोग नइ करय। अउ इही अवस्था के जानकारी जब फसल खातिर देना होथे, त कहिथन- धान ह "पोठरियागे" हे गा या "पोठरीपान" धर ले हे।
ए हमर भाखा के शब्द भंडार अउ वोकर उपयोग करे के विविधता के बहुत सुघ्घर उदाहरण आय। एकर ले हमर भाखा के समृद्धि के घलो जानबा मिलथे, जेकर उचित उपयोग के संग वोकर बढ़वार के जोखा घलो हमला करना हे। जय हो राजभाखा छत्तीसगढ़ी... जय हो महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी...
-सुशील भोले

अवतरे हे या जमने हे....

अवतरे हे या जमने हे...?
हर भाखा के अपन मौलिक परंपरा होथे, अउ वोला सुरक्षित रखे के जवाबदारी वो भाखा-संस्कृति ल जीयइया मन के होथे।
छत्तीसगढ़ी म जब ककरो घर लइका होथे, त वो घर के सियान बताथे, हमर घर बाबू अवतरे हे, या नोनी अवतरे हे। वो ह लइका जनमे हे या जमने हे, नइ काहय।
अउ जब वोकर घर कोनो गाय-गरुवा ल जमनथे, त जरूर वो कहिथे, हमर गाय ह बछरू या बछिया जमने हे।
माने मनखे के जनमे बर अवतरे अउ जानवर के जनमे बर जमने शब्द के प्रयोग करथे।
काली जुवर जब मैं एक बड़का लोगन के जनमदिन म  बधाई देवत वोकर "अवतरण दिन" लिखेंव, त एक हिन्दी के बड़का विद्वान अवतरण शब्द गलत हे कहे लगिस। मैं वोला कहेंव- छत्तीसगढ़ी के परंपरा तोला जाने बर लागही साहेब। हम छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति के पोठ रखवार ल बधाई दे हावन, त अवतरे शब्द के प्रयोग करे हावन। वो चुप रहिगे।
संगी हो हिन्दी या आने भाखा म भले ककरो जनम दिन ल अवतरण दिन कहना गलत हो सकथे, फेर छत्तीसगढ़ी म नइ होय। एकर सेती जरूरी हे, के हम अपन संस्कृति-परंपरा के पालन करन, दूसर भाखा के भेंड़िया धंसान म झन रेंगन।
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो.9826992811

Thursday, 22 August 2019

सावन पुन्नी के प्रगटे हे...

सावन पुन्नी के प्रगटे हे शिव पूजा के चिन्हारी
एकरे सेती ए महीना होथे पूजा जादा हितकारी
बोल बम के गूंजत रहिथे जब चारों मुड़ा जयकारा
तब लिंग रूप धारी शिव बरसाथे असीस-धारा
-सुशील भोले-9826992811

कतेक सुग्घर तीजा तिहार...

कतेक सुघ्घर परब हवय हमर तीजा के तिहार
गंजमंज-गंजमंज लागत हावय  ददा के दुवार
साल भर म सकलाए हावंय जम्मो बेटी-माई
आज करू-भात के उनला हमर मया-जोहार
🌷सुशील भोले-9826992811

ग्रंथ ल नइ लिखे हे भगवान...

दुनिया के कोनो ग्रंथ ल नइ लिखे हे भगवान
एकरे सेती कहिथंव सबला जांच-टमड़ के मान
जतका ग्रंथ रचइया हें, सब उंकरे अनुभव आय
जेकर भाग म जतका साधना वतके गहिरा जान
-सुशील भोले-9826992811

Tuesday, 20 August 2019

महुआ के पतरी म पसहर के भात...

महुआ के पतरी म, पसहर के भात।
मिंझर के चुरही, भाजी के छै जात।।
भंइस के दही संग, पाबोन परसाद।
दाई पोता मार के, दिही आसिरबाद।।
महतारी मन लइका खातिर, करे हे उपास।
जुग जुग जिए मोर बेटा, अइसे बिसवास।।
महतारी मन के सदा, सजे रहय सिंगार।
जम्मो झन बर सुग्घर हो, कमरछठ तिहार।।

Friday, 16 August 2019

तब पाबे अधिकार...

जी-हुजुरी करे म पा लेबे भले तैं चटनी कस चटकार
फेर भीरे कछोरा धरबे संघर्ष के रद्दा तब पाबे अधिकार
-सुशील भोले-9826992811

Wednesday, 14 August 2019

फल तभे मिलही जब आही सीजन....

भले चघावत राह साल भर तैं श्रद्धा के फूल-पान
फेर पूजा के फल तब मिलही जब आही देव-लगन
जइसे रूखुवा फल देथे, जब आथे वोकर सीजन
ठउका अइसने देव-मंडल घलो करथे अपन जतन
सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान रायपुर
मो. 9826992811

Monday, 12 August 2019

छत्तीसगढ़िया राज आइस हे...

सन् 56 ले चले आन्दोलन के अब भाग जागिस हे
कब के घपटे अंधियारी रात सिरतोन पहाइस हे
कोरी भर बछर बीते के बाद अब जनाइस हे
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़िया राज आज आइस हे
-सुशील भोले-9826992811

Saturday, 10 August 2019

उज्जर करम के अंजोर ले.....

उज्जर करम के चिटिक अंजोर ले पूरा जिनगी उजराथे
एकेच ठोसहा के करम लेख ले कतकोन पीढ़ी तर जाथे
-सुशील भोले