Tuesday, 31 May 2016

तुतारी // समरसता भोज

जइसे-जइसे चुनाव लकठाथे तइसे-तइसे  एक ले बढ़के एक ढोंग अउ पाखण्ड देखे बर मिलथे। अभी उत्तर प्रदेश म चुनाव होवइया हे, त उहां समरसता के खेल चालू होगे हे। बीते मंगलवार के वाराणसी के एक दलित के घर भाजपा के शहंशाह 'समरसता भोज" करे बर पहुंचगे। मजेदार बात ये आय के पेट भर खाइसे 'शाह" ह अउ पेट पिराइसे 'बहिन जी" के।

सुशील भोले
9826992811, 808530593

तुतारी // कबीरदास अउ कुमार विश्वास..?

कवि हजारों होथें, फेर सबके अलग-अलग दृष्टिकोण अउ उद्देश्य होथे। कतकों झन जब मोला जानथें के ये कवि ये, त झट पूछथे- फलाना हास्य कवि संग आथस-जाथस का? मैं कहिथौं के मैं तो एक उद्देश्य अउ सिद्धांत ल लेके साहित्यिक रचना लिखथौं, त वोकर समझ म कुछु नइ आवय। मैं कहिथौं- जेन दिन तैं कबीर दास अउ कुमार विश्वास के अंतर ल समझ जाबे, उही दिन तोला हास्य अउ गंभीर लेखन के अंतर घलोक समझ आ जाही।

सुशील भोले
9826992811, 808530593

Monday, 30 May 2016

तुतारी // मानसून ढेरियावत हे....

मानसून हमर देश म 1 जून ले लेके 5 जून तक प्रवेश करथे। मौसम विज्ञानी मन के कहना हे के देश के बाकी भाग म तो मानसूम ह अपन बेरा म प्रवेश करही फेर केरल म थोकन पिछुवा जाही। नवतपा म बरखा के नजारा  देखत छत्तीसगढ़ बर ये ह संसो के बात ये, काबर ते हमर राज म केरल के ही मानसून ह खेती-किसानी बर जादा फायदा के होथे। मानसून ढेरियाही त खेती घलोक ढेरिया देही।

सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // राज्यसभा म आरुग छत्तीसगढिय़ा....

अभी राज्यसभा म हमर राज ले दू आरुग छत्तीसगढिय़ा सदस्य के रूप म जाहीं। इहां अइसन नजारा तब देखे बर मिलथे, जब मुख्य चुनाव तीर-तखार म नजर म आए बर धर लेथे। नहीं ते बाकी समय म तो राष्ट्रीयता के नांव म क्षेत्रीय उपेक्षा के खेल चलत रहिथे। जय राष्ट्रीयता....जय राष्ट्रीय पार्टी....

सुशील भोले
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Saturday, 28 May 2016

तुतारी // अंत समय म मति भ्रम...

अइसे कहे जाथे के जब काकरो अंत समय आथे, त वोकर मति भ्रष्ट हो जाथे या भ्रम के अवस्था म पहुंच जाथे। अभी मोदी सरकार ह अपन कार्यकाल के दू बछर पूरा करे के जलसा मनावत हे। फेर कांग्रेस वाला मन के एकर खातिर जइसे किसम के प्रतिक्रिया आवत हे, वो ह, वो अंत समय वाला कहावत ल चरितार्थ करत हे, अइसे जनावत हे।

सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // नवतपा म बरखा....

जब ले नवतपा लगे हे, तब ले बादर भइया के मया बाढग़े हे। रोज संझा धमक देथे। थोक-बहुत घुड़ुर-घाडऱ करथे, पानी बरसथे, फेर कोनो-कोनो जगा करा घलो ठठा देथे। आंधी-गरेर घलो संग म लानथे, जे ह टीन-टप्पर, रूख-राई मन के सत्यानाश कर देथे। लोगन बस अतके पूछत रहि जाथें, के बादर भइया तैं बरसात म कहां लुकाए रेहे?

सुशील भोले
9826992811, 8085305931

Friday, 27 May 2016

छत्तीसगढ़ी लेखन म शब्द के चयन

छत्तीसगढ़ राज बने के बाद अउ खास करके छत्तीसगढ़ी ल ये राज म राजभाखा के दरजा मिले अउ छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के स्थापना होय के बाद छत्तीसगढ़ी लेखन ह भरदरागे हवय। अब उहू मन छत्तीसगढ़ी म लिखे बर धर लिए हें, जे मन कभू हमन ल संकीर्ण अउ राष्ट्रभाषाद्रोही होए के आरोप लगावत राहंय। फेर ये भरदराये लेखन म इहू देखब म आवत हवय के लोगन कतकों शब्द मनला बिगाड़ के या फेर आने-ताने लिखत हावंय।

खास करके मोला अइसन देखे बर ए सेती मिलथे काबर ते मैं कई ठन पत्र-पत्रिका मन के संपादन के बुता म कोनो न कोनो किसम ले जुड़े रहिथंव। एकरे सेती जुन्ना साहित्यकार मन के संगे-संग नवा-नेवरिया मन के लेखन अउ उंकर शब्द चयन के पाला मोर संग परत रहिथे। अलग-अलग क्षेत्र के लोगन के अलग-अलग शब्द चयन संग घलोक मुठभेड़ होवत रहिथे। तब लागथे के अभी तक एकर मानक रूप के निर्धारण या पालन काबर नइ हो पाय हे, जेमा जम्मो क्षेत्र के लोगन एके किसम के शब्द मन के उपयोग कर लेतीन?

उदाहरण खातिर मैं अइसन मनखे के लिखे शब्द अउ वाक्य ल ए मेर रखना चाहत हंव, जेकर छत्तीसगढ़ के संगे-संग देश भर म एक भाषा-वैज्ञानिक के रूप म चिन्हारी हवय, अउ वो हें- डॉ. विनय कुमार पाठक। संगी हो, मैं कोनो नवा-नेवरिया लेखक के लिखे ल जान-बूझके उदाहरण के रूप म नइ रखना चाहंव, काबर ते वोकर लेखन म अंगरी उठाये के अबड़ अकन ठउर मिल सकत हे।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन 2014 के स्मारिका के पृष्ठ क्र. 10 म डॉ. विनय कुमार पाठक के एक लेख छपे हे, शीर्षक हे- 'छत्तीसगढ़ के चिन्हारी : भाषा-साहित्य के जुबानी"। ये लेख के शुरुवात ल बने चेत लगाके पढ़व, काबर ते हम एकरे ऊपर चरचा करबो। लिखे गे हे- 'छत्तीसगढ़ी साहित्य भारतेंदु युग ले ओगर के आज के इक्कीसवीं सदी के चौदा बछर म हबरगे हे।"

अब ये वाक्य ऊपर मोर दू-तीन ठन प्रश्न हवय, आपो मन जुवाब दे के कोशिश करहू। सबले पहला प्रश्न- छत्तीसगढ़ी साहित्य संग भारतेंदु के का संबंध हे? का हिंदी या खड़ी बोली के भारतेंदु के पहिली ले छत्तीसगढ़ी म लेखन होवत नइ आवत हे? हमर इहां लोक साहित्य के जेन खजाना हवय वो ये बात ल सिद्ध करथे के भारतेंदु के पहिली ले छत्तीसगढ़ी म लेखन होवत आवत हे। लोक साहित्य के अथाह खजाना दू-चार बछर म नइ सिरज जाय, एकर बर हजारों साल के लंबा दौर ले गुजरना होथे।

हमर इहां के विद्वान मन छत्तीसगढ़ी के पहला प्रयोग आज ले 600 साल पहिली सन् 1497 म चारण कवि बलराम राव खैरागढ़ वासी  ले करे के उदाहरण देथें-
लक्ष्मीनिधी राय सुनौ चित्त के गढ़ छत्तीसगढ़ न गढैय़ा रही
मरदूमी रही नहीं मरदन के फेर हिम्मत ले न लड़ैया रइही।।
एकरो ले आगू बढिऩ त छत्तीसगढ़ी के जुन्ना रूप ल दंतेवाड़ा म सन् 1703 अउ वोकर कोरी भर पाछू आरंग के अभिलेख म घलोक देखे के बात कहे जाथे। संत कबीर के शिष्य अउ वोकर समकक्ष धनी धरमदास के 'जामुनिया के डार मोर टोर देव हो...Ó जइसन रचना मनला घलोक छत्तीसगढ़ी के जुन्ना रूप के उदाहरण खातिर देखाये जाथे। त फेर एला भारतेंदु युग ले ओगरे के बात काबर कहे जाथे? कहूं ये ह छत्तीसगढ़ी ल भारतेंदु माध्यम ले हिंदी के पिछलग्गू बनाय के प्रयास तो नोहय?

मोर दूसरा प्रश्न- 'छत्तीसगढ़ी साहित्य भारतेंदु युग ले 'ओगर" के..." का साहित्य या भाखा ह 'ओगरथे"? ओगरना, पझरना, निथरना, बोहाना जइसन शब्द ल हमन कोनो तरल पदार्थ, जइसे- पानी या पछीना खातिर प्रयोग करत रेहे हावन के वो कुआं या झिरिया ले तुरते पानी 'ओगरे" ले धर लिस गा। फेर भाखा या साहित्य खातिर हम कभू 'ओगरे" शब्द के प्रयोग न सुने रेहेन न करे रेहेन। का कोनो फलाना घर लइका ओगरे हे कहि देही त हमन मान लेबो? हर शब्द के प्रयोग के अपन मरजाद हे, वोला वोकरे अंतर्गत करे म सुहाथे।  जिहां तक भाखा या साहित्य के बात हे, त एकर खातिर 'उद्गरथे" शब्द के उपयोग ह जादा अच्छा लाग सकथे। काबर भाखा या साहित्य के जनम होथे, उत्पत्ति होथे। वो उद्गरथे।

मोर तीसरा प्रश्न- 'छत्तीसगढ़ी साहित्य..... आज के इक्कीसवीं सदी के चौदा बछर म हबरगे हे।" सुरता रखव- 'हबरगे हे"। मोला लागथे के इहां 'हबरगे" शब्द ह वतका अच्छा नइ लागत हे, जतका 'संघरगे" जइसे कोनो शब्द ए जगा लिखे जातीस। बिलासपुर अउ रायगढ़ क्षेत्र म पहुंचे खातिर 'हबरना" शब्द के प्रयोग करे जाथे, फेर रायपुर अउ दुरुग क्षेत्र म 'हबरना" शब्द ल ए रूप म स्वीकार नइ करे जाय।

मोला जिहां तक थोक-मोक जानकारी हे तेकर अनुसार रायपुर-दुरुग के छत्तीसगढ़ी ल ही गुनिक मनखे मन मानक रूप म अपनाये के गोठ करथें। वइसे भी कोनो भी भाषा के मानक रूप वो क्षेत्र या राज के राजधानी के भाषा ल मानक रूप माने जाथे। जिहां तक भाषा के मिठास के बात हे, त पूरा छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र के भाषा, शब्द अउ उच्चारण गुरतुर हे। तभो ले मानक रूप तो राजधानी के ही भाषा ल माने जाही। डॉ. विनय कुमार पाठक के छवि एक भाषा-वैज्ञानिक के हवय त उंकर ले अइसन शब्द प्रयोग के आशा करे जाथे, जेला चारोंखुंट स्वीकारे जाय।

आजकल दू गोडिय़ा, चरगोडिय़ा जइसन शब्द के प्रयोग दोहा अउ मुक्तक शैली के पद्य लेखन खातिर करे जावत हे, एहू ह मोला बने नइ लागय। हमर इहां लोक परंपरा म दू गोडिय़ा, चरगोडिय़ा जइसे शब्द मन के प्रयोग जानवर मन खातिर करे जाथे। कविता के कोनो रूप खातिर नहीं। हमर इहां लाईन या पंक्ति खातिर डांड़ शब्द के प्रयोग करे जाथे, त अइसन रचना मनला दू डांड़, चार डांड़ काबर नइ कहे जाय?

कोनो-कोनो संगी मन धन्यवाद के छत्तीसगढ़ी अनुवाद पूछथें, कोनो स्वागत हे के विकल्प पूछथे, त मोला बड़ा अचरज लागथे। हमन ल इहां ेए बात जानना जादा जरूरी हे संगी हो, के छत्तीसगढ़ी लेखन खातिर पहिली इहां के संस्कृति, परंपरा, लोकाचार अउ लोकव्यवहार ल जानना जादा जरूरी हे। तभे लेखन म छत्तीसगढ़ी के आत्मा दिखही। नइते फर्जी  भाषा वैज्ञानिक मन के चक्कर म छत्तीसगढ़ी लेखन छदर-बदर हो जाही।

धन्यवाद काबर दिए जाथे? हमर खातिर कोनो अच्छा बुता करथे तब ना? फेर छत्तीसगढ़ी म जुच्छा धन्यवाद कहे के परंपरा नइए, भलुक हमर इहां एकर बदला म शुभकामना दे के परंपरा हे। जब कोनो हमर हित के काम करथे, त हम वोला सिरिफ धन्यवाद कहिके नइ टरका देवन, भलुक वोकर बदला, बने करे बाबू, भगवान तोर भला करे जइसे  शब्द के माध्यम ले शुभकामना देथन। अइसने स्वागत शब्द के बात हे। त हमर इहां जब कोनो हमर घर आथे त वोला जुच्छा आना गा तोर स्वागत हे नइ कहे जाय, भलुक हमर इहां जोहार करे जाथे। जोहार संग भेंट शब्द के प्रयोग करे जाथे। एला जोहार-भेंट करना कहिथन।  

संगवारी हो, ए ह छोटकुन उदाहरण आय के छत्तीसगढ़ी लेखन ल बने चेत लगा के करे जाय। छत्तीसगढ़ी के नांव म कुछ भी नइ लिखे जाना चाही। एकर ले हमर भाखा-साहित्य के हिनमान होये के संभावना रहिथे। मोर वोकरो मनले अरजी हे, जेमन शब्द ल बिगाड़ के लिखत रहिथें। जइसे संस्कृति ल संसकिरिति, शब्द ल सब्द, सुशील ल सुसील, ऋषि ल रिसि आदि-आदि। मैं ये सिद्धांत के पोषक आंव के हमन जब लेखन खातिर नागरी लिपि ल आत्मसात करे हावन त वोकर जम्मो शब्द (अक्षर / वर्ण) मनके प्रयोग ल घलोक करन। वोमा कोनो किसम के छेका-बांधा झन करन।

सुशील भोले 
म.नं. 41-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 98269-92811, 80853-05931


Wednesday, 25 May 2016

तुतारी // स्मार्ट सिरिफ सिटी ते लोगन घलो?

देश के स्मार्ट सिटी योजना के दुसरइया लिस्ट म जब ले रायपुर ल शामिल करे गे हावय, तबले इहां के लोगन भारी गदगद हें। फेर नवा रायपुर ल बसाये खातिर जतका गाँव के किसान मन के जमीन ल बरपेली अधिग्रहित करे गे हे, वोमन जरूर पूछत रिहिन हें, के स्मार्ट सिरिफ शहर भर ल बनाए जाही, ते उहां के लोगन ल घलोक?
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // क्षेत्रीय पार्टी अउ दलाली....

जइसे-जइसे विधान सभा के चुनाव लकठियाथे, तइसे-तइसे क्षेत्रीय पार्टी के नांव म कुछ लोगन फुदके लागथें। फेर अभी तक के अनुभव ये कहिथे के एमन राजनीति कम अउ दलाली जादा करथें। अइसने मन के सेती छत्तीसगढिय़ा अस्मिता के आन्दोलन आज तक सफल नइ हो पाए हे। जरूरी हे, अइसन मनखे के आगू-पाछू, तरी-ऊपर जम्मो किसम के इतिहास ल पहिली देखे जाय, तब कहूं इंकर ऊपर भरोसा करे जाय।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

Tuesday, 24 May 2016

तुतारी // छत्तीसगढ़ी म संपादकीय...

छत्तीसगढ़ी अभी संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल नइ हो पाये हे, तभो ले इहां के राज-सरकार ह एकर खातिर बने बुता करत हे। अब नवा सत्र ले स्कूली लइका मनला कुल पाठ्यक्रम के पचीस प्रतिशत छत्तीसगढ़ी म पढ़ाए जाही। निश्चित रूप ले एकर ले लिखई-पढ़ई के अभ्यास म बढ़ोत्तरी होही। हमन साहित्य-पत्रकारिता ले जुड़े हावन तेकर सेती मन म विचार आथे, के इहां के जम्मो समाचार पत्र-पत्रिका मन घलोक छत्तीसगढ़ी खातिर जगा बनावंय। हो सकय त संपादकीय ल छत्तीसगढ़ी म लिखे के शुरूवात करंय।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // सरकार के दू बछर...

मोदी सरकार दू बछर के होगे। काला धन वापस लाए जइसे चुनावी घोषणा मन तो आज ले पूरा नइ होए हे, फेर देश के छवि सुधरे जरूर हे। कतकों अकन लोक-लुभावन काम चालू करे गे हे। फेर अब कतकों राज्य म जेन चुनाव परिणाम देखे जावत हे, ए ह सरकार के कामकाज म सोच-विचार के मांग करथे। कतकों अकन बड़बोला अउ कांटा-खूंटी असन नेता हें, तेकर मन के दांत ल झर्राए के जरूरत जनाथे। कुल मिला के आशा के आस अभी बांचे हे, तेकर बधाई।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // झीरम कांड के तीसरा बरसी...

झीरम घाटी म शहीद होए कांग्रेसी नेता मन के आज तीसरा बरसी आय। उन सबला नमन। नमन उन जवान मनला, जे मन लोकतंत्र के तिरंगा ल फहरावत रखे खातिर अपन शहादत दे देथें। आज माओवाद ह सिद्धांतहीन होगे हवय। अब ये ह लोगन ल ठगे, लूटे अउ भरमाए मात्र के साधन बनगे हवय। हमन रोज देखत हावन इहां एकर नांव म चंडाली के छोंड़ अउ कुछु नइ होवत हे, जेला हर हालत म सिरवाना जरूरी हे।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

Sunday, 22 May 2016

तुतारी // कलाकार के भ्रम....

नकली अउ बनावटी जीवन जीने वाला कलाकार मनला ए भ्रम हो जाथे के दुनिया म वोकर ले बढ़के कोनो आदर्श पुरुष नइए। ऋषि कपूर घलो ये भ्रम के शिकार दिखथे। एकरे सेती पाछू कुछ बेरा ले नेहरू-गांधी परिवार ऊपर उटपुटांग टिप्पणी करत हे। वोकर पीरा हे के ये खानदान के नाम म ही ये देश के जम्मो बड़का जगा के नामकरण होगे हे। एकर जवाब बनारस के कांग्रेसी मन ठउका दिए हें- उन एक ठन सरकारी शौचालय के नाम ल ऋषि कपूर के नाम म कर दिए हें।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

Saturday, 21 May 2016

तुतारी // झिरिया के पानी...

हमन लइका रेहेन त हमर गाँव ले बोहाने वाला कोल्हान नरवा म गरमी के दिन म झिरिया कोडऩ अउ वोमा कूद-कूद के नहावन। वो लइका पन के उमंग रिहिस हे। फेर आज इही झिरिया लोगन के जीए के सहारा बनत हे। इहां के कई क्षेत्र ले अइसन सोर मिलत हे,  के नंदिया-नरवा, कुआं-बावली, बोरिंग-सोरिंग मन झुक्खा परगे हें। लोगन जीव बचाए बर झिरिया कोड़ के बूंद-बूंद पानी सकेलत हें। सरकार ल एकर ऊपर गंभीरता ले सोचना चाही। इहां अतेक नंदिया-नरवा हे। बरसात म वोकर पानी ल रोके-छेंके के कुछु उदिम करना चाही, तेमा गरमी म अइसन ताला-बेली के बेरा मत आवय।
सुशील भोले
9826992811, 808530593

तुतारी // शहर आवत हें जंगल के जीव...

हमर इहां जतका जंगली क्षेत्र हे, उहां ले रोज खबर मिलत हे, के उहां के जानवर कोनो गांव-बस्ती म आके लोगन ल नुकसान पहुंचावत हें। कहूं-कहूं हाथी जइसे बड़े जानवर मन घर-बस्ती अउ खेत-खार ल उजारत हें, लोगन ल पांव तरी कुचरत हें। अइसन सिरिफ एकर सेती होवत हे, काबर ते शहर के सभ्य कहे जाने वाला मन उंकर जंगल ल उजारत हें, उंकर जीए के साधन ल नंगावत हें। लूटत हें।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // धर्म जोड़थे अउ राजनीति...

बैशाख पुन्नी के आखिरी शाही स्नान के संग सिंहस्थ कुंभ बारा बछर बर बिदा होगे। लाखों-करोंड़ों देशी-विदेशी मनखे क्षिप्रा के पवित्र जल म स्नान करीन। शिव अउ वैष्णव सम्प्रदाय के साधु-संत मन एके संग एके बेरा म नहा के धर्म सबला जोड़थे, ए बात के संदेश देइन। फेर अचरज होथे जब इही धर्म राजनीति वाले मन के हाथ म चले जाथे, त वो ह लोगन ल आपस म लड़वाए के माध्यम कइसे बन जाथे?
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // इहां क्षेत्रीय सरकार कब?

आज मन बड़ा गदगद हे। दीदी-अम्मा मन फेर सरकार बनावत हें। राष्ट्रीयता के नाम म कूदत दू दलीय सरकार ल ठेंगा देखावत हें। छत्तीसगढ़ म घलो कभू क्षेत्रीय दल के सरकार के सपना देखे गे रिहिसे। लागत रिहिसे इहां के अस्मिता के सोर-खबर लेवइया मन सरकार म बइठहीं। फेर अब लागथे वो सपना सपनच रहि जाही। काबर ते इहां रोज स्थानीय अस्मिता ल मुसकेटे जावत हे, फेर कोनो उनला छेंकइया नइ दिखत हे।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // एक लइका, तीन जगा जनम...

हमर राज के एक झन जवनहा नेता के बारे म सोर मिलत हे के वो ह तीन जगा पैदा होए हे। कोनो विदेश म कहिथे, कोनो देश के आने भाग म त कोनो छत्तीसगढ़ म। तीनों जगा के प्रमाण-पत्र हे वोकर जगा, अइसे वोकर पार्टी के खेमा-बंदी वाले मन कहिथें। सवाल ए बात के नइहे के वो कहां पैदा होइस? सवाल ये देश के सिस्टम ऊपर हे के वो ह कोनो भी मनखे ल कोनो भी किसम के प्रमाण-पत्र आँखी मूंद के कइसे बांट देथे?
सुशील भोले
9826992811, 8085305931



Thursday, 19 May 2016

तुतारी क्या...?

हमारे आसपास घटित होने वाली घटनाओं को छत्तीसगढ़ी भाषा में हास्य-व्यंग्य का तड़का लगाकर केवल एक पैराग्राफ में लिखने का प्रयास है तुतारी। इसे दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल, रायपुर संस्करण के प्रथम पृष्ठ पर प्रतिदिन प्रकाशित किया जा रहा है। विश्वास है इंटरनेट पर आप सभी मित्रों का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // अपराधी मन के मौज..

रायपुर म आईपीएल का होवत हे, जम्मो अपराधी, चोर-उच्चका मन के मौज होगे हे। बस माल उड़ावव अउ निश्चिंत होके घुमव, काबर ते इहां के क्राइम ब्रांच ले लेके जम्मो अधिकारी मन आईपीएल म खेले बर आए खिलाड़ी मन के सुरक्षा अउ व्यवस्था म लगे हवंय। बांचे हे ते मन स्टेडियम अउ लोगन के देख-रेख करहीं। बतावव चोर-चंडाल मन कइसे मौज नइ करहीं?
सुशील भोले
9826992811, 8085305931

तुतारी // पानी नहीं त बिहाव नहीं..

ग्वालियर के कैथा गाँव के लोगन पानी के संगे-संग सुवारी खातिर घलो हलाकान हें। गाँव के जम्मो पानी के सोत सूखागे हवय। ये ह ये गाँव के हर साल के रोना आय। गरमी म लोगन चिथिया जथें, जीव-जंतु हलाकान हो जाथें।  एकरे सेती ए गाँव के छोकरा मनला दूसर गाँव के लोगन बिहाव खातिर छोकरी नइ देवंय। गाँव म कुंवारा मन के संख्या दिन के दिन बाढ़त जावत हे। अभी तक दुब्बर बर दू असाढ़ सुने रेहेन, फेर अब कहे बर परही- सुक्खा म सुख के संकट।

सुशील भोले
9826992811, 8085305931

Tuesday, 17 May 2016

तुतारी // जोक्कड़ आयोग...

भाषा के रखवारी म जब जोक्कड़ई करइया मनला बइठार दिए जाही, त वो राज के महतारी भाषा के का दुरगत होही, एला देखना हे, त छत्तीसगढ़ के भाषा-ठिहा ल देखे जा सकथे। पहिली एक झन जोक्कड़ रिहिसे, आफिस के काम कम अउ हा-हा भकभक वाला आयोजन म जादा मगन रिहिसे। अब तो तीन-तीन झन होगे हें, भगवान जानय इहाँ के महतारी भाषा के का दुरगत होही? तेमा लीम चढ़े करेला ये के एक झन फर्जी वैज्ञानिक ह एकर मन के अगुवा बनगे हे।

सुशील भोले
मो. 98269-92811,  80853-05931

तुतारी // सुराज आही...

हमर राज के जम्मो मंत्री मन चिरई बरोबर ए गाँव ले वो गाँव उडिय़ावत हें। सुराज के सपना बांटत हें। कई बछर होगे सुराज के अंजोर बगरावत, वोकर सोर करत । फेर ये परबुधिया कती मेर लुकागे हे, चारोंखुंट बस अंधियारेच अंधियार दिखथे। हर बछर सुरता करवाये बर लागथे। भुलवारे-चुचकारे बर लागथे। वइसे तो छत्तीसगढ़ ल अलग राज बने पंदरा बछर बीतगे हे, फेर सुराज के तलाश अभी तक चलत हे। भरोसा हे एक दिन जरूर आही।

सुशील भोले
मो. 98269-92811,  80853-05931

तुतारी // आईपीएल बर पानी...


पूरा देश के संगे-संग छत्तीसगढ़ घलो पानी खातिर चिथियागे हावय। चारों मुड़ा ले जीव-जंतु के मरे के, लोगन के झिरिया कोड़ के पानी हेरे के, खबर पेपर मन म रोज छपत हे। फेर ये सब ले निश्ंिचत इहां के क्रिकेट संघ ह आईपीएल के दू ठन मैच खातिर रोज हजारों लीटर पानी स्टेडियम म बोहावत हे। पानी के ये बर्बादी खातिर कुछ लोगन हाई कोर्ट म याचिका लगाये रिहिन। फेर हाईकोर्ट ह घलोक बस अतेक कहिके कलेचुप होगे के उहां के जम्मो दर्शक मनला आयोजक संघ ह पानी पियाही।
सुशील भोले
मो. 98269-92811,  80853-05931

Sunday, 15 May 2016

तुतारी // जात न पूछो.....

महात्मा कबीर दास जी कहे हें- जात न पूछो साधु की। फेर कबीर दास के चेला मन अतलंग करत हें। रोज बपरा जोगी-बैरागी के जात पूछत हें। कभू राज्यपाल ल ज्ञापन देथें, त कभू मीडिया ल किसम-किसम के प्रमाण पत्र देखावत रहिथें। जुन्ना मुखिया तो एला अपन स्तर के नइ मानय, एकरे सेती वो कोनो किसम के जुवाब नइ देवंय। फेर भूतपूर्व के अभूतपूर्व लइका भारी डिंगराहा हे। पार्टी मुखिया ल रोज हुदर देथे। नवा-नवा बयान देथे। बहस करे के चुनौती देथे। त पार्टी मुखिया घलो कहि देथे- तोरो लइका मोर स्तर के नइए त जुवाब कइसे देवंव? कुल मिला के न कोनो जुवाब देवय, न कोनो जात-पात के सोर-खबर मिलय।

सुशील भोले 
मो. 98269-92811,  80853-05931

तुतारी // फूल अउ कांटा...

फूल अउ कांटा संगे-संग रहिथे, ये प्रकृति के नियम आय। भरोसा नइए त हमर इहां के मंत्री मंडल ल देख लेवव। मुखिया बपरा फूल बरोबर कोंवर हें, त दू-चार झन मंत्री मन कांटा बरोबर हें। रोज लोगन ल हुदरत रहिथें, कोचकत रहिथें, तुतारी करत रहिथें। पंचइती वाला ह तो जादा च पंचइती करत हे। कभू कोनो अधिकारी ल झर्रा देथे, त कभू कोनो ल अपन मंच ले खेदार देथे। अउ जब लोगन वोकर करनी ऊपर अंगरी उठाथें, चांव-चांव करथें, त मंत्री जी सिंहस्थ म जाके कुंभ स्नान कर आथें।

सुशील भोले 
मो. 98269-92811,  80853-05931

Wednesday, 11 May 2016

मूल संस्कृति आयोग की आवश्यकता...

छत्तीसगढ़ की जन भाषाओं को समृद्ध बनाने, उन्हें उचित सम्मान देने के लिए जिस तरह से यहां छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की स्थापना की गई है, ठीक उसी तरह यहां की मूल संस्कृतियों को संरक्षित करने, उन्हें उनके मूल रूप में स्थापित करने के लिए भी एक मूल संस्कृति आयोग की आवश्यकता है।
यहां का संस्कृति विभाग कला, संस्कृति के लिए अच्छा काम कर रहा है, लेकिन उसके पास अनेकों और भी कार्य होते हैं, जिसके कारण मूल संस्कृति के लिए जितना जतन किया जाना चाहिए उतना होता नहीं है। यदि मूल संस्कृति के लिए अलग से आयोग की स्थापना कर दी जाये तो निश्चित रूप यह यहां की मौलिक पहचान के लिए, यहां की अस्मिता के लिए सुखद होगा।
आप क्या कहते हैं....
* सुशील भोले  

Sunday, 8 May 2016











डंका परगे साहब के, गाँव-गाँव आही सुराज
हमर मुंह के कौंरा ल नइ झपटय कोनो बाज
नइ अदियावन सहीं, अब कोनो डर के रइही
लोकतंत्र के जय-जय होही, हमर सरी राज

सुशील भोले
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811