Wednesday, 17 June 2015

बियंग के रंग...

पुस्तक चर्चा
बियंग के रंग
संजीव तिवारी छत्तीसगढ़ी भाखा के चिन्हारी आय। छत्तीसगढ़ के नक्शा ले जब कभू बाहिर छत्तीसगढ़ी के गोठ होथे त 'गुरतुर गोठ डॉट कॉम" के माध्यम ले ही होथे, जेन उंकर सफल संपादन म इंटरनेट म सरलग कई बछर ले पूरा दुनिया म छत्तीसगढ़ी के सोर करत हावय। सोसल मीडिया के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी खातिर वोहर जेन बुता करे हावय ते ह इतिहास के बात आय। ठउका अइसने 'बियंग के रंग" के माध्यम ले घलो छत्तीसगढ़ी के गद्य लेखन संसार अउ खासकर व्यंग्य विधा के जोरन-सकेलन वोहर करे हावय, उहू हर इतिहास के बात आय। मोर असन कतकों कम जनइया मन अइसन कहि देवँय के 'छत्तीसगढ़ी के लेखन ह अभी लइकई अवरधा म हावय..' 'बियंग के रंग" ल पढ़ के उंकर मन के भरम ह दुरिहा जाही।

साहित्य संसार म व्यंग्य के ठउर वइसने हे जइसे फूल के पेंड़ म कांटा के होथे। जइसे कांटा ह फूल ल टोर के वोला रउँदे के उदिम करइया मनला छेंकथे, वइसने व्यंग्य घलो ह मानव समाज के मनसुभा ल रउँदे के उदिम करइया मनला हुदरथे, कोचकथे अउ उनला छेंके खातिर दंदोर के चेत कराथे।

छत्तीसगढ़ी म व्यंग्य के रूप तो जब ले इहां सांस्कृतिक विकास होय हे तब ले देखे ले मिलथे। हमर संस्कृति म बर-बिहाव के बखत जेन भड़ौनी गाये जाथे, वोहर व्यंग्य के मयारुक-रूप आय। एकर पाछू हमर कला-यात्रा के रूप म जेन नाचा-गम्मत के मंच म जोक्कड़ के माध्यम ले हास्य-व्यंग्य के स्वरूप दिखथे, वोहर एकर विकास यात्रा के ही स्वरूप आय। हमर लोक गीत मन म घलोक एकर रूप समाये हे। ददरिया म नायक-नायिका एक-दूसर ल ताना अउ आभा मारथे इहू ह व्यंग्य के सुघ्घर छापा आय।

जिहां तक प्रकाशित साहित्य म व्यंग्य-लेखन के देखे के बात आय त ए ह आजादी के आन्दोलन के समय ले देखे म आथे। इहां वो दौर म कई ठन नाटक लिखे गइस जेमा हास्य-व्यंग्य के समिलहा रूप देखे म आथे। आरुग गद्य-व्यंग्य लेखन के रूप घलोक इही बखत ले देखब म आथे। इहां के सबले जुन्ना साप्ताहिक पेपर 'अग्रदूत" के फाइल लहुटावत मैं टिकेन्द्रनाथ टिकरिहा के कतकों व्यंग्य देखे अउ पढ़े हावंव।

'बियंग के रंग" म संजीव तिवारी जी एकर इतिहास के गजब सुघ्घर उल्लेख करे हावँय । ए किताब ल पढ़ के एकर आदि रूप ले लेके मंझोत बेरा अउ आज के नवा जुग के लेखक अउ उँकर लेखनी ले परिचित होय के अवसर मिलथे-  छत्तीसगढ़ी म गद्य साहित्य : विकास के रोपा, बियंग के अरथ अउ परिभासा, बियंग म हास्य अउ बियंग, हास्य अउ बियंग के भेद, देसी बियंग, बियंग के उद्देश्य अउ तत्व, बियंग विधा, बियंग के अकादमिक कसौटी, बियंग के महत्व : बियंग काबर, बियंग के भाखा, छत्तीसगढ़ी बियंग के रंग, अउ बाढ़े सरा जइसे बारा ठन खांचा म बांध के व्यंग्य के जम्मो इतिहास ल पिरोये के उदिम करे गे हवय।

सिरिफ छत्तीसगढ़ी भर के नहीं भलुक ये देश अउ दुनिया के जम्मो नामी अउ पो व्यंग्य लेखक मन के विचार ल एमा संघारे गे हवय। डॉ. सुधीर शर्मा के विद्वता ले भरे भूमिका, तमंचा रायपुरी के अपनी बात अउ खुद संजीव तिवारी के दू आखर ये किताब ल अउ एकर उद्देश्य ल समझे खातिर बनेच पंदोली दे के बुता करथे।
वैभव प्रकाशन रायपुर ले प्रकाशित 'बियंग के रंग" ल पढ़े के बाद मोला कतकों नवा व्यंग्यकार मनके नांव घलोक जाने बर मिलिस। उंकर रचना संसार के जानकारी मिलिस अउ उंकर सोंच के घलोक जानबा होइस। एकर संगे-संग विविध पत्र-पत्रिका मन म छत्तीसगढ़ी कालम के माध्यम ले कतका झन व्यंग्य लेखन करत हावँय एकरो जानकारी ए किताब ले मिलथे।

'बियंग के रंग" के लेखक संजीव तिवारी ल ए किताब खातिर बधाई अउ संगे-संग ए अरजी घलोक के अइसने छत्तीसगढ़ी के अउ आने विधा मन के घलोक ऐतिहासिक जोरन-सकेलन के बुता ल अपन सख भर करत रहँय।

सुशील भोले 
म.नं. 54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 080853-05931, 098269-92811
ईमेल - sushilbhole2@gmail.com

1 comment:

  1. बढ़िया लिखे हस भोले भाई । आने विधा ऊपर भी लिखना चाही ,संजीव बड़ खोज बीण करके लिखथे ।
    उपन्यास ऊपर ओकर लिखे लेख मैं पढे रहेंव ।

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