Wednesday, 28 December 2016

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा...














नया वर्ष हो नया हर्ष हो, नव प्रभात का नव उजियारा
कलुषित भेदभाव मिटे, हरो मनुज मन का अंधियारा
नव वर्ष की स्वर्ण रश्मियों से आल्हादित हो गगन-धरा
नई दृष्टि पाये जग सारा, स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा

* सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811

Monday, 26 December 2016

छत्तीसगढ़ी अस्मिता और छत्तीसगढ़िया राज...

छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और संपूर्ण अस्मिता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सैकड़ों वर्षों से अपने-अपने स्तर पर काम किए जा रहे हैं। यहां के लेखकों, साहित्यकारों और इतिहासकारों ने अनेक एेसे काम किए हैं, जिन पर आज हर छत्तीसगढ़िया गर्व महसूस करता है।

लेकिन क्या इतने भर से ही आज तक छत्तीसगढ़ी अस्मिता की सही मायने में स्थापना हो पायी है? अलग छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के पश्चात भी यदि नहीं हो पायी है, तो क्यों नहीं हो पायी है? क्या एेसा नहीं लगता कि राजनीतिक सत्ता पर आसीन लोगों ने इसके लिए ईमानदारी के साथ आज तक कोई काम ही नहीं किया?

जितने भी राजनीतिक दलों ने यहां शासन किए सभी ने राष्ट्रीयता के नाम पर स्थानीय भाषा, संस्कृति और लोगों की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को, बाहरी भाषा, संस्कृति और धर्म को लादने के अलावा और कुछ नहीं किया।यहां के गौरव को नष्ट कर उस पर बाहरी प्रतीकों को थोपने का कार्य किया। आज यहां के मूल निवासी षडयंत्र पूर्वक लगातार विस्थापित किए जा रहे हैं। हर क्षेत्र से, हर मार्ग से, हर स्थान से।

 आखिर इसका समाधान क्या है? निश्चत रूप से यहां के मूल निवासियों के हाथों में यहां की संपूर्ण सत्ता। और एेसा तभी संभव है, जब यहां के मूल निवासियों की अपनी स्वयं की राजनीतिक पार्टी हो, जिसके माध्यम से राज सत्ता पर आसीन हुआ जाए। और एेसे चुने हुए लोगों को उस पर बिठाया जाए, जो अस्मिता के महत्व को समझते और जानते है, उसकी रक्षा के लिए कार्यरत रहे हैं।

तो आइए, नव वर्ष की नई सुबह पर हम संकल्प लें। संपूर्ण छत्तीसगढ़ी अस्मिता और छत्तीसगढ़िया राज के लिए कार्य करेंगे। अपने पुरखों के द्वारा देखे गये छत्तीसगढ़ राज के स्वप्न को सही मायने में साकार करेंगे।      

* सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811

Saturday, 24 December 2016

... मूलनिवासियों का शासन

चाहे कितने भी दो लच्छेदार भाषण
या एक रुपये में ही बांट लो राशन
दुनिया में खुशहाली आ नहीं सकती
जब तक न हो मूलनिवासियों का शासन

* जय सब्बो मूलनिवासी
* जय दुनिया के मूलनिवासी

*सुशील भोले*

Sunday, 18 December 2016

एक न एक दिन रार मचाहीं...



















धरे मशाल फेर जाग उठे हें, नारा ले स्वाभिमान के
एक न एक दिन रारा मचाहीं, अब बेटा सोनाखान के...

एक फिरंगी मार भगाएन, अब आगें रूप नवा धरे
हमरे सहीं बोली-भाखा, फेर चरित्तर हे अलग गढ़े
उन राष्ट्रीयता के माला जपथें, फेर नीयत हे शैतान के...

हमर भुइयां हमर जंगल तभो गुलामी हमीं भोगत हन
हटर-हटर जांगर ल पेरत उंकर पेट ल हमीं भरत हन
उन धरम-पंथ जाला बुनके, करथें खेल हिनमान के...

हमरे वोट अउ हमरे नोट तब राज उंकर कइसे होगे
गुनौ-चेतौ मूल निवासी, तुंहर आजादी कइसे खोगे
अब तो कनिहा कसना परही, ले परन नवा बिहान के...

* सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 80853-05931, 98269-92811