कोंदा भैरा के गोठ-26
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-हमर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कला संस्कृति ल लेके अब बने जागरुकता देखे बर मिलत हे जी भैरा.
-ए तो बने बात आय जी कोंदा.. हमर छत्तीसगढ़ ह काकरो ले कोनोच जिनिस म कमती नइए.. बस लोगन पर के पाछू भटके ल छोड़ के अपन गौरव ल जानयँ.. आत्मसात करयँ.
-सही आय जी.. राजधानी रायपुर के डीडीनगर गोल चौक म अभी के नवरत म आरुग छत्तीसगढ़ी परंपरा म पंडाल बनाय गे हवय तेला देख के गरब के अनुभव होथे.. इहाँ माता के सुमरनी ल सुवा, करमा अउ पंथी जइसन गीत नृत्य के माध्यम ले करे जाथे.
-वाह भई..!
-हव जी.. ए पंडाल म संघरे बर आरुग छत्तीसगढ़ी सँवाँगा म जाए बर लागथे, नइते उहाँ निंगन नइ देवय.
-ए तो बहुतेच बढ़िया बात आय संगी.. मैं तो इही किसम इहाँ के आध्यात्मिक संस्कृति, पूजा विधि अउ जीवन पद्धति के घलो बात करथौं.. हमला काकरोच खातिर आने मन के मुंह देखे के जरूरत नइए.
-धीर लगा के सब होही संगी.. राजधानी के पंडाल ले अभी जेन सांस्कृतिक गंगा के धारा निकले हे, ए ह पूरा राज भर संचरही अउ कला संस्कृति ले होवत आध्यात्मिक जीवन पद्धति तक जाही.
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-हमर छत्तीसगढ़ म एक अइसन मंदिर घलो हे जी भैरा जिहाँ परसाद के रूप म दहीबड़ा, मिर्चा भजिया अउ समोसा जइसन लसुन गोंदली वाले तामसिक जिनिस ही चघाए जाथे.
-वाह भई.. हम तो अइसन कभू नइ सुने रेहेन जी कोंदा!
-हाँ.. बिलासपुर के चिंगराजपारा म धूमावती माता के मंदिर हे.. इहाँ सिरिफ शनिच्चर भर के अइसन चढ़ाए जाथे.. इहाँ माता धूमावती के माता पार्वती के विधवा रूप म पूजा करे जाथे एकरे सेती उनला लुगरा घलो सादा रंग के ही चढ़ाए जाथे.
-मोला सुन के ही बड़ा अचरज लागत हे संगी.
-एमा अचरज के का बात हे जी.. अभी नवरात तो चलतेच हे, जा के माता के दरस कर के आजा.. अउ सँउहे अपन आँखी म देख ले.. वइसे इहाँ खाली हाथ वाली माईलोगिन मन विशेष रूप ले आथें बताथें.. जे मन एक चिट्ठी म लिख के अपन समस्या मनला माता जी ल बताथें अउ फेर माता के आशीष ले वो जम्मो दुख पीरा ले मुक्ति पा जाथें.
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-धोबी समाज ह अब समाज के वो लोगन मनला, जे मन आने समाज के नोनी मन संग बिहाव कर डारे हें उनला कुछ प्रतिबंध के संग अपन समाज म मिलाए के निर्णय लिए हें जी भैरा.
-ए तो बहुत बढ़िया बात आय जी कोंदा.. इहाँ के मनवा कुर्मी समाज म तो अइसन अंतर्जातीय बिहाव वाले मनला समाज म संघारे के परंपरा बनेच दिन ले चलत हे.
-अच्छा.. बनेच दिन ले चलत हे?
-हव.. समाज के जागरूक लोगन महाधिवेशन म प्रस्ताव पास करवाए रिहिन हें.. उंकर कहना रिहिसे के वो अंतर्जातीय बिहाव वाले जोड़ा ले जेन संतान के जनम होथे आखिर वोकर मन के का अपराध हे तेमा उनला समाज ले बाहिर रखे जाय?
-सिरतोन आय.. लइका मन के का कसूर?
-अइसने शासन ह जब आजीवन कारावास के सजा 14 बछर के देथे, त हमूं मनला ए मनला 14 बछर बाद समाज म संघार लेना चाही, ए मान के.. के इंकरो आजीवन कारावास/निष्कासन पूरा होगे.
-बहुत बढ़िया बात अउ तर्क संगी.. सबो समाज वाले मनला अइसन प्रगतिशील सोच अपनाना चाही.
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-हमर छत्तीसगढ़ के कतकों गाँव के भाँठा म रावन के पुतरा ह बारों महीना हाँसत-खुलखुलावत खड़े रहिथे जी भैरा.
-हव जी कोंदा.. महूं आकब करे हौं.. अब हमरेच गाँव के भाँठा म देख लेना.. लीला मंडली वाले मन हर बछर नवा रावन बनाय बर लागथे कहिके भाँठा म सिरमिट के रावन ठढ़िया दिए हें.
-हव जी.. फेर कतकों गाँव मन म तो मैं वो रावन के पूजा होवत घलो देखे हौं.. कुछू परब-तिहार होय या उत्सव-जलसा सबोच पइत रावन के पूजा कर के नरियर चघाए जाथे.
-हमरे परोसी गाँव मोहदी म घलो तो अइसने होथे.. हमूं मन उहाँ खेलकूद म जावन त भाँठा के रावन म नरियर चघा के घोलंड के पाँव परन.
-हव भई.. गुरुजी च मन रावन म नरियर चघा के पाँव परे बर काहय न.. अउ सिरतोन म संगी.. तहाँ ले खेलकूद के पहला इनाम हमरे गाँव ल मिलय.
-हव जी.. ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के चैम्पियन शील्ड हमारे गाँव म आवय हर बछर.
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-आरंग जगा के गाँव कठिया म एक झन शिवदास नॉव के बाबा ह तरिया के पानी ऊपर रेंगत-रेंगत नहाकहूं कहिके गाँव के लोगन मनला काली जुवर सकेल डारे रिहिसे जी भैरा.
-अच्छा.. त पानी ऊपर रेंगिस हे के नहीं जी कोंदा?
-कहाँ पाबे बइहा.. तउंरत तउंरत जावत रिहिसे.. बीच तरिया म थथमराय असन होगे त बचाव दल ह वोला कइसनो कर के तरिया ले बाहिर निकालिस हे.
-ले बता.. सिद्धी फिद्धी के नॉव म लोगन अइसन अलहन ल काबर नेवता दे डारथें कहिथौं.
-कतकों सिद्ध मनखे मन अइसन कर डारथें जी संगी, फेर अइसन सिद्धी ह कोनो विशेष बुता बखत काम करथे.. शेखी बघारे असन प्रदर्शन खातिर वोकर उपयोग करहूँ कहिबे त इही मनखे बरोबर हिनमान पाबे.
-सही आय.. तप सिद्धी ह प्रदर्शन के विषय नोहय.
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-आने भाखा ले आने वाले शब्द मनला छत्तीसगढ़ी म बउरत बेरा एती-तेती ले टोर-भाँज के लमिया देथें जी भैरा.
-कइसे गढ़न के कहे जी कोंदा?
-प्रकृति ल परकरिति, संस्कृति ल संसकरिति अइसने गढ़न के अउ शब्द मनला घलो लमिया डारथें.
- महूंँ ह कोनो कोनो ल अइसन लिखत देखे हौं.. अउ एकर खातिर वोमन तर्क ए देथें के गाँव-गँवई के सियान मन तो अइसने लमिया के गोठियाथें. असल म का हे ना.. कोनो भी भाखा के मानक उहाँ के पढ़े लिखे शिक्षित लोगन ल माने जाना चाही, जे मन कोनो भी शब्द के शुद्ध अउ आरुग उच्चारण करथें.. वो मनला नहीं, जे मन शब्द के उच्चारण सही नइ कर सकयँ.
-तोर कहना वाजिब हे, फेर कतकों झन तो उही सियनहा मन के उच्चारण ल मानक माने जाना चाही कहिके मुड़पेलवा करथें.
-तैं रायपुर के गोल बजार जाबे, उहाँ पसरा म लिमउ बेचत माईलोगिन मनला सुनबे.. वो मन लिमउ ल लीम्बू कहिथें.. काबर जानथस- हिंदी के नींबू अउ छत्तीसगढ़ी के लिमउ ल जोड़-ताड़ के आधा एती के अउ आधा शब्द वोती के कर के 'लीम्बू' कहिथें. अब तहीं बता अइसन मन के शब्द ल मानक माने जा सकथे?
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-तुंहर इहाँ के सियान के अस ल इलाहाबाद नइ लेगे रेहेव कहिके सुने ल मिलिस हे जी भैरा?
-ठउका सुने हावस जी कोंदा.. अरे भई जब हमर छत्तीसगढ़ के राजिम म साक्षात त्रिवेणी संगम हे, त फेर एती-तेती भटके के का जरूरत हे.
-तोरो कहना वाजिब जनाथे संगी.. मैं तो कहिथौं अइसने गढ़न के पिंडा परवाए खातिर लोगन जेन गया जी लेगथें ना.. वोकरो नेंग ल हमर छत्तीसगढ़ म ही कर लेना चाही.
-बिल्कुल कर लेना चाही.. राजिम अउ शिवरीनारायण ए दूनों हमर इहाँ अइसन पबरित ठउर हे, जिहाँ अस सरोए अउ पिंडा परवाए दूनों के विकल्प के रूप म विकसित करे जा सकथे.. मैं तो अपन घर के लइका मनला चेता के रखहूँ के मोर दरी तुमन एती-तेती भटके के बलदा राजिम अउ शिवरीनारायण म ही दूनों नेंग ल सिध पार लेहू.
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-अभी कुवाँर अंजोरी दसमीं के हमन विजयदशमी परब मनाए हावन नहीं जी भैरा?
-हव मनाए तो हावन जी कोंदा.. गाँव के भाँठा म रावन के पुतरा म आगी ढीले रेहेन.
-हव.. इहिच ह तो मोला थोकिन अनफभिक बानी के जनाथे.. एक डहार किष्किन्धा काण्ड के चौपाई 11 ले 18 म 'गत ग्रीषम बरषा रितु आई'.. ले लेके 'बरषा गई निर्मल रितु आई' काहत ए बताए गे हवय के भगवान राम ह असाढ़, सावन, भादो अउ कुवांँर के शरदपुन्नी तक के चौमासा ल प्रबरषण पहाड़ के गुफा म रहिन हें कहिके, त फेर वो गुफा म राहत बेरा ही रावन ल कइसे मार डारिन?
-तोरो प्रश्न ह वाजिब जनाथे संगी.. एक डहार हम पढ़थन के चौमासा म तो भगवान गुफा म रहिन हें, त फेर चौमासा के सिराय बिन.. वो गुफा ले निकले अउ लंका पहुँचे बिन रावन ल मार कइसे डारिन होहीं?
-मोला लागथे संगी के राम ह चौमासा के पूरा चार महीना उहाँ नइ रिहिन होहीं. जेकर पत्नी के हरण होय हे, वो चार महीना हाथ गोड़ सकेल के कइसे बइठे सकही?
-कोन जनी भई.. फेर पोथी म तो वइसने पढ़े बर मिलथे..!
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-शरदपुन्नी के दिन सक्ती जिला के गाँव तांदुलाडीह म गोंड़ परिवार के जेन दू भाई मनला गुरु भक्ति म ब्रह्मलीन साधना करत मरगें कहिके सुनाय रिहिसे, तेन ह तो वोकर बहिनी अमरिका के टोटा ल मसक के मारे के सेती मरे रिहिसे कहिथें जी भैरा.
-तभे तो मोला साधना करत मरे के बात ह अनभरोसिल कस जनाय रिहिसे जी कोंदा.. कभू कोनो साधना करत मरहीं गा.. भई हमूंँ मन कतकों साधक मनला देखे हावन, फेर अइसन कभू सुने नइ रेहेन.
-हव जी.. असल म वो लइका मन के बहिनी अमरिका ल ए भरम रिहिसे के वो ह मरे मनखे मनला अपन मंत्र साधना ले जीया डारही, इही बात ल सिद्ध करे खातिर वो अपन महतारी बहिनी अउ एक भाई ल अपन डहार संघार के वोकर ए साधना के बात ल अंधविश्वास कहइया दूनों भाई मनला पहिली तो जहरीला धुँगिया सूँघा के बेहोश करीस तेकर पाछू दूनों के टोटा ल मसक के मार डारिस.
-अइसन साधना के बात ह मोला आरुग अंधविश्वास जनाथे संगी.
-ए ह अंधविश्वास नहीं.. मूर्खता के पराकाष्ठा आय अउ ए ह दुख के बात आय के चारों मुड़ा अइसन नजारा देखे ले मिलत हे.
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-इहाँ के मूलनिवासी मन के देवी देवता मन के अपमान करे के उदिम अभी घलो चलतेच हे जी भैरा.
-ए तो जब ले अनगँइहा मन इहाँ आए हें तब ले चलत हे जी कोंदा.. डॉ. दयाशंकर शुक्ल के शोधग्रंथ छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य का अध्ययन के प्रथम संस्करण ल पढ़बे वोमा लिखाय हे- इहाँ के आदिवासी मन के जंगली देवता ऊपर आर्य देवता मनला स्थापित करे के काम तेज गति ले चलत हे.'
-वाह भई.. जंगली देवता..!
-हव दूसरा संस्करण म महीं ह वोला संपादित करे रेहेंव तेकर सेती सुरता हे.. अब गरियाबंद ले खबर आय हे- उहाँ दसेरा परब के आदिवासी परंपरा के अनुसार सिरहा (पुजारी) ह देवी के अवतार धर के पहुंचिस, तेला युवराज पांडेय ह डंडा म मार के देवी ल अपमान जनक गारी घलो दिस.
-वाह भई.. वोला इहाँ के देवी देवता अउ परंपरा के समझ नइए का जी?
-कोन जनी भई.. ए घटना के सेती आदिवासी मन भारी रोसियाइन.. धरना प्रदर्शन घलो करिन त कहूँ जाके युवराज पांडेय अउ तुषार मिश्रा के खिलाफ पुलिस ह अपराध दर्ज करे हे.
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-हमर इहाँ के हर समाज के अपन परंपरा अउ नेंग होथे जी भैरा.
-हव जी कोंदा सही आय.. एकदम अलगे जेन अउ दूसर समाज म देखे सुने म नइ आवय.
-हव जी सही आय.. अब हमर इहाँ के बिरहोर जनजाति ल ही देख लेना.. वो मन बर-बिहाव म टिकावन के रूप म दुल्हा बाबू ल टुकना, टँगिया, हँसिया अउ बेंदरा धरे के फाँदा देथें.
-वाह भई.. बेंदरा धरे के फाँदा!
-हव.. अभी रविशंकर विश्वविद्यालय म होय एक विशेष उद्बोधन म बिरहोर जनजाति मन बर बुता करत पद्मश्री जागेश्वर राम यादव ह ए बात के जानकारी दिस हे.
-वो समाज ह तइहा बेरा ले जंगल झाड़ी म राहत आवत हे, वो दृष्टि ले उहाँ रेहे खातिर अइसन टिकावन ह वाजिब घलो तो जनाथे.
-सही आय, फेर अब जागेश्वर राम यादव के सरलग बुता के सेती उहू मन म थोर बहुत बदलाव के आरो मिले लगे हे.
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-असल म हमर छत्तीसगढ़ म देवारी तो तीनेच दिन के होथे जी भैरा.. कातिक अमावस के सुरहुत्ती, गौरा-ईसरदेव बिहाव, वोकर बिहान भर गोवर्धन पूजा अउ तेकर बिहान भर मातर, फेर इहाँ एक अइसनो गाँव हे जिहाँ ए देवारी परब ल एक हफ्ता पहिलीच ले मना लिए जाथे.
-एक हफ्ता पहिली जी कोंदा?
-हव.. राजधानी रायपुर ले करीब 55 किमी दुरिहा बसे गाँव सेमरा जेन धमतरी, दुर्ग अउ बालोद जिला के सीमा म हे.
-अच्छा..!
-हव.. गाँव के मन बताथें के पहिली इहाँ कटाकट जंगल रिहिसे तब गाँव म एक पेड़ के खाल्हे म एक बाबा बइठे रिहिन हें, उही बेरा जंगल ले एक बघवा आइस अउ बाबा संग लड़े लगिस. शेर ह बाबा के मुड़ी अउ देंह ल अलग कर दिस, जेमा के मुड़ी ह हमर गाँव सेमरा म अउ देंह ह परोसी गाँव बोरझरा म गिरिस. पाछू बाबा ह हमर गाँव के लोगन ल सपना दिस के मोर हिसाब ले तुमन इहाँ तिहार बार ल मानहू त ए गाँव म सुख समृद्धि बने रइही. वोकर बाद बाबा सिरदार देव के मंदिर बनाए गिस अउ फेर उही ल गाँव के ईष्टदेव मानत हर बछर हफ्ता भर पहिली इहाँ देवरी मनाना शुरू होइस, जेन ह अभी घलो सरलग चलत हे.
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-पलंग सुपेती म सूतइया.. स्पंज वाले कोंवर सोफा म बइठइया शहरिया मन घलो अब हमर गाँव के गाँथे-तीरे खटिया के महात्तम ल समझे लगे हें जी भैरा.
-समझबे करहीं जी कोंदा.. तइहा बेरा ले चलत हमर खटिया ह शरीर खातिर बड़ उपयोगी अउ मयारुक होथे.. ए ह प्राकृतिक रूप ले एक्यूप्रेशर के बुता करथे.
-हव जी एकरे सेती अब रायपुर जइसन शहर म जुन्ना बेरा के खटिया के माँग अउ चलन बाढ़त हे.. न्यूरो थैरेपिस्ट अउ फिजियो थैरेपिस्ट मन के कहना हे- पारंपरिक तरीका ले आँटे गे बगई डोरी म गँथाय खटिया हमर देंह के हवा ल संतुलित राखथे.. ए ह पीठ पीरा अउ देंह के पीरा सबो ले बँचाथे, जेन ह आजकाल बेड, तख्त अउ स्पंज वाले गद्दा म सूते बइठे के सेती होवत हे.
-हव जी फेर खटिया के अँचावन ल बने टाँठ तिराय रहना चाही, इहू चेत करना जरूरी हे.. नइते पीठ पीरा ह बाढ़ घलो सकथे.
-सही आय.. हमर इहाँ सूते खातिर खटिया त बइठे खातिर मचोली घलो गाँथे राहय हमर बबा ह.
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-हमर मन के बेरा म तिहार बार म जेन फटाका फोरन तेन ह कतकों बाजय धुँगिया उड़ावय फेर कोनो ल नुकसान नइ करत रिहिसे जी भैरा फेर अब तो अइसन रोसहा रोसहा फटाका आगे हवय ते तोर कान-नाक के छेदरा बोजा जाही तइसे जनाथे.
-हव जी कोंदा.. अभी रायपुर के बजार म 130 डेसिबल तक के आवाज वाला फटाका आय हे बताथें.. कहूँ ए फटाका के फूटत बेरा तैं भोरहा म कान-नाक ल तोपे बर भूला जाबे त जउँहर हो जाही.
-हव भई.. अइसन मनला पूरा प्रतिबंधित करना चाही.. हमन अपन लइकई म कइसे बढ़िया कुधरी मनला सकेल के वोमा छोटे छोटे दनाका मनला गड़िया के फोरन. फटाका के फूटते कुधरी मन छटकय अउ धुर्रा उड़ियावय त कतका निक लागय.
-हव जी संगी.. हमन कहूँ बस्ती ले बाहिर भाँठा म जावन त उहाँ गोबर चोता मन म सुतरी बम ल खोंच के फोर देवत रेहेन.. भारी आनंद आवय संगी.
-अब वो दिन बेरा गय.. नवा जमाना के नवा उदिम आगे, फेर एमा मनोरंजन कम अउ खतरा जादा होगे हे.
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-सुनत हस भैरा.. काली एक झन मोला डाॅक्टर के उपाधि देबोन कहिके लुढ़ारत रिहिसे.
-भाग भइगे.. तैं ह कब ले लोगन के नरी टमड़े ले सीख गेस जी अउ कब ले सुजी बेधे के बुता करत हस.. हमला तो गमे नइए?
-अरे वइसनहा डाॅक्टर थोरहे बइहा.. साहित्य के काहत रिहिसे.
-टार बुजा ल.. अइसनो ह मोला फदित्ता बरोबर जनाथे.. भई हमन कोंदा लेड़गा मनखे.. अपन नॉव के आगू डाॅक्टर लिखई फबही गा?
-उही ल तो महूंँ कहेंव- हमन जइसन पाथन तइसन जतर-कतर लिख बइठथन.. त फेर वो ह साहित्य कहाँ ले होगे.. मोला डाॅक्टर फॉक्टर के पदवी झन देहू ददा.. उल्टा जी के काल हो जही.
-बने कहेस.
-तभो ले वो काहत रिहिसे- आजकाल अइसने तो चलत हे गा.. एकाद ठन फर्जी बानी के संस्था के नॉव धर ले अउ तहाँ ले मटमटहा किसम के लिखइया पढ़इया मनला किसम किसम के प्रमाण पत्र बाँटत राह.
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