Monday, 16 December 2024

कोंदा भैरा के गोठ-28

कोंदा भैरा के गोठ-28

-ए बछर कुंभ नहाय बर जाबो नहीं जी भैरा.
   -टार बुजा ल.. मोला कुंभ के नॉव सुनते झझकासी चकचकासी असन लागथे जी कोंदा.
   -अइसे काबर जी संगी.. 12 बछर म एक पइत भराथे तेकर अबड़ महात्तम होथे.
   -अच्छा.. तैं ह अभी प्रयागराज म 13 जनवरी ले महाशिवरात्रि 26 फरवरी तक महाकुंभ भराही तेमा असनाँदे बर जाए खातिर काहत रेहे का जी? 
   -हव.. त तैं ह अउ का समझत रेहे? 
   -अरे.. मैं ह एदे हमर परोस म पुन्नी मेला ल बलद के नकली कुंभ के चोचला चलत हे तेमा जाए बर काहत हे का हावस सोचत रेहेंव.
   -टार बइहा.. तहूं ह कहाँ ले अंते-तंते ल टमड़ डारथस.. हमर देश म सिरिफ चारे जगा- प्रयागराज, नासिक, उज्जैन अउ हरिद्वार म ही कुंभ लगथे.. उहू म अभी प्रयागराज म जेन महाकुंभ होही ना.. तेकर महात्तम ल गुनिक मन सबले जादा बताथें.
   -हाँ.. प्रयागराज म तो पक्का जाबो संगी.. उहाँ खातिर तो हमर मन म जबर श्रद्धा अउ भरोसा हे.
🌹

-अभी तो शिक्षा के नॉव म भइगे तोता रटंत भर चलत हे जी भैरा.
   -सिरतोन कहे जी कोंदा.. हमर घर के लइका मनला देखथौं त अपन ले जादा गरु के बस्ता बोह के जाथे अउ तहाँ ले उहिच मनला रटत रहिथे.
   -सबो घर के एके हाल हे.. फेर मोला लागथे संगी कागजी शिक्षा के संगे-संग तर्क शक्ति घलो होना चाही.
   -बिलकुल होना चाही.. हमन तो बड़का बड़का डिग्री धर के किंजरइया मनला पाँचवीं फेल ढोंगी पाखंडी मन के पाँव तरी घोनडइया मारत देखे हावन.
   -हव जी सिरतोन आय.. जहाँ धरम-करम के गोठ होइस, तहाँ ले तोर सब पढ़ई लिखई मन एक कोंटा म तिरिया जथे.
   -हव भई.. ‌एकरे सेती तो मोला सियान मन के वो बात ह बने सुहाथे .. उन काहँय- ' तेकर ले तो पढ़े ले कढ़े बने'.
   -पढ़े ले कढ़े बने होबेच करथे.. एमा मनखे अपन आत्मज्ञान अउ अनुभव के अनुसार ही कोनो ल पतियाथें अउ आज एकरे सबले जादा जरूरत हे.
🌹

-मोला अइसे जनाथे जी भैरा के कोनो मनखे के एको अंग ह कहूँ दिव्यांग गढ़न के रहिथे तेला उप्पर वाले ह कोनो अलग ले विशेष गुण अउ प्रतिभा दे देथे, जेकर ले वो सफलता के सिढ़िया चढ़ सकय. 
   -ए बात ल तो महूँ आकब करे हौं जी कोंदा.. बिलासपुर के रहइया आशीष सिंह ठाकुर ह जेन रायपुर म घलो पदस्थ रिहिसे अभी कर्नाटक के मैसूर जिला म डाक निदेशक के पद म आसीन हे, अउ तैं जानथस संगी आशीष ह दृष्टिहीन हे तभो ले हमर देश के सबले कठिन माने जाने वाला यूपीएससी के परीक्षा पास करे हे.
   -सही म ए ह उप्पर वाला के देन ही आय जी.. अइसने हमर इहाँ के छत्तीसगढ़ी कवि मेहतरू मधुकर अउ बोधनराम निषादराज ल तैं जानथस नहीं? 
   -जानबे कइसे नहीं जी.. शारीरिक रूप ले भले वो मन ह दिव्यांग हे फेर वोकर रचना मन अगास ल अमरे कस ऊँचहा भाव लिए रहिथे.
   -सही कहे संगी.. अउ ए सब ह उप्पर वाले के विशेष कृपा के बिना नइ हो सकय.
🌹

-मोला सिख समाज के ए प्रायश्चित वाले परंपरा ह गजबेच निक लागथे जी भैरा.
  -कइसन प्रायश्चित के परंपरा ह जी कोंदा? 
   -सिख समाज के जेन कोनो भी सदस्य ल धार्मिक सदाचार के दोषी पाए जाथे वोला तनखैया घोषित करे जाथे.
   -अच्छा.. काली उहाँ के जुन्ना मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल अउ वोकर मंत्रीमंडल के सदस्य रेहे विक्रम सिंह मजीठिया मन अपन टोटा म दोषी होय के तख्ती ओरमाए सेवादार के नीला डरेस पहिने हाथ म भाला धरे स्वर्णमंदिर परिसर के दरवाजा म घंटा भर सेवा बजाइन तेला कहिथस का? 
   -हव जी वो मन ल राम रहीम वाले मामला म धार्मिक रूप ले दोषी पाए गे रिहिसे तेकर सेती सिख धर्मगुरु मन तनखैया घोषित करे रिहिन हें.
   -सही म उँकर मन के ए न्याय व्यवस्था महूँ ल गजब सुहाथे संगी काबर ते एमा कोनो किसम के ऊँच नीच छोटे बड़े के भेदभाव नइ करे जाय सबो ल एक बरोबर माने जाथे अउ वोकरे मुताबिक व्यवहार या कहिन न्याय करे जाथे.
   -कभू कभू मैं गुनथौं संगी.. का हमरो समाज म बिना भेदभाव वाला अइसन न्याय परंपरा या व्यवहार देखे बर मिल पाही?
🌹

-गीता जयंती के जोहार जी भैरा.
   जोहार संगी कोंदा.. आज मोर मन म एक बात ह गजब उठत हे जी संगी- मैं देखथौं ते कतकों झन अइसन साधू, संत अउ तपस्वी हें, जे मन कोनो न कोनो किसम के शारीरिक दुख-पीरा.. रोग-राई म बूड़ेच असन दिखथें. भई हमर असन लंदर-फंदर मनखे के अइसन तकलीफ ह तो फभ जथे, फेर तपस्वी मन घलोक अइसनेच म अभरे रहिथें! 
   -हाँ.. अइसन तो होथेच जी भैरा.. एला अध्यात्म म प्रारब्ध भोग कहे जाथे.
   -अच्छा.. प्रारब्ध भोग? 
   -हहो.. अउ एला पूरा करे बिना कोनो ल मोक्ष या कहिन सद्गति नइ मिलय.
   -अच्छा... ताज्जुब हे भई! 
   -ए ह वो तपस्वी मन के पाछू जनम मन म कोनो भी कारन ले होय गुण-दोस मनला बराबर करे के एक प्रक्रिया होथे, जेला अध्यात्म के भाखा म प्रारब्ध भोग कहे जाथे. मान ले वो तपस्वी ह ए जनम म ए प्रारब्ध भोग ल पूरा नइ करही, त वोला फेर दूसर जनम ले बर लागही, फेर वोला पूरा करेच बर लागही.
   -अच्छा..! 
   -हव.. बिन प्रारब्ध पूरा करे कोनो ल सद्गति नइ मिलय.
🌹

-रामायण महाभारत काल के जबर युद्ध के घाव मनला तुरते भर दे के कमाल करइया औषधि जेला शल्यकर्णी के नॉव ले जाने जावय तेकर अति दुर्लभ पौधा ह अभी अमरकंटक के जंगल म मिले हे कहिथें जी भैरा.
   -अच्छा.. जेकर ले बड़का बड़का घाव ह रात भर म भर जावय कहिथें तेने ह जी कोंदा? 
   -हव जी वो शल्यकर्णी के पौधा ल रीवा के वन संरक्षक अनुसंधान केंद्र म बो के बढ़वार करत हें.. अभी पौधा मन पाँच ले दस फीट तक ऊँचहा होए हे कहिथें.
   -वाह भई.. ए तो बहुते सुग्घर बात आय.. वइसे भी हमर इहाँ के जड़ीबूटी मन म अबड़ गुन हे, बस जरूरी हे त इँकर संरक्षण अउ बढ़वार के.
   -सही आय.. मोला तो इही आयुर्वेद के परंपरा ऊपर जादा भरोसा जनाथे.. मोर खुद के बीमारी ह एकरे ले थोरिक राहत बरोबर जनाय हे.
   -अभी पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ह प्रेस कांफ्रेंस म बताय रिहिसे के वोकर सुवारी के केंसर के बीमारी ह जड़ीबूटी अउ संतुलित खान पान ले ठीक होइस हे कहिके, फेर दुर्भाग्य हे संगी हम अपन ए ज्ञान के संगे-संग जड़ीबूटी के विविध रूप अउ उपयोग ल बिसरावत जावत हन.. उहू म जानबूझ के.
🌹

-भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व ल अब दुनिया ह जाने समझे अउ माने ले धर लिए हे जी भैरा.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा.. अभी हमर इहाँ के जेन ध्यान के परंपरा हे, तेला अवइया 21 दिसंबर ले हर बछर 'विश्व ध्यान दिवस' के रूप म मनाए जाही.
   -अच्छा.. जइसे इहाँ के योग के महत्व ल समझ के विश्व योग दिवस मनाए के चलन शुरू होइस हे तइसने? 
   -हव.. संयुक्त राष्ट्र महासभा ह 21 दिसंबर ल विश्व ध्यान दिवस के रूप म घोषित कर दिए हे. ए प्रस्ताव ल पारित करवाए म भारत के संगे-संग लिकटेंस्टीन, श्रीलंका, नेपाल, मैक्सिको अउ अंडोरा घलो ह बड़का भूमिका निभाए हे.
   -ए तो बढ़िया बात आय जी.. ध्यान ल कोनो धर्म विशेष संग जोड़ के नइ देखना चाही, जइसे योग ल आज शारीरिक अउ मानसिक समृद्धि खातिर दुनिया के हर देश ह अपनावत हे, वइसने ध्यान ल घलो सबो ल सहजता ले स्वीकार करना चाही.
   सही आय जी.. ध्यान ले लोगन ल नवा नजरिया प्राप्त होथे.. सोचे-समझे के अउ कोनो बात ल फोरिया के गोठियाय बताय म सोहलियत होथे अउ सबले बड़का बात.. ध्यान ह हमर तीर-तखार के नकारात्मकता ल दुरिहा के सकारात्मक स्थिति बनाथे.
🌹

-अब हमर इहाँ के महापुरुष मन के जीवनी ल घलो गाथा के रूप म गाये के परंपरा चलही तइसे जनावत हे जी भैरा.
   -ए तो बढ़िया बात आय जी कोंदा.. कब तक आने आने देश राज के लोगन ल हमन अपन गायन-वादन के हिस्सा बनावत रहिबोन? 
   -सही आय जी.. आज 10 दिसंबर के हमर छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जी के जीवनी ल पंडवानी शैली म प्रसिद्ध गायक चेतन देवांगन जी गाहीं.
   -ए तो बढ़िया शुरुआत आय जी.. इहाँ के सबो गायक कलाकार मनला अइसन करना चाही.. हमर इहाँ एक ले बढ़ के एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व होए हें, जेकर मन के जीवनी ल गाथा गायन के रूप म लोगन तक अमराना चाही.
   -हव जी.. आज वीर नारायण सिंह जी के शहादत दिवस घलो आय न तेकर सेती उँकर शहादत ठउर रायपुर के जय स्तंभ चौक म पंडवानी शैली म गायन करे जाही संग म उनला अपन अपन श्रद्धा के मुताबिक लोगन श्रद्धांजलि घलो देहीं.
   -बहुत बढ़िया संगी.. हमरो डहर ले अमर शहीद ल जोहार.. पैलगी.. शहीद वीर नारायण सिंह जी अमर रहँय.
🌹

-विश्व ध्यान दिवस के जोहार जी भैरा.
   -जोहार संगी कोंदा.. हमर संत महात्मा मन के ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा अउ अध्यात्म संग जुड़े के ए ध्यान के परंपरा ह कतेक सुग्घर अउ सरल हे ना.. उन एकांत गुफा-कुँदरा म रहि के घलो देश दुनिया अउ अपन आराध्य संग जुड़ जावत रिहिन हें.
   -हव जी सही आय.. ध्यान के परंपरा ह तभो गजब मयारुक रिहिसे अउ आजो हे.
   -अइसे ना? 
    -हव जी.. मैं खुद एकर बड़का उदाहरण हावौं.. छै बछर ले आगर होगे हे मोला खटिया धरे.. अब न कहूँ मंदिर देवाला जा सकौं न घरे के पूजा ठउर ल अमरे सकौं, तभो इही ध्यान के भरोसा वो जम्मो आवश्यक ऊर्जा अउ ज्ञान स्रोत ल अमर डारथौं, जेकर मोला आवश्यकता होथे.
   -अइसे ना? 
   -मोर खटिया ही ह अब जप-तप अउ साधना के ठउर बनगे हे ए ध्यान परंपरा के भरोसा.. अब मोला अपन कोनो किसम के दिनचर्या म कोनोच किसम के कमी महसूस नइ होवय.
   -चलौ बनेच हे.. अब दुनिया के लोगन घलो हमर ध्यान परंपरा के महात्तम ल जानहीं, परखहीं अउ अपनाहीं.
   -जरूर अपनाहीं, तभे तो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आज के दिन ल विश्व ध्यान दिवस घोषित करे के निर्णय ह सुफल होही.
🌹

-राजनीतिक लाभ हानि के सेती स्कूल मन म लइका मन के पढ़ई घलो लट्टे-पट्टे हो पावत हे जी भैरा.
   -वाजिब कहे जी कोंदा.. फलाना समाज ल खुश करे बर वोकर कोनो परब म छुट्टी अउ तहाँ ले फेर कोनो समाज के लोगन ल खुश करे बर फेर छुट्टी.. भइगे छुट्टी उप्पर छुट्टी चलत हे.
   -भइगे.. काला कहिबे.. मोर नाती मनला जब देखथौं त घरेच म रहिथे आज फलाना के छुट्टी त आज ढेकाना के.. शिक्षा विभाग के नियमावली के मुताबिक बछर भर म 220 दिन स्कूल संचालित होना चाही, फेर थोक के भाव म छुट्टी देवई के सेती लट्टे-पट्टे 180 ले 185 दिन ही स्कूल संचालित हो पाथे.
   -ले तो भला अइसने म लइका मन के पढ़ई कइसे बने गतर के हो पाही? 
   -अरे.. उँकर कोर्स घलो पूरा नइ हो पावय.. एकरे सेती तो निजी स्कूल वाले मन चिथियागे हें.. उँकर कहना हे के पाँचवी अउ आठवीं बोर्ड के परीक्षा ल इहू बछर सामान्य ही लिए जाय.
   -सरकार ल एती खंँचित चेत करना चाही.. सार्वजनिक छुट्टी के संख्या मनला कम करना चाही, भले ऐच्छिक छुट्टी के संख्या ल बढ़ो देवय.. फेर जिहाँ तक पाँचवी अउ आठवीं के बोर्ड परीक्षा के बात हे त वोला तो लिए ही जाना चाही.. एमा कोनो ढील या छूट नहीं.
🌹

-कोनो भी नवा विचार या गोठ ल लोगन एकदमेच नइ पतियावयँ जी भैरा.
   -कहाँ ले पतियाहीं जी कोंदा.. जइसे पहिली ले बने बुनाए चातर रद्दा म ही लोगन ल रेंगन भाथे, नवा बने एकपइँया रद्दा ल लोगन कन्नेखी तक नइ देखय न.. ठउका नवा गोठ संग घलो अइसनेच होथे.
   -हव भई महूँ आकब करे हौं.. अभी हमन छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अउ इतिहास के वाजिब बात ल करथन त लोगन हमन ल गुरेरे अस देखथें काबर ते हमर मन जगा वोकर जुन्ना बेरा के कोनो लिखे साहित्य नइए.. अउ वोकर मन के बात ल झट पतिया लेथें जेकर मन के पहिली ले लिखे साहित्य या किताब हे, भले वो साहित्य ल अन्ते के लोगन अपन डहार के चलागन म लिखे रहिथें, जेकर हमर परंपरा संग कोनो तालमेल नइ राहय तभो.
   -अइसन तो होथेच संगी.. सच ल पहिली लोगन के हिनमान सहे बर लागथे, तेकर पाछू विरोध घलो झेले बर लागथे अउ फेर तब कहूँ जाके आखिर म वोला लोगन के स्वीकृति मिलथे.. दम धरौ.. तुँहरो संग अइसने होही, आखिर म लोगन तुँहरे गोठ ल पतियाहीं.. अपन गरब के चिन्हारी मानहीं.
🌹

-मंदिर-देवाला मन म नरियर खुरहोरी या लइची-लाड़ू आदि के परसाद तो सबो जगा बाँटे जाथे जी भैरा फेर हमर रायपुर के माँ मरही माता मंदिर म संझा-बिहनिया दूनों जुवर बिहनिया 10 ले 12 बजे तक अउ संझौती 6 ले 8 बजे तक जेवन घलो बाँटे जाथे.
   -अच्छा.. डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के बाजू वाले मरही माता मंदिर म जी कोंदा? 
   -हव जी.. जब विश्वव्यापी महामारी कोरोना ह बछर 2020 म दंदोरे ले धरे रिहिसे ना तब अंबेडकर अस्पताल म इलाज कराए बर अवइया लोगन  के रिश्ता-नता मन खोंची भर जेवन बर तरस जावत रिहिन हें, इही सब ल देख के गणेश भट्टर नॉव के मनखे के करेजा पसीज जावत रिहिसे.
   -हव.. कतकों दयालु धरमी मन संग अइसन होथे.
   -सही कहे.. तब भट्टर जी ह मरही माता मंदिर‌ समिति वाले मन संग गोठबात कर के इहाँ जेवन बाँटे के शुरू करिस.. पहिली तो इहाँ जेन कोनो भी वो तीर म आवय सबो ल जेवन दे दिए जावय फेर अब जेकर मन जगा अंबेडकर अस्पताल के पास होथे तेही मनला जेवन दिए जाथे.
   -बने हे.. दया-धरम के पुन्न‌ परसाद ल योग्य पात्र मनला ही मिलना चाही.
🌹

-धरम के लंबरदार मन के भारी चरित्तर हे जी भैरा.
   -कइसे का होगे जी कोंदा? 
   -अभी मोर हाथ म एक ठ प्रमाण पत्र आय हे.. जानथस ए ह कारक प्रमाण पत्र आय? 
   -तैं बताबे तब तो जानहूँ संगी.
   -ए ह "पाप मुक्ति प्रमाण पत्र" आय. 
‌‌  -ददा रे.. पाप मुक्ति के प्रमाण पत्र? 
   -हव भई.. ए प्रमाण पत्र ल 16 जून 2023 के श्री गौतमेश्वर महादेव अमीनात कचहरी, गौतमेश्वर थाना अमनोद जिला प्रतापगढ़ राजस्थान के सिल मोहर ले जारी करे गे हवय, जेमा पुजारी क्षितिज अउ अमीन के हस्ताक्षर हे.
   -वाह भई.. 
   -जेन मनखे ल पाप मुक्ति के प्रमाण पत्र दिए गे हे वोकर नॉव राधाकृष्ण मीणा पिता रामसिंह मीणा गाँव कैमला जिला करौली राजस्थान लिखाय हे, जेला श्री गौतमेश्वर जी के मन्दाकिनी पाप मोचनी ‌गंगा कुंड म नहवा के प्रायश्चित करवाए गे हे लिखाय हे.
   -अच्छा..! 
   -हव.. अउ खाल्हे म वोकर जाति समाज म वापस ले के बात कहे हे.
   -अच्छा.. त हो सकथे उँकर जाति समाज म कोनो कारण से अइसे करवाए जावत होही.
🌹

-तंत्र-मंत्र अउ ठुआँ-टोटका के नॉव म अभी तक कुकरा बोकर के पुजवन देके बात सुने रेहेन जी भैरा फेर सरगुजा के छिंदकालो गाँव ले खबर आए हे के उहाँ के एक झन आनंद यादव नॉव के छोकरा ह जीयत चीयाँ ल ही खा डरिस.
  -अच्छा.. कुकरी पिला ल जी कोंदा? 
   -हव भई.. बताथें के 15 बछर होगे रिहिसे वोकर बिहाव होय, फेर लइका नइ होवत रिहिसे, लइका के आस म जीयत चीयाँ ल खा डरिस अउ मर घलो गे.
   -मरबे करही.. चीयाँ ह वोकर टोटा म फँस गिस होही.
   -हव.. समझ म नइ आवय भई लोगन अइसन कइसन उजबक किसम के सलाह दे देथें अउ लोगन वोला पतिया घलो लेथें! डॉक्टर मन बतावत रिहिन हें के चीयाँ के पाँव ह वोकर श्वांस नली म अउ मुड़ ह आहार नली म यू आकार म फंसे रिहिसे, जेला पोस्टमार्टम के बेरा निकाले गिस.
   -कलंक हे संगी.. बइगा गुनिया मन के विचित्र सलाह अउ लइका सुख पाए बर अलकरहा जीवलेवा उपाय!
🌹

-धरम-पंथ ह लोगन ल एक-दूसर संग जोड़थे जी भैरा.. मीत-मितानी सीखोथे अउ देश राज म सुख शांति के स्थापना करत विकास के रद्दा ल चातर करथे.. वोमा बढ़वार करथे.
   -सही आय जी कोंदा.. धरम-पंथ के इही कारज ह लोगन के हिरदे म वोला ऊँचहा आसन देवाथे.
  -फेर मोला एक बात ह अचरज बानी के जनाथे संगी- तब फेर लोगन धरम-पंथ, जाति समाज के नॉव म एक-दूसर संग पटकिक-पटका तिरिक-तीरा करत नफरत अउ भेदभाव काबर बगरावत रहिथें.. का अइसन करइया मनला सही मायने म धार्मिक कहे जा सकथे? 
   -बिल्कुल नहीं.. जाति, धरम, संप्रदाय अउ देवी देवता के नॉव म तनाव, भेदभाव अउ ऊँच-नीच के नार लमइया मन भला धार्मिक कइसे हो सकथे? अइसन मन धरम के कोचिया दलाल हो सकथें.. उँकर रखवार‌ या खेवनहार नहीं.

Sunday, 1 December 2024

मयारु माटी बछर 2 अंक 2 पीडीएफ

छत्तीसगढ़ी भाखा के पहला संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' ह वो बेरा म कइसन निकलत रिहिसे ए बात ल जाने खातिर कतकों संगी मन गोठियावत राहँय, उँकर जिज्ञासा शांत करे खातिर पहिली बछर 1988 के देवारी अंक के पीडीएफ ल पोस्ट करे गे रिहिसे.. अब 'मयारु माटी' के बछर 2 अंक 2 के पीडीएफ जे ह हमला रायगढ़ के साहित्यकार भाई बसंत राघव जी के माध्यम ले मिले पोस्ट करे जावत हे. देखव वो बखत हमर महतारी भाखा खातिर कइसन बुता होवत रिहिसे...

Saturday, 30 November 2024

मुख्यमंत्री ने कोंदा भैरा के गोठ का विमोचन किया

मुख्यमंत्री के हाथों "कोंदा भैरा के गोठ" विमोचित.. 
   रायपुर। साहित्यकार सुशील भोले द्वारा सोशलमीडिया के सभी मंच पर प्रतिदिन धारावाहिक के रूप में पोस्ट किए जा रहे छत्तीसगढ़ी धारावाहिक "कोंदा भैरा के गोठ" का छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्ण देव साय के हाथों विमोचन किया गया। रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे एवं इतिहासकार डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र विशेष अतिथि के रूप में मंचस्थ थे.
   सिविल लाइन, रायपुर स्थित सर्किट हाउस के कम्यूनिटी हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश भर से आए साहित्यकार उपस्थित थे। 
   छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित "कोंदा भैरा के गोठ" में प्रतिदिन लिखे जा रहे धारावाहिक के प्रारंभिक दिनों की 177 कड़ियों को समाहित किया गया है। कोंदा भैरा के गोठ की भूमिका पं. सुंदर लाल शर्मा राज्य अलंकरण से सम्मानित साहित्यकार डॉ. सत्यभामा आड़िल ने लिखी है, तथा शुभकामना के दो शब्द सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने प्रेषित किया है।

Sunday, 24 November 2024

कोंदा भैरा के गोठ-27

कोंदा भैरा के गोठ-27

-अपन धरम-पंथ के लोगन मन के बीच बिहाव करना ही ह बने जनाथे जी भैरा.
   -बने जनाथे घलो अउ बने जिनगी भर खटाथे घलो जी  कोंदा.
   -हव जी सही आय.. बिलासपुर के विकास चंद्रा संग एक मसीही समाज के नोनी ह मया बंधना के सेती हिंदू रीति ले बिहाव तो करे रिहिसे, फेर वो ह हिंदू परंपरा के कभू सम्मान नइ करत रिहिसे अउ ते अउ अपन पति संग पूजा पाठ घलो म नइ संघरत रिहिसे उल्टा चर्च जवई करत रिहिसे, तेकरे सेती विकास ह फेमिली कोर्ट ले वोला तलाक़ दिए रिहिसे.
   -बने करिस.. भई जेन माईलोगिन ह अपन आदमी के धरम परंपरा के कारज म संघरत नइ रिहिसे वोला तो तलाक़ देना ही चाही.
   -हव.. फेर वो माईलोगिन ह फेमिली कोर्ट के फैसला ल हाईकोर्ट म चुनौती दे रिहिसे, त हाईकोर्ट ह घलो फेमिली कोर्ट के फैसला ल सही बतावत कहिस- पति संग सहधर्मिणी के कर्तव्य पूरा नइ करना ह धार्मिक मान्यता के अपमान अउ मानसिक क्रूरता आय.

🌹
-गौरा-ईसरदेव परब के बेरा म काली काँसी डोरी वाला सोंटा मरवाए नहीं जी भैरा? 
   -इहू पूछे के बात आय जी कोंदा.. हर बछर मैं गौरा-ईसरदेव के आशीर्वाद पाए बर सोंटा मरवाथौं.
   -बहुत बढ़िया.. वइसे ए ह आय तो हमर पुरखा मन के बनाए एक परंपरा ही, फेर ए ह वैज्ञानिक दृष्टि ले घलो बड़ महत्तम के होथे.
   -अच्छा.. अइसे का जी? 
   -हहो.. ए सोंटा ल काँसी के काँदी (सुक्खा पैरा) के डोरी ल बने पाँच दिन तक तेल म बोर के राखे जाथे, जेकर हाथ म सटाक ले परे ले हमर नस के सफेद रक्त कोशिका  (white blood cells) मन ह सक्रिय हो जाथें.. सफेद रक्त कोशिका मन के सक्रिय होय ले करीब पचास किसम के बीमारी मन अपने अपन ठीक हो जाथें.. ए सोंटा के माध्यम ले शरीर ल मिले एक्यूप्रेशर के क्रिया ले कैंसर के लक्षण कहूँ जनावत होही त उहू ल ए सफेद रक्त कोशिका मन खतम कर देथें.
   -वाह भई.. तब तो अब मैं ह हर बछर अपन घर के लइका मनला घलो सोंटा मरवाए बर कइहौं.

🌹
-हमर देश म तइहा जुग ले गाय ल महतारी बरोबर मानत आवत हावन‌ जी भैरा तभो ले अब इहाँ 'कत्लखाना' मन के संख्या म होवत बढ़ोत्तरी ह भारी ताज्जुब बरोबर जनाथे.
   -हव जी कोंदा.. पहिली गाँव के कोनो घर अइसन नइ राहत रिहिसे जिहाँ एको ठन गाय गरुवा नइ राहत रिहिस‌ होही, फेर अब टेक्टर अउ हार्वेस्टर जइसन मशीन ले खेती होय के सेती बने असन किसान घर घलो गाय गरुवा दिखे ले नइ धरय. 
   -हव जी.. ए ह देश म होवत धार्मिक सांस्कृतिक अउ औद्योगिक बदलाव के सेती घलो होही तइसे जनाथे.
   -कुछू होवय, फेर इहाँ अभी कोनो कोनो संत महात्मा मन गाय ल राष्ट्रमाता घोषित करे के माँग करथें ना, ते ह मोला वाजिब जनाथे.
   -गाय के महत्ता ल तो अफ्रीकी देश सूडान के मुंदरी आदिवासी मन ठउका जानथें, उहाँ एला सबले बड़े धन अउ खजाना माने जाथे.
   -अच्छा..! 
   -हव.. एकरे सेती गाय के रखवारी बर वोमन‌ खाँध म एके 47 जइसन हथियार टाँग के किंजरत रहिथें.

🌹
-धर्म खातिर आस्था ह बहुते सुग्घर बात आय जी भैरा, फेर एकर नॉव ले बगराए जाने वाला अफवाह ल समझना अउ बाँचना घलो जरूरी होथे.
   -सही आय जी कोंदा.. कतकों अफवाह ह बिन मुड़ी पूछी के होथे तभो लोगन वोमा झपाए परथें.
   -हव जी.. अभी वृंदावन के बाँकेबिहारी मंदिर ले खबर आए हे- उहाँ हाथी के मुँह ले टपकत पानी ल लोगन भगवान के चरणामृत आय कहिके पीये बर लुलुवावत झपाय परत हें.
   -वाह भई..! 
   -हव.. फेर उहाँ मंदिर म सेवा करइया आशीष गोस्वामी ह बताइस के असल म वो पानी ह मंदिर म लगे एसी अउ सफाई आदि ले निकलने वाला पानी आय. 
   -भाग भइगे..! 
   -राजस्थान पत्रिका म छपे ए खबर ह वायरल होवत हमन ल चेतावत हे, के कोनो ह कौवा कान ल लेगे कहि दिस त अपन कान ल टमड़े बिन कौवा के पाछू नइ भागना चाही.

🌹
-छत्तीसगढ़ी म एक कहावत हे- 'बेर्रा अबड़ भोगावत हे' एकर मतलब समझथस जी भैरा? 
   -कोन जनी जी कोंदा.. रोगहा.. बेर्रा ल हम गारी होही कहिके भर समझथन! 
   -दू अलग अलग प्रजाति के जिनिस ले सिरजे जिनिस ल 'संकरनस्ल' कहिथन न उही आय.. बेर्रा.
   -अच्छा.. जेकर दाई अलगे अउ ददा अलगे जात समाज के होथे तइसने? 
‌  -हव.. अब ठउका समझे.. अउ ए संकरनस्ल के जिनिस मन उत्ताधुर्रा बाढ़थें.. उही ल हमर सियान मन 'बेर्रा अबड़ भोगावत हे' काहँय.. अब इहाँ के राजनीति म अइसने बेर्रा मन के संख्या म भारी बढ़ोत्तरी आवत हे, ए मन खाथे-पीथें तो इहाँ के अन्न-जल ल फेर गुन गाथें अनगँइहा मन के.
   -अच्छा.. अभी भिलाई के विधायक ह कुरूद के तरिया के नॉव ल अनगँइहा गायिका के नॉव म धर दिए हे तइसने.. जबकि वो तरिया के नॉव ह नगर पालिक निगम के रिकॉर्ड म पहिली ले पंथी सम्राट देवदास बंजारे के नॉव म दर्ज‌ हे.
   -हव संगी.. हमन ल अब अइसने बेर्रा किसम के राजनीतिक मन ले इहाँ के परब-तिहार, नदिया-तरिया, गाँव-गँवई जइसन सबो चिन्हारी ल बँचा के राखे बर लागही, तभे छत्तीसगढ़ ह छत्तीसगढ़ रहि पाही नहीं ते इहू ह परदेशियागढ़ बन जाही.

🌹
-रायपुर के दादाबाड़ी म चलत प्रवचन के श्रृंखला म विराग मुनि जी कहिन जी भैरा के आज सबो झन अपने मान्यता ल ही सबो के ऊपर थोपना चाहत हें, उनला लागथे के उहिच भर सही हे अउ बाकी सब गलत हें.
  -ए बात तो महूंँ ल वाजिब जनाथे जी कोंदा.. जतका धरम-पंथ के संत मनला सुन ले सब अपनेच ल श्रेष्ठ कहिथें अउ आने मनला कमजोरहा.
   -विराग मुनि जी कहिन के आज हम कहाँ ले कहाँ पहुँच गे हावन.. हमर देश म विद्या ल कभू बेचे नइ जावत रिहिसे.. अन्न देवई या काकरो ईलाज खातिर मदद करई ल सेवा अउ पुन्य परसाद माने जावत रिहिसे, फेर आज इही तीनों ह सबले बड़े कारोबार बनगे हे.
   -सिरतोन आय संगी.. धरम-करम के परिभाषा अंते-तंते जनाथे.
   -हव.. वो मन के कहना हे के आज के कतकों संत मन तो भगवान के भक्ति उपासना ल छोड़ के अपने भक्त बनाय म मगन रहिथें.. संत समाज म घलो विकृति आगे हवय.
   -सही आय.. काकर ल मानन अउ काकर ल नहीं तइसे होगे हावय.

🌹
-हरदेव लाला मंदिर म काली छत्तीसगढ़ी चिन्हारी मन के 'उजियार' देखे ले गे रेहे नहीं जी भैरा? 
   -हव.. अइसन सुग्घर उदिम मन म तो मैं कइसनो कर के पहुँची जथौं जी कोंदा.. लइका मन के सुग्घर सुग्घर चित्रकारी, कलाकारी अउ कविता पाठ ल देख सुन के मन गदगद होगे रिहिसे.
   -होबेच करही जी, फेर मोला लागथे के अब हमन ल  पंडवानी या भरथरी जइसन अनगँइहा मन के गाथा के बलदा हमर आरंग के राजा मोरध्वज के वो गाथा ल गाना चाही, जेन ह अपन बेटा ल आरा म दू फाँकी चीर के भगवान के आगू म मढ़ा दिए रिहिसे.
   -हव जी.. भगवान कृष्ण ह जइसे इंद्रदेव के पूजा परंपरा ल बंद करवा के अपन तीर के गोवर्धन पूजा के परंपरा चालू करवाए रिहिसे तइसने.
   -हव.. हमूं मनला अइसने करे बर लागही, अंते तंते के लोगन अउ पात्र मन के गाथा ल छोड़ के अपन इहाँ के गौरव मनला दुनिया भर बगराए के उदिम करना चाही.
   -मैं तो इहू कहिथौं संगी के हमला अइसन जम्मो आयोजन मनला मनोरंजन के संग ज्ञान अउ जनजागरण के माध्यम घलो बनाना चाही.

🌹
-अब तो हमरो इहाँ चार लइका बियाय बर जोर देवत हें जी भैरा.. कइसे करबे तैं ह? 
   -कोन ह अइसन काहत हे जी कोंदा? 
   -दूसर धरम-पंथ वाले मन के बाढ़त जनसंख्या ल देखत हमरो धरम के रखवार मन अइसने करे बर काहत हें जी.
   -वइसे सुने म अइसन गोठ ह बड़ा निक बानी के जनाथे ना, फेर जेकर घर-परिवार हे चोरो-बोरो लोग-लइका हे, ते मन जानथें के उँकर मन के सम्मान जनक शिक्षा अउ भरन-पोसन खातिर कतका मरे-खपे ल परथे.
   -सही आय जी.. डिड़वा मनखे जेकर लोग न लइका परिवार के व्यवस्था कइसे होही तेकर चिंता न फिकर.. वइसन मन का जानहीं चार लइका बियाय ले कइसे का हो जाही तेला? 
   -तभो ले ए गोठ ऊपर चिंतन होना चाही अइसे लागथे मोला.
   -चितन तो सबो गोठ ऊपर होना चाही के वोकर मन के पाले-पोसे के जिम्मेदारी कोन लेही या फेर वो मनला कीरा-मकोरा बरोबर जिनगी जीए बर ढकेल दिए जाही?

🌹
-हमर शहर म तो अभी ले बिन पँखा के सूते-बसे नइ सकन तभो ले काली जेठौनी परब म भुर्री तापे के नेंग ल करे हावन जी भैरा.
   -गरमी ह तो हमरो कोती थिरावन नहीं काहत हे जी कोंदा तभो ले हमूँ मन जुन्ना सूपा, झेंझरी मनला बार के आगी तापे हावन.
   -पहिली के बेरा म जेठौनी के आवत ले जाड़ ह बनेच दँदोरे ले धर ले राहय तभो सियान मन भुर्री बारे अउ तापे खातिर जेठौनी के शुभ परब के अगोरा करँय.
   -हव जी.. जइसे गरमी के मौसम म अक्ती परब ले ही नवा करसी म पानी पीए के शुरुआत करथन तइसने गढ़न.
   -सही आय जी.. जाड़ होवय चाहे गरमी फेर उन दूनों ले राहत पाए के शुरुआत खातिर शुभ परब के अगोरा करे जावय इही ह आज हमर परंपरा बनगे हावय.

🌹
-बिन गुरु के काकरो उद्धार नइ होय काहत रिहिसे जी भैरा.. गाँव के मंडल ह. 
   -बने तो काहत रिहिसे जी कोंदा.. हर मनखे ल अपन जिनगी म एक आध्यात्मिक गुरु जरूर बनाना चाही, काबर ते पूजा-उपासना के फल तो ऊपर वाला ही देथे, फेर वोला गुरु के माध्यम ले ही देथे.
   -अच्छा.. अउ गुरु बनाए बिन पूजा उपासना करत रहिबे तभो फल नइ देवय? 
   -देथे.. फेर अधूरा देथे.. विधिवत गुरु बनाए के पाछू ही पूरा देथे.
   -एकरे सेती तो महूँ ह थथमराए असन होगे हौं.. काला गुरु बनावौं अउ काला नहीं, काबर ते आजकाल रंग-रंग के गुरु देखब म आथे.
   -ऊपर के चकाचक अउ रूप-रंग भर ल देखबे ते अलहन हो जाथे.. वोकर कर्म अउ जीवन दर्शन ल घलो देखना चाही.. आजकाल वंश परंपरा के रूप म फलाना ह गुरु के बेटा आय कहिके घलो नइ अभरना चाही.
   -हव जी बने काहत हस.. तभे तो सियान मन 'गुरु बनावौ जान के अउ पानी पीयौ छान के' काहँय.
   -हव.. फेर आजकाल तो सिधवा बरोबर चोला खाप के हुँड़रा भेड़िया मन घलो किंजरत रहिथें.. अइसन मनला कहूँ गलती म गुरु बना परबे त वो तोला कुकरी चोरा के खवई ल घलो पुन्न के कारज बता देही.

🌹
-राजनीति के अगास म 'बँटोगे तो कटोगे' नारा ह गजब चलत हे जी भैरा.
   -नारा भर के चले ले का होथे जी कोंदा.. नारा लगइया मन के चाल-चरित्तर म घलो तो वइसन दिखना चाही.
   -हव जी सिरतोन आय.. हमर इहाँ तो मंदिर-देवाला तक म भेदभाव देखे ले मिलथे.. वीआईपी मन बर खुसरे के आने रद्दा अउ आम लोगन बर आने.
    -वाह.. आजकाल तो टिकट घलो मिले लगे हे.. अतका के टिकट म एती ले अउ वतका के टिकट म वोती ले.. अब तहीं बता अइसन भेदभाव ले कोनो भी समाज ह एक हो सकथे? मोला तो सिख समाज के वो दृश्य गजब मनभावन लागथे संगी, जिहाँ गुरुद्वारा मन म बड़े बड़े वीआईपी मन घलो लोगन के जूठा बर्तन अउ जूता के सफाई करत रहिथें.
   -अरे अतके ल कहिथस.. जब ज्ञानी जैलसिंह जी राष्ट्रपति रिहिन हें तब उनला तनखैया घोषित कर के स्वर्णमंदिर म जूता साफ करे के आदेश दिए गे रिहिसे.. अउ सिरतोन म संगी जैलसिंह जी वो आदेश के पालन करे रिहिन हें.. अब तैं बता तोर समाज म अइसन संभव हे? 
   -कहाँ पाबे संगी? 
   -हांँ.. जब तक ऊँच-नीच छोटे बड़े के मानसिकता ल पोंस के राखबे, तब तक भइगे नारा भर लगावत रहिबे.. एक नइ हो सकस.

🌹
-देश सेवा खातिर फौज म ही जाना जरूरी नइए जी भैरा.. हम जिहाँ रहिथन उहेंच ले देश सेवा के रद्दा निकाल सकथन. 
   -हाँ ए बात ल तो महूँ मानथौं जी कोंदा.. काबर ते देश सेवा के कतकों रूप हो सकथे.
   -सही आय.. हमर रायपुर के फाफाडीह चौक म एक होटल हे- नीलकंठ रेस्टोरेंट.. इहाँ फौजी मन के विशेष रूप ले सम्मान करे जाथे.
   -अच्छा.. वो कइसे? 
   -इहाँ जे फौजी ह वर्दी पहिन के जाथे वोला पचास प्रतिशत छूट म भोजन करवाए जाथे, अउ कोनो फौजी ह सिविल ड्रेस म चल देथे त वोला पचीस प्रतिशत छूट दिए जाथे.
   -वाह भई..! 
   -रेस्टोरेंट के संचालक मनीष बताथे- वोकर सियान के संगे-संग उन तीनों भाई एनसीसी कैडेट रहें हें, तेकर सेती देश सेवा म जाए के बहुत इच्छा रिहिसे, फेर पारिवारिक ज़िम्मेदारी के सेती फौज म जा नइ पाईन, एकरे सेती देश सेवा खातिर फौजी भाई मनला विशेष छूट के साथ भोजन करवाए के बुता करत हावन.. वो बताथे के उँकर रेस्टोरेंट म रोज 10-15 फौजी आ जाथें.. कभू कोनो शहीद के माता पिता आ जाथें त उनला नि:शुल्क भोजन करवाए जाथे.

🌹
-छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस अवइया हे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. 28 नवंबर के हर बछर मनाथन न.. इही दिन बछर 2007 म छत्तीसगढ़ विधानसभा म छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा के रूप म मान्यता देवइया विधेयक ह सर्वसम्मति ले पास होए रिहिसे, तेकरे सेती जम्मो भाखा प्रेमी मन ए दिन ल छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के रूप म मनाथन.
   -हव बने कहे.. फेर तैं जानथस संगी हमर सरकार ह आजतक छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा के रूप म मनाए खातिर विधिवत शासकीय परिपत्र जारी नइ करे हे.
   -डॉ. रमन सिंह जी मुख्यमंत्री रिहिन हें तब तो हर बछर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए के घोषणा करे रिहिन हें ना? 
   -हव करे रिहिन हें ना, फेर वो ह आजतक सिरिफ घोषणा ही बन के रहिगे हे.. एकर संबंध म शासन द्वारा विधिवत परिपत्र जारी नइ करे गे हे, एकरे सेती हमर इहाँ के जम्मो शासकीय संस्थान मन म छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए नइ जाय.
   -वाह भई.. सरकार ल ए डहार चेत करना चाही अउ "हमन बनाए हावन त हमींच मन सँवारबो" के नारा ल सच साबित करत तुरते परिपत्र जारी कर के जम्मो शासकीय संस्थान मन म छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाए के ठोसहा बुता करना चाही.

🌹
-किन्नर मनला सुप्रीम कोर्ट ह जब तृतीय लिंग के रूप म स्वतंत्र चिन्हारी दिए रिहिसे तब मैं रायपुर के किन्नर मन संग भेंट कर के एक लंबा लेख अउ उँकर पीरा ल रेखांकित करत गीत लिखे रहेंव जी भैरा- "घर म रहि के घलो मैं बिरान होगेंव, कइसे बहिनी-भाई बर घलो आन होगेंव.'
  - किन्नर मन के जीवन तो होथेच पीरा के खदान जी कोंदा.
   -सही कहे संगी, फेर अभी बलौदाबाजार जगा के एक खदान म मिले किन्नर काजल के हत्या अउ लाश ले संबंधित खबर ह मोला झकझोर डरिस.
   -वो कइसे? 
   -खबर म बताए गे हवय- रायपुर के जोरा बस्ती म किन्नर मन के मठ हे, जिहाँ के मुखिया बने बर या कहिन उहाँ के वर्चस्व खातिर निशा अउ तपस्या नॉव के किन्नर मन काजल नॉव के किन्नर ल सुपारी दे के मरवा दिस.
   -वाह भई..! किन्नर मठ के वर्चस्व खातिर सुपारी..? 
   -हव जी.. उहू म 12 लाख रुपिया के सुपारी! बलौदाबाजार पुलिस ह ए पूरा मामला के खुलासा करे हे, जेमा दूनों किन्नर संग तीन झन सुपारी लेवइया मनला गिरफ्तार करे हे.
   -बाप रे.. अइसन किन्नर मन ले संवेदनशील होय के बलदा सचेत रहे के जरूरत जनावत हे.

🌹
-अब के लइका मन तो भइगे चिरई पिला कस होगे हें जी भैरा.. पाँखी ह थोक-बहुत जामे अस होइस तहाँ ले कुँदरा ले उड़िया जाथें.
   -ठउका कहे जी कोंदा.. पढ़ा-लिखा के बर-बिहाव करे तहाँ ले नौकरी के ओढ़र म शहर के रद्दा धर लेथें.
   -हव भई.. दाई-ददा मन इहाँ घिलरत हन.. केपकेप करत बिदागरी के रद्दा जोहत हन, फेर हमर मन के देखइया-जतनइया कोनोच नइए.. कभू-कभार उन हमर सुध ले बर आ घलो जथें, त भइगे पहुना बरोबर.. बिहनिया आईन अउ संझा चले गेईन.. रतिहा तक ल नइ बिलमयँ.
   -ए ह अब हमरे भर मन के बात नइ रहिगे हे जी संगी पूरा बस्ती उजार परत हे.. सबोच गाँव के.. इहाँ गाँव के गौंटिया मंडल मन बरोबर सुग्घर जिनगी ल छोड़ के शहर के धुर्रा धुँगिया म बिट्टाए बर लुलुआए परे हें.
   -सही कहे संगी.. शहर के चकाचौंध ह दुरिहा ले देखत भर के आय.. तीर म जाबे त जानबे कतका मुश्किल हे उहाँ जिनगी जीना, फेर ए परलोखिया मनला कोन समझावय.

🌹
-हमर देवी देवता मन म कालभैरव ही अइसे देवता आय जी भैरा जेला मंद-मउहा के भोग लगाए जाथे.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा बताए जाथे के ए ह शिव जी के पाँचवा अवतार आय जे ह देवी के रक्षा खातिर अवतार लिए रिहिन हें.. बताथें के वोमन युद्ध के मैदान म रहिथें.. भोलेनाथ ह कालभैरव जी ल कोतवाल घलो नियुक्त करे रिहिन हें, तेकर सेती ए मन हर देवी मंदिर म बिराजे रहिथें.
   -अच्छा..! 
   -हव.. वइसे तो जम्मो जगा के मंदिर मन म कालभैरव जी ल मंद के ही भोग लगथे, फेर हमर छत्तीसगढ़ के रतनपुर महामाया मंदिर म अगहन महिना के अँधियारी पाख के आठे के दिन सात्विक भोग लगाए जाथे.
   -अच्छा.. वो काबर? 
   -ए दिन इँकर जयंती होथे, तेकरे सेती इनला ए दिन बाल स्वरूप मान के सात्विक भोग लगाए जाथे. बाकी दिन आने मंदिर मन असन मंद के भोग लगथे.. असल म कालभैरव ल तामसिक देवता माने जाथे जे ह युद्ध के मैदान म रहिथे.. एकरे सेती इनला मंद जइसे तामसिक भोग चढ़ाए जाथे.

🌹
-हमर परब तिहार, देवता-धामी अउ उपास-धास सबो ह बेटी माई मन के ही भरोसा बाँचे रहिगे हे जी भैरा.
   -ए बात ल तो सिरतोन कहे जी कोंदा.. उहू म वो बेटी माई मन ए सबला माने जाने म अगुवा हें, जेकर मन के नेरवा ह गाँव-गँवई म गड़े हे, शहरिया चोला ओढ़े मन म एमा थोरिक कमी देखे जाथे.
   -सिरतोन कहे संगी, फेर कभू-कभू मैं इहू गुनथौं के ए मनला हमर देश के संविधान ह उनला उँकर अधिकार अउ सुरक्षा खातिर कतका अकन व्यवस्था करे हे, तेकरो जानकारी रहिथे ते नहीं? 
   -हाँ.. इहू ह बड़ जरूरी बात आय.. आज सबो वर्ग अउ ठउर के बेटी माई मनला एकर खँचित जानबा होना चाही.. उँकर दाई-ददा, भाई-बंद सबो ल ए डहार चेत करना चाही, काबर ते जतका जरूरी हमर परब-संस्कृति के बढ़वार हे, वतकेच जरूरी महतारी बेटी मन के सुरक्षा अउ अधिकार घलो हे.
   -हव जी आज 26 नवंबर के संविधान दिवस के बेरा म आवव परन करीन के हमन ए मुड़ा म ठोसहा कारज करबोन.. काबर ते बेटी माई मन सम्मान के साथ रइहीं, तभे हमर परब-संस्कृति घलो सम्मान जनक स्थिति म बाँचे रहि पाही.
🌹

Sunday, 17 November 2024

आगाज में कविता..

हमरूह प्रकाशन दिल्ली के साझा काव्य संकलन 'आगाज-1' के पृष्ठ 111 एवं 112 पर प्रकाशित मेरी रचना- इतिहास बोल रहा है..

Thursday, 14 November 2024

कविता.. विकास होगे..!

विकास होगे..! 
निच्चट कोलकी म हे
मोर कुँदरा ह. 
ए मुड़ा 
न कार आ सकय
न फटफटी
एकरे सेती
कार म रेंगइया
अउ फटफटी म बुलइया
न तो सरकार
एती आवय
न उँकर कोनो डारा-शाखा.
तभे तो
हमर कोलकी
आज ले अद्दर परे हे.
फेर लोगन बताथें-
सरकार के रिकॉर्ड म
हमर कोलकी ह
पक्का चमचमावत
सिरमिट के
गली म 
लहुट गे हे.
कोनो कोनो बताथें-
बिजली के
डेड़हत्था सादा पोंगरी
घलो ओरमे हे, 
फेर रतिहा 
कभू कुछू जिनिस 
बिसर जाथे त
देशी मंद के बोतल ल
कुलुप के बनाए 
चिमनी के अँजोर म
टमड़ के 
वोला उचा लेथन
आजो ले.
-सुशील भोले

Monday, 28 October 2024

कोंदा भैरा के गोठ-26

कोंदा भैरा के गोठ-26
🌹
-हमर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कला संस्कृति ल लेके अब बने जागरुकता देखे बर मिलत हे जी भैरा.
   -ए तो बने बात आय जी कोंदा.. हमर छत्तीसगढ़ ह काकरो ले कोनोच जिनिस म कमती नइए.. बस लोगन पर के पाछू भटके ल छोड़ के अपन गौरव ल जानयँ.. आत्मसात करयँ.
   -सही आय जी.. राजधानी रायपुर के डीडीनगर गोल चौक म अभी के नवरत म आरुग छत्तीसगढ़ी परंपरा म पंडाल बनाय गे हवय तेला देख के गरब के अनुभव होथे.. इहाँ माता के सुमरनी ल सुवा, करमा अउ पंथी जइसन गीत नृत्य के माध्यम ले करे जाथे.
   -वाह भई..! 
    -हव जी.. ए पंडाल म संघरे बर आरुग छत्तीसगढ़ी सँवाँगा म जाए बर लागथे, नइते उहाँ निंगन नइ देवय.
   -ए तो बहुतेच बढ़िया बात आय संगी.. मैं तो इही किसम इहाँ के आध्यात्मिक संस्कृति, पूजा विधि अउ जीवन पद्धति के घलो बात करथौं.. हमला काकरोच खातिर आने मन के मुंह देखे के जरूरत नइए. 
   -धीर लगा के सब होही संगी.. राजधानी के पंडाल ले अभी जेन सांस्कृतिक गंगा के धारा निकले हे, ए ह पूरा राज भर संचरही अउ कला संस्कृति ले होवत आध्यात्मिक जीवन पद्धति तक जाही.
🌹
-हमर छत्तीसगढ़ म एक अइसन मंदिर घलो हे जी भैरा जिहाँ परसाद के रूप म दहीबड़ा, मिर्चा भजिया अउ समोसा जइसन लसुन गोंदली वाले तामसिक जिनिस ही चघाए जाथे.
   -वाह भई.. हम तो अइसन कभू नइ सुने रेहेन जी कोंदा! 
   -हाँ.. बिलासपुर के चिंगराजपारा म धूमावती माता के मंदिर हे.. इहाँ सिरिफ शनिच्चर भर के अइसन चढ़ाए जाथे.. इहाँ माता धूमावती के माता पार्वती के विधवा रूप म पूजा करे जाथे एकरे सेती उनला लुगरा घलो सादा रंग के ही चढ़ाए जाथे.
   -मोला सुन के ही बड़ा अचरज लागत हे संगी.
   -एमा अचरज के का बात हे जी.. अभी नवरात तो चलतेच हे, जा के माता के दरस कर के आजा.. अउ सँउहे अपन आँखी म देख ले.. वइसे इहाँ खाली हाथ वाली माईलोगिन मन विशेष रूप ले आथें बताथें.. जे मन एक चिट्ठी म लिख के अपन समस्या मनला माता जी ल बताथें अउ फेर माता के आशीष ले वो जम्मो दुख पीरा ले मुक्ति पा जाथें.
🌹
-धोबी समाज ह अब समाज के वो लोगन मनला, जे मन आने समाज के नोनी मन संग बिहाव कर डारे हें उनला  कुछ प्रतिबंध के संग अपन समाज म मिलाए के निर्णय लिए हें जी भैरा.
   -ए तो बहुत बढ़िया बात आय जी कोंदा.. इहाँ के मनवा कुर्मी समाज म तो अइसन अंतर्जातीय बिहाव वाले मनला समाज म संघारे के परंपरा बनेच दिन ले चलत हे.
   -अच्छा.. बनेच दिन ले चलत हे? 
   -हव.. समाज के जागरूक लोगन महाधिवेशन म प्रस्ताव पास करवाए रिहिन हें.. उंकर कहना रिहिसे के वो अंतर्जातीय बिहाव वाले जोड़ा ले जेन संतान के जनम होथे आखिर वोकर मन के का अपराध हे तेमा उनला समाज ले बाहिर रखे जाय? 
  -सिरतोन आय.. लइका मन के का कसूर? 
   -अइसने शासन ह जब आजीवन कारावास के सजा 14 बछर के देथे, त हमूं मनला ए मनला 14 बछर बाद समाज म संघार लेना चाही, ए मान के.. के इंकरो आजीवन कारावास/निष्कासन पूरा होगे.
  -बहुत बढ़िया बात अउ तर्क संगी.. सबो समाज वाले मनला अइसन प्रगतिशील सोच अपनाना चाही.
🌹
-हमर छत्तीसगढ़ के कतकों गाँव के भाँठा म रावन के पुतरा ह बारों महीना हाँसत-खुलखुलावत खड़े रहिथे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. महूं आकब करे हौं.. अब हमरेच गाँव के भाँठा म देख लेना.. लीला मंडली वाले मन हर बछर नवा रावन बनाय बर लागथे कहिके भाँठा म सिरमिट के रावन ठढ़िया दिए हें.
   -हव जी.. फेर कतकों गाँव मन म तो मैं वो रावन के पूजा होवत घलो देखे हौं.. कुछू परब-तिहार होय या उत्सव-जलसा सबोच पइत रावन के पूजा कर के नरियर चघाए जाथे.
   -हमरे परोसी गाँव मोहदी म घलो तो अइसने होथे.. हमूं मन उहाँ खेलकूद म जावन त भाँठा के रावन म नरियर चघा के घोलंड के पाँव परन. 
  -हव भई.. गुरुजी च मन रावन म नरियर चघा के पाँव परे बर काहय न.. अउ सिरतोन म संगी.. तहाँ ले खेलकूद के पहला इनाम हमरे गाँव ल मिलय.
   -हव जी.. ब्लॉक स्तरीय खेलकूद के चैम्पियन शील्ड हमारे गाँव म आवय‌ हर बछर.
🌹
-आरंग जगा के गाँव कठिया म एक झन शिवदास नॉव के बाबा ह तरिया के पानी ऊपर रेंगत-रेंगत नहाकहूं कहिके गाँव के लोगन मनला काली जुवर सकेल डारे रिहिसे जी भैरा.
   -अच्छा.. त पानी ऊपर रेंगिस हे के नहीं जी कोंदा? 
   -कहाँ पाबे बइहा.. तउंरत तउंरत जावत रिहिसे.. बीच तरिया म थथमराय असन‌ होगे त बचाव दल ह वोला कइसनो कर के तरिया ले बाहिर निकालिस हे.
   -ले बता.. सिद्धी फिद्धी के नॉव म लोगन अइसन अलहन ल काबर नेवता दे डारथें कहिथौं.
   -कतकों सिद्ध मनखे मन अइसन कर डारथें जी संगी, फेर अइसन सिद्धी ह कोनो विशेष बुता बखत काम करथे.. शेखी बघारे असन प्रदर्शन खातिर वोकर उपयोग करहूँ कहिबे त इही मनखे बरोबर हिनमान पाबे.
   -सही आय.. तप सिद्धी ह प्रदर्शन के विषय नोहय.
🌹
-आने भाखा ले आने वाले शब्द मनला छत्तीसगढ़ी म बउरत बेरा एती-तेती ले टोर-भाँज के लमिया देथें जी भैरा.
   -कइसे गढ़न के कहे जी कोंदा? 
   -प्रकृति ल परकरिति, संस्कृति ल संसकरिति अइसने गढ़न के अउ शब्द मनला घलो लमिया डारथें.
   - महूंँ ह कोनो कोनो ल अइसन लिखत देखे हौं.. अउ एकर खातिर वोमन तर्क ए देथें के गाँव-गँवई के सियान मन तो अइसने लमिया के गोठियाथें. असल म का हे ना.. कोनो भी भाखा के मानक उहाँ के पढ़े लिखे शिक्षित लोगन ल माने जाना चाही, जे मन कोनो भी शब्द के शुद्ध अउ आरुग उच्चारण करथें.. वो मनला नहीं, जे मन शब्द के उच्चारण सही नइ कर सकयँ.
   -तोर कहना वाजिब हे, फेर कतकों झन तो उही सियनहा मन के उच्चारण ल मानक माने जाना चाही कहिके मुड़पेलवा करथें.
   -तैं रायपुर के गोल बजार जाबे, उहाँ पसरा म लिमउ बेचत माईलोगिन मनला सुनबे.. वो मन लिमउ ल लीम्बू कहिथें.. काबर जानथस- हिंदी के नींबू अउ छत्तीसगढ़ी के लिमउ ल जोड़-ताड़ के आधा एती के अउ आधा शब्द वोती के कर के 'लीम्बू' कहिथें. अब तहीं बता अइसन मन के शब्द ल मानक माने जा सकथे?
🌹
-तुंहर इहाँ के सियान के अस ल इलाहाबाद नइ लेगे रेहेव कहिके सुने ल मिलिस हे जी भैरा? 
   -ठउका सुने हावस जी कोंदा.. अरे भई जब हमर छत्तीसगढ़ के राजिम म साक्षात त्रिवेणी संगम हे, त फेर एती-तेती भटके के का जरूरत हे.
   -तोरो कहना  वाजिब जनाथे संगी.. मैं तो कहिथौं अइसने गढ़न के पिंडा परवाए खातिर लोगन जेन गया जी लेगथें ना.. वोकरो नेंग ल हमर छत्तीसगढ़ म ही कर लेना चाही.
   -बिल्कुल कर लेना चाही.. राजिम अउ शिवरीनारायण ए दूनों हमर इहाँ अइसन पबरित ठउर हे, जिहाँ अस सरोए अउ पिंडा परवाए दूनों के विकल्प के रूप म विकसित करे जा सकथे.. मैं तो अपन घर के लइका मनला चेता के रखहूँ के मोर दरी तुमन एती-तेती भटके के बलदा राजिम अउ शिवरीनारायण म ही दूनों नेंग ल सिध पार लेहू.
🌹
-अभी कुवाँर अंजोरी दसमीं के हमन विजयदशमी परब मनाए हावन नहीं जी भैरा? 
   -हव मनाए तो हावन जी कोंदा.. गाँव के भाँठा म रावन के पुतरा म आगी ढीले रेहेन.
   -हव.. इहिच ह तो मोला थोकिन अनफभिक बानी के जनाथे.. एक डहार किष्किन्धा काण्ड के चौपाई 11 ले 18 म 'गत ग्रीषम बरषा रितु आई'.. ले लेके 'बरषा गई निर्मल रितु आई' काहत ए बताए गे हवय के भगवान राम ह असाढ़, सावन, भादो अउ कुवांँर के शरदपुन्नी तक के चौमासा ल प्रबरषण पहाड़ के गुफा म रहिन हें कहिके, त फेर वो गुफा म राहत बेरा ही रावन ल कइसे मार डारिन? 
   -तोरो प्रश्न ह वाजिब जनाथे संगी.. एक डहार हम पढ़थन के चौमासा म तो भगवान गुफा म रहिन हें, त फेर चौमासा के सिराय बिन.. वो गुफा ले निकले अउ लंका पहुँचे बिन रावन ल मार कइसे डारिन होहीं? 
   -मोला लागथे संगी के राम ह चौमासा के पूरा चार महीना उहाँ नइ रिहिन होहीं. जेकर पत्नी के हरण होय हे, वो चार महीना हाथ गोड़ सकेल के कइसे बइठे सकही? 
   -कोन जनी भई.. फेर पोथी म तो वइसने पढ़े बर मिलथे..!
🌹
-शरदपुन्नी के दिन सक्ती जिला के गाँव तांदुलाडीह म गोंड़ परिवार के जेन दू भाई मनला गुरु भक्ति म ब्रह्मलीन साधना करत मरगें कहिके सुनाय रिहिसे, तेन ह तो वोकर बहिनी अमरिका के टोटा ल मसक के मारे के सेती मरे रिहिसे कहिथें जी भैरा.
   -तभे तो मोला साधना करत मरे के बात ह अनभरोसिल कस जनाय रिहिसे जी कोंदा.. कभू कोनो साधना करत मरहीं गा.. भई हमूंँ मन कतकों साधक मनला देखे हावन, फेर अइसन कभू सुने नइ रेहेन.
   -हव जी.. असल म वो लइका मन के बहिनी अमरिका ल ए भरम रिहिसे के वो ह मरे मनखे मनला अपन मंत्र साधना ले जीया डारही, इही बात ल सिद्ध करे खातिर वो अपन महतारी बहिनी अउ एक भाई ल अपन डहार संघार के  वोकर ए साधना के बात ल अंधविश्वास कहइया दूनों भाई मनला पहिली तो जहरीला धुँगिया सूँघा के बेहोश करीस तेकर पाछू दूनों के टोटा ल मसक के मार डारिस.
   -अइसन साधना के बात ह मोला आरुग अंधविश्वास जनाथे संगी.
   -ए ह अंधविश्वास नहीं.. मूर्खता के पराकाष्ठा आय अउ ए ह दुख के बात आय के चारों मुड़ा अइसन नजारा देखे ले मिलत हे.
🌹
-इहाँ के मूलनिवासी मन के देवी देवता मन के अपमान करे के उदिम अभी घलो चलतेच हे जी भैरा.
   -ए तो जब ले अनगँइहा मन इहाँ आए हें तब ले चलत हे जी कोंदा.. डॉ. दयाशंकर शुक्ल के शोधग्रंथ छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य का अध्ययन  के प्रथम संस्करण ल पढ़बे वोमा लिखाय हे- इहाँ के आदिवासी मन के जंगली देवता ऊपर आर्य देवता मनला स्थापित करे के काम तेज गति ले चलत हे.'
   -वाह भई.. जंगली देवता..! 
   -हव दूसरा संस्करण म महीं ह वोला संपादित करे रेहेंव तेकर सेती सुरता हे.. अब गरियाबंद ले खबर आय हे- उहाँ दसेरा परब के आदिवासी परंपरा के अनुसार सिरहा (पुजारी) ह देवी के अवतार धर के पहुंचिस, तेला युवराज पांडेय ह डंडा म मार के देवी ल अपमान जनक गारी घलो दिस.
   -वाह भई.. वोला इहाँ के देवी देवता अउ परंपरा के समझ नइए का जी? 
   -कोन जनी भई.. ए घटना के सेती आदिवासी मन भारी रोसियाइन.. धरना प्रदर्शन घलो करिन त कहूँ जाके युवराज पांडेय अउ तुषार मिश्रा के खिलाफ पुलिस ह अपराध दर्ज करे हे.
🌹
-हमर इहाँ के हर समाज के अपन परंपरा अउ नेंग होथे जी भैरा.
   -हव जी कोंदा सही आय.. एकदम अलगे जेन अउ दूसर समाज म देखे सुने म नइ आवय. 
   -हव जी सही आय.. अब हमर इहाँ के बिरहोर जनजाति ल ही देख लेना.. वो मन बर-बिहाव म टिकावन के रूप म दुल्हा बाबू ल टुकना, टँगिया, हँसिया अउ बेंदरा धरे के फाँदा देथें.
   -वाह भई.. बेंदरा धरे के फाँदा! 
   -हव.. अभी रविशंकर विश्वविद्यालय म होय एक विशेष उद्बोधन म बिरहोर जनजाति मन बर बुता करत पद्मश्री जागेश्वर राम यादव ह ए बात के जानकारी दिस हे.
   -वो समाज ह तइहा बेरा ले जंगल झाड़ी म राहत आवत हे, वो दृष्टि ले उहाँ रेहे खातिर अइसन टिकावन ह वाजिब घलो तो जनाथे.
   -सही आय, फेर अब जागेश्वर राम यादव के सरलग बुता के सेती उहू मन म थोर बहुत बदलाव के आरो मिले लगे हे.
🌹
-असल म हमर छत्तीसगढ़ म देवारी तो तीनेच दिन के होथे जी भैरा.. कातिक अमावस के सुरहुत्ती, गौरा-ईसरदेव बिहाव, वोकर बिहान भर गोवर्धन पूजा अउ तेकर बिहान भर मातर, फेर इहाँ एक अइसनो गाँव हे जिहाँ ए देवारी परब ल एक हफ्ता पहिलीच ले मना लिए जाथे.
   -एक हफ्ता पहिली जी कोंदा? 
   -हव.. राजधानी रायपुर ले करीब 55 किमी दुरिहा बसे गाँव सेमरा जेन धमतरी, दुर्ग अउ बालोद जिला के सीमा म हे. 
   -अच्छा..! 
   -हव.. गाँव के मन बताथें के पहिली इहाँ कटाकट जंगल रिहिसे तब गाँव म एक पेड़ के खाल्हे म एक बाबा बइठे रिहिन हें, उही बेरा जंगल ले एक बघवा आइस अउ बाबा संग लड़े लगिस. शेर ह बाबा के मुड़ी अउ देंह ल अलग कर दिस, जेमा के मुड़ी ह हमर गाँव सेमरा म अउ देंह ह परोसी गाँव बोरझरा म गिरिस. पाछू बाबा ह हमर गाँव के लोगन ल सपना दिस के मोर हिसाब ले तुमन इहाँ तिहार बार ल मानहू त ए गाँव म सुख समृद्धि बने रइही. वोकर बाद बाबा सिरदार देव के मंदिर बनाए गिस अउ फेर उही ल गाँव के ईष्टदेव मानत हर बछर हफ्ता भर पहिली इहाँ देवरी मनाना शुरू होइस, जेन ह अभी घलो सरलग चलत हे.
🌹
-पलंग सुपेती म सूतइया.. स्पंज वाले कोंवर सोफा म बइठइया शहरिया मन घलो अब हमर गाँव के गाँथे-तीरे खटिया के महात्तम ल समझे लगे हें जी भैरा.
   -समझबे करहीं जी कोंदा.. तइहा बेरा ले चलत हमर खटिया ह शरीर खातिर बड़ उपयोगी अउ मयारुक होथे.. ए ह प्राकृतिक रूप ले एक्यूप्रेशर के बुता करथे.
   -हव जी एकरे सेती अब रायपुर जइसन शहर म जुन्ना बेरा के खटिया के माँग अउ चलन बाढ़त हे.. न्यूरो थैरेपिस्ट अउ फिजियो थैरेपिस्ट मन के कहना हे- पारंपरिक तरीका ले आँटे गे बगई डोरी म गँथाय खटिया हमर देंह के हवा ल संतुलित राखथे.. ए ह पीठ पीरा अउ देंह के पीरा सबो ले बँचाथे, जेन ह आजकाल बेड, तख्त अउ स्पंज वाले गद्दा म सूते बइठे के सेती होवत हे.
   -हव जी फेर खटिया के अँचावन ल बने टाँठ तिराय रहना चाही, इहू चेत करना जरूरी हे.. नइते पीठ पीरा ह बाढ़ घलो सकथे.
   -सही आय.. हमर इहाँ सूते खातिर खटिया त बइठे खातिर मचोली घलो गाँथे राहय हमर बबा ह.
🌹
-हमर मन के बेरा म तिहार बार म जेन फटाका फोरन तेन ह कतकों बाजय धुँगिया उड़ावय फेर कोनो ल नुकसान नइ करत रिहिसे जी भैरा फेर अब तो अइसन रोसहा रोसहा फटाका आगे हवय ते तोर कान-नाक के छेदरा बोजा जाही तइसे जनाथे.
   -हव जी कोंदा.. अभी रायपुर के बजार म 130 डेसिबल तक के आवाज वाला फटाका आय हे बताथें.. कहूँ ए फटाका के फूटत बेरा तैं भोरहा म कान-नाक ल तोपे बर भूला जाबे त जउँहर हो जाही.
   -हव भई.. अइसन मनला पूरा प्रतिबंधित करना चाही.. हमन अपन लइकई म कइसे बढ़िया कुधरी मनला सकेल के वोमा छोटे छोटे दनाका मनला गड़िया के फोरन. फटाका के फूटते कुधरी मन छटकय अउ धुर्रा उड़ियावय त कतका निक लागय.
   -हव जी संगी.. हमन कहूँ बस्ती ले बाहिर भाँठा म जावन त उहाँ गोबर चोता मन म सुतरी बम ल खोंच के फोर देवत रेहेन.. भारी आनंद आवय संगी.
   -अब वो दिन बेरा गय.. नवा जमाना के नवा उदिम आगे, फेर एमा मनोरंजन कम अउ खतरा जादा होगे हे.
🌹
-सुनत हस भैरा.. काली एक झन मोला डाॅक्टर के उपाधि देबोन कहिके लुढ़ारत रिहिसे.
   -भाग भइगे.. तैं ह कब ले लोगन के नरी टमड़े ले सीख गेस जी अउ कब ले सुजी बेधे के बुता करत हस.. हमला तो गमे नइए? 
‌‌  -अरे वइसनहा डाॅक्टर थोरहे बइहा.. साहित्य के काहत रिहिसे.
   -टार बुजा ल.. अइसनो ह मोला फदित्ता बरोबर जनाथे.. भई हमन कोंदा लेड़गा मनखे.. अपन नॉव के आगू डाॅक्टर लिखई फबही गा? 
   -उही ल तो महूंँ कहेंव- हमन जइसन पाथन तइसन जतर-कतर लिख बइठथन.. त फेर वो ह साहित्य कहाँ ले होगे.. मोला डाॅक्टर फॉक्टर के पदवी झन देहू ददा.. उल्टा जी के काल हो जही.
   -बने कहेस.
   -तभो ले वो काहत रिहिसे- आजकाल अइसने तो चलत हे गा.. एकाद ठन फर्जी बानी के संस्था के नॉव धर ले अउ तहाँ ले मटमटहा किसम के लिखइया पढ़इया मनला किसम किसम के प्रमाण पत्र बाँटत राह.
🌹

मयारु माटी देवारी अंक 1988

छत्तीसगढ़ी भाखा के पहला संपूर्ण मासिक पत्रिका "मयारु माटी" के बछर 1988 के देवारी अंक के पीडीएफ ह रायगढ़ के साहित्यकार भाई बसंत राघव के सद्प्रयास ले मिले हे. बहुत झन संगी मन 'मयारु माटी' वो बखत कइसन निकलत रिहिसे कहिके पूछत रहिथें, वोकर मन के जिज्ञासा शांत करे खातिर ए अंक के पीडीएफ। अवइया बेरा म एकर साफ प्रति बनाय अउ पोस्ट करे के कोशिश करबोन, अभी एहा सिरिफ जिज्ञासा शांत करे खातिर..
https://www.facebook.com/share/p/x89bemNFzzG4CeeH/

Thursday, 24 October 2024

मयारु माटी के चित्रकार मोहन गोस्वामी..

सुरता//
मयारु माटी के चित्रकार भाई मोहन गोस्वामी
    छत्तीसगढ़ी भाखा के पहला संपूर्ण मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' संग चित्रकार के रूप म जुड़े रहे मोहन गोस्वामी के चिन्हारी चित्रकार के रूप म ही जादा रिहिसे. वइसे मोहन भाई जतका मयारुक चित्रकार रिहिन हें, वतकेच सुंदर फोटोग्राफर, डिजाइनर अउ गुरतुर आवाज के गायक घलो रिहिसे, जेन खुद हारमोनियम बजा के गावय.
   मोहन गोस्वामी संग मोर चिन्हारी अखबार जगत म बुता करे के सेती होय रिहिसे, तब वो ह दैनिक 'नव भास्कर' म प्रेस फोटोग्राफर रिहिसे अउ मैं दैनिक तरुण छत्तीसगढ़ म सहायक संपादक. हम दूनों के कार्यालय आसपास रिहिसे, तेकर सेती चिन्हारी रिहिसे गोठबात घलो होवत राहय.
   एक दिन मैं छत्तीसगढ़ी के लोकप्रिय कवि अउ गायक लक्ष्मण मस्तुरिया जी के ब्रम्हपुरी वाले घर म बइठे रेहेंव उही बेरा मोहन गोस्वामी घलो उहाँ आइस. तब हमर मन के उहाँ होय गोठबात म जानबा होइस के लक्ष्मण मस्तुरिया जी अउ मोहन गोस्वामी सग भाई आयँ. बातेबात म मोहन बताइस के भइया महूं तो इही जगा रहिथौं. तब मस्तुरिया जी बिरंची मंदिर के चाल म राहत रिहिन हें, अउ ठीक वोकर पाछू म वर्मा परिवार के घर म मोहन. तब मोहन मोला चलना भइया मोर घर कहिके अपन घर लेगे रिहिसे. आगू जब हमर मन के घनिष्ठता बाढ़त गिस त फेर संगे म घूमना फिरना, उठना बइठना सब होए लागिस.
    बछर 1961 के 8 अक्टूबर के गाँव मस्तूरी म जनमे मोहन गोस्वामी गजब मयारुक मनखे रिहिसे हमन वोकरे घर म बइठ के गीत संगीत के रिहर्सल घलो करन. तब बी.एस. अखिलेश, मोहन गोस्वामी, लक्ष्मण दीवान, मस्तुरिया जी के बड़े बेटा दिनेश अउ मैं जादा कर के बइठन. कभू कभार एक दू अउ संगी उहाँ आ जावत रिहिन हें. हमर मन के रिहर्सल ल देख के एक पइत मस्तुरिया जी मजाक करत केहे रिहिन हें- तुमन तो मोर ले बड़े गायक बन जाहू तइसे लागथे. ए बइठकी म मोरो गीत मनला अखिलेश भाई ह स्वरबद्ध करे रिहिसे, जेन आगू चल के 'फूलबगिया' के नॉव ले कैसेट के रूप म निकले रिहिसे.
    वो बखत रायपुर के चित्रकार जगत म बीएस अखिलेश अउ मोहन गोस्वामी ए दूनों के जबर नाम रिहिसे. दूनों ही चित्रकार अउ डिजाइनर होय के संग स्क्रीन प्रिंटिंग के बुता घलो कर देवत रिहिन हें. छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका मयारु माटी के टाइटल ले लेके पत्रिका के सबो अंक के आवरण अउ भीतर के पृष्ठ मन म छपे सबो चित्र मन मोहन गोस्वामी के ही बनाय आय, त मोर पहला काव्य संकलन 'छितका कुरिया' के आवरण अउ प्रिंटिंग बीएस अखिलेश के हाथ ले सिरजे हे.
    मोहन, मोर, अखिलेश अउ लक्ष्मण दीवान के बइठकी मोहन घर तब तक बने चलत रिहिसे जब तक मोहन के बिहाव नइ होय रिहिसे, मोहन के बिहाव होय के बाद एमा कमी आइस अउ फेर जब मोहन ह टिकरापारा के भगत चौक म खुद के मकान बिसा के रेहे लागिस, तेकर बाद तो फेर हमर मन के बइठकी पूरा बंद होगे. ए बीच कभू कभार मिले के मन होवय त मैं मोहन के फूल चौक वाले दूकान मोगो क्रियेशन म चले जावत रेहेंव या फेर वो मन मोर रिकार्डिंग स्टूडियो म आ जावत रिहिन हें.
  ए बीच हमर मन के मिलई जुलई बनेच कम होगे रिहिसे. कुछू सुख- दुख के संदेशा लक्ष्मण दीवान के माध्यम ले मिलय. इही बीच खबर आइस के मोहन के मयारुक सुपुत्र के देवलोक गमन होगे हे. जवान बेटा के अबेरहा जवई ह मोहन ल भीतरी ले टोर डारे रिहिसे, एकरे सेती मोहन बीमार‌ परे अस दिखे लागय. 22 अक्टूबर 2017 के ए दुनिया के बिदागरी ले के पहिली मोहन संग मोर सिरिफ एके पइत भेंट होय रिहिसे, जब वो ह हमर घर के तीर म ही हीरा बेकरी के डिजाइन के बुता के देखरेख करत रिहिसे.
  मोहन के जाए के बाद तो फेर महूंँ खटिया के रखवार होगेंव. आज बहुत दिन बाद मोहन के सुरता आइस त उनला श्रद्धा के फूल चढ़ावत  ए चार डाँड़ के सिरजन होगे. मोर जबर मयारुक संगी ल जोहार.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Sunday, 6 October 2024

कोंदा भैरा के गोठ-25

कोंदा भैरा के गोठ-25
🌹
-हमन अपन-अपन धर्म ल लेके कुआँ के मेचका बरोबर होगे हावन जी भैरा.
   -अइसे का जी कोंदा.. तोला ए बात ह सिरतोन जनाथे‌ का? 
   -विवेकानंद मानव प्रकर्ष संस्थान म 'विश्व भातृत्व दिवस' के अवसर म आयोजित परिसंवाद म डॉ. सुभाष चंद्राकर ह अइसने काहत रिहिसे.
   -असल म का हे ना.. धर्म ह आज पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाले गोठ बनके रहिगे हे.. मोला बता अपन धरम संस्कृति के प्रचार करना ह कहूँ कुआँ के मेचका हो जाना होथे, त इहू मन आज खुद कुआँ के मेचका बरोबर कारज करत हें नहीं? 
   -कइसे गढ़न के जी? 
   -ए मन रामकृष्ण परमहंस अउ विवेकानंद के छोड़े कोनो अउ आने देवता ल अपन मंदिर मन म ठउर देथें का? अरे ठउर देवई तो दुरिहा जाय, जेन विवेकानंद ल रायपुर के बूढ़ा तरिया म नहाय म बूढ़ादेव के आशीर्वाद ले पहिली बेर भाव समाधि मिले रिहिसे उही बूढ़ादेव के नॉव म स्थापित बूढ़ा तरिया के नॉव ल विवेकानंद के नॉव म धर दिन.. बूढ़ादेव के आशीष ल अनदेखा करत वोला एक कोन्टा म तिरिया दिन.. अब तहीं बता अइसन बात ल विश्व भातृत्व के श्रेणी के माने जाही या कुआँ के मेचका के?
   -जे मन बूढ़ादेव के महत्व नइ समझिन वो मन कुआँ के मेचका नहीं त अउ का आय?
🌹
-आज राजभाषा हिंदी दिवस के बेरा म मैं ए जानना चाहत हौं जी भैरा के तुंहर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ल एकर ले का फायदा होइस? 
   -हम अपन देश के संविधान के सम्मान करथन जी कोंदा, तेकर सेती हमर देश के राजभाषा हिंदी के घलो सम्मान करथन, तभो ए करू अनुभव ल घलो कहे बर नइ घेपन, के हमर संग हिंदी के नॉव म अन्याय जादा होय हे.
    - तुंहला अइसे काबर जनाथे संगी? 
   -अब देख- छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी मातृभाषा बोलइया मन के संख्या 66 प्रतिशत हे, अउ हिंदी मातृभाषा वाले मन के संख्या मात्र 5 प्रतिशत, तभो ले षड्यंत्र पूर्वक हमर ए राज ल हिंदी भाषी घोषित कर दिए गिस.. एकर दुष्परिणाम ए होइस के हमला हिंदी के नॉव म आने हिंदी भाषी राज मन के इतिहास, संस्कृति अउ गौरव मनला बरपेली पढ़ाए गिस, हमर ऊपर लादे गिस.. अउ हमर छत्तीसगढ़ के असली संस्कृति, इतिहास अउ गौरव ल हमर ले दुरिहा राखे खातिर तोपे अउ लुकाए गिस.. एकर दुखद परिणाम ए होइस के हम अपन गौरव ल भुला के आने मन के गौरव अउ संस्कृति ल मुड़ म लादे किंजरे लागेन.. उंकर गुलामी भोगे बरोबर उंकर पिछलग्गू बनत गेन.. परिणाम तुंहर आगू म हे.. बाहिर के लोगन इहाँ अगुवा बनत गिन अउ हम उंकर बनिहार.
🌹
-अभी केंद्र सरकार ह पाकिस्तान, बंगलादेश अउ अफगानिस्तान ले बछर 2014 के पहिली ले आए हिंदू, सिख, पारसी अउ जैन ईसाई जइसन धरम के मनइया लोगन ल हमर देश के नागरिकता दे के नियम (सीएए) चालू करे हवय न जी भैरा.. एमा हमर छत्तीसगढ़ ले घलो 100 झन अइसने लोगन मन आवेदन करे हावंय.
   -अच्छा जी कोंदा.. मतलब हमर छत्तीसगढ़ म घलो आने देश ले आए लोगन अभी तक बिना नागरिकता के राहत हावंय कहिदे.
   -हव जी ए तो आवेदन करे हें ते मन यें.. लुकाचोरी तो अउ कतकों होहीं... अब सरकार के नवा नियम म जरूरी कागजात मनला देखा के ए मन इहाँ के नागरिक बन जाही.
   -2014 ले पहिली माने 10 बछर ले आगर बेरा ले इहाँ राहत लोगन मन हमर छत्तीसगढ़ के भाखा संस्कृति ल आत्मसात करे पाइन होहीं के नहीं जी? अउ कहूँ दस बछर म घलो ए मन इहाँ के भाखा संस्कृति ल आत्मसात नइ करे होहीं त फेर इनला इहाँ के नागरिकता काबर दिए जाना चाही? 
‌    -तोरो कहना ह वाजिब जनाथे संगी.. सरकार के ए मनला जेन नागरिकता दे के नियम हे, तेमा इहू बात ल जोड़ना चाही, के अभी तक अइसन लोगन जिहां राहत हें, उहाँ के भाखा संस्कृति ल अपन मान के वोला आत्मसात करत हें के नहीं?
🌹
-विज्ञान अउ शिक्षा के नॉव म हर किसम के देशी परंपरा अउ ठुआॅं टोटका ल अंधविश्वास कहि देना ह कभू कभू मोला अलकर जनाथे जी भैरा.
   -अलकर लागे के लाइक बातेच ए जी कोंदा.. महूं कई पइत अटकरे हौं.. अब हमर डोकरी दाई के ही बात ले ले वोला उल्टा जनमे हे कहिके कतकों झन जुन्ना सियान मन वोकर जगा कनिहा पीठ के पीरा म बड़े बिहन्चे ले लात म मरवाए बर आवय अउ सिरतोन काहत हौं संगी.. वो मन डोकरी दाई के पॉंच या सात पइत हुलू-हुलू लात मारे म ही बने हो जावत रिहिन हें. कतकों झनला हॅंसिया ल गोरसी म मार लाल-लाल तीपो के अॉंक घलो देवय.
   -हहो.. एदे अइसने अभी दमोह ले खबर आय हे- उहाँ के लोगन कुकुर बिलई मन के गंदगी करे ले हलाकान होगे रिहिन हें, त फेर एक सियान के सुझाय म पॉंव म लगाय के माहुर ल बने लाली असन घोर के शीशी बाटल मन म भर के घर के बाहिर म टॉंगे लागिन. बताथें के अइसन करे ले कुकुर मन अब वोती गंदगी नइ करंय.
🌹
-लोगन के आस्था अउ वोला माने-जाने के परंपरा घलो अद्भुत हे जी भैरा.
   -हाँ ए बात तो हे जी कोंदा.. सबके अपन परंपरा अउ आस्था हे.
   -अभी मोर एक संगी के बबा मरगे त वोकर तीज नाहवन के रतिहा वोला जेन कुरिया म राखे रिहिन हें, उहें चॉंउर पिसान के कुढ़ा मढ़ा के वो मेर कलशा मढ़ा के जोत बारिन अउ वोकर खाए बर दू अलग चुकिया म उरिद के बरा, अइरसा अउ चाय पानी घलो मढ़ाए रिहिन.
   -हाँ इहाँ के बहुत अकन समाज म अइसन करथें.. कोनो चॉंउर पिसान के कुढ़ेना मढ़ाथें, त कोनो पिसान ल छींच के वोला झेंझरी/टुकनी म तोप देथें, तहाँ ले बिहनिया देखथें के वो चॉंउर पिसान म का जिनिस के चिनहा बने हे.
   -हव जी एकर माध्यम ले वो देंह छोड़े मनखे ह अगला जनम म कहाँ अवतरही, का जोनी पाही तेकर गम कराथे कहिथें. वोकर मुक्ति पाए म कोनो चिनहा नइ बनय बताथें.
   -कतकों झन मरिया हरिया म अइसन कुढ़ा मढ़ाए के नेंग तो करबेच करथें.. अपन घर के देवी-देवता या कुल देवता मन जागृत हावय ते नहीं, तेनो ल परखे खातिर अइसन कुढ़ेना मढ़ाथें.
🌹
-आजकाल कोनो नानमुन काम-बुता ल सिध पार डारथें तहाँ ले लोगन फूल के फुग्गा बरोबर हो जाथें जी भैरा.
   -हाँ ए बात देखे म आजकाल तो बनेच आवत हे जी कोंदा, फेर इहू देखे म आथे के कोनो काँटा-खूँटी म पाँव पर जाथे त ए अइसन फोकटइहा फूले मन मार सोक-सोक ले ओसक घलो जाथें.
   -ठउका कहे संगी.. कोनो काम-बुता या पद-पाॅवर के अहंकार म नइ फुदकना चाही, एला तो परमात्मा के कृपा मानना चाही के उन हमला अइसन बुता खातिर चिनहिन अउ वो बुता ल सिध घलो पारिन.
   -सिरतोन कहे जी.. परमात्मा तो जे मनखे जगा जइसन बुता करवाना चाहथे, करवाइच लेथे, हम न तो एकर ले कोनो महान हो जावन अउ न खास.. हम होथन त सिरिफ उँकर दास.
🌹
-दुनिया के सबले लम्हरी भाँटा हमर छत्तीसगढ़ म पाए जाथे जी भैरा.
   -अइसे का जी कोंदा? 
   -हव.. धमतरी जिला के गाँव धुमा (कुरूद) के किसान लीलाराम साहू ह पुरखौती बेरा ले एकर खेती करत हे.. लीलाराम ह बताइस के वोकर सियान निरंजन साहू ह पारंपरिक देशी तरीका ले ए 'निरंजन भाँटा' के खेती करय, उही परंपरा ले अब तक एकर खेती होवत हे. ए भाँटा ह 2.5 फीट तक लंबा हो जाथे.. अउ एमा बीजा घलो जादा नइ राहय.. गुरतुर स्वाद वाले ए निरंजन भाँटा, जेकर नॉव ल वोकर सियान के नॉव म ही रखे गे हवय अभी पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार के अंतर्गत पेटेंट होए‌ हे.
   -वाह भई..! 
   -कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी मन एला महत्वपूर्ण उपलब्धि बतावत छत्तीसगढ़ खातिर गौरव के बात कहे हे.. अवइया बेरा म छत्तीसगढ़ के किसान मनला एकर ले जबर लाभ होही.
🌹
-अब तो मंदिर देवाला मन म नवरात के जोत जलाए बर ताँबा के नाँदी बउरे ले धर लिए हें जी भैरा.
   -हव जी कोंदा.. हमरो गाँव के शीतला अउ महामाया दूनों च जगा बर ए बछर ताँबा के नाँदी बिसा के लाने हें काहत रिहिन हें.
   -फेर ए ह मोला वाजिब नइ जनावय संगी.. माटी के नाँदी ल हमर पुरखा म जादा शुद्ध अउ पवित्र मानंँय.
   -माटी ले बढ़के तो अउ कोनो ह होइच नइ सकय, फेर आजकाल माटी के नाँदी अउ कलश बनाए बर कुम्हार मन ढेरियाए असन करे लगे हें.. बने असन माटी मिले ले नइ धरय कहिथें, तेकर सेती ताँबा के नाँदी बउरत हें, फेर ताँबा के नाँदी ल बने धो-माँज के कतकों बछर ले बउरे घलो तो जा सकथे जी.
   -इहीच ह तो अनफभिक हे संगी.. जोत के विसर्जन ल पूरा नाँदी समेत करे के चलन हे हमर इहाँ, फेर ताँबा के नाँदी ल अइसन कहाँ करे जाथे.. अउ जब ताँबा के नाँदी ल जोत संग सरोए नइ जाय त फेर वोकर विसर्जन ल परंपरा के मुताबिक पूरा कइसे माने जाही?
🌹
-वाराणसी के मंदिर मन ले साईं बाबा के मूर्ति मनला हटाए के सेती महाराष्ट्र म भारी निंदा अउ विरोध होवत हे जी भैरा.
   -होना च हे जी भैरा.. भई कोनो भी संत महात्मा ह जाति धरम अउ पंथ ले ऊपर होथे.. एकर मन खातिर हर किसम के संकीर्णता ले ऊपर उठ के सोचना चाही.
   -हव जी महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ह घलो अइसने कहे हे, वोकर कहना हे- साईं बाबा श्रद्धेय हें, कोनो ल भी वोकर अपमान करे के अधिकार नइए, उंकर मूर्ति ल हटा के उंकर अपमान करे के बुता ल तुरते रोकना चाही. कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ह घलो भाजपा प्रमुख के बात ल पँदोली दे हवय.
   -अच्छा.. माने भाजपा अउ कांग्रेस दूनों ह ए मामला म एक होगे हे.. चलव बनेच हे अइसन होना घलो चाही.
🌹
-छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस म इहाँ के विभिन्न क्षेत्र के प्रतिभा मनला राज्य अलंकरण ले सम्मानित करे खातिर विज्ञापन निकलगे हे जी भैरा.. तहूं ल एकर खातिर आवेदन देना चाही.
   -राज्य अलंकरण खातिर जब कभू आवेदन मँगवाए जाथे, त मोला संगीतकार स्व. खुमान साव जी के वो बात के सुरता आथे जी कोंदा जब उन काहयँ- अरे कोनो स्वाभिमानी कलाकार या साहित्यकार ह मोला सम्मानित कर दे कहिके आवेदन करही का जी? मैं तो अइसन कभू नइ करेंव.
   -उंकर कहना महूं ल वाजिब जनाथे संगी.. सरकार ल ए डहार चेत करना चाही.
   -बिल्कुल चेत करना चाही.. सोज्झे कलाकार, साहित्यकार या आने विधा के लोगन ले आवेदन मँगवाए के बलदा संबंधित विभाग मन म पंजीकृत संस्था मन ले सुझाव मँगवाना चाही, के उंकर विचार म कोन मनखे ल राज्य अलंकरण ले सम्मानित करे जाना चाही? 
   -हव जी.. सबो संस्था मन ले मिले सुझाव ल फेर चयन समिति के आगू म मढ़ा के वोमा ले वरिष्ठता, योग्यता अउ वोकर द्वारा करे गे काम के आधार म राज्य अलंकरण खातिर योग्य पात्र के चयन करे जाना चाही.
🌹
-अब तो सोशलमीडिया म देवी देवता अउ गुरु महात्मा मन के फोटो ल पोस्ट करई ह पाप करे बरोबर जनाय लगे हे जी भैरा.
   -कइसे अंते-तंते गोठियाथस जी कोंदा.. कहूँ देवता-धामी मन के सोर-संदेशा भेजई ह पाप हो सकथे.
   -एदे अभी हमर रायपुर के श्री जैन दादाबाड़ी म सोशलमीडिया संस्कृति ल लेके श्री विराग मुनि जी ह अपन प्रवचन म कहिन हें- हम रोज संझा बिहनिया मोबाइल म भगवान के अपन गुरु के फोटो भेजत रहिथन.. अब कोनो वो फोटो मनला जिनगी भर तो सहेज के राखय नहीं.. डिलीट करीच देथे, जेन ह रिसाइकल बिन म चल देथे.. एकर मतलब ए होइस के हमन सोज्झेच परमात्मा अउ अपन गुरु महात्मा मनला कचरा के घुरुवा म फटिक देथन.. न जाने अइसन कतकों पाप हम जाने अनजाने कर डारथन.
   -अरे ददा रे.. अतेक गहिर गोठ ल तो मैं कभू सोचेच नइ रेहेंव.. का सिरतोन म अइसन करई ह पाप करम म गिने जाही जी?
🌹

Sunday, 22 September 2024

पुनर्जन्म अउ आदिवासी कुढ़ी..

पुनर्जन्म के अवधारणा अउ आदिवासी समाज
* घर पहुनई जाने बर मढ़ाथेंं कुढ़ी

   मनखे के पुनर्जन्म होथे ते नइ होवय, ए बात ल लेके लोगन के अलग अलग मान्यता अउ विचार हे. जिहां तक हमर जइसन लोगन के बात हे, त हमन तो ए मानथन अउ जानथन घलो के मनखे के अपन ए जनम म करे गे कर्म के मुताबिक अगला जनम होथे या फेर वोला सद्गति जेला मोक्ष कहे जाथे, मिलथे. तहाँ ले फेर वो ह स्थायी रूप ले अपन ईष्ट के लोक म आसन या कहिन ठउर पाथे.
   हमर इहाँ के हल्बाआदिवासी समाज म घलो ए मान्यता ल एक परंपरा, जेला घर पहुनई कहे जाथे के रूप म देखे जा सकथे. एमा इहू जाने के उदिम करे जाथे, के वो जीव ह अवइया जनम म का जोनी पाही? एकर खातिर ए घर पहुनई परंपरा के अंतर्गत 'कुढ़ी' मढ़ाथेंं.
   दल्ली राजहरा के साहित्यकार राजेश्वरी ठाकुर जी ले मिले जानकारी के मुताबिक ए परंपरा के निर्वहन वो देंह छोड़े मनखे के तीजनाहवन के  बाद आने वाला बुधवार या इतवार के रतिहा करे जाथे.
   इहाँ ए जानना वाजिब जनाथे के आदिवासी समाज मृतक मनखे ल पहिली माटी देवय, माने दफना देवत रिहिसे, फेर अब कुछ लोगन हिंदू परंपरा के अनुसार मृतक के दाहसंस्कार करथे. दाहसंस्कार करे के तीसरइया दिन अस्थि विसर्जन करे जाथे, अउ फेर अस्थि विसर्जन के पाछू ए पुनर्जन्म के जानकारी खातिर ए परंपरा घर पहुनई के निर्वहन करथें, कुढ़ी मढ़ाथेंं.  ए परंपरा ल अस्थि विसर्जन के बाद अवइया इतवार या फेर बुधवार के रतिहा म करे जाथे. उंकर मन के मान्यता हे के सोमवार अउ बिरस्पत ह सृष्टि के अधिष्ठात्री देवी के वार आय, तेकर सेती वो मन इही वार के चयन ए परंपरा ल संपन्न करे खातिर करथें.
   देह छोड़ चुके आत्मा ह अगला जनम म का जोनी म अवतरही, एकर खातिर रतिहा बेरा वो ठउर ल जेन ठउर म वोकर जीव छूटे रहिथे (एकर खातिर कोनो दूसर कुरिया या ठउर के घलो उपयोग करे जा सकथे) वो जगा बने चौंक पूर के चॉंउर के पिसान के ढेरी/कुढ़ी मढ़ाथेंं. कलशा के ऊपर दीया मढ़ा के वोला बारे जाथे, संग म दू अउ चुकिया म लाड़ू, अइरसा रोटी, उरिद दार के बने बरा के संग चाय पानी घलो अपन देंह छोड़ के गे पिरोहिल खातिर रखे जाथे. वो चुकिया मनला ढॉंके खातिर परसा पाना अउ बगई डोरी के इस्तेमाल करे जाथे. पाछू ए मनला एक बड़का असन झॉंपी/झेंझरी के भीतर तोप के रख दिए जाथे.
   जे दिन ए परंपरा ल संपन्न करे जाथे, वो दिन रतिहा बेरा जम्मो परिवार वाले मन के संगे-संग गोतियार मन घलो उही घर म सूतथें. ए कुढ़ी मढ़ाय वाले परंपरा के रतिहा घर के सिंग दरवाजा (माई कपाट) के संगे-संग घर के सबोच दरवाजा मनला खुल्ला छोड़ दिए जाथे. राजेश्वरी जी के कहना हे के ए परंपरा ल आदिकाल ले उंकर पुरखा मन द्वारा संपन्न करे जावत हे.
   रतिहा पहाए के बाद जब सुरूज अंजोर ह बगर जाथे तब परिवार वाले, जम्मो गोतियार अउ पारा-परोसी मन के आगू म वो ढॉंके गे झॉंपी ल टार के चॉंउर पिसान के ढेरी/कुढ़ी म का जिनिस के चिनहा बने हे, तेला खोजे जाथे, जेन ए बात के साक्षी होथे के वो देंह छोड़े पिरोहिल के जनम अब कोन रूप या कोन जोनी म होवइया हे. 
   बताथें के वो चॉंउर पिसान के ढेरी म चिरई के पॉंव, मनखे के पॉंव, शंख, स्वास्तिक, गदा जइसन कोनो भी चिनहा बने दिख जाथे. मान्यता हे के अइसन चिनहा वो आत्मा के द्वारा ही बनाए जाथे. कतकों पइत चॉंउर पिसान के ढेरी म कोनोच किसम के चिनहा नइ दिखय, तब ए माने जाथे के अब वो मनखे के पुनर्जन्म नइ होवय.
   राजेश्वरी जी बताथें के वो मन अपन सियान (पिताजी) के बखत करे गे चॉंउर पिसान के कुढ़ी म शंख के अउ अपन कका खातिर मढ़ाए गे ढेरी म स्वास्तिक के चिनहा खुद अपन अॉंखी म देखे रेहेंव, जेन जगजग ले स्पष्ट दिखत रिहिसे. अउ अइसे घलो नहीं के वो चिनहा मन सिरिफ मुंहिच भर ल दिखे रिहिसे, भलुक वो जगा जतका झन उपस्थित रिहिन हें सबो झनला दिखत रिहिसे. अइसने एक हनुमान भक्त खातिर मढ़ाए गे चॉंउर पिसान के ढेरी म गदा के निशान देखे रेहेन.
   बिहनिया बेरा वो ढेरी/कुढ़ी म मढ़ाए चॉंउर पिसान के बोबरा (रोटी) बना के अपन देवता म हूम देथन अउ तब फेर गोतियार मन सब जेवन पाथें.
   अपन सियान खातिर मढ़ाए कुढ़ी म शंख के चिनहा देखे के संबंध म राजेश्वरी जी बताथें के उंकर सियान शंभूनाथ जेला ए आदिवासी मन बड़ा देव कहिके संबोधित करथें, वोकर जबर भक्त रिहिन हें. वो मन अपन हाथ ले ही घर म शंभूनाथ के प्राणप्रतिष्ठा करे रिहिन हें. जब वो मन अपन जिनगी के पहाती बेरा म आईसीयू म भर्ती रिहिन हें, त उहाँ के डॉक्टर ह हमर सियान के पहिरे अंगूठी अउ चेन मनला देवत बेरा हमन ल पूछे रिहिन हें के तुंहर घर म शंभू काकर नॉव हे? वो मन घेरी- भेरी वोकरेच नॉव लेवत हें. तब हमन कमतीच उमर के रेहेन. हम चारों भाई बहिनी उही कुरिया म सूते रेहेन जिहां हमर सियान खातिर चॉंउर पिसान के कुढ़ी मढ़ाय जावत रिहिसे. 
    सियान के देंह छोड़े के दुख म हमर मन के नींद नइ परत रिहिसे. रतिहा करीब तीन बजे के आसपास हमन ल घर के सिंग दरवाजा डहार ले दाई.. दाई हुंत कराए के आवाज सुनाए रिहिसे, तब दूसर कुरिया म सूते हमर दूनों फूफू मन आवाज देवइया मनखे ल खोजे लागिन. अपन फूफू के आवाज सुन के महूं अपन कुरिया ले बाहिर आएंव. हमन सबो कुरिया म जा जाके पूछेन फेर आवाज तो कोनो नइ दिए रिहिन हें. तब हमन ल जनाए रिहिसे के जेकर खातिर कुढ़ी मढ़ाए गे रिहिसे शायद वोकर आत्मा इहाँ आए रिहिसे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर

Friday, 20 September 2024

रायपुर म गणेश उत्सव के परंपरा

सुरता//
रायपुर म गणेश उत्सव के परंपरा   
   अभी के लोहार चौक जेला पहिली सुखरू चौक कहे जाय, उहाँ इही सुखरू लोहार ह जेकर नॉव ले एला सुखरू चौक कहे जाय, इही जगा के अपन दुकान म हर बछर गणेश बइठारय अउ गणेश जी के आगू म एक ठन पानी के नान्हे असन टंकी बनावय, अउ ए टंकी म वो हर बछर डुडूंग मछरी, जेकर मुड़ी ह थोकिन बॉंबी बरोबर जनावय अउ बाकी के धड़ ह सॉंप असन लाम राहय, ते मन तउंरत राहय.. हमन तब खोखोपारा मिडिल स्कूल म पढ़त राहन, तब हमन वो सुखरू लोहार के गणेश जी ल देखे के नॉव म कम अउ डुडूंग मछरी मनला मार सरमर सरमर तउंरत देखे बर उहाँ जादा जावन.
   वइसे तो रायपुर म गणेश उत्सव के चलन ह गजबे च जुन्ना हे, फेर एकर निश्चित जानकारी शायदेच कोनो ल होही. कुछ जानकारी रखइया मन बताथें के पहिली रायपुर म सिरिफ एकेच झन मूर्ति बनइया रिहिसे, जेकर नॉव रिहिसे- गोविन्द राव गिरहे. वो मन कंकाली पारा म मूर्ति बनावंय, संग म उन मयारुक पेंटर घलो रिहिन हें. 
   गोविन्द राव जी के दू झन चेला रिहिन हें- नारायण राव अउ मुकुन्द लाल‌ यादव. मुकुन्द लाल‌ यादव जिहां अच्छा मूर्ति बनइया रिहिन हें, उहें नारायण राव अच्छा पेंटर रिहिन हें. आगू चल के दूनों एक दूसर के कला ल सीखे के कोशिश करिन. माने, मुकुन्द लाल‌ ह नारायण राव ल मूर्ति बनाय बर सिखावय, त नारायण राव ह मुकुन्द लाल‌ ल पेंटिंग करे बर. धीरे धीरे मुकुन्द लाल‌ ह दूनों कला माने मूर्ति बनई अउ पेंटिंग करई दूनों ल सीखगे, फेर नारायण राव ह मूर्ति बनाय बर नइ सीख पाइस. हाँ ए जरूर होइस के नारायण राव के सुवारी लक्ष्मीबाई ह मूर्ति बनाय बर सीख गे, तहाँ ले लक्ष्मीबाई ह कतकों बछर तक ए बुता ल व्यवसाय के रूप म अपनाय रहिस.
   नारायण राव के कतकों झन चेला होइन- मोहनलाल यादव, नारायण यादव (कुशालपुर) परस पेंटर जे हा गुढ़ियारी म ऐतिहासिक नरियर के गणेश मूर्ति ल बनाए रिहिसे. रहीस पेंटर रामनगर, माधव पेंटर, घनश्याम फूटान, हेनुराम सोन, केशव साहू. अइसने मुकुन्द लाल‌ यादव के घलो कुछ चेला होइन, जेमा रेखराज ध्रुव (मंदिर हसौद) नरेश पेंटर, श्याम पेंटर अउ रामनारायण यादव (पुत्र). ए किसम इहाँ मूर्ति बनइया मन के संख्या बाढ़त गिस.
   रायपुर म पहिली छोटे छोटे मूर्ति मढ़ाए के रिवाज रिहिसे. लोहार चौक म सुखरू लोहार पारंपरिक रूप ले गणेश बइठारय. उंकर मूर्ति हर बछर एके असन राहय. लोगन बतावंय के वो मन मूर्ति ल तो विसर्जित कर देवत रिहिन हें, फेर सजावट के जम्मो जिनिस मनला अवइया बछर खातिर सुरक्षित मढ़ा देवत रिहिन हें. इंकर एक विशेषता रिहिसे के हर बछर मूर्ति के आगू म एक ठन नान्हे असन पानी के टंकी बनावंय अउ वोमा सॉंप असन दिखइया डुडूंग मछरी ढील देवंय. नान्हे लइका मन बर वो मछरी ह देखनी हो जावय. ठीक उंकरेच बाजू म महरू दाऊ जी घलो गणेश बइठारय. उंकर विशेषता ए रिहिसे के उन सजावट म चारों मुड़ा कॉंच के सजावट करंय. वोकर गणपति मढ़ाय के हाल भीतर खुसरन त मार बिजली अंजोर म कॉंच मन चकमिक चकमिक करत राहय. एकरे सेती लोगन एला कॉंच वाले गणेश घलो काहंय.
    रायपुर म गणेश सजावट के रौनक अउ तब बाढ़िस, जब रामरतन बेरिया ह गुढ़ियारी पड़ाव म एक भारी भरकम झॉंकी बनाइस. मोला सुरता हे- गुढ़ियारी के गणेश झॉंकी ल देखे बर हम एक अलग से दिन निकाल के जावन. 
   तब हमन पुरानी बस्ती थाना जगा राहत रेहेन. एक दिन एती रामसागर पारा के जावत ले गणेश झॉंकी मनला देखन अउ फेर दूसर दिन गुढ़ियारी के झॉंकी ल फुरसुदहा देखे बर जावन. फल धरे के टुकनी, जूट के बोरा अउ पालीथीन मनला जोड़ जाड़ के वो हर अइसन झॉंकी बनाइस, जेन देखे म उभरे वाले पेंटिंग बरोबर जनावय. वो झॉंकी ल देखे बर पूरा गुढ़ियारी म मेला बरोबर रौनक राहय. रामरतन बेरिया रायपुर के ही रहइया रिहिसे, फेर वो ह मुंबई म जाके फिल्म मन के सेट बनाए बर सीख गे रिहिसे, एकरे जबर उपयोग वो ह गणपति के सजावट म करय. 
   एकर बाद फेर हाथ गोड़ हाले डोले वाले झॉंकी बने के शुरूआत होइस. अइसन झॉंकी मन म सजावट खातिर रखाय पुतला मन के हाथ गोड़ चलय, वो मन रेंगत असन जनावंय. इहू मनला देखे बर लोगन के भीड़ उमड़ जाय.
   एकर पाछू फेर बड़े बड़े गुफा बनाय के चलन चालू होइस. गोलबाजार, रामसागर पारा म दू तीन घर मनला मिला के अइसे गुफा बनावंय के लोगन के देखनी हो जावय. लोगन नदिया, पहाड़ सबो ल नाहकत बुलकत गणेश जी के दरस करंय. 
   गुढ़ियारी म ही नरियर ले बने गणेश जी ह सबो कीर्तिमान मन ल टोर दिए रिहिसे. ए ह अपन किसम के अनोखा प्रयोग रिहिसे, जेन बहुते सफल अउ चर्चित होए रिहिसे. लोगन एकजुवरिया ले ही लाईन लगा के दर्शन खातिर खड़े हो जावंय. कोनो किसम के अलहन घटना झन घट जाय, अइसे गुन के बाद म प्रशासन ह एला बंद करवा दे रिहिसे.
   जब बड़का बड़का मूर्ति बने के परंपरा चालू होइस, त गोल बाजार म अतका बड़का मूर्ति बनवा डरिन, ते वोकर स्थापना करे खातिर दू ठन क्रेन के सहारा लेना परगे, एकरे सेती वो गणपति के नॉव क्रेन वाला गणेश परगे. इहिच गोल बाजार म एक पइत गणेश उत्सव खातिर चंदा ले के बेरा जबर विवाद होगे रिहिसे, तब आयोजक मन ए गणेश उत्सव समिति के नॉव ल ही "विवादास्पद गणेश उत्सव समिति" रख दिए रिहिन हें.
   छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पाछू जब बिलासपुर म हाईकोर्ट बनाए के निर्णय होए रिहिसे तब रायपुर म वोकर खंडपीठ बनाए के माॅंग ले लेके जबर आन्दोलन होए रिहिसे. ए बखत कंकाली पारा के तंबोली परिवार अउ आने जम्मो लोगन गजबेच सुग्घर मूर्ति बनवा के स्थापना करवाए रिहिन हें. ए मूर्ति ल जब तक खंडपीठ के माॅंग पूरा नइ हो जावय, तब तक विसर्जन नइ करन कहिके अंड़ दिए रिहिन हें. बाद म गणेश विसर्जन के कतकों दिन के पाछू मान मनौव्वल कर के वो गणपति के विसर्जन करवाए गे रिहिसे. ए घटना के सेती गजब दिन तक वो गणेश ल खंडपीठ गणेश कहे जावय.
   गुढ़ियारी के गणेश समिति वाले मन नवा-नवा प्रयोग करत राहंय. एक पइत उहाँ परस पेंटर ह नरियर ले भारी जबर गणेश प्रतिमा बनाए रिहिसे. ए नरियर के प्रतिमा ह रायपुर के इतिहास म नवा अध्याय जोड़े रिहिसे. ए गणेश ल देखे खातिर सिरिफ रायपुर भर के नहीं, भलुक आने आने गाँव शहर के लोगन घलो आवंय. 
   आवव अब चिटिक गणेश विसर्जन के गोठ कर लेइन. सियान मन बतावंय के पहिली गणेश प्रतिमा के विसर्जन पुरानी बस्ती के खो खो तरिया म करे जावय. बइला गाड़ी म सुग्घर केरा पान म सजा के झॉंकी निकाले जावय. वो बेरा म आज असन न तो चकाचौंध करत लाईट के व्यवस्था रिहिसे अउ न ही जनरेटर सेट, एकरे सेती वो बखत बइला गाड़ी के आगू आगू माटी तेल म बोरे वाला भभका मशाल धर के रेंगय, ए किसम तब विसर्जन झॉंकी निकलय. बाद म फेर बूढ़ा तरिया म मूर्ति विसर्जन होए लगिस. हमन बूढ़ा तरिया म मूर्ति विसर्जन होवत ही देखत रेहेन. खो खो तरिया के बेरा म शायद हमर मन के जनम नइ होए रिहिसे. 
   जब बूढ़ा तरिया के पानी जादा मतलाय लगिस अउ मूर्ति म लगे रसायन मन के सेती जलप्रदूषण के शिकायत आए लगिस, त फेर प्रशासन ह मूर्ति मन के विसर्जन ल खारुन नदिया म करे के नियम बनाइस. शुरू शुरू म खारुन नदिया के पुलिया ऊपर ले मूर्ति ल सउंहे ढपेल के विसर्जित करे जावत रिहिसे, फेर पाछू इहाँ फिसले वाले मशीन बनाए गिस. अउ जब नदिया के पानी घलो बनेच मतलाय लगिस, तब इहाँ कुंड बना के मूर्ति मनला विसर्जित करे जाय लगिस, जेन अभी तक चलतेच हे.
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो/व्हा. 9826992811

Sunday, 15 September 2024

जोहार अउ जय जोहार

"जोहार" अउ "जय जोहार"
   एक कहावत हे- 'अड़हा बइद परान घातका'। माने अड़हा कहूं बइद ह होगे, त मरीज के मरे बिहान हे। ठउका इही किसम कहूं जे मन भाखा खातिर कारज करत हें, अउ उहू मनला भाखा अउ ओकर ले जुड़े परंपरा अउ संस्कृति के समझ नइए त उहू भाखा के मरे बिहान कस हे।
    अभी जे मन हमर भाखा के नाव म एती-वोती कूदत हें, वोमा के कतकों जब मोर संग भेंट होथे, त कहि परथें-"जय जोहार" भोले जी। मैं अतका म टमड़ डारथंव के भाखा के नाव म बिल्लस खेलइया ए लोगन के भाखा अउ संस्कृति के संबंध म कतका ज्ञान हे।
    अरे भई, 'जोहार' शब्द ह संबोधन खातिर अपन आप म पूर्ण शब्द आय, वोला अलग ले ककरो पंदोली के जरूरत नइए। जइसे- 'नमस्कार' या 'प्रणाम' ल ककरो जरूरत नइ परय। जोहार के मतलब ही नमस्कार करना, प्रणाम करना या जयकार करना होथे। जइसे हम जय नमस्कार या जय प्रणाम नइ काहन वइसने जय जोहार कहे के भी जरूरत नइए। अभिवादन खातिर सिरिफ "जोहार" कहना काफी हे।
       गाँव म परंपरा हे- जब देवारी पइत पहाटिया मन मड़ई उठाए के बेरा सबले पहिली गाँव के गंउटिया, सरपंच या सियान ल पहिली सम्मान दे के परंपरा निभाथें, त उन कहिथें- 'चलव गा पहिली दाऊ ल, मंडल ल, या सरपंच ल जोहार लेथन, तेकर पाछू दइहान या अउ कोनो आयोजन ठउर कोती जाबो'।
     असल म 'जोहार' शब्द ह 'जय' अउ 'हर' शब्द के मेल ले बने हे, जेकर अर्थ ही होथे 'हर' अर्थात शिवजी के जयकार करना. हमर ए भुइया ह जुन्ना बेरा ले बूढ़ादेव के रूप म शिव उपासक अंचल रहे हे, तेकर सेती वोकर जयकार करत ए 'जोहार' शब्द के माध्यम ले अभिवादन करत चले आवत हे.
    हमर देश के पहला महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी जब अपन पद के शपथ ग्रहण लीन हें, तभो उन "आप सभी को मेरा जोहार" कहे रिहिन हें. हमर देश म जतका भी जगा अभिवादन खातिर जोहार शब्द के प्रयोग करे जाथे, सबो जगा बिन काकरो पंदोली के आरुग 'जोहार' ही कहे जाथे.
सबो झनला जोहार🙏🌹😊
-सुशील भोले-9826992811