Friday, 9 March 2018

** हमर पूजा विधि **

* स्नान करके आने पर मुख्य द्वार पर जल अर्पण के पश्चात् जय गुरुदेव, ऊँँ नम: शिवाय, जय-विजय को प्रणाम करें।
* पैर धोकर या जल छिड़क कर अंदर प्रवेश करें। पुन: अंदर के द्वार पर जल अर्पण
कर जय गुरुदेव, ऊँँ नम: शिवाय, जय-विजय को प्रणाम करें।
* गुरु स्थापना (मंत्र) कर के भगवान शिव सहित सभी देवी-देवताओं को जल
अर्पण करें।
* आसन (पूजा स्थल) की साफ-सफाई कर समस्त पूजा सामग्री एकत्र कर लें।
* गुरुस्थापना (मंत्र) कर के गुरु तथा माता-पिता के नाम से जाप कर आसन पर
जल छिड़कें तथा आसन ग्रहण करें।
* जल, दूध, बेलपत्ता, फूल-माला, भोग, चंदन-तिलक क्रमश: लगाएं।
* गुरु स्थापना (मंत्र पाठ) करते हुए दीपक में तेल डालें तथा बत्ती लगाएं।
* अपने अंग पर चंदन-भस्म लगाएं।
* ज्योति प्रज्वलित करें। हवन कुंड में भी अग्नि प्रज्वलित करें।
* अगरबत्ती जलाकर हूम-धूप (हवि) अग्नि कुंड में अर्पित करें।
* विधिवत प्रणाम कर आशीर्वाद लें।
* समस्त ग्रंथ, चालीसा, मंत्र-विद्या आदि का अपनी शक्ति के अनुसार या साधनानुसार
पाठ कर अंत में पंचाक्षरी मंत्र ऊँँ नम: शिवाय का या अपने गुरु से प्राप्त मंत्र का
१०८ बार जाप करें।
* तुलसी में (आंगन के) दीप, अगरबत्ती, जलाकर सूर्यदेव को प्रणाम करें, तथा
अंत में प्रसाद ग्रहण कर अपने आसन को उठा लें।

नोट :- जिन्हें विधिवत गुरुमंत्र नहीं मिला हो वे गुरुस्थापनी मंत्र के स्थान पर पंचाक्षरी
   अर्थात ऊँँ नम: शिवाय मंत्र का लगातार जाप करते रहें।

-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान
५४/१९१, डाॅ . बघेल गली, संजय नगर
(टिकरापारा) रायपुर (छत्तीसगढ)
मो/व्हा. ९८२६९९२८११, ७९७४७२५६८४

** साधक मन के करम-धरम **

* सूर्योदय से पूर्व स्नान-ध्यान।
* पूर्व तथा पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके दिशा-मैदान न करें।
* स्नान के पश्चात् पीपल वृक्ष में जल चढ़ाएं। ·किसी कारणवश या समयाभाव के
कारण जय पीपल देव, ऊँँ नम: शिवाय, ऊँँ विष्णुदेवाय नम: का स्मरण कर लें।
* सोमवार तथा शनिवार को पीपल वृक्ष की धूप-दीप, अगरबत्ती, फूल, भोग,
चंदन आदि के साथ पूजा करें।
* दक्षिण तथा पश्चिम दिशा की ओर मुंह कर के भोजन ग्रहण न करें।
* पूर्व दिशा की ओर तथा किसी भी मंदिर या पूजा स्थल की ओर पैर कर के
नहीं सोना चाहिए।
* अपना जूठा किसी भी परिस्थिति में दूसरों को न दें, तथा केवल एक ग्रास
(परोसा) ही भोजन ग्रहण करें।
* पिड़हा (पाटा) पर रख·र ही भोजन ग्रहण ·रें, तथा भोजन ग्रहण करते समय
मौन रहें।
* विष नाशक मंत्र के द्वारा शोधित करने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें।
* किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ तथा मांस आदि का सेवन न करें।
* चौबीस घंटे में कम से कम एक बार अवश्य विधिवत पूजा करें। प्रत्येक पर्व,
त्यौहार एवं विशेष तिथियों पर दोनों समय विधिवत पूजा-पाठ करें।
* सुबह के समय 4 बजे से लेकर दिन के 11 बजे तक शाम को 5 बजे से ले·र रात्रि 9 बजे
तक पूजा संपन्न कर लेना चाहिए।
* पूजा के समय सफेद वस्त्र धारण करें।
* किसी भी प्रकार की अशुद्धता की स्थिति में पूजा स्थल पर न जाएं।

-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान
54/191, डाॅ . बघेल गली, संजय नगर
(टिकरापारा) रायपुर (छत्तीसगढ)
मो/व्हा. 9826992811, 7974725684

* . ज्ञान-सार..*

* ज्ञान और आशीर्वाद चाहे जहां से भी मिले उसे अवश्य ग्रहण करना चाहिए।

* दुनिया का कोई भी ग्रंथ न तो पूर्ण है, और न ही पूर्ण सत्य है। इसलिए सत्य को
जानने के लिए साधना के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करें। केवल साधना और
अनुभव के द्वारा प्राप्त ज्ञान ही सत्य तक पहुंचने का एकमात्र उत्तम रास्ता है।

* जहां तक सम्मान की बात है, तो दुनिया के हर धर्म और संस्कृति का सम्मान करना
चाहिए, लेकिन जीएं सिर्फ अपनी ही संस्कृति को, क्योंकि अपनी ही संस्कृति
व्यक्ति को आत्म गौरव का बोध राती है, जबकि दूसरों की संस्कृति गुलामी का
रास्ता दिखाती है। 

* भारत संस्कृतियों का देश है। यहाँ हर राज्य की अलग संस्कृति है। हर क्षेत्र की
अलग संस्कृति है। हर समूह की अलग संस्कृति है। इसके बावजूद मैं छत्तीसगढ़ के
संदर्भ में जिस मूल संस्कृति की बात करता हूं, वह केवल एक संस्कृति ही नहीं,
अपितु एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, एक संपूर्ण धर्म है, जिसे मैं आदिधर्म कहता हूं।

-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान
54/191, डाॅ . बघेल गली, संजय नगर
(टिकरापारा) रायपुर (छत्तीसगढ)
मो/व्हा. 9826992811, 7974725684

**....हमर मूल परब-तिहार..**

*     चैत अंजोरी ए·म - हमर संस्कृति के नवा बछर
* चैत अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति ·के सती रूप म अवतरण दिवस)
* बइसाख अंजोरी तीज - अक्ति (किसानी ·के नवा बछर)
* असाढ़ महीना भर - जुड़वास
* असाढ़ पुन्नी - गुरु पूर्णिमा
* सावन अमावस - सवनाही / हरेली (मांत्रिक शक्ति प्रागट्य दिवस)
* सावन अंजोरी पंचमी - नाग पंचमी (वासुकी जन्मोत्सव)
* सावन अंजोरी पंचमी/नवमी ले पूर्णिमा तक- भोजली परब
* सावन पुन्नी - परमात्मा के शिव लिंग रूप म अवतरण दिवस
* भादो अंधियारी छठ - कमरछठ (कर्तिकेय जन्मोत्सव)
* भादो अमावस - पोरा (नंदीश्वर जन्मोत्सव)
* भादो अंजोरी चौथ - गणेश जन्मोत्सव
* ऋषि पंचमी/दशहरा/अन्नकूट - नवा खाई (एला अलग-अलग समुदाय के मन अलग-अलग दिन मनाथें)
* कुंवार अंधियारी पाख - पितर पाख
* कुंवार अंजोरी नवमी - नवरात (माता शक्ति के पार्वती रूप म अवतरण दिवस)
* कुंवार अंजोरी दशमी - दंसहरा (समुद्र मंथन ले निकले विष के हरण दिवस)
* कुंवार पुन्नी - शरद पुन्नी (समुद्र मंथन ले निकले अमरित पाए के परब)
* कातिक अंधियारी पाख - कातिक नहाए अउ सुवा नाच के माध्यम ले ईसरदेव-
गौरा के बिहाव के तैयारी परब-पाख
* कातिक अमावस - गौरी-गौरा परब (ईसरदेव-गौरा बिहाव परब)
* कातिकपुन्नी ले शिवरात्रि तक - मेला-मड़ई के परब
* अगहन पुन्नी - परमात्मा के ज्योति स्वरूप म प्रगट दिवस
* माघ अंजोरी पंचमी - बसंत पंचमी (शिव तपस्या भंग करे बर कामदेव अउ रति
के आगमन के प्रतीक स्वरूप अंडा पेंड़ (अरंडी) गडिय़ाना, नाचना-गाना सवा
महीना के परब मनाना)
* पूस पुन्नी - छेरछेरा (शिवजी द्वारा पार्वती घर नट बनकर जाकर भिक्षा मांगने का परब )
* फागुन अंधियारी तेरस - महाशिवरात्रि (परमात्मा के जटाधारी रूप म प्रगटोत्सव पर्व)
* फागुन पुन्नी - होली / कामदहन परब (तपस्या भंग करे के उदिम करत कामदेव
ल क्रोधित शिव द्वारा तीसरा नेत्र खोल के भसम करे के परब)
* चैत अंधियारी पाख - गौना (गवन) के पाख ।

-सुशील भोले
आदि धर्म जागृति संस्थान
54/191, डाॅ . बघेल गली, संजय नगर
(टिकरापारा) रायपुर (छत्तीसगढ)
मो/व्हा. 9826992811, 7974725684

Tuesday, 6 March 2018

"आदि धर्म जागृति संस्थान" पंजीकृत

छत्तीसगढ के मूल धर्म, संस्कृति एवं सम्पूर्ण अस्मिता के लिए कार्यरत "आदि धर्म सभा" को सहायक पंजीयक आर. आर. भानू द्वारा "आदि धर्म जागृति संस्थान" के नाम पर पंजीकृत कर क्र. 122201889720 प्रदान किया गया है।
जो मित्र अपने पुरखों की विरासत को उसके मूल रूप में जानने, समझने और उसे संरक्षित कर आने वाली पीढी के लिए जीवंत रूप में रखने में रूचि रखते हैं, वे हमसे जुड़ने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।
इससे संबंधित विषयों पर सभा, संगोष्ठी, व्याख्यान एवं अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी सम्पर्क किया जा सकता है।
-सुशील कुमार वर्मा "भोले"
संयोजक, आदि धर्म जागृति संस्थान
54/191, डाॅ . बघेल गली, संजय नगर 
(टिकरापारा) रायपुर (छत्तीसगढ)
मो/व्हा. 9826992811, 7974725684

"आदि धर्म जागृति संस्थान" की प्रथम बैठक


"आदि धर्म जागृति संस्थान" की प्रथम बैठक रविवार 4 मार्च को तात्यापारा, रायपुर स्थित दानवीर भोला कुर्मी छात्रावास के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में संयोजक सुशील वर्मा "भोले" ने संस्था के पंजीयन के संबंध में उपस्थित सदस्यों को जानकारी दी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी बैठक 29 मार्च को आयोजित होगी जिसमें पदाधिकारियों की विधिवत घोषणा की जाएगी। उसके पश्चात ही संस्थान के माध्यभ से यहां की मूल संस्कृति एवं सम्पूर्ण अस्मिता के प्रचार-प्रचार एवं पुनस्थापना के लिए जमीनी कार्य प्रारंभ होगा।

आज की बैठक में संयोजक सुशील भोले, डाॅ. सुखदेव राम साहू , रामशरण कश्यप, ललित टिकरिहा, बंशीलाल कुर्रे, रामजी ध्रुव, हीरा लाल साहू, कमल निर्लकर, देवनाथ साहू आदि उपस्थित थे।

मूल संस्कृति अउ धुर-पंचमी...?

छत्तीसगढ के मूल संस्कृति म होरी परब, जे असल म काम-दहन के रूप म मनाए जाथे, वो ह बसंत पंचमी ले लेके फागुन पुन्नी तक करीब 40 दिन के परब होथे, जेला हम वसंतोत्सव के रूप म घलो जानथन। 

इहां के मूल संस्कृति म रंग-पंचमी या धुर-पंचमी के कोनो ठउर नइए। ए असल म बाहिरी संस्कृति, जेला हम होलिका दहन के रूप म सुनथन तेकर अंग आय। होलिका दहन फागुन पुन्नी ले लेके चैत अंधियारी पाख के पंचमी तक मनाए जाथे। जबकि हमर इहां के मूल संस्कृति ल बसंत पंचमी ले लेके फागुन पुन्नी तक।

जे मन इहां के भाखा, संस्कृति अउ अस्मिता ल लेके काम करत हें, वो मनला चेत राखे के जरूरत हे, कोन हमर मूल संस्कृति आय अउ कोन हमर मूड़ म थोपे गे बाहिरी संस्कृति। तभे हमर मूल संस्कृति के आरुग चिन्हारी हो सकथे।

-सुशील भोले
संयोजक, आदि धर्म जागृति संस्थान, रायपुर
मुंहाचाही : 9826992811