पत्र अउ पत्रिका म अंतर..
छत्तीसगढ़ी साहित्य के इतिहास म जब कभू पहला पत्रिका प्रकाशित होए के बात होथे, त 'छत्तीसगढ़ी मासिक' या फेर 'छत्तीसगढ़ी सेवक' के नॉंव लिख दिए जाथे. मोला लागथे, पत्र अउ पत्रिका के प्रारूप म तकनीकी रूप ले का अंतर होथे, एला समझे बिना अइसन लेखन ह सही नइहे.
असल म 'छत्तीसगढ़ी मासिक' अउ 'छत्तीसगढ़ी सेवक' ए दूनों ह 'पत्र' के श्रेणी म आथे 'पत्रिका' के नहीं.
पत्र या पत्रिका प्रकाशन के मानक म वोकर आकर-प्रकार, पृष्ठ संख्या अउ बाइंडिंग या केवल फोल्डिंग आदि ल घलो चेत करे जाथे.
आजकल प्रकाशित होने वाला दैनिक अखबार जेला सामान्य बोलचाल म 'समाचार पत्र' घलो कहिथन. ठउका अइसने एकर आधा साईज वाला छपे अखबार ल घलो 'पत्र' ही कहिथन. हमन प्रेस के भाषा म एला 'टेबलाइज्ड' घलो कहि देथन. असल म 'छत्तीसगढ़ी मासिक' अउ 'छत्तीसगढ़ी सेवक' ए दूनों मन इही श्रेणी म आथें. काबर के वोमन चार या आठ पेज के टेबलाइज्ड साइज म फोल्डिंग वाला छपत रिहिन हें. जबकि 9 दिसंबर 1987 ले चालू होए मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' सही मायने म 'पत्रिका' रिहिसे. मयारु माटी ह शुरू म चालीस पेज के आजकल प्रकाशित होने वाला 'इंडिया टुडे' जइसे आम पत्रिका मन के साइज (प्रेस के भाषा म एला डेमी 1/4 साइज कहे जाथे) म छपत रिहिसे. बाद म एला 36 पेज के 20×30 के 1/8 साइज म छापे गिस.
इही ह पत्रिका के मानक आय, जेहा कम से कम तीस या वोकर ले जादा पेज के बाइंडिंग वाला होय. ए मानक म 'मयारु माटी' ही छत्तीसगढ़ी भाषा के पहला मासिक पत्रिका कहलाही, जबकि पहला पत्र कहे म 'छत्तीसगढ़ी मासिक'.
-सुशील भोले
Friday, 24 June 2022
पत्र अउ पत्रिका म अंतर
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