Sunday, 22 September 2024

पुनर्जन्म अउ आदिवासी कुढ़ी..

पुनर्जन्म के अवधारणा अउ आदिवासी समाज
* घर पहुनई जाने बर मढ़ाथेंं कुढ़ी

   मनखे के पुनर्जन्म होथे ते नइ होवय, ए बात ल लेके लोगन के अलग अलग मान्यता अउ विचार हे. जिहां तक हमर जइसन लोगन के बात हे, त हमन तो ए मानथन अउ जानथन घलो के मनखे के अपन ए जनम म करे गे कर्म के मुताबिक अगला जनम होथे या फेर वोला सद्गति जेला मोक्ष कहे जाथे, मिलथे. तहाँ ले फेर वो ह स्थायी रूप ले अपन ईष्ट के लोक म आसन या कहिन ठउर पाथे.
   हमर इहाँ के हल्बाआदिवासी समाज म घलो ए मान्यता ल एक परंपरा, जेला घर पहुनई कहे जाथे के रूप म देखे जा सकथे. एमा इहू जाने के उदिम करे जाथे, के वो जीव ह अवइया जनम म का जोनी पाही? एकर खातिर ए घर पहुनई परंपरा के अंतर्गत 'कुढ़ी' मढ़ाथेंं.
   दल्ली राजहरा के साहित्यकार राजेश्वरी ठाकुर जी ले मिले जानकारी के मुताबिक ए परंपरा के निर्वहन वो देंह छोड़े मनखे के तीजनाहवन के  बाद आने वाला बुधवार या इतवार के रतिहा करे जाथे.
   इहाँ ए जानना वाजिब जनाथे के आदिवासी समाज मृतक मनखे ल पहिली माटी देवय, माने दफना देवत रिहिसे, फेर अब कुछ लोगन हिंदू परंपरा के अनुसार मृतक के दाहसंस्कार करथे. दाहसंस्कार करे के तीसरइया दिन अस्थि विसर्जन करे जाथे, अउ फेर अस्थि विसर्जन के पाछू ए पुनर्जन्म के जानकारी खातिर ए परंपरा घर पहुनई के निर्वहन करथें, कुढ़ी मढ़ाथेंं.  ए परंपरा ल अस्थि विसर्जन के बाद अवइया इतवार या फेर बुधवार के रतिहा म करे जाथे. उंकर मन के मान्यता हे के सोमवार अउ बिरस्पत ह सृष्टि के अधिष्ठात्री देवी के वार आय, तेकर सेती वो मन इही वार के चयन ए परंपरा ल संपन्न करे खातिर करथें.
   देह छोड़ चुके आत्मा ह अगला जनम म का जोनी म अवतरही, एकर खातिर रतिहा बेरा वो ठउर ल जेन ठउर म वोकर जीव छूटे रहिथे (एकर खातिर कोनो दूसर कुरिया या ठउर के घलो उपयोग करे जा सकथे) वो जगा बने चौंक पूर के चॉंउर के पिसान के ढेरी/कुढ़ी मढ़ाथेंं. कलशा के ऊपर दीया मढ़ा के वोला बारे जाथे, संग म दू अउ चुकिया म लाड़ू, अइरसा रोटी, उरिद दार के बने बरा के संग चाय पानी घलो अपन देंह छोड़ के गे पिरोहिल खातिर रखे जाथे. वो चुकिया मनला ढॉंके खातिर परसा पाना अउ बगई डोरी के इस्तेमाल करे जाथे. पाछू ए मनला एक बड़का असन झॉंपी/झेंझरी के भीतर तोप के रख दिए जाथे.
   जे दिन ए परंपरा ल संपन्न करे जाथे, वो दिन रतिहा बेरा जम्मो परिवार वाले मन के संगे-संग गोतियार मन घलो उही घर म सूतथें. ए कुढ़ी मढ़ाय वाले परंपरा के रतिहा घर के सिंग दरवाजा (माई कपाट) के संगे-संग घर के सबोच दरवाजा मनला खुल्ला छोड़ दिए जाथे. राजेश्वरी जी के कहना हे के ए परंपरा ल आदिकाल ले उंकर पुरखा मन द्वारा संपन्न करे जावत हे.
   रतिहा पहाए के बाद जब सुरूज अंजोर ह बगर जाथे तब परिवार वाले, जम्मो गोतियार अउ पारा-परोसी मन के आगू म वो ढॉंके गे झॉंपी ल टार के चॉंउर पिसान के ढेरी/कुढ़ी म का जिनिस के चिनहा बने हे, तेला खोजे जाथे, जेन ए बात के साक्षी होथे के वो देंह छोड़े पिरोहिल के जनम अब कोन रूप या कोन जोनी म होवइया हे. 
   बताथें के वो चॉंउर पिसान के ढेरी म चिरई के पॉंव, मनखे के पॉंव, शंख, स्वास्तिक, गदा जइसन कोनो भी चिनहा बने दिख जाथे. मान्यता हे के अइसन चिनहा वो आत्मा के द्वारा ही बनाए जाथे. कतकों पइत चॉंउर पिसान के ढेरी म कोनोच किसम के चिनहा नइ दिखय, तब ए माने जाथे के अब वो मनखे के पुनर्जन्म नइ होवय.
   राजेश्वरी जी बताथें के वो मन अपन सियान (पिताजी) के बखत करे गे चॉंउर पिसान के कुढ़ी म शंख के अउ अपन कका खातिर मढ़ाए गे ढेरी म स्वास्तिक के चिनहा खुद अपन अॉंखी म देखे रेहेंव, जेन जगजग ले स्पष्ट दिखत रिहिसे. अउ अइसे घलो नहीं के वो चिनहा मन सिरिफ मुंहिच भर ल दिखे रिहिसे, भलुक वो जगा जतका झन उपस्थित रिहिन हें सबो झनला दिखत रिहिसे. अइसने एक हनुमान भक्त खातिर मढ़ाए गे चॉंउर पिसान के ढेरी म गदा के निशान देखे रेहेन.
   बिहनिया बेरा वो ढेरी/कुढ़ी म मढ़ाए चॉंउर पिसान के बोबरा (रोटी) बना के अपन देवता म हूम देथन अउ तब फेर गोतियार मन सब जेवन पाथें.
   अपन सियान खातिर मढ़ाए कुढ़ी म शंख के चिनहा देखे के संबंध म राजेश्वरी जी बताथें के उंकर सियान शंभूनाथ जेला ए आदिवासी मन बड़ा देव कहिके संबोधित करथें, वोकर जबर भक्त रिहिन हें. वो मन अपन हाथ ले ही घर म शंभूनाथ के प्राणप्रतिष्ठा करे रिहिन हें. जब वो मन अपन जिनगी के पहाती बेरा म आईसीयू म भर्ती रिहिन हें, त उहाँ के डॉक्टर ह हमर सियान के पहिरे अंगूठी अउ चेन मनला देवत बेरा हमन ल पूछे रिहिन हें के तुंहर घर म शंभू काकर नॉव हे? वो मन घेरी- भेरी वोकरेच नॉव लेवत हें. तब हमन कमतीच उमर के रेहेन. हम चारों भाई बहिनी उही कुरिया म सूते रेहेन जिहां हमर सियान खातिर चॉंउर पिसान के कुढ़ी मढ़ाय जावत रिहिसे. 
    सियान के देंह छोड़े के दुख म हमर मन के नींद नइ परत रिहिसे. रतिहा करीब तीन बजे के आसपास हमन ल घर के सिंग दरवाजा डहार ले दाई.. दाई हुंत कराए के आवाज सुनाए रिहिसे, तब दूसर कुरिया म सूते हमर दूनों फूफू मन आवाज देवइया मनखे ल खोजे लागिन. अपन फूफू के आवाज सुन के महूं अपन कुरिया ले बाहिर आएंव. हमन सबो कुरिया म जा जाके पूछेन फेर आवाज तो कोनो नइ दिए रिहिन हें. तब हमन ल जनाए रिहिसे के जेकर खातिर कुढ़ी मढ़ाए गे रिहिसे शायद वोकर आत्मा इहाँ आए रिहिसे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर

Friday, 20 September 2024

रायपुर म गणेश उत्सव के परंपरा

सुरता//
रायपुर म गणेश उत्सव के परंपरा   
   अभी के लोहार चौक जेला पहिली सुखरू चौक कहे जाय, उहाँ इही सुखरू लोहार ह जेकर नॉव ले एला सुखरू चौक कहे जाय, इही जगा के अपन दुकान म हर बछर गणेश बइठारय अउ गणेश जी के आगू म एक ठन पानी के नान्हे असन टंकी बनावय, अउ ए टंकी म वो हर बछर डुडूंग मछरी, जेकर मुड़ी ह थोकिन बॉंबी बरोबर जनावय अउ बाकी के धड़ ह सॉंप असन लाम राहय, ते मन तउंरत राहय.. हमन तब खोखोपारा मिडिल स्कूल म पढ़त राहन, तब हमन वो सुखरू लोहार के गणेश जी ल देखे के नॉव म कम अउ डुडूंग मछरी मनला मार सरमर सरमर तउंरत देखे बर उहाँ जादा जावन.
   वइसे तो रायपुर म गणेश उत्सव के चलन ह गजबे च जुन्ना हे, फेर एकर निश्चित जानकारी शायदेच कोनो ल होही. कुछ जानकारी रखइया मन बताथें के पहिली रायपुर म सिरिफ एकेच झन मूर्ति बनइया रिहिसे, जेकर नॉव रिहिसे- गोविन्द राव गिरहे. वो मन कंकाली पारा म मूर्ति बनावंय, संग म उन मयारुक पेंटर घलो रिहिन हें. 
   गोविन्द राव जी के दू झन चेला रिहिन हें- नारायण राव अउ मुकुन्द लाल‌ यादव. मुकुन्द लाल‌ यादव जिहां अच्छा मूर्ति बनइया रिहिन हें, उहें नारायण राव अच्छा पेंटर रिहिन हें. आगू चल के दूनों एक दूसर के कला ल सीखे के कोशिश करिन. माने, मुकुन्द लाल‌ ह नारायण राव ल मूर्ति बनाय बर सिखावय, त नारायण राव ह मुकुन्द लाल‌ ल पेंटिंग करे बर. धीरे धीरे मुकुन्द लाल‌ ह दूनों कला माने मूर्ति बनई अउ पेंटिंग करई दूनों ल सीखगे, फेर नारायण राव ह मूर्ति बनाय बर नइ सीख पाइस. हाँ ए जरूर होइस के नारायण राव के सुवारी लक्ष्मीबाई ह मूर्ति बनाय बर सीख गे, तहाँ ले लक्ष्मीबाई ह कतकों बछर तक ए बुता ल व्यवसाय के रूप म अपनाय रहिस.
   नारायण राव के कतकों झन चेला होइन- मोहनलाल यादव, नारायण यादव (कुशालपुर) परस पेंटर जे हा गुढ़ियारी म ऐतिहासिक नरियर के गणेश मूर्ति ल बनाए रिहिसे. रहीस पेंटर रामनगर, माधव पेंटर, घनश्याम फूटान, हेनुराम सोन, केशव साहू. अइसने मुकुन्द लाल‌ यादव के घलो कुछ चेला होइन, जेमा रेखराज ध्रुव (मंदिर हसौद) नरेश पेंटर, श्याम पेंटर अउ रामनारायण यादव (पुत्र). ए किसम इहाँ मूर्ति बनइया मन के संख्या बाढ़त गिस.
   रायपुर म पहिली छोटे छोटे मूर्ति मढ़ाए के रिवाज रिहिसे. लोहार चौक म सुखरू लोहार पारंपरिक रूप ले गणेश बइठारय. उंकर मूर्ति हर बछर एके असन राहय. लोगन बतावंय के वो मन मूर्ति ल तो विसर्जित कर देवत रिहिन हें, फेर सजावट के जम्मो जिनिस मनला अवइया बछर खातिर सुरक्षित मढ़ा देवत रिहिन हें. इंकर एक विशेषता रिहिसे के हर बछर मूर्ति के आगू म एक ठन नान्हे असन पानी के टंकी बनावंय अउ वोमा सॉंप असन दिखइया डुडूंग मछरी ढील देवंय. नान्हे लइका मन बर वो मछरी ह देखनी हो जावय. ठीक उंकरेच बाजू म महरू दाऊ जी घलो गणेश बइठारय. उंकर विशेषता ए रिहिसे के उन सजावट म चारों मुड़ा कॉंच के सजावट करंय. वोकर गणपति मढ़ाय के हाल भीतर खुसरन त मार बिजली अंजोर म कॉंच मन चकमिक चकमिक करत राहय. एकरे सेती लोगन एला कॉंच वाले गणेश घलो काहंय.
    रायपुर म गणेश सजावट के रौनक अउ तब बाढ़िस, जब रामरतन बेरिया ह गुढ़ियारी पड़ाव म एक भारी भरकम झॉंकी बनाइस. मोला सुरता हे- गुढ़ियारी के गणेश झॉंकी ल देखे बर हम एक अलग से दिन निकाल के जावन. 
   तब हमन पुरानी बस्ती थाना जगा राहत रेहेन. एक दिन एती रामसागर पारा के जावत ले गणेश झॉंकी मनला देखन अउ फेर दूसर दिन गुढ़ियारी के झॉंकी ल फुरसुदहा देखे बर जावन. फल धरे के टुकनी, जूट के बोरा अउ पालीथीन मनला जोड़ जाड़ के वो हर अइसन झॉंकी बनाइस, जेन देखे म उभरे वाले पेंटिंग बरोबर जनावय. वो झॉंकी ल देखे बर पूरा गुढ़ियारी म मेला बरोबर रौनक राहय. रामरतन बेरिया रायपुर के ही रहइया रिहिसे, फेर वो ह मुंबई म जाके फिल्म मन के सेट बनाए बर सीख गे रिहिसे, एकरे जबर उपयोग वो ह गणपति के सजावट म करय. 
   एकर बाद फेर हाथ गोड़ हाले डोले वाले झॉंकी बने के शुरूआत होइस. अइसन झॉंकी मन म सजावट खातिर रखाय पुतला मन के हाथ गोड़ चलय, वो मन रेंगत असन जनावंय. इहू मनला देखे बर लोगन के भीड़ उमड़ जाय.
   एकर पाछू फेर बड़े बड़े गुफा बनाय के चलन चालू होइस. गोलबाजार, रामसागर पारा म दू तीन घर मनला मिला के अइसे गुफा बनावंय के लोगन के देखनी हो जावय. लोगन नदिया, पहाड़ सबो ल नाहकत बुलकत गणेश जी के दरस करंय. 
   गुढ़ियारी म ही नरियर ले बने गणेश जी ह सबो कीर्तिमान मन ल टोर दिए रिहिसे. ए ह अपन किसम के अनोखा प्रयोग रिहिसे, जेन बहुते सफल अउ चर्चित होए रिहिसे. लोगन एकजुवरिया ले ही लाईन लगा के दर्शन खातिर खड़े हो जावंय. कोनो किसम के अलहन घटना झन घट जाय, अइसे गुन के बाद म प्रशासन ह एला बंद करवा दे रिहिसे.
   जब बड़का बड़का मूर्ति बने के परंपरा चालू होइस, त गोल बाजार म अतका बड़का मूर्ति बनवा डरिन, ते वोकर स्थापना करे खातिर दू ठन क्रेन के सहारा लेना परगे, एकरे सेती वो गणपति के नॉव क्रेन वाला गणेश परगे. इहिच गोल बाजार म एक पइत गणेश उत्सव खातिर चंदा ले के बेरा जबर विवाद होगे रिहिसे, तब आयोजक मन ए गणेश उत्सव समिति के नॉव ल ही "विवादास्पद गणेश उत्सव समिति" रख दिए रिहिन हें.
   छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पाछू जब बिलासपुर म हाईकोर्ट बनाए के निर्णय होए रिहिसे तब रायपुर म वोकर खंडपीठ बनाए के माॅंग ले लेके जबर आन्दोलन होए रिहिसे. ए बखत कंकाली पारा के तंबोली परिवार अउ आने जम्मो लोगन गजबेच सुग्घर मूर्ति बनवा के स्थापना करवाए रिहिन हें. ए मूर्ति ल जब तक खंडपीठ के माॅंग पूरा नइ हो जावय, तब तक विसर्जन नइ करन कहिके अंड़ दिए रिहिन हें. बाद म गणेश विसर्जन के कतकों दिन के पाछू मान मनौव्वल कर के वो गणपति के विसर्जन करवाए गे रिहिसे. ए घटना के सेती गजब दिन तक वो गणेश ल खंडपीठ गणेश कहे जावय.
   गुढ़ियारी के गणेश समिति वाले मन नवा-नवा प्रयोग करत राहंय. एक पइत उहाँ परस पेंटर ह नरियर ले भारी जबर गणेश प्रतिमा बनाए रिहिसे. ए नरियर के प्रतिमा ह रायपुर के इतिहास म नवा अध्याय जोड़े रिहिसे. ए गणेश ल देखे खातिर सिरिफ रायपुर भर के नहीं, भलुक आने आने गाँव शहर के लोगन घलो आवंय. 
   आवव अब चिटिक गणेश विसर्जन के गोठ कर लेइन. सियान मन बतावंय के पहिली गणेश प्रतिमा के विसर्जन पुरानी बस्ती के खो खो तरिया म करे जावय. बइला गाड़ी म सुग्घर केरा पान म सजा के झॉंकी निकाले जावय. वो बेरा म आज असन न तो चकाचौंध करत लाईट के व्यवस्था रिहिसे अउ न ही जनरेटर सेट, एकरे सेती वो बखत बइला गाड़ी के आगू आगू माटी तेल म बोरे वाला भभका मशाल धर के रेंगय, ए किसम तब विसर्जन झॉंकी निकलय. बाद म फेर बूढ़ा तरिया म मूर्ति विसर्जन होए लगिस. हमन बूढ़ा तरिया म मूर्ति विसर्जन होवत ही देखत रेहेन. खो खो तरिया के बेरा म शायद हमर मन के जनम नइ होए रिहिसे. 
   जब बूढ़ा तरिया के पानी जादा मतलाय लगिस अउ मूर्ति म लगे रसायन मन के सेती जलप्रदूषण के शिकायत आए लगिस, त फेर प्रशासन ह मूर्ति मन के विसर्जन ल खारुन नदिया म करे के नियम बनाइस. शुरू शुरू म खारुन नदिया के पुलिया ऊपर ले मूर्ति ल सउंहे ढपेल के विसर्जित करे जावत रिहिसे, फेर पाछू इहाँ फिसले वाले मशीन बनाए गिस. अउ जब नदिया के पानी घलो बनेच मतलाय लगिस, तब इहाँ कुंड बना के मूर्ति मनला विसर्जित करे जाय लगिस, जेन अभी तक चलतेच हे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Sunday, 15 September 2024

जोहार अउ जय जोहार

"जोहार" अउ "जय जोहार"
   एक कहावत हे- 'अड़हा बइद परान घातका'। माने अड़हा कहूं बइद ह होगे, त मरीज के मरे बिहान हे। ठउका इही किसम कहूं जे मन भाखा खातिर कारज करत हें, अउ उहू मनला भाखा अउ ओकर ले जुड़े परंपरा अउ संस्कृति के समझ नइए त उहू भाखा के मरे बिहान कस हे।
    अभी जे मन हमर भाखा के नाव म एती-वोती कूदत हें, वोमा के कतकों जब मोर संग भेंट होथे, त कहि परथें-"जय जोहार" भोले जी। मैं अतका म टमड़ डारथंव के भाखा के नाव म बिल्लस खेलइया ए लोगन के भाखा अउ संस्कृति के संबंध म कतका ज्ञान हे।
    अरे भई, 'जोहार' शब्द ह संबोधन खातिर अपन आप म पूर्ण शब्द आय, वोला अलग ले ककरो पंदोली के जरूरत नइए। जइसे- 'नमस्कार' या 'प्रणाम' ल ककरो जरूरत नइ परय। जोहार के मतलब ही नमस्कार करना, प्रणाम करना या जयकार करना होथे। जइसे हम जय नमस्कार या जय प्रणाम नइ काहन वइसने जय जोहार कहे के भी जरूरत नइए। अभिवादन खातिर सिरिफ "जोहार" कहना काफी हे।
       गाँव म परंपरा हे- जब देवारी पइत पहाटिया मन मड़ई उठाए के बेरा सबले पहिली गाँव के गंउटिया, सरपंच या सियान ल पहिली सम्मान दे के परंपरा निभाथें, त उन कहिथें- 'चलव गा पहिली दाऊ ल, मंडल ल, या सरपंच ल जोहार लेथन, तेकर पाछू दइहान या अउ कोनो आयोजन ठउर कोती जाबो'।
     असल म 'जोहार' शब्द ह 'जय' अउ 'हर' शब्द के मेल ले बने हे, जेकर अर्थ ही होथे 'हर' अर्थात शिवजी के जयकार करना. हमर ए भुइया ह जुन्ना बेरा ले बूढ़ादेव के रूप म शिव उपासक अंचल रहे हे, तेकर सेती वोकर जयकार करत ए 'जोहार' शब्द के माध्यम ले अभिवादन करत चले आवत हे.
    हमर देश के पहला महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी जब अपन पद के शपथ ग्रहण लीन हें, तभो उन "आप सभी को मेरा जोहार" कहे रिहिन हें. हमर देश म जतका भी जगा अभिवादन खातिर जोहार शब्द के प्रयोग करे जाथे, सबो जगा बिन काकरो पंदोली के आरुग 'जोहार' ही कहे जाथे.
सबो झनला जोहार🙏🌹😊
-सुशील भोले-9826992811